Bse Sensex Nse Nifty Share Market Today: Indian Indices Trading In Red Mark – Sensex Nifty Today: गिरावट पर कारोबार कर रहा बाजार, 464 अंक लुढ़का सेंसेक्स, निफ्टी भी धड़ाम


मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच आज सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। दोपहर 12.05 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 464.46 अंक (0.95 फीसदी) की कमजोरी के साथ 48,570.21 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 155.35 अंक यानी 1.08 फीसदी की गिरावट के साथ 14,278.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 56.81 अंक (0.12 फीसदी) की कमजोरी के साथ 48,977.86 के स्तर पर खुला था। वहीं निफ्टी की शुरुआत 21.70 अंक यानी 0.15 फीसदी की गिरावट के साथ 14,412 के स्तर पर हुई थी। चौतरफा गिरावट के चलते लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 192.36 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

वैश्विक बाजारों का हाल
एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई इंडेक्स 0.85 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.90 फीसदी पर कारोबार कर रहे हैं। हालांकि, चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स और हांगकांग का हेंगसेंग इंडेक्स 0.41 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। इससे पहले यूरोपियन और अमेरिकी बाजार गिरावट के साथ बंद हुए थे।

710 शेयरों में आई तेजी 
आज 710 शेयरों में तेजी आई और 662 शेयरों में गिरावट आई। वहीं 89 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। केंद्रीय बजट से पहले निवेशक निवेश को लेकर चिंतित हैं क्योंकि ज्यादातर मार्केट विश्लेषकों के अनुसार, कोरोना के चलते इस बार का बजट उम्मीद के मुताबिक नहीं होगा, जिसकी वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 252.16 अंक या 0.51 फीसदी के लाभ में रहा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 86.45 अंक या 0.60 फीसदी चढ़ गया।

इस सप्ताह इन कारकों से तय होगी शेयर बाजार की दिशा
शेयर बाजारों की दिशा इस सप्ताह कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक घटनाक्रमों से तय होगी। विश्लेषकों का कहना है कि आगामी आम बजट से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव रह सकता है। इसके अलावा निवेशकों की निगाह कोविड-19 से जुड़े घटनाक्रमों, विशेषरूप से देश में टीकाकरण अभियान पर रहेगी। इस सप्ताह बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बजाज फाइनेंस, फेडरल बैंक, एशियन पेंट्स, बजाज ऑटो और रिलायंस इंडस्ट्रीज के तिमाही नतीजे आने हैं। वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख के बीच इस सप्ताह घरेलू बाजारों की निगाह बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र पर रहेगी। कारोबारियों ने कहा कि देश में टीकाकरण शुरू होने के बाद शेयर मूल्यों में काफी बदलाव देखने को मिल सकता है। 

दिग्गज शेयरों का हाल
दिग्गज शेयरों की बात करें, तो आज शुरुआती कारोबार के दौरान एचडीएफसी बैंक, अडाणी पोर्ट्स, विप्रो, गेल और यूपीएल के शेयर हरे निशान पर खुले। वहीं इंडसइंड बैंक, एम एंड एम, ग्रासिम, एसबीआई लाइफ और भारती एयरटेल के शेयर लाल निशान पर खुले। 

सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर
सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर डालें, तो आज आईटी, पीएसयू बैंक और एफएमसीजी के अतिरिक्त सभी सेक्टर्स लाल निशान पर खुले। इनमें फाइनेंस सर्विसेज, बैंक, मेटल, प्राइवेट बैंक, फार्मा, मीडिया, रियल्टी और ऑटो शामिल हैं।

प्री ओपन के दौरान यह था शेयर मार्केट का हाल
प्री ओपन के दौरान सुबह 9.03 बजे सेंसेक्स 47.24 अंक (0य10 फीसदी) नीचे 48987.43 के स्तर पर था। वहीं निफ्टी 58.70 अंक (0.41 फीसदी) नीचे 14492.40 के स्तर पर था।

2020 में बाजार में जारी रही उठा-पटक
शेयर बाजारों के लिए साल 2020 काफी घटनाक्रमों वाला रहा। मार्च 2020 में भारत में कोरोना वायरस महामारी ने दस्तक दी। कोरोना वायरस से शेयर बाजार भी अछूता नहीं रहा। घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। मार्च में जहां शेयर बाजार धड़ाम हुआ था, वहीं साल के अंत में सेंसेक्स-निफ्टी ने 2020 में हुए पूरे नुकसान की भरपाई कर ली। 

