होम लोन की प्लानिंग कर रहे तो हो जाएं खुश, सस्ता हो सकता है 30 लाख से ज्यादा का लोन | business – News in Hindi

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होम लोन की प्लानिंग कर रहे तो हो जाएं खुश, सस्ता हो सकता है 30 लाख से ज्यादा का लोन

30 लाख रुपये से ज्यादा के होम लोन सस्ते हो सकते हैं.

Home Loan : संभव है कि 30 लाख रुपये या इससे ज्यादा का होम लोन सस्ता हो जाए. दरअसल, RBI ने इस श्रेणी में लोन जारी करने के लिए बैंकों को ढील दी है. इसके पहले बैंकों को बड़े लोन के लिए ज्यादा पूंजी अलग रखनी होती थी.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 10, 2020, 12:58 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकों और वित्तीय कंपनियों (Finance Companies) के लिए मोटा होम लोन (Home Loan) देना कम खर्चीला बना दिया है. इसके बाद अब उम्मीद है कि 30 लाख रुपये या इससे ज्यादा रकम का होम लोन सस्ता हो जाए. 75 लाख रुपये से ज्यादा के होम लोन में सबसे ज्यादा कटौती की उम्मीद है. वर्तमान में, होम लोन दरें लोन साइज (Loan Size) से लिंक हैं. इस हिसाब से 30 लाख रुपये से कम के लोन पर ब्याज दरें कम हैं. जैसे-जैसे लोन की रकम ज्यादा होती जाती है, वैसे-वैसे दरों में भी इजाफा होता है.

कैसे लोन की रकम के हिसाब से बढ़ता है ब्याज दर
मान लीजिए कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) 30 लाख रुपये के होम लोन पर 7 फीसदी की दर से ब्याज वसूल रहा है. 30 से 75 लाख रुपये पर यह ब्याज दर 7.5 फीसदी हो जाता है. वहीं, 75 लाख रुपये से ज्यादा के लोन पर यह बढ़कर 7.35 फीसदी हो जाता है. इसी प्रकार पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank) भी इन स्लैब्स में क्रमश: 7.15 फीसदी, 7.25 फीसदी और 7.30 फीसदी की दर से ब्याज वसूलता है. प्राइवेट सेक्टर का एचडीएफसी बैंक 30 लाख रुपये तक के होम लोन पर 6.95 फीसदी की दर से ब्याज वसूलता है. जबकि, 30 लाख रुपये से ज्यादा की रकम के लिए यह 7.05 फीसदी है. अधिकतर बैंक महिलाओं के नाम पर होम लोन पर 5 बेसिस प्वाइंट कम दर से ब्याज वसूलते हैं.

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दरअसल, लोन की रकम के अनुसार ही बैंकों को पूंजी रखनी होती है. वर्तमान में, 30 लाख रुपये के लोन के लिए बैंकों को कम से कम 35 फीसदी रकम रखनी होती है. वहीं, 30 से 75 लाख रुपये के लोन के लिए यह 50 फीसदी है. 75 लाख रुपये से ज्यादा के लोन के लिए बैंकों को कम से कम 75 फीसदी रकम की जरूरत होती है. पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर लोन के लिए तो बैंकों को 100 फीसदी की पूंजी रखनी होती है.

जोखिम के आधार पर पूंजी अलग से रखते हैं बैंक
लोन साइज के अलावा बैंकों के लिए पूंजी की जरूरत प्रॉपर्टी के वैल्यू के आधार पर भी निर्भर करती है. आमतौर पर, ​जिन लोन्स पर जोखिम जितना ज्यादा होता है, बैंक उतनी ज्यादा पूंजी अलग से रखते हैं. बिजनेस लोन या अन्य पर्सनल लोन की तुलना में होम लोन पर थोड़ा कम जोखिम होता है. हालांकि, इसमें गोल्ड लोन शामिल नहीं है.

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लोन टू वैल्यू की मौजूदा व्यवस्था अभी भी जारी रहेगी. इसका मतलब है कि ज्यादा कीमत वाले घरों के लिए उधारकर्ताओं को कम से कम लोन का 25 फीसदी देना होगा. 80 लाख रुपये से कम लोन के लिए यह 20 फीसदी होगा. लोन टू वैल्यू एक तरह का जोखिम होता है, जिसे कोई भी बैंक लोन जारी करने से पहले परीक्षण करता है. मान लीजिए कि आपने घर खरीदने के लिए बैंक से 1 करोड़ रुपये लोन लिया है. इसके लिए आपने 10 लाख रुपये डाउन पेमेंट के तौर पर दिया है. आपको 90 लाख रुपये बैंक से उधार लेना होगा. इसी का अनुपात लोन टू वैल्यू होता है. इस उदाहरण में लोन टू वैल्यू अनुपात 90 फीसदी का है.





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