Consumer News In Hindi : Uber launches new service, will now be able to book cars by the hour | उबर ने शुरू की नई ‘आवरली रेंटल्‍स’ सर्विस, अब घंटों के हिसाब से बुक कर सकेंगे कार


  • कंपनी ने ‘Hourly Rentals’ नाम की सर्विस को शुरू किया है
  • यह ऑन-डिमांड सर्विस 24 घंटे सातों दिन उपलब्‍ध रहेगी

दैनिक भास्कर

Jun 09, 2020, 10:41 AM IST

बेंगलुरु. उबर अपने ग्राहकों के लिए खास सुविधा लेकर आया है। इसके तहत वे अब कार घंटों के हिसाब से बुक कर सकेंगे। सोमवार को कंपनी ने ‘आवरली रेंटल्‍स’ (Hourly Rentals) नाम की इस सर्विस को शुरू किया है। यह ऑन-डिमांड सर्विस 24 घंटे सातों दिन उपलब्‍ध रहेगी। इस सर्विस के तहत लोग एक शहर से दूसरे में भी आ-जा सकते हैं।

कितना देना होगा किराया?
इस सेवा की शुरुआत 189 रुपयए घंटे/ प्रति 10 किमी पैकेज से होगी। इसमें राइडर्स को कई अन्य पैकेज भी ऑफर किए जाएंगे। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से पैकेज चुन सकते हैं। इस सर्विस के तहत लोग अधिकतम 12 घंटे तक कार को बुक करा सकेंगे।

मिलेगी खुद की कार जैसी सुविधा
कंपनी ने बताया कि सफर करते हुए लोग जहां चाहेंगे, कार को रुकवा सकेंगे। इस दौरान ड्राइवर कार में ही रहेगा। बुकिंग के घंटों के दौरान वे कार को कहीं भी रोक और ले जा सकते हैं। कंपनी के अनुसार इसका मकसद ग्राहकों को अपनी कार जैसी सुविधा उपलब्‍ध कराना है।

इन शहरों में शुरू हुई सुविधा
यह सर्विस फिलहाल 17 शहरों में उपलब्‍ध है। इनमें दिल्‍ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्‍नई, जयपुर, पुणे, अहमदाबाद, भवनेश्‍वर, कोयंबटूर, लुधियाना, चंडीगढ़, कोच्‍च‍ि, लखनऊ, गुवाहाटी, कानपुर और भोपाल शामिल हैं।



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Maintenance Of Hygiene Standards Is Taken Care Of In The Manufacture Of Harvest Gold Bread – हार्वेस्ट गोल्ड ब्रेड के निर्माण में रखा जाता है स्वच्छता के मानकों का पूरा ध्यान


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27 साल पहले लोगों को स्वादिष्ट ब्रेड खिलाने के लिए भिवाड़ी के एक कमरे में शुरू किया गया हार्वेस्ट गोल्ड आज एक विश्वस्तरीय ब्रांड बन चुका है। दिल्ली एनसीआर में पांच फैक्ट्रियों के साथ, डिस्कवरी चैनल के “द ग्रेट इंडियन फैक्ट्री सीरीज” में भी हार्वेस्ट गोल्ड का कार्यालय दर्शन कराया जा चुका है। हार्वेस्ट गोल्ड अपने उत्पादों, जैसेकि, बन, पाव, कुल्चा, बर्गर बन, रोटी, रस्क आदि के द्वारा लाखों घरों तक पहुंच चुका है। आज के मुश्किल समय में भी लोगों को अच्छा उत्पाद उपलब्ध करानाअपनी जिम्मेदारी समझते हुए, हार्वेस्ट गोल्ड नित्य नए परिवर्तन कर रहा है।

वर्तमान समय में स्वच्छता व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आवश्यक हो गया है। विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव के लिए ये उपाय अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो रहे हैं। इसके द्वारा हम न सिर्फ अपनी सुरक्षा करते हैं बल्कि अन्य लोगों को भी इन बीमारियों से बचाते हैं। स्वच्छता व सोशल डिस्टेंसिंग ही इन बीमारियों के संक्रमण से बचने का सबसे कारगर हथियार है। कुछ ऐसा ही मानना है हार्वेस्ट गोल्ड का और इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने उत्पादन में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं।

इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हार्वेस्ट गोल्ड ने कोविड-19 संक्रमण से बचाव हेतु सारे नए मानकों को अपना कर अपनी स्वच्छता की परम्परा को आगे बढ़ाया है। हार्वेस्ट गोल्ड को हमेशा से उच्च गुणवत्ता के उत्पादों के लिए जाना गया है। इनकी क्वालिटी पॉलिसी में उत्पादन युनिट को स्वच्छ रखना अनिवार्य है। इस स्वच्छता को बरकरार रखने के लिए फैक्ट्री को सैनिटाइज़ कराना, सभी कर्मचारियों द्वारा हेड मास्क पहनना, अपने हाथों को हर थोड़ी देर में धोना व आईपीए हैंड सैनिटाइजर द्वारा उन्हें स्वच्छ रखना आवश्यक है। 

वर्तमान समय में जिन कर्मचारियों का उत्पादन युनिट में आना जरूरी है, उनके लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। सारे कर्मचारियों के लिए उत्पादन युनिट में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही उन्हें कोविड-19 से जुड़े भ्रम व तथ्यों के बारे में विशेषज्ञों के द्वारा सूचित भी किया गया है।

हार्वेस्ट गोल्ड के उत्पादन युनिट के हर प्रवेश द्वार पर सभी कर्मचारियों की थर्मल स्क्रीनिंग के द्वारा तापमान की जांच की जाती है। इसके अलावा डिलीवरी करने वाले ट्रकों को सैनिटाइज़ करना शुरू कर दिया है। साथ ही ट्रक चालकों की थर्मल स्क्रीनिंग जैसे कई महत्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं।

इनके द्वारा की गई नई पहल इस प्रकार है:

  • कोविड-19 के बारे में अपने सभी कर्मचारियों को सही जानकारी उपलब्ध कराना।
  • उत्पादन युनिट व बाहर, हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना।
  • उत्पादन युनिट व डिलीवरी वाले ट्रक में स्वच्छता बरकरार रखना।
  • महत्वपूर्ण वस्तुएं जैसे कच्चे माल लाने वाले ट्रक, ब्रेड रखने वाले क्रेट व कार्टन, आदि को सैनेटाइज़ करना।
  • कर्मचारियों की बसों को सैनेटाइज़ करना।
  • नियमित रूप से डॉक्टर द्वारा प्रत्येक कर्मचारियों की जांच कराना।

उत्पादन युनिट के साथ-साथ हार्वेस्ट गोल्ड की सेल्स टीम ने भी मुश्किल दौर में अपना योगदान दिया है। खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिलीवरी करना। लॉकडाउन का समय वरिष्ठ नागरिकों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा है। इस संकट की घड़ी में हार्वेस्ट गोल्ड ने अपने उत्पादों को वरिष्ठ नागरिकों के घर तक पहुंचा रहा है। जिसका लाभ ढेरों बुजुर्गों को हुआ है।

हार्वेस्ट गोल्ड समाज के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभाता है। अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिल्टी (सीएसआर) के तहत कंपनी ने ‘प्रोजेक्ट एंपावर’ नाम की एक नई पहल की शुरूआत की है। इसके अंतर्गत हार्वेस्ट गोल्ड रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को मुफ्त में हाथ गाड़ी देती है, जिसके द्वारा वो सम्मानपूर्वक अपना जीवन यापन कर सकते हैं। हाथ गाड़ी के साथ साथ उन्हें इसे चलाने की ट्रेनिंग, आरडब्ल्यूए की अनुमति व अन्य सहायता भी प्रदान की गई है। इन हाथ गाड़ियों के द्वारा आम लोगों को ब्रेड, मक्खन, अण्डे आदि रोजमर्रा की चीजें आसानी से उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तक हार्वेस्ट गोल्ड ने 260 से ज्यादा हाथ गाड़ियां उपलब्ध कराई हैं। एक हाथ गाड़ी की सहायता से महीने में 10 से 15 हजार रुपए कमाए जा सकते हैं। 

कोविड-19 के समय में अपने इन महत्वपूर्ण परिवर्तनों द्वारा हार्वेस्ट गोल्ड ब्रेड ने अपनी परम्परा को बनाए रखा है और स्वच्छता मानको पर खरा उतरा है। हार्वेस्ट गोल्ड का प्रमुख उद्देश्य अपने कर्मचारियों व अपने  उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना है और वह अपने प्रयासों द्वारा सफल भी हो रहे हैं।

Advertorial

सार

  • सालों से सुरक्षित व स्वच्छ ब्रेड का उत्पादन करता है हार्वेस्ट गोल्ड

विस्तार

27 साल पहले लोगों को स्वादिष्ट ब्रेड खिलाने के लिए भिवाड़ी के एक कमरे में शुरू किया गया हार्वेस्ट गोल्ड आज एक विश्वस्तरीय ब्रांड बन चुका है। दिल्ली एनसीआर में पांच फैक्ट्रियों के साथ, डिस्कवरी चैनल के “द ग्रेट इंडियन फैक्ट्री सीरीज” में भी हार्वेस्ट गोल्ड का कार्यालय दर्शन कराया जा चुका है। हार्वेस्ट गोल्ड अपने उत्पादों, जैसेकि, बन, पाव, कुल्चा, बर्गर बन, रोटी, रस्क आदि के द्वारा लाखों घरों तक पहुंच चुका है। आज के मुश्किल समय में भी लोगों को अच्छा उत्पाद उपलब्ध करानाअपनी जिम्मेदारी समझते हुए, हार्वेस्ट गोल्ड नित्य नए परिवर्तन कर रहा है।

वर्तमान समय में स्वच्छता व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आवश्यक हो गया है। विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव के लिए ये उपाय अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो रहे हैं। इसके द्वारा हम न सिर्फ अपनी सुरक्षा करते हैं बल्कि अन्य लोगों को भी इन बीमारियों से बचाते हैं। स्वच्छता व सोशल डिस्टेंसिंग ही इन बीमारियों के संक्रमण से बचने का सबसे कारगर हथियार है। कुछ ऐसा ही मानना है हार्वेस्ट गोल्ड का और इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने उत्पादन में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं।



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World Bank Predicts Worst Recession Since World War II, Global Economy To Shrink By 5.2%


The World Bank said the world is facing an unprecedented health and economic crisis that has spread with astonishing speed and will result in the largest shock for the global economy.


New Delhi: The global economy will contract the most since World War II this year and emerging nations’ output will shrink for the first time in at least six decades due to the Covid-19 pandemic, reducing incomes and sending millions of people into poverty, the World Bank said on Monday. Also Read| Besides New Zealand, Check Out List Of Countries That Effectively Eliminated Covid-19 Outbreak

World Bank’s ‘Global Economic Prospects Report’ said that global economic activity will shrink by 5.2% this year, the deepest recession since a 13.8% global contraction in 1945-46 at the end of World War II.

The per-capita output will contract in more than 90 percent of countries, the biggest share since 1870. The economy will rebound in 2021, growing 4.2 percent, it said.

“The speed and depth with which it has struck, suggests the possibility of a sluggish recovery that may require policymakers to consider additional interventions,” he said.

For many emerging markets and developing countries, however, effective financial support and mitigation measures are particularly hard to achieve because a substantial share of employment is in informal sectors, the president of the Washington-based multilateral lender said.

Reflecting this downward pressure on incomes, World Bank economists said they expected the number of people in extreme poverty could grow by between 70 million and 100 million this year.

World Bank economists cautioned that their forecast was based on an assumption that the worst of the coronavirus outbreak was coming to an end and economies would pick up fairly quickly once governments begin to reopen.

If there is a second wave of the virus that disrupts economic activity later this year, then growth this year will fall even farther and the rebound next year will be weaker, the World Bank analysts said.

With this, the World Bank has joined the long list of institutions expecting a negative GDP growth for India in 2020-21. Earlier on May 22, for the first time, the Reserve Bank of India (RBI) Governor, Shaktikanta Das had said, “Overall the GDP growth in 2020-21 is estimated to remain in negative territory.”