पिछले कारोबारी दिन सपाट स्तर पर खुला था सेंसेक्स 
पिछले कारोबारी दिन सेंसेक्स 39.73 अंक (0.08 फीसदी) की कमजोरी के साथ 49544.43 के स्तर पर खुला था। वहीं निफ्टी 0.00 फीसदी के बदलाव के साथ 14595.60 के स्तर पर था। 

शुक्रवार को लाल निशान पर बंद हुआ था बाजार
शुक्रवार को दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद शेयर बाजार लाल निशान पर बंद हुआ था। सेंसेक्स 549.49 अंक यानी 1.11 फीसदी की गिरावट के साथ 49034.67 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 161.90 अंक (1.11 फीसदी) की गिरावट के साथ 14433.70 के स्तर पर बंद हुआ था। 



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budget 2021 expactation standard deduction may be increased from Rs 50000 to Rs 1 lakh | इनकम टैक्स में राहत की ज्यादा गुंजाइश नहीं, स्टैंडर्ड डिडक्शन की 50,000 रुपए की सीमा बढ़ सकती है


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नई दिल्ली8 दिन पहले

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सरकार पैसे की तंगी का सामना कर रही है, इसलिए बजट का फोकस ऐसे कदमों पर रह सकता है, जिससे जनता को भी थोड़ी राहत मिले और सरकार की भी आय बढ़े - Dainik Bhaskar

सरकार पैसे की तंगी का सामना कर रही है, इसलिए बजट का फोकस ऐसे कदमों पर रह सकता है, जिससे जनता को भी थोड़ी राहत मिले और सरकार की भी आय बढ़े

आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इनकम टैक्स में ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती है, क्योंकि 2020 में कोरोनावायरस महामारी के कारण सरकार पैसे की तंगी का सामना कर रही है। बजट का फोकस ऐसे कदमों पर रह सकता है, जिससे जनता को भी थोड़ी राहत मिले और सरकार की भी आय बढ़े। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा भी है कि इस बार का बजट ऐसा होगा, जैसा पहले कभी भी नहीं देखा गया है।

पिछले साल इनकम टैक्स प्रणाली में कुछ बड़े बदलाव हुए थे, इसलिए इस साल टैक्स ब्रैकेट में खास बदलाव की उम्मीद नहीं है। पिछले साल के बजट में सरकार ने पुरानी टैक्स प्रणाली के साथ एक वैकल्पिक सरल टैक्स प्रणाली दी थी। निवेश पर डिडक्शन क्लेम नहीं करने वाले लोग कम टैक्स स्लैब वाली नई प्रणाली को अपना सकते हैं।

वर्क फ्रॉम होम के खर्चे औेर महंगाई के कारण स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की उम्मीद

वर्क फ्रॉम होम से जुड़े खर्चे और ऊंची महंगाई के कारण उद्योग संघ फिक्की ने वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को मौजदा 50,000 रुपए से बढ़ाकर 1 लाख रुपए किए जाने की उम्मीद जताई है। इससे लोगों का पर्चेजिंग पावर नहीं घटेगा। फिक्की ने यह भी सलाह दी कि स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ मेडिकल खर्च और ट्रांसपोर्टेशन के लिए रीइंबर्समेंट को भी जारी रखा जाए। पिछले साल के बजट में मेडिकल रीइंबर्समेंट और कनविएंस अलाउएंस को 50,000 रुपए के कंपोजिट स्टैंडर्ड डिडक्शन लिमिट में मिला दिया गया था। उससे पहले इनकम टैक्स के सेक्शन 17(2) के तहत सालाना अधिकतम 15,000 रुपए के मेडिकल रीइंबर्समेंट का प्रावधान था, जो 1999 में फिक्स किया गया था। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने भी महंगाई के कारण स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाए जाने की उम्मीद जताई है। एसोचैम ने भी स्टैंडर्ड डिडक्शन लिमिट बढ़ाने की सलाह दी है, क्योंकि फाइनेंस एक्ट 2018 में लगाए गए 1 फीसदी के अतिरिक्त सेस के कारण स्टैंडर्ड डिडक्शन का अधिकांश हिस्सा बेअसर हो जाता है।

