After The Defeat In The Elections, The Voices Of Protest Resurfaced In The Congress, Kapil Sibal Besieged Rahul-sonia Gandhi – चुनावों में हार के बाद कांग्रेस में फिर उठे विरोध के स्वर, सिब्बल ने राहुल-सोनिया को घेरा

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बिहार चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी कलह एक बार फिर सामने आने लगी है। पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कपिल सिब्बल ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। सिब्बल ने एक अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘बिहार चुनाव और उपचुनावों में हालिया प्रदर्शन पर कांग्रेस पार्टी (के शीर्ष नेतृत्व) के विचार अब तक सामने नहीं आए हैं। शायद उन्हें लगता हो कि सब ठीक है और इसे सामान्य घटना ही माना जाना चाहिए।’ 

चुनावों में हार पर कांग्रेस लीडरशिप के रवैये पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए सिब्बल ने कहा कि मैं सिर्फ अपनी बात कर रहा हूं। मैंने लीडरशिप को कुछ कहते नहीं सुना। इसलिए मुझे नहीं पता। मुझ तक सिर्फ नेतृत्व के ईर्द-गीर्द के लोगों की आवाज पहुंचती है। मुझे सिर्फ इतना ही पता होता है।’

सिब्बल से पहले बिहार कांग्रेस के बड़े नेता तारीक अनवर भी पार्टी के अंदर मंथन होने की बात कह चुके हैं। बिहार चुनाव के परिणामों के बाद तारिक ने कहा कि पार्टी के अंदर मंथन होना चाहिए। उधर महागठबंधन की राजद और लेफ्ट पार्टियां पर भी लगातार कांग्रेस पर निशाना साध रही हैं।

सिब्बल ने तारीक अनवर के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि एक सहयोगी ने कांग्रेस के अंदर मंथन की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, ‘अगर छह सालों में कांग्रेस ने आत्ममंथन नहीं किया तो अब इसकी उम्मीद कैसे करें? हमें कांग्रेस की कमजोरियां पता है। हमें पता है सांगठनिक तौर पर क्या समस्या है। मुझे लगता है कि इसका समाधान भी सबको पता है। कांग्रेस पार्टी भी जानती है, लेकिन वो इन समाधान को अपनाने से कतराते हैं। अगर वो ऐसा करते रहेंगे को ग्राफ यूं ही गिरता रहेगा। यह कांग्रेस की दुर्दशा की स्थिति है जिससे हम सब चिंतित हैं।’

सिब्बल से जब पूछा गया कि जब कांग्रेस को समाधान पता है तो इसका शीर्ष नेतृत्व इसे अपनाने से क्यों हिचकती है? इस सवाल पर उन्होंने बिना लाग-लपेट कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सीडब्ल्यूसी के सदस्य नॉमिनेटेड हैं। सीडब्ल्यूसी को कांग्रेस पार्टी के संविधान के मुताबिक लोकतांत्रिक बनाना होगा। आप नामित सदस्यों से यह सवाल उठाने की उम्मीद नहीं कर सकते कि आखिर कांग्रेस पार्टी चुनाव दर चुनाव कमजोर क्यों होती जा रही है।

पार्टी की बेहतरी से जुड़े उपायों पर कांग्रेस नेता ने कहा, सबसे पहले तो हमें संवाद की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। हमें गठबंधन की जरूरत है और हमें जनता तक पहुंचने की भी आवश्यकता है। हम यह उम्मीद नहीं कर सकते कि जनता हमारे पास आएगी। हम उस तरह की ताकत नहीं रहे, जैसे कि कभी हुआ करते थे। हमें उन लोगों तक पहुंच बनानी होगी, जिन्हें राजनीतिक अनुभव है। लेकिन इस कवायद के लिए सबसे पहले विचार-विमर्श करना जरूरी है।

सिब्बल ने कहा, हमें कई स्तरों पर कई चीजें करनी हैं। संगठन के स्तर पर, मीडिया में पार्टी की राय रखने को लेकर, उन लोगों को आगे लाना-जिन्हें जनता सुनना चाहती है। साथ ही सतर्क नेतृत्व की जरूरत है, जो बेहद एहितयात के साथ अपनी बातों को जनता के सामने रखे। 

बिहार विधानसभा चुनाव के अलावा गुजरात और मध्य प्रदेश के उपचुनाव में कांग्रेस के निराशानजक प्रदर्शन पर सिब्बल ने कहा, ‘जिन राज्यों में सत्तापक्ष का विकल्प है, वहां भी जनता ने कांग्रेस के प्रति उस स्तर का विश्वास नहीं जताया, जितना होना चाहिए था। हमें स्वीकार करना होगा कि हम कमजोर हुए हैं।

बिहार चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी कलह एक बार फिर सामने आने लगी है। पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कपिल सिब्बल ने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। सिब्बल ने एक अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘बिहार चुनाव और उपचुनावों में हालिया प्रदर्शन पर कांग्रेस पार्टी (के शीर्ष नेतृत्व) के विचार अब तक सामने नहीं आए हैं। शायद उन्हें लगता हो कि सब ठीक है और इसे सामान्य घटना ही माना जाना चाहिए।’ 

चुनावों में हार पर कांग्रेस लीडरशिप के रवैये पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए सिब्बल ने कहा कि मैं सिर्फ अपनी बात कर रहा हूं। मैंने लीडरशिप को कुछ कहते नहीं सुना। इसलिए मुझे नहीं पता। मुझ तक सिर्फ नेतृत्व के ईर्द-गीर्द के लोगों की आवाज पहुंचती है। मुझे सिर्फ इतना ही पता होता है।’

सिब्बल से पहले बिहार कांग्रेस के बड़े नेता तारीक अनवर भी पार्टी के अंदर मंथन होने की बात कह चुके हैं। बिहार चुनाव के परिणामों के बाद तारिक ने कहा कि पार्टी के अंदर मंथन होना चाहिए। उधर महागठबंधन की राजद और लेफ्ट पार्टियां पर भी लगातार कांग्रेस पर निशाना साध रही हैं।

सिब्बल ने तारीक अनवर के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि एक सहयोगी ने कांग्रेस के अंदर मंथन की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, ‘अगर छह सालों में कांग्रेस ने आत्ममंथन नहीं किया तो अब इसकी उम्मीद कैसे करें? हमें कांग्रेस की कमजोरियां पता है। हमें पता है सांगठनिक तौर पर क्या समस्या है। मुझे लगता है कि इसका समाधान भी सबको पता है। कांग्रेस पार्टी भी जानती है, लेकिन वो इन समाधान को अपनाने से कतराते हैं। अगर वो ऐसा करते रहेंगे को ग्राफ यूं ही गिरता रहेगा। यह कांग्रेस की दुर्दशा की स्थिति है जिससे हम सब चिंतित हैं।’

सिब्बल से जब पूछा गया कि जब कांग्रेस को समाधान पता है तो इसका शीर्ष नेतृत्व इसे अपनाने से क्यों हिचकती है? इस सवाल पर उन्होंने बिना लाग-लपेट कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सीडब्ल्यूसी के सदस्य नॉमिनेटेड हैं। सीडब्ल्यूसी को कांग्रेस पार्टी के संविधान के मुताबिक लोकतांत्रिक बनाना होगा। आप नामित सदस्यों से यह सवाल उठाने की उम्मीद नहीं कर सकते कि आखिर कांग्रेस पार्टी चुनाव दर चुनाव कमजोर क्यों होती जा रही है।


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पार्टी की बेहतरी के उपाय



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