COVID-19: खुद को फिट रखने के लिए बाबर आजम घर में बहा रहे हैं पसीना, देखिए Video|cricket Videos in Hindi


कोविड-19 (COVID-19) की वजह से क्रिकेट बंद है और खिलाड़ी अपने घर पर हैं लेकिन पाकिस्तान के बल्लेबाज बाबर आजम अपनी फिटनेस पर जमकर पसीना बहा रहे हैं





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Consumer travel News In Hindi : Term insurance plan provides more cover in lower premium, it provides financial security to the family | टर्म इंश्योरेंस प्लान में मिलता है कम प्रीमियम में ज्यादा कवर, इससे परिवार को मिलती है वित्तीय सुरक्षा


  • आदर्श रूप से आपकी वार्षिक आय का 10 गुना इंश्योरेंस कवर होना चाहिए
  • टर्म इंश्योरेंस में आपको बहुत ही कम प्रीमियम में काफी ऊंची कीमत का कवर मिलता है

दैनिक भास्कर

Mar 31, 2020, 06:54 PM IST

बिजनेस डेस्क. देश में कोरोनावायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।  इसको देखते हुए कई कंपनियों ने कई तरह के इंश्योरेंस प्लान शुरू किए हैं, इनमें से कुछ टर्म इंश्योरेंस प्लान भी हैं।  अगर आप अपने और अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो इंश्योरेंस आपके लिए सबसे अच्छा उपाय है। टर्म इंश्योरेंस प्लान में आपको बहुत ही कम प्रीमियम में काफी ऊंची कीमत का कवर मिलता है। इस तरह की पॉलिसी पूरी तरह सुरक्षा के लिहाज से ली जाती हैं। टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी में मैच्योरिटी पर पैसों से जुड़ा कोई फायदा नहीं होता है लेकिन पॉलिसीधारक की असमय मृत्यु होने पर नामिनी को इंश्योर्ड रकम मिल जाती है। यह रकम ट्रेडिशनल लाइफ इंश्योरेंस प्लान से कई गुना ज्यादा होती है।अगर आप भी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के बारे में सोच रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना आपके लिए जरूरी है।

कब खरीदें टर्म इंश्योरेंस
टर्म इंश्योरेंस को आप जितनी जल्दी ले लेंगे उतना फायदे में रहेंगे। आप जितना देर करेंगे, प्रीमियम की राशि बढ़ती जाएगी। इसलिए अगर आपको सस्ता प्रीमियम चाहिए तो जल्द से जल्द इंश्योरेंस खरीद लें। साधारण तौर पर टर्म पॉलिसी 10, 15, 20, 25 और 30 साल के लिए ली जाती हैं।

अच्छे से कर लें तुलना
कोई भी टर्म इंश्योरेंस प्लान खरीदने से पहले एक-दो प्लान के बीच में तुलना जरूर कर लें। मान लीजिए कि किसी कंपनी की वेबसाइट पर दो प्लान मौजूद हैं, जिसमें से एक का प्रीमियम किश्तों में जाता है और दूसरे का एकमुश्त। ऐसे में अक्सर लोग सस्ता दिखने वाला प्लान ले लेते हैं। ऐसे में ध्यान रखने वाली बात यह है कि सस्ता दिखने वाला प्रीमियम मेडिकल टेस्ट के बाद बढ़ सकता है। लिहाजा इन सब फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए अपना प्लान चुनें।

जरूरत होने पर राइडर खरीदें
राइडर का अर्थ है किसी भी बीमा पॉलिसी के साथ कोई अटैचमेंट। मतलब पॉलिसी में कवर होने वाले जोखिम के साथ साथ दूसरे किसी जोखिम को उसी पॉलिसी के साथ जोड़ लेना। यानी अगर आप सामान्य जीवन बीमा पॉलिसी लेते हैं तो उसके साथ एक राइडर के तौर पर क्रिटिकल इलनेस (गंभीर बीमारियों) के जोखिम को कवर करने के लिए अतिरिक्त राइडर जोड़ सकते हैं। आप टर्म इंश्योरेंस के साथ राइडर भी ले सकते हैं। हालांकि राइडर से प्रीमियम का खर्च बढ़ जाता है इसलिए बहुत जरूरत होने पर ही राइडर को शामिल करें।

इंश्योरेंस प्रीमियम कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें
सबसे पहले अपनी जरूरत का आकलन करें और उसके बाद अपने लिए कोई प्लान तय करें। प्लान चुनने के लिए आप इंश्योरेंस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं। तकरीबन सभी इंश्योरेंस कंपनियों की साइट पर आपको इंश्योरेंस कैलकुलेटर मिल जाएंगे। कैलकुलेटर की मदद से आप अपने बजट के मुताबिक सही प्लान चुन पाएंगे।

क्लेम सेटलमेंट रेशियो की जांच करें
क्लेम सेटलमेंट रेशियो से इस बात का पता चलता है कि एक इंश्योरेंस कंपनी द्वारा पिछले साल कुल कितना प्रतिशत इंश्योरेंस क्लेम का निपटान किया गया था। 
ये रेशियो जितना अधिक होता है, उतना बेहतर होता है। बीमा नियामक हर साल क्लेम सेटलमेंट रेशियो डेटा जारी करता है ताकि सही इंश्योरेंस कंपनी का चयन करने में मदद मिल सके।

सही जानकारी भरें
टर्म इंश्योरेंस सीधे-सीधे आपकी जिंदगी और सेहत से जुड़ा होता है। ऐसे में फॉर्म भरते समय सारी जानकारी सही-सही भरें। अपनी कोई मेडिकल हिस्ट्री या शराब पीने और धूम्रपान जैसी आदतों को न छुपाएं। आपकी दी हुई जानकारी के आधार ही इंश्योरेंस की राशि क्लेम की जाती है। अगर आपकी छुपाई हुई कोई जानकारी कंपनी को बाद में पता चलती है तो कंपनी आपका क्लेम रिजेक्ट कर सकती है।

टर्म इंश्योरेंस क्या है? 
टर्म इंश्योरेंस एक तरह की जीवन बीमा पॉलिसी है जो सीमित अवधि के लिए निश्चित भुगतान दर पर कवरेज प्रदान करती है। यदि पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मृत्यु लाभ राशि नामांकित व्यक्ति को दी जाती है। यह अनिश्चितता या मृत्यु की स्थिति में परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। 



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Lucknow News In Hindi : Varanasi Lucknow Coronavirus Lockdown Live | 14 Day Mandatory Quarantine For Lakhs Of Migrants Returning To UP, Bihar News and Updates | 3 दिन में दूसरे राज्यों से 1.5 लाख लोग उत्तर प्रदेश आए, योगी बोले- इन्हें 14 दिनों के लिए क्वारैंटाइन किया जाएगा


  • लॉकडाउन के चौथे दिन दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर उमड़ी भारी भीड़, सरकार ने बसों का इंतजाम कर लोगों को रवाना
  • लखनऊ पहुंचने पर करीब 200 बसों से पूर्वांचल के जिलों में लोगों को भेजा गया, गांव के हिसाब से प्रवासियों की बनेगी सूची

दैनिक भास्कर

Mar 29, 2020, 12:27 PM IST

लखनऊ. कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए देशभर में 21 दिनों के लॉकडाउन का आज 5वां दिन है। हालांकि, शनिवार को यह दिल्ली से लेकर लखनऊ तक फेल नजर आया। दिल्ली गेट से लखनऊ और फिर यहां पूर्वांचल व अन्य हिस्सों में लोगों को बसों का इंतजाम कर भेजा गया। अनुमान है कि 3 दिन के भीतर गैर राज्यों से प्रदेश में 1.5 लाख आए हैं। इन लोगों को 14 दिनों के अनिवार्य क्वारैंटाइन में रहना होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी डीएम को निर्देश दिया है कि वे पिछले 3 दिनों में राज्य में लौटे 1.5 लाख प्रवासियों का पता लगाएं, उन्हें राज्य के शिविरों में रहने दें और उनके भोजन और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उनके नाम, पते और फोन नंबर इन अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए हैं और उनकी निगरानी की जा रही है। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा- इन सभी प्रवासी मजदूरों को 14 दिनों के लिए सरकारी शिविरों में रहना होगा। उन्हें अपने घरों में लौटने की अनुमति नहीं होगी। व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कल रात ग्राम प्रधानों को 65,000 से अधिक कॉल किए गए। नोडल अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। ग्राम निकायों को प्रवासियों की सूची तैयार करने के लिए भी कहा गया है।

देवरिया में हुई थर्मल स्कैनिंग
इस कवायद के बीच तमाम लोग अपने-अपने घरों को पहुंच चुके हैं। देवरिया में गैर राज्यों से आए मजदूरों की थर्मल स्कैनिंग हुई। उसके बाद उन्हें अपने गांवों में जाने की अनुमति दी गई। बस स्टेशनों भी मजदूरों को कतारबद्ध कर डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम द्वारा स्कैन किया गया। उनके नाम, पते, फोन नंबर का डाटा तैयार किया गया। एक अधिकारी ने कहा- केवल उन्हीं लोगों क्वारैंटाइन किया जाएगा, जिनमें संदिग्ध लक्षण दिखेंगे। देवरिया में अब कोई संदिग्ध नहीं मिला है।

