घर पर या लॉकर में रखें सोने से होगी कमाई, ब्याज के साथ टैक्स छूट का भी लाभ | business – News in Hindi

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अमतौर पर सोना-चांदी जैसी कीमती चीज को घर पर न रखकर बैंक लॉकर में रखने का चलन है. लॉकर में रखा सोना-चांदी सु​रक्षित तो रहता है लेकिन इस पर आपको कोई ब्याज नहीं मिलता है. हालांकि, इनकी वैल्यू बढ़ने के साथ आपको फायदा होता. दूसरी तरफ लॉकर का खर्च भी देना होता है. ऐसे में आप आरबीआई द्वारा निर्धारित बैंकों में सोना रखकर ब्याज भी कमा सकते हैं. साथ में आपको सोने की वैल्यू बढ़ने का फायदा तो मिलेगा ही. यह सुविधा आरबीआई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetization Scheme) के तहत उपलब्ध है.

यह सुविधा बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) की तरह है, जिसमें आप अतिरिक्त गोल्ड को डिपॉजिट करते हैं और मैच्योरिटी के समय पर आपको ब्याज भी मिलता है. आपके पास गोल्ड की वैल्यू भी प्राप्त करने का विकल्प होगा, जोकि मैच्योरिटी के समय सोने के बाजार भाव पर निर्भर करेगा. इस पर आपको ब्याज उसी दर पर मिलेगा, जिस दर पर आपने गोल्ड डिपॉजिट किया है. आपके सोने की सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी बैंक की होगी.

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1. गोल्ड एफडी (Gold FD) में कोई भी भारतीय RBI की इस स्कीम के तहत निवेश कर सकता है. गोल्ड एफडी को ज्वाइंट आधार पर भी खोला जा सकता है.2. इसके लिए गोल्ड को बार, कॉइन्स के रूप में एक्सेप्ट किया जाता है. अगर आप गोल्ड ज्वेलरी डिपॉजिट करते हैं तो इसमें कोई स्टोन या अन्य मेटल नहीं होना चाहिए.

3. कोई भी इन्वेस्टर कम से कम 30 ग्राम तक गोल्ड डिपॉजिट कर सकता है. इसके लिए कोई अधिकतम लिमिट नहीं है.

4. इन्वेस्टर्स के पास 1 साल से लेकर 15 साल के बीच कोई भी टर्म चुनने का विकल होगा. 1 से 3 साल की अवधि को लिए शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (STBD) कहा जाता है. 5 से 7 साल की डिपॉजिट को मीडियम टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (MTGD) कहा जाता है. 12 से 15 साल के डिपॉजिट को लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (LTGD) कहा जाता है.

5. मीडियम और लॉन्ग टर्म के तहत बैंक केंद्र सरकार की तरफ से यह डिपॉजिट करेगा.

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कितना मिलेगा ब्याज?
>> STBD के में 1 साल तक के लिए 0.50 फीसदी सालान दर से ब्याज मिलेगा. 1 से 2 साल के लिए यह ब्याज 0.55 फीसदी और 2 से 3 साल के लिए यह 0.60 फीसदी सालाना होगा.

>> वहीं, मीडियम और लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट के लिए यह ब्याज दर 2.25 फीसदी सालाना होगा.

>> STBD के लिए मूल और ब्याज गोल्ड के मद में ही होगा. वर्तमान में MTGD और LTGD के तहत मूल को रुपये में माना जाता है. इसपर हर साल 31 मार्च को सालाना तौर पर ब्याज कैलकुलेट किया जाएगा. मैच्योरिटी पर भी क्युमुलेटिव ब्याज का भी विकल्प होगा.

>> डिपॉजिटर के पास सालाना ब्याज प्राप्त करने के लिए दो विकल्प होंगे. एक तो यह कि वो हर साल के अंत में ब्याज प्राप्त करें या फिर मैच्योरिटी के समय ही ब्याज प्राप्त करें. डिपॉजिट के समय ही इनमें से कोई एक ब्याज चुनना होगा.

>> इसमें डिपॉजिटर को प्रीमैच्योर विड्रॉल का भी विकल्प मिलेगा. STBF के तहत 1 साल का लॉक-इन पीरियड होता है. इसके बाद एक छोटी से पेनाल्टी रकम देने के बाद विड्रॉल किया जा सकता है.

>> MTGD के तहत 3 साल के बाद ब्याज पर पेनाल्टी देने के बाद कभी भी विड्रॉल किया जा सकता है.

>> LTGD के तहत 5 साल के बाद ब्याज पर पेनाल्टी देने के बाद कभी भी विड्रॉल किया जा सकता है.

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टैक्स छूट का भी लाभ
RBI की इस स्कीम की एक सबसे खास बात ये है कि गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम पर कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax), वेल्थ टैक्स या इनकम टैक्स की छूट मिलती है. डिपॉजिट किए गए गोल्ड का भाव बढ़ भी जाता है तो इस पर कोई कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं देना होगा. ब्याज से होने वाली कमाई पर भी यह लागू नहीं होगा. मैच्योरिटी पर डिपॉजिटर को ठीक उसी फॉर्म में सोना मिलेगा, जिस फॉर्म में उन्होंने डिपॉजिट किया है. हालांकि, ज्वेलरी के मामले में इसे गलाकर पीवीसी द्वारा एनलाइज किया जाता है.





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