Also Watch| War of words between Rahul Gandhi and Rajnath Singh



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The Chinese company made 20 million kilometers of electric car batteries; Tesla, BMW and Toyota EVs will be used | चीन की कंपनी ने बनाई 20 लाख किलोमीटर चलने वाली इलेक्ट्रिक कार बैटरी; टेस्ला, बीएमडब्ल्यू और टोयोटा के ईवी में होगा इस्तेमाल


  • अब तक अधिकतम 2.4 लाख किलोमीटर तक चलने वाली बैटरी ही मार्केट में उपलब्ध थी
  • नई बैटरी की लाइफ 16 साल, मौजूदा बैटरियों के मुकाबले कीमत 10 फीसदी ज्यादा

दैनिक भास्कर

Jun 09, 2020, 05:40 AM IST

बीजिंग. टेस्ला और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक कार बैटरी बनाने वाली कंपनी एम्पेरेक्स टेक्नोलॉजी ने दावा किया है कि उसने ऐसी बैटरी बनाई है, जिसकी लाइफ 16 साल और 20 लाख किलोमीटर है। कंपनी के चेयरमैन झेंग युक्वुन ने एक इंटरव्यू में यह दावा किया।

यह कंपनी अभी 2.4 लाख किलोमीटर लाइफ वाली बैटरी बनाती है। यह बैटरी बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी भी है। कंपनी के ग्राहकों में टेस्ला के अलावा बीएमडब्यू और टोयोटा मोटर भी शामिल हैं।
बैटरी लाइफ बढ़ाना इलेक्ट्रिक कार इंडस्ट्री के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहन रखने का खर्च काफी कम होगा

इससे एक बैटरी का इस्तेमाल दूसरी गाड़ी में भी हो पाएगा और इलेक्ट्रिक वाहन रखने का खर्च काफी कम होगा। कोरोना से पहले ईवी की बिक्री पूरी दुनिया में बढ़ रही थी। लेकिन, पिछले तीन महीनों से यह लगभग ठप है। ऐसे में बैटरी लाइफ बढ़ाने वाली खबर से इंडस्ट्री का मोमेंटम लौट सकता है।

ऑर्डर मिलने पर हम प्रोडक्शन के लिए तैयारः झेंग

झेंग ने कहा, ‘अगर कोई कंपनी इस बैटरी के लिए ऑर्डर देती है तो हम इसके प्रोडक्शन के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया है कि क्या किसी कंपनी ने इसके लिए अब तक संपर्क किया है या नहीं। झेंग ने कहा कि मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक वाहनों में जो बैटरी लगी होती है उनसे इस बैटरी की कीमत 10 फीसदी ज्यादा होगी।

टेस्ला ने ज्यादा चलने वाली बैटरी बनाने का दावा किया था

बैटरी की क्षमता में कमी आना और कुछ साल में इसे बदलने की जरूरत जैसी कुछ ऐसी बाधाएं हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों की तरक्की पर ब्रेक लगता रहा है। टेस्ला ने पिछले साल कहा था कि वह 10 लाख मील (16 लाख किलोमीटर)  तक चलने वाली बैटरी बनने की उम्मीद कर रहे हैं।

कंपनी के मुताबिक- 2021 से इसकी मांग में बढ़ोतरी होगी

वहीं, जनरल मोटर्स ने पिछले महीने कहा था कि वह इस लक्ष्य के काफी करीब है। इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री में जल्द तेजी लौटने की उम्मीद कर रही एम्पेरेक्स टेक्नोलॉजी ने हाल-फिलहाल बैटरी की टेक्नोलॉजी पर खर्च काफी बढ़ा दिया है। चेयरमैन झेंग ने कहा कि इस साल तो बिक्री कम होगी लेकिन, 2021 से डिमांड में इजाफा होगा। 

बैटरी का इस्तेमाल टेस्ला की मॉडल 3 सेडान कारों में होगा 

सीएटीएल ने फरवरी में टेस्ला के साथ दो साल का करार किया था। टेस्ला इससे पहले जापान की पैनासोनिक और दक्षिण कोरिया की एलजी केम के साथ काम कर रही थी। कंपनी की बैटरी टेस्ला के मॉडल 3 सेडान कारों में इस्तेमाल होंगे। यह कार शंघाई के पास बनी टेस्ला की नई फैक्टरी में तैयार होगी।



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Share Market Closing Today In Green Mark Again Sensex Nifty Ended Up – सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स 83 अंक और निफ्टी 25 अंक ऊपर हुआ बंद


बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 08 Jun 2020 03:46 PM IST

शेयर बाजार
– फोटो : अमर उजाला–रोहित झा

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सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को फिर शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ। आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 0.24 फीसदी की बढ़त के साथ 83.34 अंक ऊपर 34370.58 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 0.25 फीसदी उछलकर 25.30 अंक ऊपर 10167.45 के स्तर पर बंद हुआ। 

ऐसा रहा दिग्गज शेयरों का हाल
दिग्गज शेयरों की बात करें, तो आज टाटा मोटर्स, गेल, इंडसइंड बैंक, बजाज फाइनेंस, ओएनजीसी, एक्सिस बैंक, आईओसी, टाटा मोटर्स, टाइटन और बजाज फिन्सर्व के शेयर हरे निशान पर बंद हुए। वहीं जी लिमिटेड, श्री सीमेंट, एम एंड एम, इंफ्राटेल, सिप्ला, अल्ट्राटेक सीमेंट, नेस्ले इंडिया, ग्रासिम और एचडीएफसी बैंक के शेयर लाल निशान पर बंद हुए। 

सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर
सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर डालें, तो आज एफएमसीजी, ऑटो मेटल, पीएसयू बैंक, फार्मा और मीडिया लाल निशान पर बंद हुए। वहीं बैंक, प्राइवेट बैंक, रियल्टी और आईटी लाल निशान पर बंद हुए।

हरे निशान पर खुला था बाजार
सोमवार को शेयर बाजार में रौनक बरकरार रही और यह हरे निशान पर खुला था। सेंसेक्स 540.03 अंक (1.58 फीसदी) ऊपर 34827.27 के स्तर पर खुला था। वहीं निफ्टी 1.71 फीसदी यानी 173.60 अंकों की बढ़त के साथ 10315.17 के स्तर पर खुला था। 

पिछले कारोबारी दिन हरे निशान पर बंद हुआ था बाजार
पिछले कारोबारी दिन शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ था। सेंसेक्स 0.90 फीसदी की बढ़त के साथ 306.54 अंक ऊपर 34287.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 1.13 फीसदी उछलकर 113.05 अंक ऊपर 10142.15 के स्तर पर बंद हुआ था।

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को फिर शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ। आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 0.24 फीसदी की बढ़त के साथ 83.34 अंक ऊपर 34370.58 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 0.25 फीसदी उछलकर 25.30 अंक ऊपर 10167.45 के स्तर पर बंद हुआ। 

ऐसा रहा दिग्गज शेयरों का हाल

दिग्गज शेयरों की बात करें, तो आज टाटा मोटर्स, गेल, इंडसइंड बैंक, बजाज फाइनेंस, ओएनजीसी, एक्सिस बैंक, आईओसी, टाटा मोटर्स, टाइटन और बजाज फिन्सर्व के शेयर हरे निशान पर बंद हुए। वहीं जी लिमिटेड, श्री सीमेंट, एम एंड एम, इंफ्राटेल, सिप्ला, अल्ट्राटेक सीमेंट, नेस्ले इंडिया, ग्रासिम और एचडीएफसी बैंक के शेयर लाल निशान पर बंद हुए। 

सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर
सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर डालें, तो आज एफएमसीजी, ऑटो मेटल, पीएसयू बैंक, फार्मा और मीडिया लाल निशान पर बंद हुए। वहीं बैंक, प्राइवेट बैंक, रियल्टी और आईटी लाल निशान पर बंद हुए।

हरे निशान पर खुला था बाजार
सोमवार को शेयर बाजार में रौनक बरकरार रही और यह हरे निशान पर खुला था। सेंसेक्स 540.03 अंक (1.58 फीसदी) ऊपर 34827.27 के स्तर पर खुला था। वहीं निफ्टी 1.71 फीसदी यानी 173.60 अंकों की बढ़त के साथ 10315.17 के स्तर पर खुला था। 

पिछले कारोबारी दिन हरे निशान पर बंद हुआ था बाजार
पिछले कारोबारी दिन शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ था। सेंसेक्स 0.90 फीसदी की बढ़त के साथ 306.54 अंक ऊपर 34287.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 1.13 फीसदी उछलकर 113.05 अंक ऊपर 10142.15 के स्तर पर बंद हुआ था।



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Market News In Hindi : Corporate loans will be the most affected due to the epidemic in the current financial year, half of its total loans to banks | महामारी के कारण चालू वित्त वर्ष में कॉर्पोरेट लोन सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, बैंकों के  कुल लोन में इसका आधा हिस्सा


  • आर्थिक गतिविधियां कई दशकों के निचले स्तर पर जा सकती हैं
  • वित्त वर्ष 2020 में क्रेडिट ग्रोथ 6 प्रतिशत अनुमानित थी

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 10:44 PM IST

मुंबई. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने सोमवार को कहा कि बैंकों के कॉर्पोरेट लोन पोर्टफोलियो सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। यह कुल लोन का आधा हिस्सा है। कोरोनावायरस प्रकोप के कारण आर्थिक गतिविधियों में तेज गिरावट वित्त वर्ष 2021 में क्रेडिट ग्रोथ को 0-1 प्रतिशत के कई दशकों के निचले स्तर पर ले जा सकती है।

क्रेडिट ग्रोथ पर महामारी का प्रभाव 800 बीपीएस होगा

क्रिसिल के वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारामन ने कहा कि लॉकडाउन के कारण सभी क्षेत्रों में सीमित क्षमता के उपयोग के साथ ऑपरेशन्स में काफी अड़चन पैदा हुई है। यह महामारी से पहले 8-9 प्रतिशत क्रेडिट ग्रोथ के क्रिसिल के पूर्वानुमान के विपरीत है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने कहा कि दूसरे शब्दों में, क्रेडिट ग्रोथ पर महामारी का प्रभाव 800 बेसिस पॉइंट्स (बीपीएस) होगा। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2017 में बैंक की ग्रॉस क्रेडिट ग्रोथ 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2018 में 9 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2019 में 11 प्रतिशत, वित्त वर्ष 20 में 6 प्रतिशत (अनुमानित) थी।

कई फैक्टर्स हैं जो क्रेडिट ऑफटेक को धीमा करेंगे

उन्होंने कहा कि यह संकट अभूतपूर्व है और इसलिए इसके आर्थिक नतीजे सामने आएंगे। इसमें कम कैपेक्स मांग के साथ-साथ कम खर्च, औऱ कुछ ऐसे फैक्टर्स हैं जो क्रेडिट ऑफटेक को धीमा कर देंगे। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की शुरुआत के बाद से इंक्रीमेंटल बैंक क्रेडिट में कमी निरंतर जारी है। इसमें  27 मार्च से 22 मई के बीच 1.76 ट्रिलियन रुपए की गिरावट आई है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार नॉन फूड क्रेडिट 27 मार्च को 103.2 ट्रिलियन रुपए था। यह 22 मई तक 101.4 ट्रिलियन रुपए तक कम हो गया।

बैंकों का रिटेल लोन भी अब घट रहा है

क्रिसिल ने कहा कि रिटेल लेंडिंग जो कुल कर्ज का एक चौथाई है और जिसने अब तक मोर्चा संभाला हुआ था, वह भी नौकरी के नुकसान और वेतन में कटौती के बीच कम हो गया है। इसके अलावा, नए घरों और वाहनों की खरीद में देरी होने की उम्मीद है, जिससे फाइनेंसिंग की मांग प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि अधिकांश असेट्स क्लास के वितरण में इस वित्त वर्ष में काफी गिरावट देखने को मिलेगी। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि इससे रिटेल लोन में कुल वृद्धि भी इस वित्त वर्ष में तेजी से गिरकर सिंगल डिजिट में आने की उम्मीद है।

छोटे व्यापार का लोन बढ़ सकता है

क्रिसिल का कहना है कि छोटे व्यापार लोन इस वित्त वर्ष में 6-7 प्रतिशत की दर से अधिक बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। क्योंकि इन्हें सरकार की ओर से प्रोत्साहन पैकेज मिला है और खासकर 3 ट्रिलियन रुपए की आपातकालीन क्रेडिट लाइन की गारंटी भी मिली है। सरकारी बैंकों के लिए यह एक अच्छा अवसर है।

कृषि कर्ज में 3-4 प्रतिशत की वृद्धि होगी

क्रिसिल ने कहा कि कृषि कर्ज में 3-4 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जो सामान्य मानसून की उम्मीदों और महामारी से ग्रामीण भारत में तेजी से वसूली के कारण है। क्रिसिल रेटिंग्स ने कहा कि आरबीआई नीतिगत दरों को कम कर रहा है और सरकार ने कर्ज को प्रोत्साहित करने के लिए उपाय शुरू किए हैं। आरबीआई के पास सरप्लस लिक्विडिटी है और इसके हाई क्रेडिट के फैलाव का फायदा उधार लेने वालों को मिलता है।

नारायणन ने कहा, “क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ाने के लिए अनिवार्य है कि विशिष्ट क्षेत्रीय उपायों के माध्यम से उधार देने वालों का विश्वास बढ़ाया जाए जो उनकी चिंताओं को दूर कर रेट और फंडिंग का सही ट्रांसमिशन करे।



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Sbi Report Says Prolonged Growth Slowdown Likely To Hit External Sector Of India – विदेश व्यापार के मोर्चे पर भारत को हो सकता है नुकसान: Sbi रिपोर्ट


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देश की आर्थिक वृद्धि में लंबे समय तक सुस्ती छाए रहने का भारत के विदेश व्यापार क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वर्तमान में यह बाहरी क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के नरम दाम के चलते संतोषजनक स्थिति में है। स्टेट बैंक की सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

एसबीआई शोध की इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक भारत चालू वित्त वर्ष की समाप्ति चालू खाते में अधिशेष की स्थिति के साथ कर सकता है। इसमें कहा गया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार नीचे बने रहते हैं और वर्ष के दौरान उनमें कोई उठापटक नहीं आती है तो भारत की स्थिति बाहरी मोर्चे पर बेहतर रह सकती है।

इसमें कहा गया है, ‘हमें वर्ष 2020- 21 के दौरान विदेश व्यापार के मोर्चे पर ध्यान रखना होगा क्योंकि आर्थिक वृद्धि में लंबे समय तक सुस्ती जारी रहने से विदेश व्यापार के मोर्चे पर गणित गड़बड़ा सकता है, खासतौर से रुपये की विनिमय दर पर असर पड़ सकता है।’

रिपोर्ट में इस बात पर गौर किया गया है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वर्ष 2016- 17 में 8.3 फीसदी से घटकर 2019- 20 में 4.2 फीसदी पर आ गई है। वहीं चालू वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था में पांच फीसदी तक कमी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे कुल मिलाकर आर्थिक वृद्धि दर में नौ फीसदी गिरावट का संकेत मिलता है। कोरोना वायरस के चलते वर्ष 2019- 20 के मुकाबले यह नौ फीसदी की बड़ी गिरावट होगी।

इसमें हमारी बाहरी मोर्चे पर वहनीय स्थिति बने रहना ही अच्छी बात है। जून 2019 में जीडीपी के मुकाबले कुल बाहरी ऋण 19.8 फीसदी के अनुपात पर बना रहा।