अफॉर्डेबल हाउस पर्चेज पर टैक्स लाभ की समय सीमा बढ़ने की उम्मीद

2019-20 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अफॉर्डेबल होम से जुड़े लोन के ब्याज भुगतान पर सेक्शन 80EEA के तहत 1.5 लाख रुपए का अतिरिक्त टैक्स लाभ दिया था। इसके लिए एक शर्त यह थी कि लोन किसी वित्तीय संस्थान द्वारा 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक की अवधि में ही सैंक्शन हुआ हो। कम आय वाली जनता के बीच अफॉर्डेबल हाउस की काफी मांग के कारण लोग चाहते हैं कि इस छूट की समय सीमा बढ़े। अफॉर्डेबल हाउस बनाने वाले बिल्डर्स भी मानते हैं कि समय सीमा बढ़ने से इस सेगमेंट में मांग बढ़ेगी। सेक्शन 24 के तहत होम लोन पर 2 लाख रुपए तक के ओरिजिनल डिडक्शन को मिला दिया जाए, तो समय सीमा के अंदर अफॉर्डेबल होम खरीदने वालों को कुल 3.5 लाख रुपए का टैक्स डिडक्शन क्लेम करने की सुविधा मिली हुई है।

कोविड मेडिकल खर्च में बढ़ोतरी पर टैक्स छूट मिलने की उम्मीद

कोरोनावायरस महामारी के कारण आम लोगों के चिकित्सा खर्च में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकर इस तरह खर्च पर टैक्स छूट का लाभ दे सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80D के तहत टैक्स लाभ बढ़ा सकती है। इस सेक्शन के तहत आयकरदाता और उसके पारिवारिक सदस्यों के लिए भुगतान किए गए मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन मिलता है।

अतिरिक्त कोविड सेस की संभावना

कोरोनावायरस महामारी और वैक्सीनेशन अभियान पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए सरकार इस बार के बजट में बेहद समृद्ध लोगों पर कोरोनावयरस सेस लगा सकती है। सेस इसलिए भी लग सकता है, क्योंकि केंद्रीय सेस की वसूली को राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है। भारतीय राजस्व सेवा संगठन (IRSA) ने पिछले साल महामारी के बीच फंड जुटाने के लिए सुपर रिच पर वन टाइम कोविड रिलीफ सेस लगाने की सलाह दी थी। SBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक 16 जनवरी से शुरू होने वाले पहले वैक्सीनेशन अभियान पर 21,000-27,000 करोड़ रुपए और दूसरे चरण पर अतिरिक्त 35,000-45,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

नई बचत योजना या बांड लाने की उम्मीद

आर्थिक रिकवरी और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए राजस्व जुटाने और बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार कुछ बचत योजनाओं या टैक्स फ्री जैसे बांड की घोषणा कर सकती है। निवेशक समुदाय कैपिटल गेन टैक्स या STT में राहत मिलने की भी उम्मीद कर रहे हैं।

पार्टनरशिप और LLP कंपनियों पर इनकम टैक्स रेट घटने की उम्मीद

छोटे कारोबारियों ने पार्टनरशिप और LLP कंपनियों पर इनकम टैक्स रेट को घटाकर 22 फीसदी करने की मांग की है। अभी यह रेट 30 फीसदी है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM) के महासचिव वीके बंसल ने कहा कि टैक्स रेट घटने से इन कंपनियों का इनकम टैक्स रेट कॉरपोरेट टैक्स के बराबर हो जाएगा।

महामारी के कारण पैसे की तंगहाली झेल रही है सरकार

कोरोनावायरस महामारी और लॉकडाउन के कारण सरकार का खर्च बढ़ने और आय घटने से देश का वित्तीय घाटा दिसंबर में ही बढ़कर 2020-21 के टार्गेट के 135 फीसदी लेवल को पार कर गया है। इस कारोबारी साल के लिए वित्तीय घाटा का लक्ष्य GDP का 3.5 फीसदी रखा गया था, लेकिन विश्लेषक मानते है कि यह GDP के 7 फीसदी के आसपास पहुंच सकता है। इस कारोबारी साल में देश की विकास दर में भी 7 फीसदी से ज्यादा गिरावट रहने की आशंका है। इसलिए जनता को भी राहत मिले और देश का राजस्व भी बढ़े, इसके लिए सरकार को बजट में कुछ इनोवेटिव प्रावधान करने होंगे।



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Petrol in Delhi at new high of Rs 84.70 per liter, diesel prices in Mumbai at new high


दिल्ली में पेट्रोल 84.70 रुपये प्रति लीटर के नए उच्चस्तर पर, मुंबई में डीजल कीमतें नई ऊंचाई पर

पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम 25-25 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

नई दिल्ली:

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बृहस्पतिवार को लगातार दूसरे दिन 25-25 पैसे प्रति लीटर की और वृद्धि हुई. इससे वाहन ईंधन के दाम नयी ऊंचाई पर पहुंच गए हैं. पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम 25-25 पैसे प्रति लीटर बढ़ाए गए हैं. दिल्ली में अब पेट्रोल 84.70 रुपये प्रति लीटर और डीजल 74.88 रुपये प्रति लीटर हो गया है. बुधवार को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25-25 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. मुंबई में पेट्रोल के दाम 91.07 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 91.32 रुपये प्रति लीटर और डीजल 81.34 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 81.60 रुपये प्रति लीटर हो गया है.

Petrol, Diesel Price: दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों ने तोड़ा रिकॉर्ड, मुंबई में डीजल 81 रुपये पार

दिल्ली में अब पेट्रोल के दाम अपने सर्वकालिक उच्चस्तर पर हैं. वहीं मुंबई में डीजल की कीमत रिकॉर्डस्तर पर पहुंच गई है. सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) ने छह जनवरी से वाहन ईंधन कीमतों में संशोधन फिर शुरू किया है. इससे पहले करीब एक माह तक ईंधन कीमतों में संशोधन नहीं हुआ था.

वाहन ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम फरवरी, 2020 के बाद उच्चस्तर पर पहुंचने के बाद फिर शुरू हुआ है. हालांकि, बृहस्पतिवार को कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट आई. ब्रेंट कच्चा तेल 11 सेंट टूटकर 55.95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. एनवाईएमईएक्स लाइट स्वीट क्रूड 10 सेंट के नुकसान से 52.81 डॉलर प्रति बैरल रह गया. इससे पहले चार अक्टूबर, 2018 को दिल्ली में पेट्रोल 84 रुपये प्रति लीटर के उच्चस्तर पर पहुंचा था. इसी दिन डीजल भी 75.45 रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्डस्तर पर था.

खाद्य वस्तुओं के दाम कम होने से खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर में घटकर 4.59 प्रतिशत पर आयी

मुंबई में भी चार अक्टूबर, 2018 को पेट्रोल 91.34 रुपये प्रति लीटर के अपने सर्वकालिक उच्चस्तर तक गया था. मई, 2020 के बाद पेट्रोल 15.04 रुपये प्रति लीटर और डीजल 12.59 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है. पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 32.98 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 31.83 रुपये प्रति लीटर है. दिल्ली में पेट्रोल पर मूल्यवर्धित कर (वैट) 19.32 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 10.85 रुपये प्रति लीटर है.

Video: हॉट टॉपिक: महानगरों में फिर महंगा हुआ पेट्रोल डीजल

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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Gold Silver Price Today 19 January Gold Mcx Prices Dip Silver Edges Up – Gold Silver Price: आज फिर कम हुई सोने की वायदा कीमत, उच्चतम स्तर से 7500 रुपये नीचे


बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 19 Jan 2021 10:33 AM IST

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सपाट वैश्विक कीमतों के चलते आज भारतीय बाजारों में सोने और चांदी की वायदा कीमत में मिला-जुला रुख रहा। एमसीएक्स पर सोना वायदा 0.1 फीसदी घटकर 48,846 रुपये प्रति 10 ग्राम पर, जबकि चांदी 0.5 फीसदी बढ़कर 65,760 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। पिछले सत्र में एक महीने में सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद सोना 0.36 फीसदी उछला था, जबकि चांदी में एक फीसदी की तेजी आई थी। अगस्त 2020 में भारतीय बाजारों में सोना 56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था। यानी अभी उच्चतम स्तर से सोना 7500 रुपये नीचे है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इतना रहा दाम
वैश्विक बाजारों में पिछले सत्र में एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद आज हाजिर सोना 0.1 फीसदी बढ़कर 1,838.51 डॉलर प्रति औंस हो गया। अन्य कीमती धातुओं में चांदी 1.1 फीसदी गिरकर 25.05 डॉलर प्रति औंस हो गई, प्लैटिनम 1.3 फीसदी बढ़कर 1,092.65 डॉलर हो गया, जबकि पैलेडियम 0.3 फीसदी की गिरावट के साथ 2,364 डॉलर हो गया।