21 जिलों में बने आश्रय स्थल
अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने बताया कि अब तक 21 जिलों में 100 आश्रय स्थल बनाए जा चुके हैं। इन जिलों में संत कबीर नगर, भदोही, मीरजापुर, कौशांबी, कासगंज, जौनपुर, गोरखपुर, अमरोहा, चंदौली, कानपुर देहात, इटावा, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, चित्रकूट, महाराजगंज, हापुड़, मुजफ्फरनगर, मैनपुरी, बदायूं, लखीमपुर और रामपुर शामिल हैं। प्रदेशस्तर पर इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम की स्थापना राहत आयुक्त कार्यालय में की जा रही है। जिलों में भी स्थायी कंट्रोल रूम स्थापित करने के लिए हर जिले को 50 हजार रुपए आवंटित किए गए हैं।

बिहार मुख्यमंत्री ने कहा- 14 दिनों तक घर जाने की नहीं मिलेगी अनुमति
दिल्ली, मुंबई व राजस्थान से आने वाले तमाम मजदूर बिहार के रहने वाले हैं, जो यूपी के जरिए अपने अपने घरों को रवाना हुए हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को सीमावर्ती जिलों में राहत शिविर स्थापित करने का आदेश दिया है। इन मजदूरों को 14 दिनों तक घर जाने की अनुमति नहीं होगी। नीतीश कुमार ने कहा था- विशेष बसों से लोगों को राज्यों को वापस भेजने से लॉकडाउन का उलंघन होगा। इससे कोरोनावायरस के प्रसार में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा, लोगों को घर वापस भेजने की कोशिश के बजाय स्थानीय स्तर पर शिविरों का आयोजन करना बेहतर है। राज्य सरकार किसी के द्वारा आयोजित इन शिविरों की लागत की प्रतिपूर्ति करेगी।



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रोजाना सिर्फ 167 रुपये बचाकर ऐसे बनें करोड़पति, ये सबसे आसान तरीका-Crorepati Calculator How To Become Crorepati Money just rs 5000 monthly investment in mutual fund | business – News in Hindi


सिर्फ 167 रुपये बचाकर कर बन सकते हैं करोड़पति, जानिए इसके बारे में सबकुछ

करोड़पति बनने का है ये आसान तरीका

SIP के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश (Investment) लॉन्ग टर्म टारगेट को हासिल करने का सबसे अच्छा तरीका है. इक्विटी में दूसरी योजनाओं की अपेक्षा अधिक रिटर्न देने की क्षमता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated:
    November 8, 2019, 8:51 AM IST

नई दिल्ली. कई बार लोग छोटी रकम निवेश (Investment) करने में संकोच करते हैं और बड़ी रकम जमा करने के बाद ही निवेश की योजना बनाते हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि कम निवेश से उतना फायदा नहीं होगा जितना कि लॉन्ग टर्म में जरूरत होगी. आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि रोजाना 167 रुपये के निवेश से भी आप करोड़पति बन सकते हैं. आप सोच रहे होंगे कि कैसे संभव है? यह संभव है म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के स्कीम में निवेश के जरिए. आइए जानते हैं इतने कम निवेश में कैसे होगा करोड़पति बनने का सपना पूरा?

SIP के जरिए करें निवेश- SIP, म्‍युचुअल फंड में निवेश का सबसे अच्‍छा तरीका है. इस माध्‍यम से निवेश की अच्‍छी एवरेजिंग हो जाती है, जिससे निवेश में खतरा घट जाता है और अच्‍छे रिटर्न की संभावना बढ़ जाती है. म्‍यूचुअल फंड में SIP शुरू करने के बाद जरूरी नहीं है कि आप तय समय तक ही निवेश करें. इस निवेश को आप जब भी चाहें रोक सकते हैं. ऐसा करने पर कोई पेनाल्‍टी नहीं लगती है.

SIP के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश लॉन्ग टर्म टारगेट को हासिल करने का सबसे अच्छा तरीका है. इक्विटी में दूसरी योजनाओं की अपेक्षा अधिक रिटर्न देने की क्षमता है. यह महंगाई को मात देने में भी मदद करता है, जोकि दूर के लक्ष्यों को पाने के लिए जरूरी भी है. इसके अलावा टैक्सेशन में भी सहायक है. ये भी पढ़ें: पेट्रोल पंप मालिक बनकर लाखों कमाने का मौका, 22 नवंबर तक ऐसे कर सकते हैं अप्लाई

ऐसे बन सकते हैं करोड़पति- अगर आप रोजाना 167 रुपये की बचत करते हैं तो यह महीने में 5,000 रुपये होगा. आपको हर महीने 5,000 रुपये बेहतर म्यूचुअल फंड की स्कीम में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP के जरिए निवेश करना होगा. अगर आपका पोर्टफोलियो सालाना 12 फीसदी रिटर्न देता है तो आप 28 साल में 1.4 करोड़ रुपए से ज्यादा कमा सकते हैं. वहीं 30 साल में आपका निवेश 1.8 करोड़ रुपए और 35 साल में आप 3.24 करोड़ रुपए के मालिक बन सकते हैं.

निवेश पर रखें नजर- यह जरूरी है कि आप अपने निवेश पर नजर बनाए रखें. हर छह महीने या साल भर में इसे जांचते रहें. अगर आपके निवेश की वैल्यू बढ़ रही है तो बने रहें. अगर आप कारण से संतुष्ट ना हों तो इसी कैटेगरी में अपने निवेश को कहीं और शिफ्ट कर सकते हैं.

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First published: November 8, 2019, 8:00 AM IST





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Exam Guide: Gk Exam Mock Test Paper In Hindi – Exam Guide: इस टेस्ट से चेक करें अपने GK एग्जाम की तैयारी


Exam Guide: यदि आप Govt. Jobs के लिए अप्लाई कर रहे हैं तो आप सामान्य ज्ञान (General Knowledge) के इस मॉक टेस्ट पेपर द्वारा अपनी तैयारियां जांच सकते हैं। सभी प्रश्नों के रिजल्ट्स पोस्ट के अंत में दिए गए हैं।

Exam Guide: यदि आप Govt. Jobs के लिए अप्लाई कर रहे हैं तो आप सामान्य ज्ञान (General Knowledge) के इस मॉक टेस्ट पेपर द्वारा अपनी तैयारियां जांच सकते हैं। सभी प्रश्नों के रिजल्ट्स पोस्ट के अंत में दिए गए हैं। दिखने में ये सवाल कई बार मुश्किल लग सकते हैं परन्तु याद करने में ये अत्यन्त आसान हैं-

प्रश्न (1) – ग्यारहवां ‘राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र सम्मेलन 2020’ कहां आयोजित हुआ?
(अ) नई दिल्ली
(ब) मुम्बई
(स) चेन्नई
(द) चंडीगढ़

प्रश्न (2) – किस राष्ट्रीय अभ्यारण्य को हाल ही इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है?
(अ) सुंदरवन बाघ अभयारण्य
(ब) राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य
(स) बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान
(द) कान्हा राष्ट्रीय उद्यान

प्रश्न (3) – जम्मू नगर निगम ने जम्मू विश्वविद्यालय को किस महाराजा के नाम पर रखने का प्रस्ताव पारित किया है?
(अ) महाराजा अग्रसेन
(ब) महाराजा सूरजमल
(स) महाराजा गुलाब सिंह
(द) महाराजा सुहेलदेव राजभर

प्रश्न (4) – निम्न में से कौन-सा विश्वविद्यालय खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2020 का विजेता रहा?
(अ) दिल्ली यूनिवर्सिटी
(ब) जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी
(स) बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी
(द) पंजाब यूनिवर्सिटी

प्रश्न (5) – जवाहर सागर बांध किस जिले में है?
(अ) झालावाड़
(ब) चित्तौडगढ़़
(स) सवाई माधोपुर
(द) कोटा-बूंदी

प्रश्न (6) – प्रारंभिक पूर्ण मानव को किस नाम से जाना जाता था?
(अ) निएण्डरथल
(ब) क्रोर्मेगनन
(स) ग्रिमाल्डी
(द) मैग्डलीनियन

प्रश्न (7) – भारत में भारत में प्रथम मुस्लिम आक्रमणकारी था-
(अ) कुतुबुद्दीन
(ब) महमूद गजनवी
(स) मुहम्मद-बिन-कासिम
(द) मुहम्मद गोरी

प्रश्न (8) – केन्द्रीय चावल अनुसंधान संस्थान कहां स्थित है?
(अ) कोलकाता
(ब) पटना
(स) रांची
(द) कटक

