हम वज़न कम करते हैं, तो वज़न जाता कहां है?

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वज़न कम (Lose Weight) करने के लिए इतने लोग परेशान या सतर्क रहते हैं कि सभी के परिवार या फिर परिचय में ऐसा कोई न कोई व्यक्ति है ही. कोई डाइटिंग (Dieting) कर रहा है, तो कोई जिम जा रहा है तो कोई योग (Yoga) से वज़न कम करने की कोशिश में है. और वज़न जैसे ही घट जाता है तो ये बड़ी खबर हो जाती है. लेकिन इस पूरी कसरत (Exercise) और उत्साह के बीच एक सवाल पैदा होता है कि वज़न कम हुआ तो वज़न गया कहां? रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े इस सवाल के जवाब को लेकर कुछ गलतफहमियां (Misconceptions) भी हैं, पहले उन्हें जान लेते हैं.

सबसे कॉमन गलतफहमी यही है कि शरीर में जो फैट मौजूद होता है, वो एनर्जी में कन्वर्ट हो जाता है. लेकिन इस वैज्ञानिक लॉजिक के साथ समस्या यह है कि इससे पदार्थ के संरक्षण यानी मैटर कन्ज़र्वेशन का सिद्धांत मेल नहीं खाता, जो कि हर केमिकल रिएक्शन पर लागू होता है. आपको हैरानी होगी यह जानकर कि यह गलतफहमी करीब 150 डॉक्टरों, डायटिशियनों और ट्रेनरों को भी रही, जिनसे यह सवाल पूछा गया था.

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फैट को लेकर दूसरी बड़ी गलतफहमी यह है कि यह मसल्स में कन्वर्ट हो जाता है. जी हां, यह साइंटिफिक बात है ही नहीं. कुछ लोग ये भी मानते हैं कि ये कोलन (बड़ी आंत का वह हिस्सा जो सेकम और रेक्टम के बीच होता है और भोजन के कणों से मॉइश्चर निकालता है) के रास्ते निकल जाता है. तो अगर ये सब जवाब ग़लत हैं तो सही जवाब क्या है?

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फैट का एनर्जी में कन्वर्ट होना एक गलतफहमी है.

आखिर कहां जाता है फैट?
ये सवाल करीब 150 विशेषज्ञों से पूछा गया था, जिनमें से सिर्फ 3 ने इसका सही जवाब दिया. द कनवर्सेशन की रिपोर्ट की मानें तो न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने दावा किया कि 98% हेल्थ प्रोफेशनल भी इस सवाल का जवाब ठीक से समझा नहीं सके. एनर्जी, मसल्स अगर सही जवाब नहीं हैं तो फैट जाता कहां है? इस सवाल का सही जवाब है कि फैट पानी और कार्बन डाई ऑक्साइड में कन्वर्ट हो जाता है.

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यानी आप जब वज़न कम करते हैं तो इसका मतलब यह होता है पसीने या मूत्र के ज़रिये और सांस छोड़ने के ज़रिये आप फैट को शरीर से निकालते हैं. इस विज्ञान का गणित इस तरह समझा जा सकता है कि अगर आपने 10 किलोग्राम वेट कम किया है तो उसमें 8.4 किग्रा के करीब आपके फेफड़ों ने कम किया और करीब 1.6 किग्रा पानी में कन्वर्ट हुआ.

अल्कोहल के साथ भी ऐसा ही होता है. प्रोटीन के साथ काफी हद तक यही फॉर्मूला लगता है, सिवाय एक छोटे से हिस्से के, जो यूरिया आदि में कन्वर्ट होकर निकलता है. साइन्स यह है कि डाइटरी फाइबर को छोड़कर आप जो भी खाते हैं, उसमें से अधिकांश तब तक नहीं निकलता, जब तक आप पसीना न बहाएं.

एनर्जी और वेट के विज्ञान का गणित
इससे आप ये न समझ बैठें कि एनर्जी संबंधी सिद्धांत गलत हैं. लेकिन थोड़ा कन्फ्यूज़ ज़रूर करते हैं इसलिए समझना यह चाहिए कि डाइट में आप केवल अपने भोजन यानी सॉलिड और लिक्विड पदार्थों को रिकॉर्ड रखते हैं, लेकिन ऑक्सीज़न का रिकॉर्ड रखना भूल जाते हैं, जो आप दिन भर सांस के ज़रिये लेते हैं. हम सांस के ज़रिये एक दिन में 600 ग्राम से ज़्यादा ऑक्सीज़न लेते हैं और यह वेट यानी वेस्टलाइन मापने में काफी अहम होती है.

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अब मान लीजिए कि आप दिन भर में सॉलिड और लिक्विड मिलाकर 3.5 किग्रा भोजन खाते हैं. इसमें 600 ग्राम ऑक्सीज़न जोड़िए. कुल 4.1 किग्रा वेट रोज़ आपके अंदर गया. अब स्वस्थ रहने के लिए आपको इतना ही बाहर निकालना है और अगर आप वेट कम करना चाह रहे हैं, तो इससे ज़्यादा. तो यह कैसे संभव होगा?

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वज़न कम करने के लिए विशेषज्ञों की सलाह से ही डाइट लें.

एक 75 किग्रा वज़न के व्यक्ति के शरीर से दिन भर में करीब 590 ग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड और करीब 200 ग्राम पानी अपने आप निकल जाता है. यह भी एक खुशखबरी ही है कि सोते हुए आप 200 ग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ देते हैं, जो दिन भर के लिए आपको जितनी कार्बन डाई ऑक्साइड निकालना होती है, उसका एक चौथाई टारगेट तो आप बिस्तर छोड़ने से पहले ही पूरा कर लेते हैं.

तो क्या ज़्यादा सांस लेने से कम होगा वज़न?
अब तक के गणित से साफ है कि वज़न कैसे आपके अंदर जाता है और कैसे बाहर निकलता है. अगर आप इसका मतलब ये समझ रहे हैं कि आप ज़्यादा सांस लेकर वज़न कम कर लेंगे तो ऐसा नहीं है. हांफना कोई हल नहीं है इससे आपको बेहोशी तक की समस्या हो सकती है. ज़्यादा कार्बन डाई ऑक्साइड आपके ​शरीर से निकले, इसका एक ही रास्ता है कि आप अपनी मांसपेशियों को ज़्यादा मूव करें.

आखिरी कैल्कुलेशन यह भी जानिए कि आपको 100 ग्राम फैट खत्म करना है तो 280 ग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ना होगी. सीधी बात है ज़रूरत के हिसाब से खाएं, खूब मेहनत या कसरत करें और वज़न कम हो जाएगा.





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