कोविड- 19 के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 18 मई तक प्रतिदिन एक लाख से कम परीक्षण हो रहे थे। लेकिन इसके बाद यह संख्या एक लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई। जून के पहले सात दिनों के दौरान भारत में औसतन 1.32 लाख कोविड- 19 परीक्षण किये गए। वहीं छह और सात जून को यह संख्या 1.40 लाख प्रतिदिन से ऊपर निकल गई। रिपोर्ट में कहा गया, ‘शायद यही वजह रही कि संक्रमण के नए मामले तेजी से बढ़ते दिखने लगे हैं।’

देश की आर्थिक वृद्धि में लंबे समय तक सुस्ती छाए रहने का भारत के विदेश व्यापार क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वर्तमान में यह बाहरी क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के नरम दाम के चलते संतोषजनक स्थिति में है। स्टेट बैंक की सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

एसबीआई शोध की इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक भारत चालू वित्त वर्ष की समाप्ति चालू खाते में अधिशेष की स्थिति के साथ कर सकता है। इसमें कहा गया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार नीचे बने रहते हैं और वर्ष के दौरान उनमें कोई उठापटक नहीं आती है तो भारत की स्थिति बाहरी मोर्चे पर बेहतर रह सकती है।

इसमें कहा गया है, ‘हमें वर्ष 2020- 21 के दौरान विदेश व्यापार के मोर्चे पर ध्यान रखना होगा क्योंकि आर्थिक वृद्धि में लंबे समय तक सुस्ती जारी रहने से विदेश व्यापार के मोर्चे पर गणित गड़बड़ा सकता है, खासतौर से रुपये की विनिमय दर पर असर पड़ सकता है।’

रिपोर्ट में इस बात पर गौर किया गया है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वर्ष 2016- 17 में 8.3 फीसदी से घटकर 2019- 20 में 4.2 फीसदी पर आ गई है। वहीं चालू वित्त वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था में पांच फीसदी तक कमी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इससे कुल मिलाकर आर्थिक वृद्धि दर में नौ फीसदी गिरावट का संकेत मिलता है। कोरोना वायरस के चलते वर्ष 2019- 20 के मुकाबले यह नौ फीसदी की बड़ी गिरावट होगी।

इसमें हमारी बाहरी मोर्चे पर वहनीय स्थिति बने रहना ही अच्छी बात है। जून 2019 में जीडीपी के मुकाबले कुल बाहरी ऋण 19.8 फीसदी के अनुपात पर बना रहा।

कोविड- 19 के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 18 मई तक प्रतिदिन एक लाख से कम परीक्षण हो रहे थे। लेकिन इसके बाद यह संख्या एक लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई। जून के पहले सात दिनों के दौरान भारत में औसतन 1.32 लाख कोविड- 19 परीक्षण किये गए। वहीं छह और सात जून को यह संख्या 1.40 लाख प्रतिदिन से ऊपर निकल गई। रिपोर्ट में कहा गया, ‘शायद यही वजह रही कि संक्रमण के नए मामले तेजी से बढ़ते दिखने लगे हैं।’



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Consumer News In Hindi : Covid-19: Mother Dairy launches haldi milk to boost immunity | मदर डेयरी ने इम्युनिटी पावर बढ़ाने के लिए लांच किया ‘हल्दी दूध’, 25 रूपए में सभी बूथ पर उपलब्ध होगा यह प्रोडक्ट


  • कोरोनावायरस महामारी के बीच इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने सभी को हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दी है
  • यह कंपनी द्वारा पेश किए जाने वाले रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पादों की कैटेगरी में पहला उत्पाद है

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 11:40 PM IST

नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी के बीच रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के इरादे से प्रमुख दूध कंपनी मदर डेयरी ने सोमवार को बटरस्कॉच स्वाद में हल्दी मिल्क बाजार में पेश किया। कोरोनावायरस महामारी के बीच इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने सभी को हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दी है। इसी के अनुरूप मदर डेयरी ने अपने नए प्रोडक्ट- हल्दी मिल्क को बाजार में उतारा है।

ठंडे और गर्म दोनों तरह का होगा यह प्रोडक्ट

मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक संग्राम चौधरी का कहना है कि नया हल्दी मिल्क मदर डेयरी के सभी बूथ और चैनल भागीदारों की दुकानों पर ग्लास बोतल पैकिंग में 25 रूपए की किफायती कीमत पर उपलब्ध है। इस पेय को ठंडा या गर्म, दोनों तरह से पीया जा सकता है। यह कंपनी द्वारा पेश किए जाने वाले रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पादों की कैटेगरी में पहला उत्पाद है।

‘रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है’

हल्दी मिल्क की पेशकश के मौके पर मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक संग्राम चौधरी ने कहा, ‘कोरोनावायरस को देखते हुए लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना’ बेहद जरूरी हो गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए दूध एवं दूध उत्पादों से जुड़ी तथा एनडीडीबी की सहयोगी कंपनी मदर डेयरी ने आज बटरस्कॉच स्वाद में हल्दी दूध की पेशकश की है। हल्दी के गुणों से भरपूर, इसकी हर बोतल दूध में एक चम्मच हल्दी के फायदे देती है।”

हल्दी दूध को इम्युनिटी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है

उन्होंने कहा, ‘हल्दी और दूध का काढ़ा जिसे टरमेरिक लाटे कहा जाता है, को आज दुनिया भर में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुराने दिनों में हल्दी का इस्तेमाल ‘बीमारियों के इलाज’ के लिए किया जाता था। हल्दी के गुणों का उल्लेख हज़ारों साल पुराने भारतीय आयुर्वेदिक विज्ञान में है। माना जाता है कि हल्दी शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत को मजबूत बनाती है तथा आमतौर पर होने वाले संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती है।’

शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत को बढ़ाता है

कोरोनावायरस महामारी के बीच रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयूष मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों एवं सुझावों के मद्देनज़र मदर डेयरी ने अपने नए उत्पाद- हल्दी दूध तैयार किया है। हल्दी में एक फ्लेवोनाइड करक्युमिन होता है, जो इम्युनिटी यानि शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत को बढ़ाता है और बीमारी से जल्दी ठीक होने में मदद करता है।



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Coronavirus Hit On British Petroleum Company, Will Lay Off 10,000 Jobs – ब्रिटिश पेट्रोलियम कंपनी पर कोरोना की मार, 10 हजार कर्मचारियों की करेगी छंटनी


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कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। जिसके चलते करोड़ो लोगों की नौकरियां छिन रही हैं। इस बीच यूके की तेल कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम ने 10 हजार कर्मचारियों को निकालने का ऐलान किया है। बता दें कि मौजूदा समय में कंपनी के पास कुल कर्मचारियों की संख्या 70 हजार है। इस हिसाब से कंपनी लगभग 15 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है।

कंपनी के सीईओ बर्नार्ड लूनी ने अपने 70 हजार कर्मचारियों को ईमेल लिखकर बताया कि बीते दिनों तेल की मांग में भारी गिरावट होने के कारण अब इस घाटे से उबरना जरूरी है और इसी वजह हम कंपनी के 10,000 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रहे हैं।  

जानकारी के अनुसार जिन लोगों को कंपनी से बाहर किया जाएगा, उसमे अधिकतर वरिष्ठ अधिकारी होंगे, कम सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। लूनी ने कहा है कि कंपनी अपने खर्चों में आगे भी कमी कर सकती है। वहीं 2021 में कंपनी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सैलरी में बढ़ोतरी नहीं दे रही है, कंपनी का कहना है कि इस साल सैलरी बोनस नहीं मिलेगा।

 उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है क्योंकि सरकार लॉकडाउन में छूट देते हुए व्यवसायों को धीरे-धीरे फिर से खोलने की अनुमति दे रही है।

कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। जिसके चलते करोड़ो लोगों की नौकरियां छिन रही हैं। इस बीच यूके की तेल कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम ने 10 हजार कर्मचारियों को निकालने का ऐलान किया है। बता दें कि मौजूदा समय में कंपनी के पास कुल कर्मचारियों की संख्या 70 हजार है। इस हिसाब से कंपनी लगभग 15 फीसदी कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है।

कंपनी के सीईओ बर्नार्ड लूनी ने अपने 70 हजार कर्मचारियों को ईमेल लिखकर बताया कि बीते दिनों तेल की मांग में भारी गिरावट होने के कारण अब इस घाटे से उबरना जरूरी है और इसी वजह हम कंपनी के 10,000 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रहे हैं।  

जानकारी के अनुसार जिन लोगों को कंपनी से बाहर किया जाएगा, उसमे अधिकतर वरिष्ठ अधिकारी होंगे, कम सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। लूनी ने कहा है कि कंपनी अपने खर्चों में आगे भी कमी कर सकती है। वहीं 2021 में कंपनी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सैलरी में बढ़ोतरी नहीं दे रही है, कंपनी का कहना है कि इस साल सैलरी बोनस नहीं मिलेगा।

 उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है क्योंकि सरकार लॉकडाउन में छूट देते हुए व्यवसायों को धीरे-धीरे फिर से खोलने की अनुमति दे रही है।



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Market News In Hindi : Reliance Jio’s deal makes silver worth of investors; Investors’ assets increased by Rs 2.60 lakh crore from eight deals | रिलायंस जियो की डील से निवेशकों की हुई चांदी, आठ सौदों से 2.60 लाख करोड़ रुपए बढ़ी इनवेस्टर्स की संपत्ति


  • दो महीने में रिलायंस के शेयरों ने दिया 85 प्रतिशत का रिटर्न
  • इंट्रा डे में सोमवार को 1,624 रुपए पर पहुंचा आरआईएल का शेयर

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 07:25 PM IST

मुंबई. इस समय देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के लिए सब कुछ बल्ले-बल्ले है। दो महीने में कंपनी के शेयरों ने निवेशकों को 85 प्रतिशत का लाभ दिया है। जियो में 8 कंपनियों के निवेश के बाद आरआईएल के निवेशकों की संपत्ति में करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है। सोमवार को कंपनी के शेयर कारोबार के दौरान 1,624 रुपए के उच्च स्तर तक चले गए थे।

मार्च में आरआईएल के स्टॉक में हुई थी भारी बिक्री

आंकड़े बताते हैं कि मार्च में आरआईएल के स्टॉक में अच्छी खासी बिक्री हुई थी। इसके बाद यह स्टॉक टूटकर 867 रुपए के निचले स्तर तक आ गया था। हालांकि अप्रैल आते ही इस स्टॉक में खरीदारी दिखी और यह इस समय 1,570 रुपए पर कारोबार कर रहा है। यानी दो महीनों में इस शेयर ने 85 प्रतिशत का लाभ दिया। इस शेयर ने तब ऊपर की ओर यात्रा शुरू की जब जियो में डील शुरू हुई।

22 अप्रैल को जियो की हिस्सेदारी बिक्री की हुई थी पहली डील

जियो की पहली डील फेसबुक के साथ 22 अप्रैल को हुई थी। उसके बाद अब तक इसमें 8 कंपनियों ने शेयर खरीदा है। सोमवार को इसका शेयर हालांकि 1,624 रुपए को छू लिया, पर बाद में यह कुछ गिरावट के साथ 1,570 रुपए पर आ गया। यह तेजी इसलिए दिखी क्योंकि रविवार को इसमें अबूधाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी ने 5,683 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की। इसके बाद सोमवार को स्टॉक 2.74 प्रतिशत बढ़ गया। इससे इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 10.98 लाख करोड़ रुपए हो गया।

अब तक 97,000 करोड़ रुपए मिला जियो को 

बता दें कि 8 कंपनियों ने जियो प्लेटफॉर्म में अब तक 97,800 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जियो में 21.06 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी है। विश्लेषकों का अनुमान है कि यह शेयर 2,000 रुपए तक जा सकता है। इसका कारण यह है कि कंपनी कर्जमुक्त होने जा रही है और जियो एक नई आरआईएल की राह पर चल पड़ी है। आरआईएल और जियो पर 1.61 लाख करोड़ रुपए का कुल कर्ज है। इसे वह चुकाने के लिए अब करीब पहुंच गई है।

अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में सबसे बेहतर रिटर्न दिया आरआईएल ने

23 मार्च के निचले स्तर से रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़नेवाला सबसे बड़ा स्टॉक अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जीरो डेट वाली अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में पहली कंपनी होगी। आंकड़े बताते हैं कि जियो प्लेटफॉर्म की पहली डील अप्रैल से लेकर अब तक रिलायंस का मार्केट कैपिटलाइजेशन 2,69,311 करोड़ रुपए बढ़ा है। हालांकि मार्च के निचले स्तर से देखें तो यह इस समय दोगुना बढ़ा है। 23 मार्च को कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 5,05,969 करोड़ रुपए था।

1.10 लाख करोड़ रुपए हो गया है कर्ज चुकाने के लिए कंपनी के पास

विश्लेषकों के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की जो सोच है, वह एक अदभुत सोच है। किसी कंपनी को जीरो डेट पर लाना एक ऐतिहासिक कदम है। कंपनी इसे मार्च के लक्ष्य से पहले ही हासिल कर लेगी। कंपनी को 1.10 लाख करोड़ रुपए जियो में हिस्सेदारी बेचने से मिला है जबकि 13,000 करोड़ रुपए राइट्स इश्यू से मिला है। साथ ही इसका अप्रैल से दिसंबर तिमाही का करीबन 53,000 करोड़ रुपए का कैश भी जनरेट होगा। इससे कुल मिलाकर कंपनी 1.61 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि तय समय से पहले जुटा लेगी।