प्रश्न (9) – क्लोरोफिल का खनिज घटक क्या है ?
(अ) आयरन
(ब) कैल्शियम
(स) पोटैशियम
(द) मैग्नीशियम

प्रश्न (10) – चन्द्रमा पर मानव भेजने वाला विश्व का प्रथम देश कौन है?
(अ) बांग्लादेश
(ब) ब्राजील
(स) रूस
(द) संयुक्त राज्य अमरीका

उत्तरमाला: 1. (अ), 2. (ब), 3. (स), 4. (द), 5. (द), 6. (ब), 7. (स), 8. (द), 9. (द), 10. (द)


























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Entry ban without washing hands in the village, located at a height of 8700 feet, water tank fitted for people outside the village | 8700 फीट की ऊंचाई पर बसे गांव में बिना हाथ धोए एंट्री बैन, गांव के बाहर लोगों के लिए लगी पानी की टंकी


  • करगिल के लत्तू गांव के लोगों की पहल, लिखा- पहले हाथ धोएं, फिर गांव में प्रवेश करें
  • ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के व्यक्ति को भी बिना हाथ धोए गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा

दैनिक भास्कर

Mar 29, 2020, 01:23 PM IST

करगिल. करगिल का गांव लत्तू, जो समुद्र तल से 8700 फीट ऊंचाई पर बसा है। पहले ठंड की स्थिति और अब बीमारी का डर लोगों को सता रहा है। इन स्थितियों के बीच इस गांव में कोरोना को लेकर जागरुकता देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने स्वच्छता की मुहिम शुरू करते हुए गांव के बाहर एक पानी की टंकी लगा दी है। इस पर लिखा है- ‘पहले हाथ धोएं, फिर गांव में प्रवेश करें।’ ग्रामीणों के मुताबिक बिना हाथ धोए किसी भी शख्स को गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा है। चाहे वह गांव का हो या फिर बाहर का।

अन्य गांव भी सीख ले रहे

करगिल में कोरोना संक्रमित के शक में 145 से ज्यादा लोग क्वारेंटाइन में हैं। दो मरीजों के पॉजिटिव होने का पता चला है। इसे देखते हुए लत्तू के ग्रामीणों ने एक कमेटी बनाई है। जिसने गांव के बाहर पानी की टंकी रखवाई है। वहां साबुन और सैनिटाइजर भी रखा गया है। इस मुहिम की चर्चा करगिल के उपायुक्त बशीर उल हक चौधरी ने ट्विटर पर की है। फायदा यह हुआ कि आसपास के लोग भी यह तरीका अपनाने लगे हैं।



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English Cricket Board Bans Players From Wearing Smartwatches In Field Of Play – अब मैदान पर स्मार्टवॉच नहीं पहन पाएंगे खिलाड़ी, इस क्रिकेट बोर्ड ने लगाई रोक

क्रिकेट में स्मार्ट वॉच


क्रिकेट में स्मार्ट वॉच
– फोटो : ट्विटर

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इंग्लैंड ऐंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने क्रिकेटरों को काउंटी क्रिकेट की लाइव स्ट्रीमिंग के मद्देनजर भ्रष्टाचार रोधी नियमों को सख्त करते हुए आगामी सभी मुकाबलों में स्मार्टवॉच पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। बोर्ड ने इससे पहले खिलाड़ियों को मैदान पर स्मार्टवॉच पहनने की अनुमति दी थी, बशर्ते कि संचार या डाटा ट्रांसमिशन सुविधाओं को टेलिविजन पर प्रसारण होने वाले मैचों के दौरान बंद रखा जाए।

एक वेबसाइट के अनुसार, ‘काउंटी खेल में लाइव-स्ट्रीमिंग सेवाओं के चलन के कारण नियमों को कड़ा किया गया। टेलिविजन पर प्रसारित होने वाले मैचों में मैदान के अंदर खिलाड़ियों के स्मार्टवॉच पहनने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अगर मैच का सीधा प्रसारण नहीं हो रहा तो वे ड्रेसिंग रूम, बालकनी और डगआउट जैसी जगहों पर इसका इस्तेमाल कर सकते है।’

यह मामला उस समय सामने आया था लंकाशर के स्पिनर मैट पार्किंसन ने बताया था कि उन्हें राष्ट्रीय टीम में चयन की सूचना 2019 चैंपियनशिप के दौरान अपनी टीम के साथी स्टीवन क्रॉफ्ट की स्मार्टवॉच पर आए संदेश जरिए मिली थी।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई साल पहले ही स्मार्टवॉच पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। भ्रष्टाचार रोधी अधिकारियों ने 2018 में लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान पाकिस्तान के असद शफीक और हसन अली को स्मार्टवॉच हटाने के लिए कहा था।

इंग्लैंड ऐंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने क्रिकेटरों को काउंटी क्रिकेट की लाइव स्ट्रीमिंग के मद्देनजर भ्रष्टाचार रोधी नियमों को सख्त करते हुए आगामी सभी मुकाबलों में स्मार्टवॉच पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। बोर्ड ने इससे पहले खिलाड़ियों को मैदान पर स्मार्टवॉच पहनने की अनुमति दी थी, बशर्ते कि संचार या डाटा ट्रांसमिशन सुविधाओं को टेलिविजन पर प्रसारण होने वाले मैचों के दौरान बंद रखा जाए।

एक वेबसाइट के अनुसार, ‘काउंटी खेल में लाइव-स्ट्रीमिंग सेवाओं के चलन के कारण नियमों को कड़ा किया गया। टेलिविजन पर प्रसारित होने वाले मैचों में मैदान के अंदर खिलाड़ियों के स्मार्टवॉच पहनने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अगर मैच का सीधा प्रसारण नहीं हो रहा तो वे ड्रेसिंग रूम, बालकनी और डगआउट जैसी जगहों पर इसका इस्तेमाल कर सकते है।’

यह मामला उस समय सामने आया था लंकाशर के स्पिनर मैट पार्किंसन ने बताया था कि उन्हें राष्ट्रीय टीम में चयन की सूचना 2019 चैंपियनशिप के दौरान अपनी टीम के साथी स्टीवन क्रॉफ्ट की स्मार्टवॉच पर आए संदेश जरिए मिली थी।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई साल पहले ही स्मार्टवॉच पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। भ्रष्टाचार रोधी अधिकारियों ने 2018 में लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान पाकिस्तान के असद शफीक और हसन अली को स्मार्टवॉच हटाने के लिए कहा था।



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Like Katrina Kaif do this thing to get Flat Belly follow her fitness mantra pur | lifestyle – News in Hindi


कटरीना कैफ की तरह Flat Belly पाने के लिए करें ये काम, फॉलो करें उनका फिटनेस मंत्र

बॉडी को फिट बनाए रखने के लिए कटरीना वर्कआउट के साथ-साथ घर में डांस भी करती है.

कटरीना के फिटनेस को लेकर बात करें तो वह अक्सर वर्कआउट करती नजर आती हैं. वह वॉटर योगा से लेकर पिलाटेस तक करती हैं.

बॉलीवुड की फेमस एक्ट्रेस कटरीना कैफ न सिर्फ अपनी एक्टिंग और डांसिग के लिए मशहूर हैं बल्कि लोग उनके फिट एंड फाइन बॉडी के भी दीवाने हैं. कई लड़कियां उनके जैसा फ्लैट बेली पाने की चाहत रखती हैं. आपको बता दें कि इसके लिए कटरीना कैफ काफी मेहनत करती हैं. कटरीना के फिटनेस को लेकर बात करें तो वह अक्सर वर्कआउट करती नजर आती हैं. वह वॉटर योगा से लेकर पिलाटेस तक करती हैं. कटरीना अपनी फिटनेस से जुड़ी कई वीडियोज और फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं. आइए आपको बताते हैं कटरीना के फ्लैट बेली और फिटनेस का राज. ताकि आप भी उन्हें फॉलो कर परफेक्ट फिगर पा सकें.

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सप्ताह में 6 दिन करती हैं वर्कआउट
कटरीना कैफ सप्ताह में 6 दिन कम से कम 45 मिनट का वर्क आउट करती हैं. वह अपनी ट्रेनर के साथ जिम में पूरी मेहनत करती नजर आती हैं. इसके अलावा वह घर पर भी एक्सरसाइज करती हैं. कटरीना फ्लैट बेली के लिए ग्लूटन रिफाइंड शुगर और डेयरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करती. कटरीना का मानना है कि इन चीजों को खाने से वजन तेजी से बढ़ता है. वह अपने खाने में प्रोटीन का भी बहुत कम सेवन करती हैं. कटरीना जंक फूड का सेवन बिल्कुल नहीं करतीं. वह कार्ब्स से भरपूर डाइट लेती हैं.