इस साल कम हुई सोने की कीमत
साल 2020 में कीमती धातु की कीमत में जोरदार उछाल आया, लेकिन इस साल वैश्विक बाजारों में अब तक सोने की दरें तीन फीसदी से अधिक गिर गई हैं क्योंकि अमेरिकी डॉलर इन अपेक्षाओं से अधिक बढ़ा है कि कोरोना वायरस के टीके और प्रोत्साहन पैकेज से आर्थिक सुधार में मदद मिलेगी। पिछले दो हफ्तों में तेजी के बाद आज डॉलर इंडेक्स 90.672 पर थोड़ा नीचे था।

2021 में घरेलू बाजार में भी कम हुई कीमत
भारत की बात करें, तो वैश्विक बाजारों के अनुरूप ही पिछले साल लगभग 25 फीसदी की गिरावट के बाद, इस साल भारत में सोने की कीमतों में अब तक तीन फीसदी की गिरावट आई है। विश्लेषकों का कहना है कि सोने को केंद्रीय बैंकों और सरकारों के बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन पैकेजों से समर्थन मिलने की उम्मीद है। 

इस साल बढ़ सकती है सोने की मांग: डब्ल्यूजीसी
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के उबरने के साथ भारत में 2021 के दौरान उपभोक्ता भावनाओं में सुधार हो रहा है और सोने की मांग सकारात्मक दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर में धनतेरस के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि आभूषणों की मांग औसत से कम थी, लेकिन इसमें पिछले साल की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून 2020) के निचले स्तर के मुकाबले काफी सुधार हुआ। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि कुछ समय के लिए अपनी पूर्ण क्षमता के मुकाबले सुस्त बनी रहेगी, लेकिन पिछले कुछ समय से सोने की कीमतों में स्थिरता के चलते उपभोक्ताओं के लिए खरीद के अवसर बढ़ेंगे। डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन जैसे देशों में आर्थिक सुधार की संभावना है, जिसे 2020 की शुरुआत में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। 

सपाट वैश्विक कीमतों के चलते आज भारतीय बाजारों में सोने और चांदी की वायदा कीमत में मिला-जुला रुख रहा। एमसीएक्स पर सोना वायदा 0.1 फीसदी घटकर 48,846 रुपये प्रति 10 ग्राम पर, जबकि चांदी 0.5 फीसदी बढ़कर 65,760 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। पिछले सत्र में एक महीने में सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद सोना 0.36 फीसदी उछला था, जबकि चांदी में एक फीसदी की तेजी आई थी। अगस्त 2020 में भारतीय बाजारों में सोना 56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था। यानी अभी उच्चतम स्तर से सोना 7500 रुपये नीचे है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इतना रहा दाम

वैश्विक बाजारों में पिछले सत्र में एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद आज हाजिर सोना 0.1 फीसदी बढ़कर 1,838.51 डॉलर प्रति औंस हो गया। अन्य कीमती धातुओं में चांदी 1.1 फीसदी गिरकर 25.05 डॉलर प्रति औंस हो गई, प्लैटिनम 1.3 फीसदी बढ़कर 1,092.65 डॉलर हो गया, जबकि पैलेडियम 0.3 फीसदी की गिरावट के साथ 2,364 डॉलर हो गया।

इस साल कम हुई सोने की कीमत

साल 2020 में कीमती धातु की कीमत में जोरदार उछाल आया, लेकिन इस साल वैश्विक बाजारों में अब तक सोने की दरें तीन फीसदी से अधिक गिर गई हैं क्योंकि अमेरिकी डॉलर इन अपेक्षाओं से अधिक बढ़ा है कि कोरोना वायरस के टीके और प्रोत्साहन पैकेज से आर्थिक सुधार में मदद मिलेगी। पिछले दो हफ्तों में तेजी के बाद आज डॉलर इंडेक्स 90.672 पर थोड़ा नीचे था।

2021 में घरेलू बाजार में भी कम हुई कीमत

भारत की बात करें, तो वैश्विक बाजारों के अनुरूप ही पिछले साल लगभग 25 फीसदी की गिरावट के बाद, इस साल भारत में सोने की कीमतों में अब तक तीन फीसदी की गिरावट आई है। विश्लेषकों का कहना है कि सोने को केंद्रीय बैंकों और सरकारों के बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन पैकेजों से समर्थन मिलने की उम्मीद है। 