मेगा राइट्स इश्यू से जुटाया 53,124 करोड़ रुपए

आरआईएल की पोटेंशियल न केवल भारत में है, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी है। यह कंपनी किसी भी वैश्विक बाजार के मार्केट में लिस्ट हो सकती है और इसका पॉजिटिव असर कंपनी पर दिख सकता है। हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इसी दौरान मेगा राइट्स इश्यू से 53,124 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि जुटाई है। यह इश्यू 1.59 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

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Share Market Opening Today Sensex Up By 540 Points Nifty Above 10300 – बाजार में रौनक बरकरार, 540 अंक ऊपर खुला सेंसेक्स, निफ्टी 10300 के पार


सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को शेयर बाजार में रौनक बरकरार रही और यह हरे निशान पर खुला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 540.03 अंक (1.58 फीसदी) ऊपर 34827.27 के स्तर पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 1.71 फीसदी यानी 173.60 अंकों की बढ़त के साथ 10315.17 के स्तर पर खुला। 

विश्वभर के बाजारों में रही बढ़त
शुक्रवार को विश्वभर के सभी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। अमेरिका का बाजार डाउ जोंस 3.15 फीसदी की बढ़त के साथ 829.16 अंक ऊपर 27,111.00 पर बंद हुआ था। नैस्डैक 2.06 फीसदी बढ़त के साथ 198.27 अंक ऊपर 9,814.08 पर बंद हुआ था। एसएंडपी 2.62 फीसदी बढ़त के साथ 81.58 अंक ऊपर 3,193.93 पर हुआ था। चीन का शंघाई कम्पोसिट 0.38 बढ़त के साथ 11.14 अंक ऊपर 2,941.94 पर बंद हुआ था। साथ ही इटली, जर्मनी और फ्रांस के बाजार में भी बढ़त रही।

दिग्गज शेयरों का हाल
दिग्गज शेयरों की बात करें, तो आज टाटा मोटर्स, एसबीआई, जी लिमिटेड, इंडसइंड बैंक, एक्सिस बंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड और सिप्ला के शेयर हरे निशान पर खुले। वहीं भारती एयरटेल, श्री सीमेंट, ब्रिटानिया, नेस्ले इंडिया, रिलायंस, एचसीएल टेक, एनटीपीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर लाल निशान पर खुले। 

सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर
सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर डालें, तो आज सभी सेक्टर्स हरे निशान पर खुले। इनमें मीडिया, ऑटो, प्राइवेट बैंक, रियल्टी, फार्मा, बैंक, मेटल, आईटी, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक शामिल हैं। 

प्री ओपन के दौरान यह था शेयर मार्केट का हाल
प्री ओपन के दौरान शेयर मार्केट बढ़त पर था। सुबह 9.10 बजे सेंसेक्स 553.93 अंक यानी 1.62 फीसदी की बढ़त के बाद 34841.17 के स्तर पर था। वहीं निफ्टी 184.60 अंक यानी 1.82 फीसदी ऊपर 10326.75 के स्तर पर था।

पिछले कारोबारी दिन हरे निशान पर बंद हुआ था बाजार
पिछले कारोबारी दिन शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ था। सेंसेक्स 0.90 फीसदी की बढ़त के साथ 306.54 अंक ऊपर 34287.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 1.13 फीसदी उछलकर 113.05 अंक ऊपर 10142.15 के स्तर पर बंद हुआ था।

शुक्रवार को हरे निशान पर खुला था बाजार 
शुक्रवार को भी शेयर बाजार हरे निशान पर खुला था। सुबह 9.16 बजे सेंसेक्स 218.73 अंक (0.64 फीसदी) ऊपर 34199.43 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 0.88 फीसदी यानी 88.20 अंकों की बढ़त के साथ 10117.30 के स्तर पर था। 



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Economy News In Hindi : Mukesh Ambani is getting free from the debt of 1.60 lakh crores, Anil Ambani is going bankrupt from debt and seeking the path of spirituality | मुकेश अंबानी 22 अरब डॉलर के कर्ज से मुक्त हो रहे हैं, अनिल अंबानी कर्ज से दिवालिया होकर अध्यात्म का रास्ता तलाश रहे हैं


  • दुनिया में बड़े बिजनेस घराने में डेढ़ दशक बाद दो भाइयों की सबसे बड़ी दुश्मनी का फाइनल पिक्चर
  • अनिल अंबानी 4 जून को 61 वें साल में प्रवेश कर गए हैं। मुकेश अंबानी आज कर्जमुक्त के लिए 22 अरब डॉलर जुटा लिए हैं

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 10:53 PM IST

मुंबई. एशिया के सबसे अमीर बिजनेस मैन मुकेश अंबानी अपनी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ऊपर 22 अरब डॉलर के कर्ज को चुकाने का अंतिम चरण पूरा कर चुके हैं। दूसरी ओर उनके छोटे भाई और रिलायंस एडीएजी के चेयरमैन अनिल अंबानी कर्ज के भारी-भरकम बोझ के तले दबने से दिवालिया होने की कगार पर हैं। वे अब जिंदगी को अध्यात्म के रास्ते पर ले जाने की सोच रहे हैं। अनिल अंबानी अपनी तमाम कंपनियों को बेच चुके हैं। बावजूद इसके उन पर देनदारी कम नहीं हो रही है।

हालात यह है कि उनको कर्ज से निपटने के लिए कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। दोनों भाइयों की दुश्मनी का अब यह फाइनल सीन है। यह इतिहास के पन्नों में दर्ज होनेवाली सीन है।

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बाएं से धीरूभाई अंबानी, अनिल अंबानी, मुकेश अंबानी और कोकिलाबेन अंबानी 

अनिल अंबानी ने कहा, मेरी नेटवर्थ जीरो है

अनिल अंबानी गुरुवार को 61 साल के हो गए। साल 2008 में वे 42 अरब डॉलर के साथ विश्व के बिलिनेयर क्लब का हिस्सा थे। 2018 में मुकेश अंबानी का नेटवर्थ 43 अरब डॉलर था जो इस समय 56.5 अरब डॉलर है।  2019 सितंबर तक 12.40 अरब डॉलर का कर्ज अनिल अंबानी पर था। अनिल अंबानी ने पिछले हफ्ते में यूके कोर्ट में कहा कि इस समय उनकी नेटवर्थ जीरो है।

बुधवार को राइट्स इश्यू सफल, शुक्रवार को अंतिम पूंजी जुटाई

तमाम प्राइवेट इक्विटी और अन्य रास्तों से रिलायंस इंडस्ट्रीज के कर्ज का निपटारा दिसंबर तक हो जाएगा। बुधवार को राइट्स इश्यू से 53,125 करोड़ रुपए के साथ कर्ज चुकाने की राशि जुटाने के बाद शु्क्रवार को अंतिम डील हुई। दुबई की मुबाडला ने जियो में 9,093 करोड़ रुपए में 1.85 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है। ये बात सच है कि कोरोना वायरस महामारी में बाकी बड़े बड़े अमीरों की कंपनियों के जैसे रिलायंस के स्टॉक को भी घाटा हुआ है। खासकर ऑयल की कीमतों में कमी होने की वजह से। परंतु यह भी सच है कि पिछले कुछ दिनों में इसके स्टॉक को हुए नुकसान की लगभग रिकवरी हो चुकी है। इसकी वजह जियो की फेसबुक को 5.7 अरब डॉलर के एवज में बेची गई हिस्सेदारी है।

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धीरूभाई अंबानी, मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी

बदलते समय के अनुसार खुद भी बदल गए हैं मुकेश अंबानी

अपनी किस्मत के भरोसे मुकेश अब सफलता की नई इबारत लिखने लगे हैं। पहले वो मीडिया और फोटोग्राफरों से हमेशा बचते थे। और कभी कभार ही इंटरव्यू देते थे। परंतु अब वो काफी बदल गए हैं। न सिर्फ मीडिया और खुद के इवेंट्स में धडल्ले से अपने बिजनेस को प्रमोट करते नजर आते हैं। यही नहीं, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम या दावोस जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी नियमित पैनलिस्ट के रूप में भाग लेते हैं। मुंबई की हाई सोसाइटी के बीच मुकेश ही नहीं, उनकी पत्नी नीता अंबानी भी काफी सक्रिय हो गई हैं। कोविड-19 के प्रकोप से पहले तक मुकेश अंबानी की 27 मंजिला आलीशान अंटीलिया में अक्सर कोई न कोई बड़े आयोजन होते रहते हैं।

शारीरिक रूप से स्वस्थ अनिल और धार्मिक हो रहे हैं

अनिल, इसके विपरीत, लगभग पूरी तरह से घिर गए हैं। फिटनेस के शौकीन अनिल शारीरिक रूप से बेहतर हालत में हैं। सुबह-सुबह 10 मील तक दौड़ जाते हैं। जो लोग उन्हें जानते है वह कहते हैं कि अनिल और अधिक धार्मिक हो गए हैं और अपनी मां के साथ हिंदू धार्मिक स्थलों पर मत्था टेक रहे हैं। दोस्तों को बताते हैं कि भौतिक सफलता, आध्यात्मिक उन्नति की तुलना में खोखला है।

कमबैक के लिए अभी भी 14 घंटे काम कर रहे हैं अनिल

अनिल अभी भी चीजों को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। और इसके लिए दिन में 14 घंटे काम कर रहे हैं ताकि कंपनियों को बचाया जा सके और अपनी शेष संपत्ति की रक्षा की जा सके। स्थिति की जानकारी रखने वाले व्यक्ति के मुताबिक अनिल को दिवालिया घोषित करने और नई शुरुआत करने की सलाह दी गई है। लेकिन अनिल ने इससे इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इससे कमबैक का अवसर हाथ से निकल जायेगा।

एक दर्जन से अधिक कर्जदार अनिल का पीछा कर रहे हैं

अनिल की कंपनियों में से एक, डिफेंस कांट्रेक्टर भी दिवालियापन की स्थिति में आ गया है। एक सितंबर को हुई शेयरधारक की बैठक में एक वकील ने कहा कि उसने अनिल के कारोबार में पैसे डालकर सब खो दिया। उसने यह भी कहा कि वह इसके खिलाफ एक लॉ-सूट फाइल करने की सोच रहा है। आजकल एक दर्जन से अधिक लोन देने वाले लोग अनिल का पीछा कर रहे हैं। उनमें से तीन राज्य नियंत्रित चीनी बैंकों का एक समूह है जिसने 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशंस को अपने नए नेटवर्क का निर्माण करने हेतु 925 मिलियन डॉलर उधार दिए थे। इन बैंकों ने हाल ही अनिल के खिलाफ लंदन में मुकदमा यह कहकर दावा है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ऋण की गारंटी दी थी।

कभी भी व्यक्तिगत गारंटी नहीं दी- अनिल अंबानी

फरवरी की सुनवाई में अनिल ने दलील दी कि उन्होंने कभी व्यक्तिगत गारंटी नहीं दी और उनके पास बैंकों को देने के लिए कुछ नहीं था। उन्होंने कहा कि उनकी वर्तमान व्यक्तिगत संपत्ति 90 लाख डॉलर है, जिसे 30 करोड़ डॉलर से अधिक की देनदारियों के खिलाफ निर्धारित किया गया है। जज डेविड वाक्समैन ने हालांकि संदेह जताया कि अनिल की वित्तीय स्थिति वाकई इतनी विकट है। वाक्समैन ने कहा, “एक निजी जेट, एक नौका और एक 11 कार वाली मोटर पूल को देखते हुए उन्हें नहीं लगता कि अनिल फ्रैंक हैं। इसके अलावा भी जज ने कहा कि मुकेश से अधिक सहायता की हमेशा से संभावना थी।

कोर्ट में पढ़े बयान में अनिल ने इस पर अपनी असहमति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि भाई से मिलने वाली सहायता दोहराने के काबिल नहीं होती। उन्होंने कहा, “मैं पुष्टि करता हूं कि मैंने जांच की है, लेकिन मैं बाहरी सौर्सेस से पैसा नहीं जुटा पा रहा हूं।

अलग होने के बाद अंबानी परिवार में सबसे बड़ा आयोजन

पिछले साल मार्च में मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी की श्लोका मेहता के साथ संपन्न हुई शादी इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा गई। यह एक ऐसी शादी, जिसे बड़े-बड़े पंडित हमेशा याद करते रहेंगे। शादी के रस्मों की शुरुआत स्विस एल्प में हुई, जिसमें देश-विदेश के चुनिंदा मेहमान अपने निजी विमान से सेंट मोर्टिज पहुंचे। उन्होंने इस शादी के जोड़े को अपना आशीर्वाद प्रदान कर इसे यादगार बना दिया। इसके बाद सभी मेहमान वापस मुंबई आए और तीन दिनों तक ग्रैंड रिसेप्शन चला। इसमें अंबानी परिवार से संबंधित देश भर के सभी शुभचिंतकों ने शिरकत की और वर वधू को आशीर्वाद दिया।

बाद में इस शानदार शादी की चर्चाएं अखबारों की सुर्खियां बनीं। रिसेप्शन के दौरान विशेष रूप से कारीगर द्वारा डिजाइन की गई मोर की मूर्ति लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। इन सबके अलावा कन्वेंशन सेंटर के बीचों बीच भगवान कृष्ण की विशालकाय मूर्ति मानो सभी को अपने वश में कर लिया था।

शादी में अरबों डॉलर का खर्च, पर मुकेश के लिए यह जेब खर्च जैसा

शादी इतनी महंगी थी कि इसका खर्च अरबों डॉलर में था। मुकेश अंबानी जैसे समृद्ध शख्सियत के लिए यह पॉकेट खर्च जैसा था। बता दें कि मुकेश अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन हैं, जो ऑयल रिफाइनरी, केमिकल प्लांट, सुपर मार्केट, और एशिया के सबसे बड़े मोबाइल नेटवर्क जियो को कंट्रोल करते हैं। ब्लूमबर्ग की अरबपतियों के इंडेक्स के अनुसार मुकेश अंबानी की कुल व्यक्तिगत संपत्ति 53 अरब डॉलर है, जो उन्हें एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति होने का गौरव प्रदान करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद शायद उन्हें भारत का सबसे पावरफुल नागरिक होने का टैग भी लग जाता है।