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बॉडी को फिट बनाए रखने के लिए कटरीना वर्कआउट के साथ-साथ घर में डांस भी करती है. उनका मानना है कि डांसिंग से बॉडी की मसल्स की अच्छी एक्सरसाइज होती है. कटरीना फिट रहने के लिए भरपूर पानी पीतीं हैं और ज्यादा से ज्यादा फ्रूट्स का सेवन करती हैं. उनका मानना है कि बॉडी को फिट रखने के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है. कटरीना स्लिम रहने के लिए स्वीमिंग भी करती हैं. उन्हें वॉटर गेम्स बेहद पसंद हैं. इस बारे में उनका मानना है कि स्वीमिंग से वजन नहीं बढ़ता.

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First published: March 31, 2020, 8:38 PM IST





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New Fiscal Year: These Changes Will Be Implemented From Today, You Will Have A Big Impact – नया वित्त वर्ष: आज से लागू होंगे ये 6 बड़े बदलाव, आप पर होगा बड़ा असर


डेमो

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income tax

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mutual fund

mutual fund
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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन
– फोटो : सोशल मीडिया

मोबाइल फोन

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Oneplus 8 Series Launch On 14 April Know Expected Price And Specifications – Oneplus 8 Series खास फीचर्स के साथ 14 अप्रैल को होगी लॉन्च, जानें संभावित कीमत


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वनप्लस (OnePlus) की बहुचर्चित 8 (OnePlus 8 Series) सीरीज 14 अप्रैल को बाजार में दस्तक देने वाली है। कंपनी ने इस जानकारी की पुष्टि की है। कंपनी के मुताबिक, वनप्लस 8 सीरीज को ग्लोबल लेवल पर ऑनलाइन इवेंट के जरिए उतारा जाएगा। फीचर्स की बात करें तो यूजर्स इस सीरीज के स्मार्टफोन में 90 गीगाहर्ट्ज का एमोलेड डिस्प्ले, दमदार प्रोसेसर और शानदार कैमरा मिल सकता है। इसके अलावा वनप्लस 8 सीरीज का 5जी वेरिएंट भी पेश किया जाएगा। तो आइए जानते हैं वनप्लस 8 सीरीज के बारे में विस्तार से…

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखते हुए वनप्लस ने इस सीरीज को ऑनलाइन लॉन्च करने का फैसला लिया है। इस सीरीज का लॉन्चिंग कार्यक्रम भारतीय समयानुसार रात 8.30 बजे से शुरू हो जाएगा। साथ ही इस कार्यक्रम को कंपनी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकेगा। वहीं, दूसरी तरफ सूत्रों की मानें तो कंपनी इस सीरीज की कीमत प्रीमियम रेंज में रखेगी।

कंपनी के सीईओ पीट लाउ ने कहा है कि वनप्लस 8 अब तक की सबसे दमदार और आकर्षक स्मार्टफोन सीरीज होगी। साथ ही यूजर्स को इस सीरीज के डिवाइस में हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और वनप्लस का सिग्नेचर पावरफुल परफॉर्मेंस सेटअप मिलेगा।

कंपनी 8 सीरीज के तहत OnePlus 8 और OnePlus 8 प्रो को उतार सकती है। तो दूसरी तरफ वनप्लस 8 लाइट को भी पेश किया जा सकता है। हालांकि, तीनों स्मार्टफोन की कीमत और फीचर्स की जानकारी लॉन्च इवेंट के बाद ही मिलेगी। 

वनप्लस (OnePlus) की बहुचर्चित 8 (OnePlus 8 Series) सीरीज 14 अप्रैल को बाजार में दस्तक देने वाली है। कंपनी ने इस जानकारी की पुष्टि की है। कंपनी के मुताबिक, वनप्लस 8 सीरीज को ग्लोबल लेवल पर ऑनलाइन इवेंट के जरिए उतारा जाएगा। फीचर्स की बात करें तो यूजर्स इस सीरीज के स्मार्टफोन में 90 गीगाहर्ट्ज का एमोलेड डिस्प्ले, दमदार प्रोसेसर और शानदार कैमरा मिल सकता है। इसके अलावा वनप्लस 8 सीरीज का 5जी वेरिएंट भी पेश किया जाएगा। तो आइए जानते हैं वनप्लस 8 सीरीज के बारे में विस्तार से…


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वनप्लस 8 सीरीज का लॉन्चिंग इवेंट



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France replaced high speed train as ambulance, train travels 300 km in one hour | फ्रांस ने हाईस्पीड ट्रेन को एंबुलेंस के रूप में बदला, ट्रेन एक घंटे में 300 किमी का सफर तय करती है


  • देशभर में मौजूद किसी भी मरीज को केवल 5 घंटे में यह ट्रेन राजधानी पेरिस तक ले आएगी
  • पहली ट्रेन 20 मरीजों को लेकर अस्पताल पहुंची, हर कैबिन में 4 मरीजों को लाया जा सकता है

दैनिक भास्कर

Mar 29, 2020, 01:30 PM IST

पेरिस. फ्रांस ने अपनी एक हाईस्पीड टीजीवी ट्रेन को देशभर में कोरोना मरीजों को लाने-लेजाने के  लिए अस्पताल के रूप में तब्दील कर दिया। देशभर में कहीं भी अगर कोरोना का मरीज है, उसे 5 घंटे में ही यह ट्रेन राजधानी पेरिस तक ले आएगी। ट्रेन के हरेक कैबिन में 4 मरीजों को लाया जा सकता है। इसमें ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और मेडिकल स्टाफ जैसी आपातकालीन सुविधाएं मौजूद हैं। शुक्रवार को गंभीर हालत में करीब 20 कोरोना मरीजों को ट्रेन से अस्पताल तक पहुंचाया गया। यह ट्रेन एक घंटे में 300 किमी का सफर तय करती है।

ट्रेन में मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर लियोनेल लामहुत ने बताया कि फ्रांस के पूर्वी और पश्चिम क्षेत्र में कोरोना के ज्यादातर मरीज सामने आ रहे हैं। ट्रेन के हर कैबिन में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और अन्य सभी जरूरी उपकरण के कारण हेलिकॉप्टर की तुलना में ज्यादा सुविधाजनक है। 



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Jam 2020 Scorecard: Iit Kanpur Released Marks On Jam.iitk.ac.in Check Scores Here – Jam 2020: आईआईटी कानपुर ने जारी किया जेएएम स्कोर कार्ड, ऐसे करें चेक


एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 31 Mar 2020 04:50 PM IST

जेएएम स्कोर कार्ड 2020
– फोटो : आधिकारिक वेबसाइट

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आईआईटी कानपुर ने मंगलवार को जेएएम 2020 का स्कोर कार्ड जारी किया। एमएससी के लिए जेएएम का स्कोर कार्ड जारी किया गया है जिसे अभ्यर्थी आईआईटी कानपुर की आधिकारिक वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं। आईआईटी कानपुर ने 9 फरवरी को जेएएम की परीक्षा आयोजित की थी जिसका स्कोर कार्ड अब जारी किया गया है। इसका रिजल्ट 16 मार्च को आया था।

आधिकारिक वेबसाइट
jam.iitk.ac.in.

ऐसे चेक करें स्कोर कार्ड
– स्कोर कार्ड चेक करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
– आईआईटी कानपुर की आधिकारिक वेबसाइट jam.iitk.ac.in है।
– यहां आपको जेएएम 2020 स्कोर कार्ड पर क्लिक करना है।
-यह विकल्प आपको वेबसाइट के होम पेज पर ही मिल जाएगा।
– क्लिक करते ही जो पेज खुलेगा वहां अभ्यर्थियों को अपने जानकारी भरनी है।
– जैसे ही आप अपनी जानकारी भरेंगे आपका स्कोर कार्ड खुल जाएगा।

 

आईआईटी कानपुर ने मंगलवार को जेएएम 2020 का स्कोर कार्ड जारी किया। एमएससी के लिए जेएएम का स्कोर कार्ड जारी किया गया है जिसे अभ्यर्थी आईआईटी कानपुर की आधिकारिक वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं। आईआईटी कानपुर ने 9 फरवरी को जेएएम की परीक्षा आयोजित की थी जिसका स्कोर कार्ड अब जारी किया गया है। इसका रिजल्ट 16 मार्च को आया था।

आधिकारिक वेबसाइट
jam.iitk.ac.in.