इस साल बढ़ सकती है सोने की मांग: डब्ल्यूजीसी

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के उबरने के साथ भारत में 2021 के दौरान उपभोक्ता भावनाओं में सुधार हो रहा है और सोने की मांग सकारात्मक दिखाई दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर में धनतेरस के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि आभूषणों की मांग औसत से कम थी, लेकिन इसमें पिछले साल की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून 2020) के निचले स्तर के मुकाबले काफी सुधार हुआ। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि कुछ समय के लिए अपनी पूर्ण क्षमता के मुकाबले सुस्त बनी रहेगी, लेकिन पिछले कुछ समय से सोने की कीमतों में स्थिरता के चलते उपभोक्ताओं के लिए खरीद के अवसर बढ़ेंगे। डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन जैसे देशों में आर्थिक सुधार की संभावना है, जिसे 2020 की शुरुआत में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। 



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Bank NPA may rise to 23-year high, says RBI | बैंकों के फंसे कर्ज 14.8% तक जा सकते हैं, यह लेवल 24 साल में सबसे ज्यादा होगा


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8 दिन पहले

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  • सरकारी बैंकों का ग्रॉस एनपीए सितंबर 2020 में 9.7% था, सितंबर 2021 में 16.2% हो सकता है
  • इस दौरान निजी बैंकों का ग्रॉस एनपीए 4.6% से बढ़ कर 7.9% तक जा सकता है
  • परिस्थितियां बिगड़ीं तो सरकारी बैंकों का एनपीए 17.6% और निजी बैंकों का 8.8% हो सकता है

आरबीआई ने बैंकों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उसने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण बैंकों को जो छूट दी गई थीं, उनके वापस लेने के बाद उन्हें पूंजी की दिक्कत हो सकती है। इसका असर उनकी बैलेंस शीट पर भी दिख सकता है। आरबीआई ने सोमवार को छमाही फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट जारी की। इसकी प्रस्तावना में गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह बात लिखी है।

मार्च 2020 में एनपीए 8.4%, सितंबर 2020 में 7.5% था
रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2021 में बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) 13.5% तक जा सकते हैं। हालात खराब हुए तो यह 14.8% तक पहुंच सकता है। यह 24 साल में सबसे अधिक होगा। इससे पहले 1996-97 में बैंकों का ग्रॉस एनपीए 15.7% था। मार्च 2020 में यह 8.4% और सितंबर 2020 में 7.5% था।

रियायतें वापस लेने के बाद बाहर आएगी बैंकों की समस्या
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि महामारी के कारण सिस्टम में कैश बढ़ा। बैंकों के लिए कर्ज देने की शर्तों में भी ढील दी गई। अब जब रेगुलेटरी छूट वापस ली जा रही हैं, तो ऐसे में बैंकों की समस्या बाहर आ सकती है। महामारी और लॉकडाउन के कारण लाखों लोगों की नौकरी जाने के बाद पिछले साल आरबीआई ने लोगों और कंपनियों के कर्ज की एक बार रिस्ट्रक्चरिंग करने की इजाजत दी थी। बैंकों को इस बात की इजाजत भी दी गई थी कि वे चाहें तो कर्ज लेने वालों को किस्तें चुकाने में 6 महीने तक छूट दे सकते हैं।

सरकार ज्यादा कर्ज ले रही है, इससे बैंकों पर दबाव बढ़ा है
दास के अनुसार महामारी के कारण सरकार को रेवेन्यू कम मिल रहा है। खर्च करने के लिए वह बाजार से ज्यादा कर्ज ले रही है। इससे बैंकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में ऐसे फैसले लिए गए ताकि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके। अब ऐसे फैसले किए जा रहे हैं जिनसे रिकवरी में मदद मिले।



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Indias vehicle exports decreased by 18.87 percent in 2020: Siam


भारत का वाहन निर्यात 2020 में 18.87 प्रतिशत कम हुआ: सिआम

सिआम ने कहा कि पिछले साल भारत से 38,65,138 वाहनों का निर्यात किया गया. (सांकेतिक तस्वीर)

नई दिल्ली:

कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित वर्ष 2020 में भारत से वाहनों का निर्यात 18.87 प्रतिशत कम हो गया. वाहन विनिर्माता कंपनियों के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सिआम) के आंकड़ों में इसकी जानकारी मिली. सिआम ने कहा कि पिछले साल भारत से 38,65,138 वाहनों का निर्यात किया गया, जबकि 2019 में 47,63,960 वाहनों का निर्यात किया गया था. वाहनों के निर्यात में गिरावट आने का एक मुख्य कारण यात्री वाहनों का निर्यात कम हो जाना रहा. इस दौरान यात्री वाहनों का निर्यात साल भर पहले की 7,06,159 इकाइयों की तुलना में 39.38 प्रतिशत घटकर 4,28,098 इकाइयों पर आ गया.

