आंदोलनकारी किसान ठंड से बचने के लिए पी रहे सरदाई, जानें क्‍या है ये

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सरदाई बादाम, खसखस, काली मिर्च, इलायची से तैयार किया जाता है. (सांकेति‍क तस्‍वीर)

सरदाई बादाम, खसखस, काली मिर्च, इलायची से तैयार किया जाता है. (सांकेति‍क तस्‍वीर)

सरदाई (Sardai) पंजाब में काफी मशहूर है. यह सर्दियों में पिया जाने वाला वहां का खास पेय (Drink) है. इसमें बादाम, खसखस, काली मिर्च, इलायची पीस कर डाले जाते हैं. इससे सर्दी से बचाव रहता है और शरीर को एनर्जी मिलती है.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    December 7, 2020, 4:12 PM IST

सरदाई (Sardai) पंजाब में ठंड के दिनों में पिया जाने वाला खास पेय (Drink) है. यह जायके में मजेदार और ठंड से बचाने वाला होता है. इन दिनों दिल्‍ली में बड़ी संख्‍या में किसान (Farmers) मौजूद हैं. इन्‍हें यहां रुके एक सप्‍ताह से ज्‍यादा का समय हो गया है. अपनी मांगों को लेकर दिल्ली-हरियाणा की सीमा सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर आंदोलन कर रहे किसान अपने खाने-पीने का पूरा इंतजाम करके आए हैं. वहीं इस ठिठुरती ठंड से बचाव के लिए वे सरदाई का सेवन कर रहे हैं.

सरदाई पंजाब में काफी मशहूर है. यह सर्दियों में पिया जाने वाला वहां का खास पेय है. इसमें बादाम, खसखस, काली मिर्च, इलायची पीस कर डाले जाते हैं. आज तक की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि किसान इसका सेवन सर्दी से बचाव के लिए करते हैं. ताकि ठंड में भी उनके शरीर में गर्मी बनी रहे. यही वजह है कि खुले आसमान के नीचे आंदोलकारी किसान खुद को महफूज रखने के लिए सरदाई बनाते हैं और पीते हैं. किसानों का कहना है कि इससे जहां शरीर का तापमान संतुलित रहता है, वहीं शरीर को ताकत भी मिलती है.

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दरअसल, किसानों ने जहां अपने लिए खाने पीने का पूरा इंतजाम कर रखा है, वहीं उनके लिए लंगर भी चलाए जा रहे हैं. चूंकि इस आंदोलन में बड़ी संख्‍या में किसान शामिल हैं तो इस पेय को भी बड़ी मात्रा में बनाया जाता है. वे सरदाई बनाने के लिए इतने ज्‍यादा मेवा आदि को पीसने के लिए मूसल का इस्‍तेमाल करते हैं. आंदोलनकारी किसानों के मुताबिक वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए अपना आंदोलन लंबे समय तक जारी रखेंगे.ये भी पढ़ें – सही नाप के जूते न पहनने से हो सकती है फुट कॉर्न की शिकायत

गौरतलब है कि बीते 26 नवंबर से किसान सिंघु बार्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. हालांकि सरकार की ओर से उनसे कई बार वार्ता की जा चुकी है, मगर वो बेनतीजा रही. यही वजह है कि किसानों ने अपनी मांगें न मानने को लेकर 8 दिसंबर को भारत बंद की घोषणा की है.





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