ऐसे चेक करें स्कोर कार्ड
– स्कोर कार्ड चेक करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
– आईआईटी कानपुर की आधिकारिक वेबसाइट jam.iitk.ac.in है।
– यहां आपको जेएएम 2020 स्कोर कार्ड पर क्लिक करना है।
-यह विकल्प आपको वेबसाइट के होम पेज पर ही मिल जाएगा।
– क्लिक करते ही जो पेज खुलेगा वहां अभ्यर्थियों को अपने जानकारी भरनी है।
– जैसे ही आप अपनी जानकारी भरेंगे आपका स्कोर कार्ड खुल जाएगा।

 



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ISSF supports new Olympic dates – आईएसएसएफ ने किया नई ओलंपिक तारीखों का समर्थन

New Olympic Dates- India TV


New Olympic Dates- India TV
Image Source : AP
New Olympic Dates

 बीजिंग| अंतर्राष्ट्रीय निशानेबाजी महासंघ (आईएसएसएफ) ने टोक्यो ओलंपिक की नई तारीखों का समर्थन किया है। आईएसएसएफ ने सोमवार को बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी और कहा है कि सभी कोटा मान्य रहेंगे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने आईएसएसएफ द्वारा जारी बयान के हवाले से लिखा है, “आईएसएसएफ टोक्यो ओलम्पिक-2020 की नई तारीखों को लेकर आईओसी आयोजन समिति का समर्थन करता है।”

बयान में कहा गया है कि टोक्यो ओलंपिक में जो कोटा हासिल कर लिए गए हैं वो मान्य रहेंगे। साथ ही बयान में कहा गया है कि आईएसएसएफ आईओसीके सामने प्रस्ताव रखेगी कि 2017 के नियम माने जाएं जिसके मुताबिक 12 कोटे हर स्पर्धा में से एक कोटा 31 मई 2020 को होने वाली विश्व चैम्पियनशिप के आधार पर दिया जाए।

बाकी के बचे 16 कोटा जो यूरोपियन निशानेबाजी परिसंघ को दिए जाने थे वो 2021 में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट से हासिल किया जा सकता है।

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Modi Government, Big Decision, No Extension Of Service To Central Government Employee Retiring On 31 March – केंद्र सरकार का फैसला, 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले केंद्रीय कर्मियों को सेवा विस्तार नहीं


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Apr 2020 02:39 AM IST

रिटायरमेंट
– फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

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कार्मिक मंत्रालय ने कहा है कि 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा। मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया, कोरोना वायरस महामारी के चलते देश भर में लॉकडाउन से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट किया जाता है कि 31 मार्च, 2020 तक अपनी सेवा पूरी करने वाले केंद्रीय कर्मियों के रिटायर होने की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी, चाहे वे घर से या दफ्तर से काम कर रहे हों।

लॉकडाउन के दौरान निलंबन आदेश सहित विभिन्न कार्यों की समीक्षा नहीं
केंद्र सरकार लॉकडाउन की अवधि से पहले निलंबन आदेश व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के नोटिस स्वीकार करने जैसे कार्यों की समीक्षा नहीं करेगी। कार्मिक मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा, कोरोना वायरस महामारी फैलने के मद्देनजर लॉकडाउन से उत्पन्न स्थिति पर विचार करते हुए केंद्रीय लोक सेवा (वर्गीकरण अपील व नियंत्रण) नियम 1965 व केंद्रीय लोक सेवा (पेंशन) नियम, 1972 में बताई गई समयसीमा का पालन करना संभव नहीं है।

अगर लॉकडाउन शुरू होने पर किसी प्रक्रिया या कार्य को पूरा करने की निर्धारित तारीख 20 दिन बाद आती है तो यह लॉकडाउन के दौरान स्थगित रहेगी। लॉकडाउन हटाने के बाद ही 20 दिन काम करने के लिए उपलब्ध रहेंगे। आदेश में कहा गया है कि लॉकडाउन हटाने के बाद अगर काम पूरा करने में 15 दिन से कम वक्त लगता है तो प्रक्रिया को इस अवधि में पूरा करने की अनुमति दी जा सकती है।

मंत्रालय ने सभी सरकारी विभागों को जारी आदेश में कहा कि जहां सीधी भर्ती, प्रतिनियुक्ति आदि के लिए आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि लॉकडाउन के दौरान आती है तो ऐसी स्थिति में अंतिम तिथि लॉकडाउन के दिनों के आधार पर बढ़ाई जाएगी। इसी प्रकार सीसीएस आचार नियम 1964 में निर्धारित सीमा को विभिन्न प्रयोजनों के लिए लॉकडाउन के दिनों की संख्या के आधार पर बढ़ाया जाएगा।

कार्मिक मंत्रालय ने कहा है कि 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया जाएगा। मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया, कोरोना वायरस महामारी के चलते देश भर में लॉकडाउन से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट किया जाता है कि 31 मार्च, 2020 तक अपनी सेवा पूरी करने वाले केंद्रीय कर्मियों के रिटायर होने की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी, चाहे वे घर से या दफ्तर से काम कर रहे हों।

लॉकडाउन के दौरान निलंबन आदेश सहित विभिन्न कार्यों की समीक्षा नहीं
केंद्र सरकार लॉकडाउन की अवधि से पहले निलंबन आदेश व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के नोटिस स्वीकार करने जैसे कार्यों की समीक्षा नहीं करेगी। कार्मिक मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा, कोरोना वायरस महामारी फैलने के मद्देनजर लॉकडाउन से उत्पन्न स्थिति पर विचार करते हुए केंद्रीय लोक सेवा (वर्गीकरण अपील व नियंत्रण) नियम 1965 व केंद्रीय लोक सेवा (पेंशन) नियम, 1972 में बताई गई समयसीमा का पालन करना संभव नहीं है।

अगर लॉकडाउन शुरू होने पर किसी प्रक्रिया या कार्य को पूरा करने की निर्धारित तारीख 20 दिन बाद आती है तो यह लॉकडाउन के दौरान स्थगित रहेगी। लॉकडाउन हटाने के बाद ही 20 दिन काम करने के लिए उपलब्ध रहेंगे। आदेश में कहा गया है कि लॉकडाउन हटाने के बाद अगर काम पूरा करने में 15 दिन से कम वक्त लगता है तो प्रक्रिया को इस अवधि में पूरा करने की अनुमति दी जा सकती है।

मंत्रालय ने सभी सरकारी विभागों को जारी आदेश में कहा कि जहां सीधी भर्ती, प्रतिनियुक्ति आदि के लिए आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि लॉकडाउन के दौरान आती है तो ऐसी स्थिति में अंतिम तिथि लॉकडाउन के दिनों के आधार पर बढ़ाई जाएगी। इसी प्रकार सीसीएस आचार नियम 1964 में निर्धारित सीमा को विभिन्न प्रयोजनों के लिए लॉकडाउन के दिनों की संख्या के आधार पर बढ़ाया जाएगा।



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Covid-19: Sensex Set for Biggest Quarterly Fall, Nifty’s Worst in 28 Years | निफ्टी का 28 साल में सबसे खराब प्रदर्शन, सेंसेक्स में इस तिमाही बड़ी गिरावट; अभी कई सेक्टर्स में नुकसान की आशंका


  • निफ्टी में इस तिमाही 31.9% की गिरावट हुई, जो जून 1992 की तिमाही के दौरान हुई 32.2 प्रतिशत गिरावट के बराबर है
  • कोरोनावायरस के चलते देश में 21 दिन का लॉकडाउन है, जिससे बाजार में अभी और गिरावट आ सकती है 

दैनिक भास्कर

Mar 31, 2020, 07:21 PM IST

बिजनेस डेस्क. इस साल शेयर बाजार की पहली तिमाही में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इस साल जनवरी से मार्च 2020 के दौरान बेंचमार्क इंडेक्स 31 प्रतिशत तक फिसल गया है। बाजार में आई इस गिरावट के लिए कोरोनावायरस की महामारी जिम्मेदार है। आमतौर पर स्टॉक या इंडेक्स के पीक लेवल से 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा की गिरावट उस ट्रेडेड यूनिट के लिए बियर मार्केट टेरिटॉरी माना जाता है। इस तिमाही के दौराान निफ्टी में 31.9 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो जून 1992 की तिमाही के दौरान हुई 32.2 प्रतिशत गिरावट के बराबर है। वहीं, दूसरी तरफ सेंसेक्स में इस दौरान 28.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

इंडियन इक्विटी से 55,007 करोड़ रुपए निकाले

सोमवार, 30 मार्च तक इस फाइनेंशियल ईयर 2019 – 2020 (FY20) में निफ्टी 50 (28.8% तक गिरा) और सेंसेक्स (26.5% तक गिरा) ने सबसे खराब प्रदर्शन किया। इससे पहले वित्त वर्ष 2019 में, एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स में 37.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। जबकि ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसेस (GFC) की वजह से निफ्टी 36.2 फीसदी गिर गया था। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) ने मार्च 2020 में इंडियन इक्विटी से 55,007 करोड़ रुपए (करीब 7.4 बिलियन डॉलर) निकाल लिए।

अभी कोरोनावायरस के चलते देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। ऐसे में ज्यादातर विश्लेषकों का कहना है कि वे देश और विदेश के बाजारों की Covid-19 मामलों को ट्रैक कर रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से बाजार में गिरावट आ सकती है।

बीएसई सेक्टर में 46 फीसदी तक गिरावट

इस तिमाही के दौरान फाइनेंशियल सेक्टर के साथ बैंक, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (NBFC), हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFC) और बीमा कंपनियों सहित बेंचमार्क सूचकांकों में तेज गिरावट देखी गई है। ऑटो, मेटल और रियल एस्टेट सेक्टर भी गिरावट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। इन सेक्टरों ने 42 फीसदी से 46 फीसदी की गिरावट दर्ज की। हालांकि, फॉर्मेसी और फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स कंपनी (FMCG) में इस दौरान सबसे कम 14 फीसदी की गिरावट आई। जबकि इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) सेक्टर में 21 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