इस दौरान यात्री कारों का निर्यात 47.89 प्रतिशत घटकर 2,76,808 इकाइयों पर आ गया. 2019 में 5,31,226 यात्री कारों का निर्यात किया गया था. यूटिलिटी वाहनों का निर्यात भी इस अवधि में 1,71,440 इकाइयों की तुलना में 12.60 प्रतिशत कम होकर 1,49,842 इकाइयों पर आ गया. निर्यात में प्रमुख योगदान देने वाले एक अन्य खंड दोपहिया में भी गिरावट देखने को मिली. इसका निर्यात 34,52,483 इकाइयों से 12.92 प्रतिशत कम होकर 30,06,589 इकाइयों पर आ गया. स्कूटरों का निर्यात 3,72,025 इकाइयों से 37.28 प्रतिशत गिरकर 2,33,327 इकाइयों पर आ गया.

मोटरसाइकिल का निर्यात भी 2020 में 9.87 प्रतिशत घटकर 27,64,301 इकाई रहा, जो 2019 में 30,67,153 इकाई था. इसी तरह, 2019 में 5,29,454 इकाइयों के निर्यात की तुलना में तीन-पहिया वाहनों का निर्यात 27.71 प्रतिशत कम होकर 3,82,756 इकाइयों पर आ गया. सिआम ने कहा कि कुल वाणिज्यिक वाहनों का निर्यात 2019 की 70,702 इकाइयों की तुलना में 2020 में 36.80 प्रतिशत घटकर 44,687 इकाई रहा.

Video: Audi A4 Facelift Review In Hindi

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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Diesel Petrol Price Today On 19 January 2021 In India: Know Rates According To Iocl – Petrol Diesel Price: पेट्रोल और डीजल के दामों में आज फिर लगी आग, जानिए कितनी पहुंची कीमत


बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 19 Jan 2021 07:18 AM IST

पेट्रोल-डीजल की कीमत
– फोटो : पीटीआई

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सरकारी तेल कंपनियों की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज फिर दूसरे दिन बढ़ोतरी हुई है। आज डीजल की कीमत में 24 से 25 पैसे की बढ़ोतरी हुई है तो वहीं पेट्रोल की भी 22 से 25 पैसे तक कीमत बढ़ी है।

जानें प्रमुख महानगरों में कितनी है कीमत
आईओसीएल से मिली जानकारी के अनुसार आज दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल और डीजल की कीमत इस प्रकार हैं-
 

शहर डीजल पेट्रोल
दिल्ली 75.38 85.20
कोलकाता 78.97 86.63
चेन्नई  80.67 87.85
मुंबई 82.13 91.80

(पेट्रोल-डीजल की कीमत प्रति रुपये लीटर में है।)

जानिए आपके शहर में कितना है दाम
पेट्रोल-डीजल की कीमत आप एसएमएस के जरिए भी जान सकते हैं। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, आपको RSP और अपने शहर का कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर भेजना होगा। हर शहर का कोड अलग-अलग है, जो आपको आईओसीएल की वेबसाइट से मिल जाएगा।

प्रतिदिन छह बजे बदलती है कीमत
बता दें कि प्रतिदिन सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है।

इन्हीं मानकों के आधार पर पर पेट्रोल रेट और डीजल रेट रोज तय करने का काम तेल कंपनियां करती हैं। डीलर पेट्रोल पंप चलाने वाले लोग हैं। वे खुद को खुदरा कीमतों पर उपभोक्ताओं के अंत में करों और अपने स्वयं के मार्जिन जोड़ने के बाद पेट्रोल बेचते हैं। पेट्रोल रेट और डीजल रेट में यह कॉस्ट भी जुड़ती है।

सरकारी तेल कंपनियों की ओर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज फिर दूसरे दिन बढ़ोतरी हुई है। आज डीजल की कीमत में 24 से 25 पैसे की बढ़ोतरी हुई है तो वहीं पेट्रोल की भी 22 से 25 पैसे तक कीमत बढ़ी है।