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बाएं से मुकेश अंबानी, धीरूभाई अंबानी और अनिल अंबानी

विश्व में भाईयों की सबसे महंगी दुश्मनी में हुई मुकेश अंबानी की जीत

जैसे ही शादी की शुरुआत हुई, मुकेश के छोटे भाई अनिल अंबानी भी मेहमानों की आवभगत के लिए शादी समारोह में पधारे। पूरे आत्मविश्वास के साथ छोटे भाई ने पारिवारिक कर्तव्यों को पूरा किया। इससे उपस्थित मेहमान भी संतुष्ट नजर आए। अनिल अंबानी ने आकाश को कुछ टिप्स भी दिए कि शादी और अन्य समारोह के दौरान उन्हें कैसे पेश आना है। यह शादी उस समय हो रही थी, जब दस दिन बाद अनिल अंबानी को अदालत में मुकदमा हारने के बाद 80 मिलियन डॉलर का कर्ज चुकाने का आदेश दिया गया था। यह भी तय था कि अगर वह तय समय पर ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उन्हें जेल भी हो सकती है।

अंबानी परिवार की साख पर आंच न आए, कोकिलाबेन ने की पहल

यह किसी भी भारतीय बिजनेस समुदाय के खिलाफ सबसे बड़ा जुर्माना माना जा रहा था। इसी दौरान काफी हफ्तों तक मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी की आपस में चर्चा चल रही थी कि इससे कैसे निपटा जाए। अंत में दोनों की माता कोकिलाबेन ने दखल दिया और बड़े भाई से बोला कि इसका कोई ऐसा अंतिम हल निकाल लिया जाए जिससे दोनों भाइयों और अंबानी परिवार की साख पर कोई आंच न आए। परंतु मुकेश अपने कर्जदार भाई को जेल से बचाने के मूड में नहीं दिख रहे थे। क्योंकि इसके बदले में अनिल ने कोई कोलैटरल नहीं दी थी।

बिजनेस साम्राज्य को अलग कर व्यापारिक दुश्मन बने दोनों भाई

दोनों भाइयों के बीच में हुई अंतिम क्षण की बातचीत भारतीय बिजनेस की दुनिया के इतिहास में एक परिवार से बिखराव और उससे बचने के तौर पर याद किया जाएगा। अंबानी भाइयों ने अपने कैरियर की शुरुआत आपस में एक दूसरे का सहयोगी बनकर की थी। जिसे कभी अनिल अंबानी ने एक विचार और दो शरीर का नाम दिया था। लेकिन धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद दोनों भाइयों के बीच में दरार बढ़ती गई।

पहले तो इन दोनों ने अपने-अपने बिजनेस साम्राज्य को अलग कर लिया और बाद में एक दूसरे के व्यापारिक दुश्मन भी बन गए। तब से इन दोनों भाइयों के बीच दुश्मनी भारत की अर्थव्यवस्था के इतिहास में कभी न भूलनेवाला अध्याय बन चुका है।

नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद मुकेश बढ़ते गए

हिंदू राष्ट्रवाद के नेता के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में देश की बागडोर संभालने के बाद मुकेश अंबानी के फारच्यून में अचानक वृद्धि होने लगी। जबकि अन्य उद्योगपतियों जिसमें अनिल अंबानी भी शामिल थे, उनकी परिसंपत्तियों और व्यवसायों में गिरावट आने लगी। इसके बारे में जब अनिल अंबानी, मुकेश अंबानी या उनकी कंपनियों के प्रमुखों से कमेंट मांगा गया तो किसी ने इसका जवाब नहीं दिया।

बहरहाल अदालत की तारीख आते-आते तक दोनों भाइयों के बीच में कोई सुलह नहीं हो पाई थी। हालांकि अंबानी परिवार को नजदीक से जानने वाले लोग यही कहते रहे कि दोनों भाइयों के बीच बातचीत स्वच्छ वातावरण में हो रही है, परंतु उद्योग जगत के नजदीकी सूत्रों की माने तो ऐसा कुछ नहीं था। बाद में अनिल अंबानी को मुकेश अंबानी के समक्ष मदद मांगनी पड़ी।

धीरूभाई ने कंज्यूमर की नब्ज टटोलकर शुरू की कंपनी

अंबानी भाइयों की कहानी किसी परियों की अंगूठी की भांति प्रतीत होती है। गुजरात के किसी छोटे से कस्बे में गैस स्टेशन पर अटेंडेंट का काम करनेवाले धीरूभाई ने 1970 के दशक की शुरुआत में ही कंज्यूमर मार्केट की नब्ज को पकड़ लिया था। जब उन्होंने नायलॉन, पॉलीस्टर और दूसरे सिंथैटिक मटेरियल जो कि उस समय भारत में बहुत कम बनते थे, की आपूर्ति करनी शुरू कर दी। उन्होंने 1973 में बतौर एक ट्रेडिंग हाउस रिलायंस की स्थापना की और धीरे-धीरे इसके ऑपरेशन ने विस्तार किया। इसे एक फाइबर का मैन्युफैक्चरिंग हब बना दिया। इसके बाद वे ऑयल रिफाइनरी के क्षेत्र में आ गए और 80 का दशक समाप्त होते -होते यह कंपनी बाजार में छा चुकी थी। यह केमिकल का इकलौता मैन्युफैक्चर बन चुकी थी।

ब्यूरोक्रेट से रिश्ते साध कर धीरूभाई ने बढ़ाया कारोबार

बिजनेस वर्ल्ड में धीरूभाई या धीरजलाल को शुरुआत में सिर्फ एक फैक्टरी के ऑपरेटर के तौर पर जाना जाता था। 1990 के पहले तक भारत की कंपनियों में तथा कथित लाइसेंस राज का खौंफ छाया हुआ था। इसके अतिरिक्त इंपोर्ट में कोटा, परमिट की जरूरतें और कीमत नियंत्रण जैसे फैक्टर अर्थव्यवस्था को अपनी गिरफ्त में लेकर बैठे हुए थे। धीरूभाई में सबसे खास बात यह थी कि वह लोगों से हमेशा एक कदम आगे की सोचते थे।

रिलायंस में शुरुआती दिनों में काम कर चुके लोगों के अनुसार धीरूभाई ने दिल्ली के बाहर ऑफिस बिल्डिंग बनाई जिसमें उ्न्होंने रिटायर हो चुके ब्यूरोक्रेट को काम पर रखा। उन्होंने बड़े बड़े अधिकारियों के बच्चों को ट्रेस किया, ताकि उन्हें रिलायंस द्वारा फंड की गई स्कॉलरशिप देकर उन्हें विदेशों में पढ़ाई के लिए भेजा जा सके।

दिवाली में मिठाई और सोने की सिक्का की परंपरा

रिलायंस के एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि दिवाली के समय चुनिंदा मंत्रालयों के बाबुओं को मिठाई के डिब्बे और उसके साथ सोने और चांदी के सिक्के भेजने की प्रथा की शुरुआत तभी से हुई थी। इससे वे लोगों को ऑबलाइज कर यह जान लेते थे कि उनके वरिष्ठ बाबू किस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। या उनके मन में क्या चल रहा है। मुकेश अंबानी 1957 में और अनिल अंबानी 1959 में पैदा हुए थे। और उनकी परवरिश करने में धीरूभाई ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और बचपन से ही उनमें व्यापार की दुनिया में सफल रहने का बीजमंत्र बोया।

अनिल अंबानी ने बताया था कि हफ्ते के अंतिम दिनों में उनके पापा दोनों भाइयों को कहीं बाहर ले जा कर ऐसा काम करने को बोलते थे जिसे करने पर कुछ न कुछ इंसेंटिव मिलता रहता था।

जब पहला पारिवारिक समारोह मुकेश की शादी से हुआ

शुरुआत से ही किसी को भी शक नहीं था कि यही दोनों भाई आगे चलकर रिलायंस का फैमिली बिजनेस संभालेंगे। और यही हुआ भी। 25 साल की उम्र के आस पास ही दोनों भाइयों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं संभाल लीं। मुकेश को रिलायंस की फैसिलिटीज में मैनेजर की जिम्मेदारी दी गई। जबकि अनिल अंबानी को सरकारी अधिकारियों निवेशकों और प्रेस से डील करन का जिम्मा दिया गया। दोनों की भूमिकाएं उनके व्यक्तित्व के मुताबिक थीं। मुकेश हमेशा से बिना इन किए हुए शर्ट पहनते थे और उनकी शादी भी 27 साल की उम्र में उनके पिता द्वारा चुनी हुई पुत्रबहु से कर दी गई।

फैशनेबल थे अनिल, सादे थे मुकेश अंबानी

शुरुआत के दिनों में वे ज्यादातर शाम को घर पर पुराने हिंदी सिनेमा देखते थे। जबकि अनिल अंबानी बन ठन कर अच्छे खासे शूट में और अच्छी हेयर स्टाइल में रहते थे। जो कि किसी भी बंबई के भीड़ का आसानी से हिस्सा बन जाते थे। और साथ ही साथ उनकी दोस्ती बालीवुड के दिग्गजों से भी होने लगी। वे कभी-कभी अपने कॉरपोरेट जेट में लिफ्ट दे दिया करते थे। अनिल अंबानी ने जब 31 साल की उम्र मे अपनी शादी टीना से की तो उनके माता पिता ने सार्वजनिक रूप से इस शादी पर नाराजगी जता दी थी।

एक तरफ मुकेश अंबानी जहां सार्वजनिक कार्यक्रम में बहुत ही कम देखे जाते थे, वहीं दूसरी ओर अनिल अंबानी लगभग हर साल रिलायंस के हेडक्वार्टर में पत्रकारों के साथ जुटे रहते थे। या अपनी कंपनी के दशा और दिशा की चर्चा किसी चौराहे पर कोई चाट खाते हुए बातचीत करते हुए तय करते थे।

धीरूभाई के जीवित रहने तक दबा था मनमुटाव

2001 आते-आते रिलायंस सभी मायने में कॉर्पोरेट जगत की एक बड़ी हस्ती बन चुकी थी और इसका फैलाव फाइनेंशियल सर्विसेस, इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन और टेलीकम्युनिकेशन के साथ साथ ऑयल रिफाइनिंग के ऑपरेशन में इतना ज्यादा हो चुका था कि इसका सीधा असर नेशनल ट्रेड डेफिसिट पर पड़ने लगा। दोनों अंबानी बंधुओं के बीच तनानती या मनमुटाव की खबरें उनके पिता के जीवित रहने तक दबी रही। परंतु साल 2002 में 69 साल की उम्र में धीरूभाई की अचानक मौत ने आनेवाले दिनों की आहट दे दी थी। क्योंकि वे अपना उत्तराधिकारी किसे चुनेंगे, इस पर कोई फैसला नहीं किया था। लोगों को भी नहीं पता था कि धीरूभाई के दिल में क्या था।

जब मुकेश चेयरमैन और अनिल वाइस चेयरमैन बने

दोनों बंधुओं ने उम्र को मानक बनाया और इसके हिसाब से मुकेश रिलायंस का चेयरमैन और अनिल वाइस चेयरमैन बने। धीरे-धीरे इन दोनों में दरार बढ़ती गई। हर एक दूसरे को ऐसा लगा कि दोनों अपने अपने स्तर पर स्वतंत्र फैसले ले रहे हैं। मुकेश को सबसे ज्यादा गुस्सा तब आया था, जब अनिल अंबानी ने बिना उनसे सलाह मशविरा किए पावर जनरेशन प्रोजेक्ट की घोषणा कर दी। अनिल अंबनी को तब गुस्सा आया था जब मुकेश अंबानी बिना कुछ बताए रिलायंस के शेयरों में परिवार की हिस्सेदारी और उसके प्रबंधन में रीस्ट्रक्चरिंग कर दी। मुकेश अपने आप को एक निर्विवाद बॉश मानने लगे थे। जबकि अनिल खुद को किसी से कम नहीं समझते थे।

धीरूभाई की मौत के बाद सार्वजनिक हुआ विवाद

दोनों भाइयों में दरार धीरूभाई की मौत के दो साल बाद सार्वजनिक हुई जब रिलायंस के बोर्ड ने एक मोशंस पास किया। इसमें कहा गया था कि अनिल अंबानी अब सारा कामकाज चेयरमैन की अथॉरिटी के अंतर्गत करेंगे। अनिल से जुडे व्यवसायिक दोस्तों के अनुसार अनिल को यह बात अखर गई। उन्होंने इसे अपना अपमान समझा। इससे एक तरह का अंबानी परिवार में सिविल वार शुरू हो गया।

जब वित्तमंत्री को देना पड़ा दखल

एक बार तो अनिल अंबानी ने रिलायंस के फाइनेंशियल स्टेटमेंट पर यह कहकर दस्तखत करने से मना कर दिया कि इसमें सारे खुलासे आधे-अधूरे हैं। एक समय तो ऐसा आया कि भारत के वित्तमंत्री को यह अपील करनी पड़ी कि दोनों भाई आपस के मतभेद सुलझा लें। जब बात हद से गुजर गई तो परिवार की मुखिया कोकिलाबेन बीच बचाव को उतरी। 2005 में एक स्टेटमेंट जारी कर उन्होंने कहा कि दोनों भाइयों ने आपसी सहमति से पारिवारिक और व्यवसायिक दायित्वों की पूर्ति के लिए मामला सुलझा लिया है।