कई सेक्टर्स को अभी और होगा नुकसान

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल रिसर्च के हेड वरुण लोहचब का मानना है कि आईटी, कंज्यूमर स्टेपल, फार्मा और केमिकल सेक्टर्स में कम आमदनी से होने वाला नुकासान कम होगा। वहीं, टेलीकॉम सेक्टर भी काफी हद तक अछूता रहेगा। हालांकि, इनकी जल्द ही इनकी मांग से लाभ हो सकता है। अभी ऑटोसेट, रिटेल, एंटरटेनमेंट, ईटिंग और एविएशन जैसे सेक्टर की कम डिमांड से निराश होना पड़ेगा। इन्हें नॉर्मल होने में वक्त लगेगा।

इस तिमाही के दौरान एसएंडपी बीएसई 500 और निफ्टी 500 के 538 शेयरों में से 114 शेयरों में इनकी मार्केट प्राइस से ज्यादा की गिरावट देखी गई है। इस लिस्ट में इंडसइंड बैंक, आरबीएल बैंक, बंधन बैंक, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस, वेदांत, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज, टाटा मोटर्स और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) शामिल हैं। अन्य 221 शेयरों में 30 फीसदी से 50 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है।



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Coronavirus Infection (COVID-19) Updates On Diabetes, Heart Disease, and High Blood Pressure – Indian Council of Medical Research (ICMR) Questions Answered | हाईब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगियों में कोरोना का संक्रमण होने पर अधिक देखभाल की जरूरत: आईसीएमआर


दैनिक भास्कर

Mar 31, 2020, 03:50 PM IST

हेल्थ डेस्क. क्या हाईब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग के मरीजों को कोरोनावायरस से संक्रमण का खतरा ज्यादा है, क्या ब्लड प्रेशर की दवाएं संक्रमण की गंभीरता को बढ़ाती हैं, ऐसे ही कई सवालों के जवाब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने दिए हैं। जानिए उनके जवाब….

#1) हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगियों को कोरोनावायरस का खतरा ज्यादा है?

आईसीएमआर : नहीं, सामान्य लोगों के मुकाबले हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगियों को कोरोनावायरस  से संक्रमण का खतरा अधिक नहीं है।

#2) क्या कोरोना का संक्रमण होने पर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगियों की हालत ज्यादा नाजुक हो जाती है?

आईसीएमआर : कोरोना से संक्रमित 80 फीसदी मरीजों में आमतौर पर बुखार, गले मेंं तकलीफ और खांसी के माइल्ड लक्षण दिखते हैं। ऐसे मामलों में मरीज पूरी तरह से रिकवर हो जाता है। लेकिन हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग के कुछ मरीजों में स्थिति नाजुक हो सकती है। कॉम्प्लिकेशन बढ़ सकते हैं। ऐसे मरीजों को अधिक देखभाल की जरूरत होती है।

#3) क्या  डायबिटीज के रोगियों को कोरोनावायरस संक्रमण का खतरा अधिक है?

आईसीएमआर: आमतौर पर जिन रोगियों का ब्लड शुगर अनियंत्रित रहता है उनमें हर तरह का संक्रमण होने की आशंका ज्यादा रहती है। ऐसे में खानपान का विशेष ध्यान रखें और रूटीन में एक्सरसाइज जरूर शामिल करें। डायबिटीज से जुड़ी दवाएं समय पर लें ताकि ब्लड शुगर कंट्रोल में रहे। ऐसी रोगियों में संक्रमण होने पर अधिक देखभाल की जरूरत होती है, थोड़ी-थोड़ी देर पर उनका ब्लड शुगर मॉनिटर करना पड़ता है।

#4) क्या ब्लड प्रेशर की दवाएं संक्रमण की गंभीरता को बढ़ाती हैं?

आईसीएमआर: अब की रिसर्च में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जो साबित करे कि ब्लड प्रेशर की दवाएं संक्रमण की गंभीरता को बढ़ावा देती हैं।  ये दवाएं ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करके हार्ट फेल्योर से बचाती हैं। कोरोनावायरस के संक्रमण के दौरान खुद से ये दवाएं बंद करना समस्या को गंभीर जरूर बना सकता है। इससे हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए ब्लड प्रेशर की दवाएं न बंद करें।

#5) शरीर में दर्द या फीवर होने पर क्या करें?

आईसीएमआर : ऐसी स्थिति में आइबूप्रोफेन जैसे नॉन-स्टीरॉयडल एंटी इंफ्लेमेट्री ड्रग लेने से बचें। ऐसे ड्रग कोरोनावायरस के संक्रमण को और गंभीर बना सकते हैं। साथ ही दिल और किडनी दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संक्रमण का खतरा महसूस होने पर पैरासिटामॉल लेना सुरक्षित है। ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए रोजाना एक्सरसाइज करें। स्मोकिंग और अल्कोहल से बचें। खाने में ऐसे फल और सब्जियां लें जिनमें फायबर और प्रोटीन अधिक हों।

#6) कौन से लक्षण हैं जो कोरोनावायरस के संक्रमण की ओर इशारा करते हैं?

आईसीएमआर : अगर आपको बुखार, खांसी, मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो डॉक्टरी सलाह लें। ये लक्षण वायरस के संक्रमण की ओर इशारा करते हैं। लक्षण पता चलने के 14 दिन बाद तक घर में ही रहें। परिवार के लोगों से दूर रहें। मास्क का प्रयोग करें। कोई भी दवा अपनी मर्जी से न लें।



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facebook will help media organization who are affected to cornavirus help of 10 crore dollar | tech – News in Hindi


कोरोना वायरस से प्रभावित मीडिया संस्थानों की मदद करेगा फेसबुक, देगा 10 करोड़ डॉलर

फेसबुक

फेसबुक ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों को सूचना देने के लिए समाचार उद्योग असाधारण हालात में काम कर रहा है.

वाशिंगटन. फेसबुक (facebook) ने सोमवार को कहा कि वह वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस महामारी (coronavirus pandemic) से बुरी तरह प्रभावित मीडिया संस्थानों को 10 करोड़ डॉलर की मदद देगा. उसने कहा कि परेशानी के समय में भरोसेमंद सूचना देने के लिए इसकी जरूरत है. फेसबुक के समाचार साझेदारी के निदेशक कैंपबेल ब्राउन ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों को सूचना देने के लिए समाचार उद्योग असाधारण हालात में काम कर रहा है.

उन्होंने कहा, ‘ जिस समय पत्रकारिता को पहले से अधिक की जरूरत है, वायरस के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव के चलते विज्ञापन से होने वाली आय में गिरावट आ रही है. स्थानीय पत्रकार इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.

(ये भी पढ़ें- लॉकडाउन के बीच Jio बना यूज़र्स का सहारा, वैलिडिटी बढ़ाने के साथ दिया 100 मिनट फ्री)

नए वित्त पोषण के मुताबिक, करीब 2.5 करोड़ डॉलर की आपातकालीन मदद स्थानीय सामाचारों को फेसबुक पत्रकारिता अभियान के जरिए दी जाएगी और बाकी 7.5 करोड डॉलर अतिरिक्त मार्केटिंग प्रयासों के जरिए विश्व के समाचार संस्थानों को दिए जाएंगे.इससे पहले फेसबुक के संस्थापक मार्ग ज़करबर्ग (mark zuckerberg) और उनकी पत्नी ​प्रिसिला चान की ओर से परोपकार के लिए गठित संगठन​ चान ज़करबर्ग इनीशिएटिव ने कोरोना वायरस से फैलने वाली बीमारी का उपचार खोजने के लिए बिल एवं मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के साथ हाथ मिलाने और 2.5 करोड़ डालर की राशि का योगदान करने की घोषणा की है.