2007 में अनिल देश के तीसरे अमीर बिजनेस मैन बने

मुकेश को धीरे-धीरे वृद्धि कर रही रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल के बिजनेस का अधिकार मिल गया। जबकि अनिल को लंबी अवधि वाले फाइनेंशियल सर्विसेस पावर जनरेशन और टेलीकम्युनिकेशन का साम्राज्य मिला। यह भारत के कॉरपोरेट जगत का सबसे बड़ा बंटवारा था। फोर्ब्स इडिया की 2007 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अनिल का नेटवर्थ तीन गुना बढ़कर 45 बिलियन अरब डॉलर हो गया जिससे वे देश के तीसरे अमीर नागरिक बन गए। जबकि उसी समय उनके भाई मुकेश का नेटवर्थ 49 बिलियन डॉलर था। अपने हाथ में इतना पैसा आया देख अनिल ने फिल्म प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया, जिसमें उन्होंने स्टीवन स्पीलबबर्ग को सपोर्ट किया।

फिल्मी दुनिया से अनिल की दिक्कतें शुरू हुई

कभी-कभी अनिल अंबानी फिल्मों की स्क्रीन के लिए मुंबई के सभी संभ्रांत लोगों को अपने घर पर बुलाते थे। जबकि मुकेश इम सब मामलों से दूर का नाता रखते थे। यह सिलसिला यूं ही दस साल तक चलता रहा। पर बाद में अनिल के व्यवसाय में दिक्तकें आने लगी। पावर प्रोजेक्ट फेल होने लगे। उनको फिर से राष्ट्रीय स्तर पर मोबाइल नेटवर्क की स्थापना करनी पड़ी। जबकि इसी समय मुकेश अंबानी की कंपनी जो कि उस समय 40 बिलियन डॉलर कमा रही थी, उसने एक अवसर देखा। यही वह समय था जब मुकेश की नजर टेलीकम्युनिकेशन पर पड़ी।

2016 में जियो की लांचिंग ने एक और आरआईएल की नींव डाली

जब भारत की आधी आबादी के पास ही मोबाइल फोन था, 2016 में उन्होंने जियो की लांचिंग और बाकी कंपनियों के मुकाबले सबसे सस्ता टैरिफ प्रस्तुत किया। उस समय लांच के दौरान मुकेश ने कहा था कि मोबाइल इंटरनेट मानव विकास का एक बहुत बड़ा साधन होने जा रहा है और हम अपने आपको भाग्यशाली समझते हैं कि 125 करोड़ की आबादी के विकास का भागीदार बनने जा रहे हैं।

यह ठीक उसी तरह का प्रयोग था, जो धीरूभाई ने आरआईएल की नींव रखकर की। आज आरआईएल देश की सबसे बड़ी कंपनी है जबकि जियो का वैल्यूएशन महज चार साल में 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है।

जियो की सफलता ने धीरूभाई के शुरुआती दिनों की याद दिलाई

जियो की लांचिंग और उसकी सफलता ने धीरूभाई के शुरुआती दिनों की याद दिला दी। जियो के स्पेक्ट्रम को एक कम जानी पहचानी कंपनी इंफोटेल ब्रॉडबैंड ने खरीदा था। कुछ ही घंटों बाद इसका अधिग्रहण कर लिया। तीन साल से ही कम समय में ट्राई ने नियमों में परिवर्तन कर दिया और यह कहा कि डाटा के साथ वाइस कॉल के लिए स्पेक्ट्रम का प्रयोग किया जाए। अगर यह प्रावधान ऑक्शन के समय किया गया होता तो पब्लिक ऑडिटर्स का अनुमान है कि इसकी कुल कीमत 2.7 अरब डॉलर से 533 मिलियन डॉलर ज्यादा होती।

शुरू में तो बीटा टेस्टिंग के दौरान इसकी सेवा ग्राहकों के लिए मुफ्त में थी। जिसके कारण अन्य नेटवर्क प्रोवाइडरों ने जियो पर अव्यवहारिक तरीके से व्यापार करने का आरोप लगाया। हालांकि जियो ने इस आरोप को खारिज कर दिया। परंतु इसका नतीजा यह हुआ कि सेल्युलर ऑपरेटरों में प्राइस वार शुरू हो गया। अनिल के मालिकाना हक वाली रिलायंस इंफोकॉम जो पहले से ही संकट से गुजर रही थी और भी मुश्किल में आ गई।

टेलीकॉम में मुकेश ने अनिल को एक प्रतिद्वंदी माना

मुकेश की रणनीति से वाकिफ एक व्यक्ति के अनुसार उन्हें यह पता था कि जियो उनके भाई की टेलीकॉम कंपनी को कुचल कर रख देगी। इस व्यक्ति के अनुसार मुकेश अंबानी ने अनिल को एक छोटे भाई के तौर पर नहीं बल्कि एक प्रतिद्वंदी के रूप में देखा। नतीजा यह हुआ कि जियो आकाश की उंचाई पर चढ़ता गया और रिलायंस कम्युनिकेशन को साल 2019 में दिवालिया के लिए आवेदन करना पड़ा। यह मामला अदालत में पहुंचने के बाद अनिल अंबानी की छवि एक बिजनेसमैन के रूप में धूमिल हो चुकी थी। अनिल को हिरासत में लेने के पहले सुलह की कोशिश की गई और दोनों भाई एक डील पर पहुंच गए।

इसके बारे में प्रेस नोट जारी कर अनिल ने अपने बड़े भाई को पारवारिक मूल्यों की रक्षा करनेवाला बताया।

नरेंद्र मोदी का राज मुकेश के लिए सौभाग्यशाली साबित हुआ

जानकार लोग बताते हैं कि इसके बदले में अनिल अंबानी ने कंपनी की आफिस बिल्डिंग 99 साल की लीज को सरेंडर कर दिया। प्रेस नोट में अनिल का कमेंट था, लेकिन इसकी सामग्री से यह स्पष्ट था कि मुकेश की ओर से इसे जारी किया गया था। नरेंद्र मोदी का राज मुकेश के लिए काफी सौभाग्यशाली साबित हुआ है। क्योंकि जिस भारत को मोदी आधुनिक और इनवेस्टमेंट फ्रेंडली बनाना चाहते हैं, उसका मुकेश की कंपनी अच्छी तरह से दोहन कर रही है।

मोदी से मिलने के लिए मुकेश को कोई अपॉइंटमेंट नहीं लेनी होती है

जानकार बताते हैं कि मुकेश अंबानी ने मोदी से सबंध में स्थापित करने की शुरुआत 1990 में कर दी थी जब वे पार्टी के छोटे मोटे कार्यकर्ता थे। मुकेश के परिवारिक मित्र यह भी बताते हैं कि उन्हें कभी मोदी से मिलने के लिए दरखास्त नहीं करनी पड़ती बल्कि मोदी समय-समय पर उन्हें अपने आवास पर जरूरी सलाह मशविरा के लिए बुलाते रहते हैं।

मोदी की राष्ट्रवादी नीतियों को आगे बढ़ाते हैं मुकेश

पिछले साल जब मोदी सरकार ने मुसलिम बहुल राज्य कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीन लिया तो उसके बाद ही रिलायंस ने अपने टॉप 25 अधिकारियों को जम्मू कश्मीर भेज कर वहां निवेश की संभावनाओं को तलाशने के काम पर लगा दिया। मुकेश हमेशा उसी पहल को आगे बढ़ाते हैं जो मोदी की राष्ट्रवादी नीतियों में शामिल रहती है। व्यवसायिक सर्कल में मुकेश की सफलता ने लोगों में खुशी और डर दोनों का माहौल पैदा किया है।

मुंबई में हाल ही में संपन्न एक मीटिंग में एक बहुत बड़े वकील ने भारत के सबसे अमीर व्यक्ति पर कुछ भी टिप्पणी करने से यह कह कर मना कर दिया कि दीवारों के भी कान होते हैं।



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State Bank Of India Slashes Mclr By 25 Bps And Ebr By 40 Bps – एसबीआई ने एमसीएलआर में की 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती 


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देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सोमवार को एमसीएलआर में 25 बेसिस प्वाइंट और ईबीआर में 40 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। बैंक ने लगातार 13वीं बार एमसीएलआर में कटौती की है। अब एक साल का एमसीएलआर 7.25 फीसदी से घटकर 7 फीसदी हो गया है। बैंक का यह फैसला 10 जून से प्रभावी होगा। 

भारतीय स्टेट बैंक ने सोमवार को कहा कि वह 10 जून से अपनी कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) में 0.25 प्रतिशत की कटौती करेगा। बैंक ने कहा है कि एक साल की अवधि की एमसीएलआर दर को 7.25 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है।

स्टेट बैंक इससे पहले बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी ऋण दर (ईबीआर) के साथ ही रेपो दर से जुड़ी कर्ज की ब्याज दर (आरएलएलआर) में एक जुलाई से 0.40 प्रतिशत कटौती की घोषणा कर चुका है।

बैंक ने ईबीआर दर को जहां 7.05 प्रतिशत से घटाकर 6.65 प्रतिशत सालाना कर दिया है वहीं रेपो दर से जुड़ी ब्याज दर को 6.65 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया गया है।

बैंक की विज्ञप्ति में कहा गया है, इस हिसाब से एमसीएलआर दर से जुड़े आवास रिण की समान मासिक किस्त की राशि में 421 रुपये की कमी आयेगी वहीं ईबीआर, आरएलएलआर से जुड़े आवास ऋण की मासिक किस्त में 660 रुपये की कमी आयेगी। यह गणना 30 साल की अवधि के 25 लाख रुपये तक के आवास ऋण पर की गई है। 

रिजर्व बैंक ने 22 मई को रेपो दर में 0.40 प्रतिशत की कटौती कर उसे चार प्रतिशत कर दिया। उसके बाद ही स्टेट बैंक ने बाह्य मानकों से जुड़ी कर्ज की ब्याज दर और रेपो दर से जुड़े कर्ज की दर में यह कटौती की।

 

देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने सोमवार को एमसीएलआर में 25 बेसिस प्वाइंट और ईबीआर में 40 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। बैंक ने लगातार 13वीं बार एमसीएलआर में कटौती की है। अब एक साल का एमसीएलआर 7.25 फीसदी से घटकर 7 फीसदी हो गया है। बैंक का यह फैसला 10 जून से प्रभावी होगा। 

भारतीय स्टेट बैंक ने सोमवार को कहा कि वह 10 जून से अपनी कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) में 0.25 प्रतिशत की कटौती करेगा। बैंक ने कहा है कि एक साल की अवधि की एमसीएलआर दर को 7.25 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है।

स्टेट बैंक इससे पहले बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी ऋण दर (ईबीआर) के साथ ही रेपो दर से जुड़ी कर्ज की ब्याज दर (आरएलएलआर) में एक जुलाई से 0.40 प्रतिशत कटौती की घोषणा कर चुका है।

बैंक ने ईबीआर दर को जहां 7.05 प्रतिशत से घटाकर 6.65 प्रतिशत सालाना कर दिया है वहीं रेपो दर से जुड़ी ब्याज दर को 6.65 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया गया है।

बैंक की विज्ञप्ति में कहा गया है, इस हिसाब से एमसीएलआर दर से जुड़े आवास रिण की समान मासिक किस्त की राशि में 421 रुपये की कमी आयेगी वहीं ईबीआर, आरएलएलआर से जुड़े आवास ऋण की मासिक किस्त में 660 रुपये की कमी आयेगी। यह गणना 30 साल की अवधि के 25 लाख रुपये तक के आवास ऋण पर की गई है। 

रिजर्व बैंक ने 22 मई को रेपो दर में 0.40 प्रतिशत की कटौती कर उसे चार प्रतिशत कर दिया। उसके बाद ही स्टेट बैंक ने बाह्य मानकों से जुड़ी कर्ज की ब्याज दर और रेपो दर से जुड़े कर्ज की दर में यह कटौती की।

 



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Market News In Hindi : Investment of equity mutual fund schemes fell 15 per cent to Rs 5,256 crore in May, a slight increase in total AUM | मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश 15 प्रतिशत गिरकर 5,256 करोड़ रुपए हुआ, कुल एयूएम में मामूली बढ़त


  • फंड इंडस्ट्री का कुल एयूएम अप्रैल में 23.9 लाख करोड़ रुपए था
  • मई में यह करीबन 60,000 करोड़ रुपए बढ़कर 24.5 लाख करोड़ हुआ

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 08:43 PM IST

मुंबई. मई में इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में निवेश 5,256.52 करोड़ रुपए रहा है। अप्रैल की तुलना में इसमें 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जबकि म्यूचुअल फंड के कुल असेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) में मामूली बढ़त आई है। अप्रैल में पूरी इंडस्ट्री का कुल एयूएम 23.9 लाख करोड़ रुपए था। यह मई में बढ़कर 24.5 लाख करोड़ हो गया। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एंफी) ने दी। सोमवार को यह आंकड़े जारी किए गए।

इक्विटी फंड पर बाजार की अस्थिरता का रहा असर

एंफी के सीईओ एन एस वेंकटेश ने कहा कि आर्थिक अनिश्चितता और बाजार में अस्थिरता के बावजूद मैच्योरिटी निवेश दिखाने वाले निवेशकों ने इक्विटी म्यूचुअल फंड में विश्वास जारी रखा है। इसे मासिक एसआईपी में भी देखा जा सकता है। डेट की ओर से जो निवेशक कम ब्याज दरों का लाभ लेने और उच्च क्वालिटी एएए रेटेड में निवेश की सोच रहे थे, उनके नेट इंफ्लो में लगातार वृद्धि हुई है। इक्विटी फंड्स के लिहाज से अच्छी बात यह रही कि सभी इक्विटी फंड कैटेगरी में मई महीने में नेट इंफ्लो रजिस्टर्ड हुआ।