(ये भी पढ़ें- लॉकडाउन के बीच TV देखने वालों के लिए अच्छी खबर, फ्री हुए ये 4 पॉपुलर पेड चैनल) 

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First published: March 31, 2020, 4:39 PM IST





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Government Bans Tourist Visa For Tablighi Programms – तबलीगी कार्यक्रमों के लिए नहीं मिलेगा पर्यटक वीजा, सरकार ने लगाई रोक


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Apr 2020 02:12 AM IST

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निजामुद्दीन मरकज में मजहबी जलसे में शामिल लोगों के बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव आने के बाद सरकार सतर्क हो गई है। इस मामले के खुलासे के बाद पता चला है कि ऐसे जलसों में विदेश जमाती पर्यटक वीजा पर भारत आते हैं और यहां धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। ऐसे में सरकार ने तबलीगी गतिविधियों के लिए अब पर्यटक वीजा न जारी करने का फैसला किया है।

देश के अलग-अलग मस्जिदों में अब तक मिले 700 से ज्यादा विदेशियों में ज्यादातर टूरिस्ट वीजा पर आए थे। गृहमंत्रालय ने कहा, इन लोगों ने वीजा नियमों का उल्लंघन किया है। इनके खिलाफ कार्रवाई होगी। विदेश मंत्रालय ने कहा, कोई विदेशी तबलीगी गतिविधियों में हिस्सा लेना चाहता है तो पर्यटक वीजा नहीं मिलेगा।

गृह मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय से कहा है कि टूरिस्ट वीजा देने से पहले यह पड़ताल जरूरी है कि आवेदक किस जगह जाना चाहते हैं। आवेदक से भारत में ठहरने, रिटर्न टिकट, यात्रा खर्च के का विवरण भी लिया जाए।

निजामुद्दीन मरकज में मजहबी जलसे में शामिल लोगों के बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव आने के बाद सरकार सतर्क हो गई है। इस मामले के खुलासे के बाद पता चला है कि ऐसे जलसों में विदेश जमाती पर्यटक वीजा पर भारत आते हैं और यहां धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। ऐसे में सरकार ने तबलीगी गतिविधियों के लिए अब पर्यटक वीजा न जारी करने का फैसला किया है।

देश के अलग-अलग मस्जिदों में अब तक मिले 700 से ज्यादा विदेशियों में ज्यादातर टूरिस्ट वीजा पर आए थे। गृहमंत्रालय ने कहा, इन लोगों ने वीजा नियमों का उल्लंघन किया है। इनके खिलाफ कार्रवाई होगी। विदेश मंत्रालय ने कहा, कोई विदेशी तबलीगी गतिविधियों में हिस्सा लेना चाहता है तो पर्यटक वीजा नहीं मिलेगा।

गृह मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय से कहा है कि टूरिस्ट वीजा देने से पहले यह पड़ताल जरूरी है कि आवेदक किस जगह जाना चाहते हैं। आवेदक से भारत में ठहरने, रिटर्न टिकट, यात्रा खर्च के का विवरण भी लिया जाए।



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The most affected unorganized sector, 93% of the workforce, these 41 crore people lag behind in economic security | लॉकडाउन: सबसे ज्यादा प्रभावित असंगठित क्षेत्र; वर्कफोर्स में 93% हिस्सा, आर्थिक सुरक्षा में सबसे पीछे ये 41 करोड़ लोग


  • 2019 में जारी इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, देश की कुल वर्कफोर्स में 93% हिस्सा असंगठित क्षेत्र का
  • देश की इकोनॉमी को चलाने में इस असंगठित क्षेत्र का बड़ा हाथ, इसके बावजूद इसकी रक्षा के लिए ठोस प्रावधान नहीं

दैनिक भास्कर

Mar 29, 2020, 01:53 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना की वजह से पूरा देश थमा हुआ है। स्वास्थ्य का यह खतरा समाज की सबसे नीचे की कड़ी के लिए आर्थिक खतरा भी बन गया है। इसी स्थिति को देखते हुए केन्द्र सरकार ने 1.70 लाख करोड़ रुपए का प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज जारी किया है। उधर, देशभर से मजदूरों के पलायन की दर्दनाक तस्वीरें आ रही हैं। पांच-पांच सौ किमी से भी ज्यादा पैदल चलकर ये लोग अपने घरों को लौट रहे हैं। इनकी तस्वीरों के साथ पुलिस द्वारा इन्हें पीटने के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। पहले कोरोना, फिर भूख और अब पुलिस की पिटाई का डर।  सेहत के बाद कोरोना का असर देश के असंगठित क्षेत्र पर पड़ा है। ये वो लोग हैं, जो या तो ठेके पर काम करते हैं। या फिर मजदूर हैं, जो रोज की दिहाड़ी से अपने परिवार का पेट भरते हैं। यह असंगठित क्षेत्र कितना बड़ा है इसका सही अंदाजा सरकार को भी नहीं है। 

2019 में जारी हुए इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार देश की कुल वर्कफोर्स में से 93 फीसदी हिस्सा असंगठित क्षेत्र का है। वहीं 2018 में नीति आयोग की एक रिपोर्ट में यह आंकड़ा 85 फीसदी है। देश की इकोनॉमी को चलाने में इस असंगठित क्षेत्र का बड़ा हाथ है। इसके बावजूद इसकी रक्षा के लिए ठोस प्रावधान नहीं हैं। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे 2017-18 की रिपोर्ट जो कि पिछले साल जारी हुई थी, उसमें कहा गया है कि  इन्फॉर्मल सेक्टर (नॉन एग्रीकल्चर) में रेगुलर/सैलरीड कर्मचारियों में भी 71% ऐसे हैं, जिनके पास लिखित में जॉब कॉन्ट्रैक्ट नहीं है। 54.2 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें पेड लीव नहीं मिलती। इतना ही नहीं, इसमें से 49.6 फीसदी किसी भी सामाजिक सुरक्षा योजना की योग्यता नहीं रखते। स्पष्ट है असंगठित क्षेत्र का दायरा न केवल व्यापक है बल्कि पूरी तरह असुरक्षित भी है। कृषि क्षेत्र जहां देश का सबसे बड़ा असंगठित वर्ग काम करता है  उसके भी इस लॉक डाउन से प्रभावित होने की आशंका है। विशेषज्ञों से जानते हैं  कि कोराेना की मार किस तरह इस वर्ग पर पड़ने जा रही है।

8 बिंदुओं के आधार पर जानिए इस पलायन से जुड़ा सबकुछ :

सवाल-1: कोरोना के बाद अब ताजा संकट क्या है?
जवाब भूख और पलायन: ताजा संकट मजदूरों के पलायन का है। ये सिर्फ कोराेना का ही नहीं, बल्कि भूख का भी सामना कर रहे हैं। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के इकोनॉमिक्स विभाग के प्रोफेसर डॉ. अमिताभ कुंदू के अनुसार- राेजगार के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन करने वाले लोगों की संख्या लगभग 1.4 करोड़ है। वहीं एक राज्य में ही एक शहर से दूसरे शहर में रोजगार के लिए जाने वाले लोगों की बात करें तो यह संख्या कई करोड़ में पहुंचती है। ये 1.4 करोड़ लोग ऐसे हैं जो कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में केवल मजदूरी या ऐसे ही कार्यों के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं। 

सवाल- 2: देश में असंगठित वर्कफोर्स कितनी बड़ी है?

जवाब- तीन अलग-अलग आंकड़े:

1. इकोनॉमिक सर्वे (2018-19) के अनुसार भारत में कुल वर्क फोर्स का 93% हिस्सा असंगठित क्षेत्र का है।
एक अनुमान के अनुसार देश में कुल वर्क फोर्स यानी काम करने वाले लोगों की संख्या 45 करोड़ है। इसमें से 93 प्रतिशत यानी देश के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या लगभग 41.85 करोड़ है। 

2. नीति आयोग द्वारा नवंबर 2018 में जारी किए आंकड़ों के अनुसार कुल वर्क फोर्स का 85 प्रतिशत मानव श्रम असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है।

3. नेशनल स्टैटिस्टिकल कमीशन 2012 की रिपोर्ट में इंफाॅर्मल वर्क फोर्स को कुल वर्क फोर्स का 90% बताया गया है। 

वहीं, आईआईएम अहमदाबाद से जुड़ी अर्थशास्त्री रितिका खेड़ा कहती हैं- 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार देश के एक तिहाई मजदूर दिहाड़ी मजदूर हैं।

सवाल-3 इस असंगठित क्षेत्र में कौन-कौन से लोग हैं? सेक्टर वाइज क्या स्थिति है?