लॉर्ज कैप फंड में 1,555 करोड़ रुपए आए

सबसे ज्यादा आय 1,555 करोड़ रुपए लॉर्ज कैप फंड्स में आई। मल्टी कैप फंड्स में 758 करोड़ रुपए का इंफ्लो आया। विश्लेषकों के मुताबिक निवेशक कोविड-19 महामारी के कारण बाजार में अस्थिरता और अनिश्चित आर्थिक माहौल को देखते हुए लॉर्ज और मल्टी कैप फंड्स को तरजीह दे रहे हैं। दूसरी ओर, क्रेडिट रिस्क फंड ने मई में कुछ राहत की सांस ली है। इसमें से निवेशक अब पैसा निकालना बंद कर दिए हैं। हाल के समय में इस कैटेगरी से निवेशक काफी पैसा निकाल रहे थे।

क्रेडिट रिस्क में 5,173 करोड़ का रहा आउटफ्लो

क्रेडिट रिस्क आउटफ्लो अप्रैल में 19,239 करोड़ रुपए से घटकर मई में 5,173 करोड़ रुपए रह गया। अप्रैल के महीने में क्रेडिट रिस्क फंड्स में बड़े पैमाने पर आउट फ्लो देखा गया। क्योंकि निवेशक फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया द्वारा अपनी 6 डेट स्कीम्स को बंद करने से डर गए थे। क्रेडिट रिस्क फंड एक ऐसा डेट फंड है जो एए-रेटेड से कम रेटिंग वाले पेपर्स में कुल निवेश का लगभग 65 प्रतिशत निवेश करता है। चूंकि कम रेटेड पेपर में निवेश से संबंधित जोखिम अधिक होता है, इसलिए इन पेपर्स पर रिटर्न भी ज्यादा होता है।

क्रेडिट रिस्क फंड रिडेंम्पशन के तनाव से गुजर रहा है 

फंड मैनेजर्स ने कहा कि क्रेडिट रिस्क फंड रिडेम्पशन के तनाव से जूझ रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर फंड हाउस का निवेश इललिक्विड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में था। भारतीय बांड बाजारों के कम क्रेडिट स्पेस में लिक्विडिटी के दबाव और आगामी जोखिम से परहेज के सेंटिमेंट को देखते हुए निवेशकों ने अपने आप को सुरक्षित रखने का फैसला लिया। इससे निवेशक अपने निवेश को उन रास्तों से भुनाने के लिए पहुंचे, जिसे उन्होंने उच्च जोखिम के रूप में माना था।

आरबीआई ने जारी की थी 50,000 करोड़ की सुविधा

हालांकि वेंकटेश का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक और सेबी द्वारा डर को शांत करने के लिए उठाए गए विश्वास बहाली के कदमों के कारण क्रेडिट रिस्क फंड्स के आउटफ्लो में कमी आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 27 अप्रैल को म्यूचुअल फंड के लिए 50,000 करोड़ रुपए की विशेष लिक्विडिटी सुविधा की घोषणा की थी। क्योंकि फ्रैंकलिन टेंपलटन बंद होने इसकी जरूरत महसूस की गई थी। आरबीआई की लिक्विडिटी सुविधा ने अधिकांश म्यूचुअल फंडों, विशेष रूप से रिडेम्पशन से जूझ रहे लोगों और ग्राहकों के बीच विश्वास पैदा किया। जिससे लिक्विडिटी पर दबाव कम हो गया।

सेबी ने भी उठाया कदम 

पूंजी बाजार नियामक सेबी भी सबसे आगे था और उसने उन स्कीम्स की म्यूचुअल फंड इकाइयों को लिस्टेड करने की अनुमति दी जो कारोबार समेटने की प्रक्रिया में थीं। इस कदम से फ्रैंकलिन टेंपलटन म्यूचुअल फंड को उन निवेशकों के लिए अपनी इकाइयों की लिस्ट बनाने की अनुमति मिली जो बाहर निकलना चाहते हैं।

ओवरनाइट फंड से भी हुई पैसों की निकासी

लिक्विडिटी फंड जिसका उपयोग कंपनियों द्वारा सरप्लस कैश को पार्क करने के लिए किया जाता है, उसमें लगातार दूसरे महीने नेट इंफ्लो दर्ज हुआ। क्योंकि निवेशकों ने आरबीआई से लिक्विडिटी बढ़ाने के उपायों के कारण निवेश को शिफ्ट कर दिया। इस कैटेगरी में 61,870 करोड़ रुपए का सबसे अधिक इंफ्लो दर्ज किया गया। अप्रैल में 68,848 करोड़ रुपए का इंफ्लो था। दूसरी ओर ओवरनाइट फंड्स में सबसे ज्यादा 15,880 करोड़ रुपए का आउट फ्लो देखा गया क्योंकि निवेशक इस फंड्स से लिक्विड फंड्स में शिफ्ट हो गए।



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Investment Tips Sovereign Gold Bond One Of Best Government Scheme To Earn Money – निवेश के मंत्र 41: सस्ते में सोना बेच रही सरकार, पांच दिन तक का मौका


बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली, Updated Mon, 08 Jun 2020 10:37 AM IST

केंद्र सरकार ने जनता को सस्ती दरों पर सोना खरीदने का मौका दिया है। निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) योजना के तहत बाजार मूल्य से काफी कम दाम में सोना खरीद सकते हैं और आज इसका पहला दिन है। इसलिए अगर आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो देर ना करें। इसकी बिक्री पर होने वाले लाभ पर आयकर नियमों के तहत छूट भी मिलेगी।

आइए जानते हैं इस योजना के बारे में।



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Sensex Zooms 546 Points, Nifty Breaches 10,300 Level, Reliance Industries, Axis Bank Supports The Rally


Reliance Industries rose over 2 percent to hit a new lifetime high of Rs 1,624 on the BSE after the Group had sold 1.16 percent stake in Jio Platforms to Abu Dhabi based sovereign wealth fund.


New Delhi: Markets opened the week on a positive note on Monday as the Sensex zoomed 546 points, or 1.83 percent, to 34,830 levels and the broader Nifty50 index touched 10,300-mark on the back of Reliance Industries and L&T gains.

Among the stocks which gained includes IndusInd Bank which soared 6 percent, Axis Bank surged 5 percent, Reliance Industries was up more than 2 percent to hit a new lifetime high of Rs 1,624 on the BSE. Also Read| Abu Dhabi-Based Mubadala Buys 1.85% Stake In Reliance Jio Platforms For Rs 9,093 Crore

Among the stocks which gained includes IndusInd Bank which soared 6 percent, Axis Bank surged 5 percent, Reliance Industries was up more than 2 percent to hit a new lifetime high of Rs 1,624 on the BSE. The Group had announced a 1.16 percent stake sale in Jio Platforms to Abu Dhabi based sovereign wealth fund.

Around 9:29 am, the stock was trading 1.42 percent higher at Rs 1,603 on the BSE. The market-capitalization of RIL stood at Rs 10,16,079.58 crore.

The group’s  $65 billion digital units have sold more than 20 percent in stakes to several investors including Facebook Inc. and US private equity firms such as KKR & Co., Silver Lake Partners, and General Atlantic.

Meanwhile, Sun Pharma was among the top laggards in the Sensex pack slipping 0.7 percent followed by Bharti Airtel, HCL Technologies, and Hindustan Unilever. On Monday, around 19 companies, including Titan, PVR, and Abbot India will announce their March quarter results.

Rupee didn’t change much at Rs75.59 per dollar against Friday’s close of Rs75.58 against the US dollar.

Meanwhile, Asian stocks also started the week firmly tracking US markets after Friday’s US jobs positive report offered hope of an economic revival. US unemployment declines to 13.3 percent as the economy restores 2.5 million jobs in May.

Japan’s Topix Index rose 0.6 percent, SGX Nifty inched 0.88 percent, indicating a positive opening for Indian stocks. S&P 500 futures gained 0.4 percent. South Korea’s Kospi Index dipped 0.1 percent while Shanghai Composite was up 0.4 percent. Hang Seng Index rose 0.7 percent.

Also watch|Unlock 1.0: Know what will reopen in various states

(With inputs from agency)



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Consumer News In Hindi : In Delhi-NCR, CNG may be available in markets other than station, agreement is being done with startups | दिल्ली-एनसीआर में अब स्टेशन के अलावा बाजारों में भी उपलब्ध हो सकती है सीएनजी, स्टार्टअप्स के साथ किया जा रहा है करार


  • आईजीएल ने अप्रूवल के लिए PESO से संपर्क किया है
  • सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स से सर्विस पर चर्चा की गई है

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 05:39 PM IST

नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में कांप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) खरीदने के लिए जल्द ही सीएनजी स्टेशनों पर लंबी लाइन खत्म हो सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय की CNG समेत सभी ईंधन को आसानी से उपलब्ध कराने की योजना के तहत ऐसा हो रहा है। इसके तहत अब पेट्रोल पंपों या सीएनजी के स्टेशन के अलावा बाजारों में सीएनजी मिल सकती है। इंद्रपस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली-एनसीआर में CNG की इस तरह की तैयारी शुरू कर दी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले दो महीनों में दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी की डिलीवरी स्टेशन के अलावा भी शुरू हो सकती है। बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी का कारोबार आईजीएल के जरिए होता है। आईजीएल की पैरेंट कंपनी गेल है।

एक जगह रहने वालों को मिलाकर ऑर्डर का विकल्प

नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि आईजीएल ने इसके अप्रूवल के लिए PESO (Petroleum and Explosives safety Organisation) से संपर्क किया है। साथ ही कई स्टार्टअप्स के साथ भी बातचीत चल रही है। इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय की कंपनियों के साथ भी बैठक हुई है। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स से सर्विस पर चर्चा की गई है।

पहले फेज में 100-150 केजी ऑर्डर पर डिलीवरी संभव

सूत्रों के मुताबिक इसकी शुरूआत दिल्ली-एनसीआर से पहले होगी। इसे कई चरणों में शुरू किया जाएगा। पहले फेज में 100-150 केजी ऑर्डर पर डिलीवरी संभव होगी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 30 मई को कहा था कि वे फ्यूल रिटेलिंग के एक ऐसे मॉडल की दिशा में भी काम कर रहे हैं, जिसमें एक ही जगह पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलएनजी और एलपीजी जैसे सभी ईंधन उपलब्ध कराए जा सकें।   

इंडियल ऑयल ने सितंबर, 2018 में मोबाइल डिस्पेंसर के जरिए डीजल की होम डिलीवरी शुरू की थी। यह सुविधा अभी कुछ शहरों में उपलब्ध है। पेट्रोल और सीएनजी की अत्यधिक ज्वलनशीलता के कारण इनकी होम डिलीवरी बहुत चुनौतीपूर्ण है। साथ ही इस काम के लिए कई विभागों की मंजूरी भी लेनी होगी।

CNG क्यू मैनेजमेंट साल्यूशन लागू किया गया

आईजीइल ने CNG स्टेशन पर लंबी कतारों की समस्या को दूर करने के लिए ऐप आधारित CNG क्यू मैनेजमेंट साल्यूशन लागू किया है। जो IGLCONNECT ऐप पर ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। ग्राहक न केवल निकटतम सीएनजी स्टेशन का पता लगाने के लिए इस ऐप का उपयोग कर सकते हैं, बल्कि स्टेशन का चयन भी कर सकते हैं।

आईजीएल के राजस्व का अधिकांश भाग सीएनजी कारोबार से

आईजीएल की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, आईजीएल के राजस्व का अधिकांश भाग CNG के कारोबार से आता है। वित्त वर्ष 2018-19 में 4,761 करोड़ रुपए की आय कंपनी को हुई थी। जो कि इसके पहले के वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत ज्यादा है। बता दें कि इसी अवधि में दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी का कारोबार डबल डिजिट के साथ बढ़ा है। वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी ने 500 वां सीएनजी स्टेशन स्थापित करके नया रिकॉर्ड हासिल किया है।

कंपनी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में करीब 7.4 लाख प्राइवेट कारों समेत 10.7 लाख वाहनों में सीएनजी की प्रक्रिया को पूरा कर रही है। 2018-19 में प्रति दिन 31.34 लाख किलोग्राम की औसत बिक्री सीएनजी की हुई।

हाल ही में कंपनी ने प्रीपेड कार्ड पेश किया था

हाल ही में कंपनी ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए अपने सीएनजी ग्राहकों के लिए प्रीपेड कार्ड पेश किया था। अब तक 100,000 वाहनों में 70,000 से अधिक कार्ड प्रचलन में हैं। कंपनी ने प्रीपेड कार्ड को बढ़ावा देने के लिए टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों जैसे मेरू, बर्डी कैब, यॉर्कर कैब आदि के साथ करार किया है।



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Increase In Net Worth Of Top Richest Person Of World Even During Corona Pandemic – और अमीर होते जा रहे हैं अरबपति, कोरोना संकट में भी इतनी बढ़ी संपत्ति


बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 08 Jun 2020 11:57 AM IST

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कोरोना वायरस से दुनियाभर में सिर्फ आम आदमी ही प्रभावित नहीं हुआ है बल्कि कई धनी लोगों पर भी इसका असर हुआ है। मगर इसके बावजूद कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनकी संपत्ति में कोरोना काल के दौरान भी बढ़ोतरी हुई है। थिंक टैंक इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी रिसर्च की एक स्टडी के अनुसार, सिर्फ अमेरिका में ही अरबपतियों की कुल संपत्ति 3.5 लाख करोड़ डॉलर के पार हो गई है। दिग्गजों की संपत्ति में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आइए जानते हैं ब्लूमबर्ग इंडेक्स के मुताबिक आठ जून 2020 तक टॉप 12 अरबपतियों को कितना फायदा हुआ।
 

संख्या  नाम कुल संपत्ति (डॉलर में)  बदलाव (डॉलर में)  देश  इंडस्ट्री
1. जेफ बेजोस  150 अरब +1.27 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
2. बिल गेट्स  115 अरब +2.02 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
3. बर्नार्ड अर्नाल्ट  96 अरब +2.20 अरब फ्रांस  कंज्यूमर
4. मार्क जुकरबर्ग  87.6 अरब +1.65 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
5. वॉरेन बफे  79.1 अरब +3.39 अरब अमेरिका  डायवर्सिफाइड
6. लैरी पेज  68.6 अरब +1.14 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
7. स्टीव बॉल्मर  67.9 अरब +1.45 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
8. सर्गी ब्रिन  66.5 अरब +1.10 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
9. अमैन्सियो ऑर्टिगा  64 अरब +1.34 अरब अरब  रिटेल
10. लैरी एलिसन  61.3 अरब +1.14 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
11. फ्रेंकोइस बेटनकोर्ट मेयर्स  60.6 अरब +4,180 लाख  फ्रांस  कंज्यूमर
12. मुकेश अंबानी  57.5 अरब +163 लाख  भारत  एनर्जी

यह भी पढ़ें: निवेश के मंत्र 40: कम समय में ज्यादा पैसे जमा करने का फॉर्मूला, मिलेगा सरकारी बैंकों से ज्यादा लाभ

19वें स्थान पर मैकेंजी बेजोस
ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक मैकेंजी बेजोस सूची में 19वें स्थान पर हैं। आठ जून तक उनकी कुल संपत्ति 49.2 अरब डॉलर है। इसमें 4,370 लाख डॉलर का इजाफा हुआ है। 

20वें स्थान पर जैक मा
अलीबाबा के संस्थापक जैक मा की बात करें, तो उनकी संपत्ति 2,110 अरब डॉलर बढ़कर 47.5 अरब डॉलर हो गई है। वे 20वें स्थान पर हैं।

यह भी पढ़ें: निवेश के मंत्र 41: सस्ते में सोना बेच रही सरकार, पांच दिन तक का मौका

22वें स्थान पर एलन मस्क 
स्पेसएक्स कंपनी के सीईओ एलन मस्क 22वें स्थान पर हैं। उनकी कुल संपत्ति 43.9 अरब डॉलर है। इसमें 8,590 लाख डॉलर का इजाफा हुआ है।

124वें स्थान पर राधाकिशन दमानी 
भारत के राधाकिशन दमानी 124वें स्थान पर है। उनकी कुल संपत्ति 12.3 अरब डॉलर है। इसमें 3,960 लाख डॉलर का इजाफा हुआ है।

कोरोना वायरस से दुनियाभर में सिर्फ आम आदमी ही प्रभावित नहीं हुआ है बल्कि कई धनी लोगों पर भी इसका असर हुआ है। मगर इसके बावजूद कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनकी संपत्ति में कोरोना काल के दौरान भी बढ़ोतरी हुई है। थिंक टैंक इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी रिसर्च की एक स्टडी के अनुसार, सिर्फ अमेरिका में ही अरबपतियों की कुल संपत्ति 3.5 लाख करोड़ डॉलर के पार हो गई है। दिग्गजों की संपत्ति में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आइए जानते हैं ब्लूमबर्ग इंडेक्स के मुताबिक आठ जून 2020 तक टॉप 12 अरबपतियों को कितना फायदा हुआ।

 

संख्या  नाम कुल संपत्ति (डॉलर में)  बदलाव (डॉलर में)  देश  इंडस्ट्री
1. जेफ बेजोस  150 अरब +1.27 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
2. बिल गेट्स  115 अरब +2.02 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
3. बर्नार्ड अर्नाल्ट  96 अरब +2.20 अरब फ्रांस  कंज्यूमर
4. मार्क जुकरबर्ग  87.6 अरब +1.65 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
5. वॉरेन बफे  79.1 अरब +3.39 अरब अमेरिका  डायवर्सिफाइड
6. लैरी पेज  68.6 अरब +1.14 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
7. स्टीव बॉल्मर  67.9 अरब +1.45 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
8. सर्गी ब्रिन  66.5 अरब +1.10 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
9. अमैन्सियो ऑर्टिगा  64 अरब +1.34 अरब अरब  रिटेल
10. लैरी एलिसन  61.3 अरब +1.14 अरब अमेरिका  टेक्नोलॉजी
11. फ्रेंकोइस बेटनकोर्ट मेयर्स  60.6 अरब +4,180 लाख  फ्रांस  कंज्यूमर
12. मुकेश अंबानी  57.5 अरब +163 लाख  भारत  एनर्जी

यह भी पढ़ें: निवेश के मंत्र 40: कम समय में ज्यादा पैसे जमा करने का फॉर्मूला, मिलेगा सरकारी बैंकों से ज्यादा लाभ

19वें स्थान पर मैकेंजी बेजोस
ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक मैकेंजी बेजोस सूची में 19वें स्थान पर हैं। आठ जून तक उनकी कुल संपत्ति 49.2 अरब डॉलर है। इसमें 4,370 लाख डॉलर का इजाफा हुआ है। 

20वें स्थान पर जैक मा
अलीबाबा के संस्थापक जैक मा की बात करें, तो उनकी संपत्ति 2,110 अरब डॉलर बढ़कर 47.5 अरब डॉलर हो गई है। वे 20वें स्थान पर हैं।

यह भी पढ़ें: निवेश के मंत्र 41: सस्ते में सोना बेच रही सरकार, पांच दिन तक का मौका

22वें स्थान पर एलन मस्क 
स्पेसएक्स कंपनी के सीईओ एलन मस्क 22वें स्थान पर हैं। उनकी कुल संपत्ति 43.9 अरब डॉलर है। इसमें 8,590 लाख डॉलर का इजाफा हुआ है।

124वें स्थान पर राधाकिशन दमानी 
भारत के राधाकिशन दमानी 124वें स्थान पर है। उनकी कुल संपत्ति 12.3 अरब डॉलर है। इसमें 3,960 लाख डॉलर का इजाफा हुआ है।



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Gold Prices Rise To ₹45,870, Silver Surges ₹47,766 Per Kg


Amid the falling price of bullion, the third tranche of gold bonds of this fiscal (2020-21) has opened for subscription on Monday.


New Delhi, June 8: Domestic gold prices rose on Monday after witnessing a sharp decline from the previous session. On MCX, August gold futures were up 0.4 per cent to ₹45,870 while silver also moved higher in tandem with the bullion prices. MCX July silver futures were up 0.88 per cent to ₹47,766 per kg. ALSO READ: https://news.abplive.com/news/world/sensex-surges-546-points-nifty-breaches-10300-level-reliance-industries-axis-bank-supports-the-rally-1254446

The demand for gold remains weak even as shops have opened up after more than two months of nationwide lockdown. The gold prices rose in the wake of a rising number of Covid-19 cases. The total number of coronavirus patients in the country touched over 2.5 lakh while fatalities climbed to 7,000 levels.

Gold is considered as a safe-haven asset in times of political and economic upheaval.

Amid the falling price of bullion, the third tranche of gold bonds of this fiscal (2020-21) has opened for subscription on Monday. The issue will close on June 12. The issue price has been fixed at ₹4,677 per gram and retail investors making payment through digital mode will get a discount of ₹50 per gram.

The scheme was launched in 2015 in an aim to curb the demand for physical gold and perhaps transfer a part of the domestic savings – used in buying gold – into financial savings.

Globally, rates have slipped after the US has reported unexpected employment data rising hopes of economic recovery. This has taken away the sheen from the safe-haven asset. Spot gold was down 0.2 per cent at $1,682.57 per ounce, following a 2.4 per cent drop in the previous week. It is the third continuous weekly drop. Other precious metals including silver was up 0.5 per cent to $17.45, while platinum declined 1.7 per cent to $821.78, according to Mint report.

The traders will now closely watch on the US central bank’s policy meeting on Wednesday. The US economy unexpectedly added jobs in May after it recorded losses in the prior month, which bolstered equity markets.

Meanwhile, the holdings of SPDR Gold Trust, the world’s largest gold-backed exchange-traded fund slipped 0.4 per cent to 1,128.11 tonnes on Friday.



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Market News In Hindi : BSE NSE Sensex Today | Stock Market Latest Update: June 8 Share Market, Trade BSE, Nifty, Sensex Live News Updates | बीएसई 553 अंक और निफ्टी 184 पॉइंट ऊपर खुला, शुक्रवार को अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 829 अंक ऊपर बंद हुआ था


  • शुक्रवार को बीएसई 306 अंक नीचे 34,287 पर और निफ्टी 113 पॉइंट नीचे 10,142 पर बंद हुआ था
  • शुक्रवार को अमेरिकी बाजार नैस्डैक 2.06 फीसदी बढ़त के साथ 198 अंक ऊपर 9,814 पर बंद हुआ था

दैनिक भास्कर

Jun 08, 2020, 02:45 PM IST

मुंबई. सोमवार को कारोबार के पहले दिन बीएसई 553.93 अंक ऊपर और निफ्टी 184.6 पॉइंट की बढ़त के साथ खुला। अब तक की ट्रेडिंग के दौरान बीएसई में अधिकतम 640.56 अंक तक और न्यूनतम 16.57 अंक तक की बढ़त रही है।

इससे पहले बीते सप्ताह शुक्रवार को बीएसई और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए थे। उस दिन दिनभर की ट्रेडिंग के दौरान बीएसई 424.73 अंक तक और निफ्टी 130.8 पॉइंट तक ऊपर जाने में कामयाब रहा था। कारोबार के अंत में बीएसई 306.54 अंक या 0.90% ऊपर 34,287.24 पर और निफ्टी 113.05 पॉइंट या 1.13% ऊपर 10,142.15 पर बंद हुआ था।

बीएसई में शामिल इन बैंक शेयरों में बढ़त

बैंक बढ़त (%)
इंडसइंड बैंक 6.61 %
RBL बैंक 5.15 %
एक्सिस बैंक 4.91 %
ICICI बैंक 3.41 %
सिटी यूनियन बैंक 2.95 %
फेडरल बैंक 2.85 %
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 2.80 %
HDFC बैंक 1.40 %

दुनियाभर के बाजारों में रही बढ़त
शुक्रवार को दुनियाभर के सभी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस 3.15 फीसदी की बढ़त के साथ 829.16 अंक ऊपर 27,111.00 पर बंद हुआ था। वहीं, अमेरिका के दूसरे बाजार नैस्डैक 2.06 फीसदी बढ़त के साथ 198.27 अंक ऊपर 9,814.08 पर बंद हुआ था। दूसरी तरफ, एसएंडपी 2.62 फीसदी बढ़त के साथ 81.58 पॉइंट ऊपर 3,193.93 पर हुआ था। चीन का शंघाई कम्पोसिट 0.38 बढ़त के साथ 11.14 अंक ऊपर 2,941.94 पर बंद हुआ था। इधर इटली, जर्मनी, फ्रांस के बाजार में भी बढ़त रही।

कोरोना से देश और दुनिया में मौतें
देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 2,57,486 हो गई है। इनमें 1,26,418 की रिपोर्ट पॉजीटिव है। वहीं 1,23,848 संक्रमित ठीक हो गए हैं। देश में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 7,207 हो चुकी है। ये आंकड़े covid19india.org के अनुसार हैं। दूसरी तरफ, दुनियाभर में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 7,086,478 हो चुकी है। इनमें 406,126 की मौत हो चुकी है। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 112,469 हो चुकी है।

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02:43 PM बीएसई 30 में शामिल 18 कंपनियों के शेयरों में बढ़त और 12 में गिरावट है। इंडसइंड बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त है।

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लॉकडाउन के दौरान कामकाज ठप होने के कारण पैदा हुई वित्तीय स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने गरीब महिलाओं के बैंक खाते में 500 रुपए महीने जमा करने की योजना चालू की थी। यह योजना तीन महीने के लिए शुरू की गई थी, जो जून में खत्म होने जा रही है।

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12:53 PM आज निफ्टी 184.6 अंक ऊपर खुला। अभी ये 70.25 पॉइंट ऊपर 10,212.40 पर कारोबार कर रहा है। इसमें 0.69% की बढ़त है।

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11:54 AM बीएसई टेलीकॉम में शामिल 13 में से 12 कंपनियों के शेयरों में बढ़त है, आइडिया के शेयर में सबसे ज्यादा 11.68% बढ़त है।

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10:26 AM स्टार सीमेंट लिमिटेड के शेयर में 15.75 फीसदी की बढ़त है। कंपनी के शेयर आज 85 रुपए पर खुले।

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09:57 AM बीएसई बैंकेक्स में शामिल सभी 9 कंपनियों के शेयरों में बढ़त है।

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09:51 AM निफ्टी 50 के टॉप-10 लूजर स्टॉक्स; सिप्ला के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट है।

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चीन के प्रति बढ़ रहे आक्रोष के बीच वैश्विक पेट्र्रोलियम निवेशक भारतीय संपत्तियों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। यह बात भारत पेट्र्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कही। सरकार बीपीसीएल का निनिवेश करने जा रही है और इसके लिए निवेशकों से बोली मांगी गई है।

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09:37 AM निफ्टी 50 के टॉप-10 गेनर स्टॉक्स; इंडसइंड बैंक और टाइटन के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त।

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09:29 AM बीएसई के 23 सेक्टर में से 22 सेक्टर में बढ़त है।

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09:27 AM बीएसई के सभी 32 इंडेक्स में अभी बढ़त बनी हुई है।

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09:23 AM बीएसई 30 में शामिल 27 कंपनियों के शेयरों में बढ़त है; इंडसइंड बैंक और एक्सिस बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त।

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09:15 AM बीएसई 611.33 अंक ऊपर 34,898.57 पर और निफ्टी 176.55 पॉइंट ऊपर 10,318.70 पर कारोबार कर रहा है।

शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में रही बढ़त

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