जवाब- सीआईआई द्वारा वर्ष 2011-12 में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार देश के गैर कृषि क्षेत्र के 7 प्रमुख सेक्टर्स में ही लगभग 16.35 करोड़ लोग असंगठित रूप से कार्यरत हैं। इनमें पहले स्थान पर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और दूसरे स्थान पर ट्रेड, होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री व तीसरे स्थान पर कंस्ट्रक्शन का क्षेत्र है। इन्हीं सेक्टर्स के मजदूरों का पलायन सबसे ज्यादा हो रहा है।

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सवाल- 4 : देश में गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले लोग कितने हैं?
जवाब-
2011 की जनगणना के दौरान देश में कुल आबादी में से 21.9% गरीबी रेखा के नीचे मानी गई थी। सरकार द्वारा घोषित पैकेज का लाभ देश के 80 करोड़ गरीबों को मिलेगा। जनगणना में देश भर में गरीबों की संख्या लगभग 26.8 करोड़ बताई गई थी।  जिनकी प्रतिदिन की आय 1.90 डॉलर (लगभग 142.80 रु) या उससे कम थी। इन लोगों के सामने सबसे बड़ा खतरा खड़ा हो गया है।

सवाल- 5 : इनमें से कितने लोगों के पास जन-धन खाते, कितनों को मिलेगा लाभ?
जवाब- केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने जुलाई 2019 में लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि 26 जून, 2019 तक देश भर में प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत 35.99 करोड़ खाते खोले गए। इनमें से वर्तमान में 29.54 करोड़ एक्टिव हैं। वहीं सरकार की प्रधानमंत्री जनधन योजना की वेबसाइट के अनुसार 18 मार्च 2020 तक इस योजना के कुल लाभान्वित लोगों की संख्या 38.28 करोड़ है। केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए 1.70 लाख करोड़ के गरीब कल्याणपैकेज के तहत इन खातों में राशि स्थानांतरित की जाएगी।

सवाल- 6 : अभी भूख की क्या स्थिति है, कितने लोगों को खाना नहीं मिल पाता?
जवाब- 2019 में जारी हुए ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 117 देशों की रैंकिंग में भारत का 102वां स्थान था। संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत काम करने वाली फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन द्वारा 2019 में जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक 2016-18 के बीच भारत में ऐसे लोगों की संख्या कुल आबादी का 14% थी, जिन्हें पोषणयुक्त आहार नहीं मिल पाता है। 135 करोड़ की आबादी के लिहाज से देखें तो यह संख्या 18.90 करोड़ है। 

सवाल- 7 : पलायन करने वाले कितना कमा पाते होंगे?
जवाब-
पलायन करने वाले लगभग 1.4 करोड़ लोगों की पारिवारिक आय औसतन 3500 से 4000 रुपए मासिक के बीच है। 5 लोगों के परिवार को एक यूनिट माना जाए तो प्रति व्यक्ति मासिक आमदनी 700 से 800 रुपए बैठती है। यह आमदनी देश में शहरी क्षेत्र की गरीबी रेखा के बराबर है।

सवाल- 8 : राज्यवार देखिए, काम के लिए पलायन करने वाले मजदूरों की स्थिति

जवाब –

    राज्य     माइग्रेंट्स
उत्तर प्रदेश      40.20 लाख
बिहार     

36.16 लाख

राजस्थान     

18.44 लाख

मध्य प्रदेश      18.26 लाख
उड़ीसा      05.03 लाख

नोट: 7 प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र, यूपी, बंगाल, गुजरात, केरल, पंजाब व असम में जाने वाले माइग्रेंट्स के आधार पर।  ( स्रोत, सेंसेक्स-2011 )

भास्कर एक्सपर्ट : रितिका खेड़ा (अर्थशास्त्री, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईएम, अहमदाबाद)

असंगठित क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होगा लॉकडाउन से
देश की करीब 80 फीसदी वर्कफोर्स इन्फॉर्मल इकोनॉमी में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार चार फीसदी कॉन्ट्रैक्ट वाले वर्कर हैं। केवल पांच में से एक के पास मासिक वेतन वाली नौकरी है। वर्कफोर्स का आधा हिस्सा स्वरोजगार वाले हैं। दुकानदार, रेहड़ी लगाने वाले, सैलून चलाने वाले, साइकल रिपेयर करने वाले मोची आदि हैं। लॉकडाउन से जो आर्थिक संकट पैदा होगा, उससे कोई नहीं बच पाएगा। दरअसल, आर्थिक व्यवस्था में हर सेक्टर दूसरे से जुड़ा होता है। गांवों से शहरों को खाने की सप्लाई मिलती है तो गांवों को शहरों से जरूरत का सामान। जब प्रोडक्शन ही नहीं होगा तो कीमतें बढ़ेंगी। ऐसे में वायरस की तरह भूख भी खतरनाक साबित होगी।

भास्कर एक्सपर्ट : प्रोफेसर अरुण कुमार ( जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली )

युद्ध से भी भयानक स्थिति, अगर लॉकडाउन लंबा खिंचा तो बदतर होंगे हालात
असंगठित क्षेत्र के पास सोशल सिक्योरिटी नहीं होती है। नियोक्ता का काम बंद होते ही सबसे पहले यहां काम करने वाले व्यक्ति का रोजगार छिनता है। देश में सर्वाधिक लोग कृषि क्षेत्र में असंगठित रूप से काम करते हैं। इसमें देश का लगभग 45 प्रतिशत वर्कफोर्स काम कर रहा है। इस लॉकडाउन का सबसे बुरा असर सप्लाई चेन के टूटने के रूप में होगा। एम्प्लायर को नुकसान होगा, वह कामगार काे निकाल बाहर करेगा। रोजगार छिनते ही कामगार की आमदनी बंद हो जाएगी। जैसे-जैसे इनकी जमापूंजी खत्म होगी लोग भोजन-पानी को तरस जाएंगे। यही सबसे खतरनाक स्थिति होगी। इसी से बचने के लिए दूसरे राज्यों में काम करने वाले लोेग अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। एक तरह से देखा जाए तो यह युद्ध से भी भयानक स्थिति है।



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Coronavirus Effect Orld Economy Will Go Inte Recession Except China India Says United Nations – कोरोना: मंदी में चली जाएगी वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारत-चीन पर असर की आशंका नहीं: संयुक्त राष्ट्र


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संयुक्त राष्ट्र की ताजा व्यापार रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल मंदी में चली जाएगी, जबकि भारत और चीन इसके अपवाद हो सकते हैं। यानी भारत और चीन पर असर नहीं होने की उम्मीद है। 

विकासशील देशों के लिए एक बड़ा संकट 
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान खरबों डॉलर का नुकसान होगा और विकासशील देशों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। हालांकि रिपोर्ट में इस बात की विस्तार से व्याख्या नहीं की गई है कि भारत और चीन अपवाद क्यों और कैसे होंगे।

2500 अरब डॉलर के राहत पैकेज की सिफारिश
इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि कोविड-19 संकट के चलते विकासशील देशों में रह रहे दुनिया के करीब दो-तिहाई लोग अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और साथ ही इन देशों की मदद के लिए 2500 अरब डॉलर के राहत पैकेज की सिफारिश भी की गई है।

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) के एक ताजा विश्लेषण में कहा गया है कि दुनिया की दो-तिहाई आबादी प्रभावित होगी और अगले दो वर्षों के दौरान विकासशील देशों में करीब 2,000 अरब डॉलर से 3,000 अरब डॉलर के बीच विदेशों से आने वाला निवेश प्रभावित हो सकता है।

यूएनसीटीएडी ने कहा कि हाल में विकसित अर्थव्यवस्थाओं और चीन ने भारी भरकम सरकारी पैकेज की घोषणा की है। जी-20 के मुताबिक उनकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ये पैकेज कुल 5,000 अरब डॉलर का होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक अभूतपूर्व संकट है, जिसके लिए अभूतपूर्व फैसले करने हैं।

अरबों-खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश का होगा नुकसान
यूएनसीटीएडी ने कहा है कि इन राहत उपायों के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल मंदी के दौर में चली जाएगी और इससे अरबों-खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश का नुकसान होगा, जो विकासशील देशों के लिए गंभीर मुसीबत बन जाएगा।

संयुक्त राष्ट्र की ताजा व्यापार रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस महामारी के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल मंदी में चली जाएगी, जबकि भारत और चीन इसके अपवाद हो सकते हैं। यानी भारत और चीन पर असर नहीं होने की उम्मीद है। 

विकासशील देशों के लिए एक बड़ा संकट 
रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान खरबों डॉलर का नुकसान होगा और विकासशील देशों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। हालांकि रिपोर्ट में इस बात की विस्तार से व्याख्या नहीं की गई है कि भारत और चीन अपवाद क्यों और कैसे होंगे।

2500 अरब डॉलर के राहत पैकेज की सिफारिश
इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि कोविड-19 संकट के चलते विकासशील देशों में रह रहे दुनिया के करीब दो-तिहाई लोग अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और साथ ही इन देशों की मदद के लिए 2500 अरब डॉलर के राहत पैकेज की सिफारिश भी की गई है।

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) के एक ताजा विश्लेषण में कहा गया है कि दुनिया की दो-तिहाई आबादी प्रभावित होगी और अगले दो वर्षों के दौरान विकासशील देशों में करीब 2,000 अरब डॉलर से 3,000 अरब डॉलर के बीच विदेशों से आने वाला निवेश प्रभावित हो सकता है।

यूएनसीटीएडी ने कहा कि हाल में विकसित अर्थव्यवस्थाओं और चीन ने भारी भरकम सरकारी पैकेज की घोषणा की है। जी-20 के मुताबिक उनकी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ये पैकेज कुल 5,000 अरब डॉलर का होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक अभूतपूर्व संकट है, जिसके लिए अभूतपूर्व फैसले करने हैं।

अरबों-खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश का होगा नुकसान
यूएनसीटीएडी ने कहा है कि इन राहत उपायों के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था इस साल मंदी के दौर में चली जाएगी और इससे अरबों-खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश का नुकसान होगा, जो विकासशील देशों के लिए गंभीर मुसीबत बन जाएगा।



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