जानें प्रमुख महानगरों में कितनी है कीमत

आईओसीएल से मिली जानकारी के अनुसार आज दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में एक लीटर पेट्रोल और डीजल की कीमत इस प्रकार हैं-

 

शहर डीजल पेट्रोल
दिल्ली 75.38 85.20
कोलकाता 78.97 86.63
चेन्नई  80.67 87.85
मुंबई 82.13 91.80

(पेट्रोल-डीजल की कीमत प्रति रुपये लीटर में है।)

जानिए आपके शहर में कितना है दाम

पेट्रोल-डीजल की कीमत आप एसएमएस के जरिए भी जान सकते हैं। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, आपको RSP और अपने शहर का कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर भेजना होगा। हर शहर का कोड अलग-अलग है, जो आपको आईओसीएल की वेबसाइट से मिल जाएगा।

प्रतिदिन छह बजे बदलती है कीमत

बता दें कि प्रतिदिन सुबह छह बजे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है। सुबह छह बजे से ही नई दरें लागू हो जाती हैं। पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है।

इन्हीं मानकों के आधार पर पर पेट्रोल रेट और डीजल रेट रोज तय करने का काम तेल कंपनियां करती हैं। डीलर पेट्रोल पंप चलाने वाले लोग हैं। वे खुद को खुदरा कीमतों पर उपभोक्ताओं के अंत में करों और अपने स्वयं के मार्जिन जोड़ने के बाद पेट्रोल बेचते हैं। पेट्रोल रेट और डीजल रेट में यह कॉस्ट भी जुड़ती है।



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Bad News For Home Buyers; Cement Steel Price Hike, Cost Of Building House Increased By Rs 150 Per Square Foot | स्टील महंगा होने से कंस्ट्रक्शन खर्च बढ़ा, बढ़ सकते हैं घरों के दाम


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नई दिल्ली8 दिन पहले

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स्टील के आसमान छूते भाव अब खरीदारों को भी परेशान करने वाले हैं। आने वाले दिनों में घरों की कीमत बढ़ेगी। डेवलपर्स के अनुसार स्टील के दाम बढ़ने की वजह से घर बनाने का खर्च प्रति वर्ग फुट 150 रुपए तक बढ़ गया है। इससे एक हजार स्क्वायर फीट के घर की कीमत 1.5 लाख रुपए तक बढ़ सकती है।

एक हफ्ते में स्टील 2,750 रुपए प्रति टन महंगा हुआ

बीते एक साल के दौरान मुंबई में स्टील का थोक भाव 55% बढ़कर 58 हजार रुपए प्रति टन पर पहुंच गया है। यह 1 जनवरी 2020 को 37.5 हजार रुपए प्रति टन था। ब्रोकरेज कंपनी इडलवाइज के मुताबिक थोक स्टील का दाम बीते एक हफ्ते में 2,750 रुपए प्रति टन बढ़ा है। इसके बाद स्टील डीलरों ने भी दाम बढ़ाए हैं।

घर बनाने में प्रति स्क्वायर फीट 10 किलो स्टील का इस्तेमाल

मध्य प्रदेश क्रेडाई के अध्यक्ष वासिक हुसैन ने बताया कि घर बनाने में प्रति स्क्वायर फीट 10 किलो स्टील का इस्तेमाल होता है। कीमत बढ़ने से इसकी लागत 550 रुपए से 600 रुपए के करीब हो गई है, जो पहले 400 रुपए थी। यानी एक औसत घर जिसका क्षेत्रफल दो हजार स्क्वायर फीट है, उसे बनाने का खर्च करीब 3 लाख रुपए तक बढ़ जाएगा। इसका सीधा असर घर खरीदारों की जेब पर पड़ेगा।

कच्चे माल की भी कीमत बढ़ी

कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले स्टील का ज्यादातर उत्पादन दक्षिणी और पूर्वी क्षेत्रों के छोटे और सेकंडरी मिल करते हैं। कोरोना के कारण कामगारों की कमी और कच्चे माल के आसमान छूते भाव की वजह से इनका उत्पादन घटा है। सरकारी खनन कंपनी NMDC ने आयरन ओर की कीमत बीते 6 महीने में 135% बढ़ा दी है। दिसंबर में इसकी कीमत 4,610 रुपए टन हो गई, जो जून में 1,960 रुपए प्रति टन थी।

स्टील की बढ़ती कीमत से सरकार चिंतित

स्टील की बढ़ती कीमत पर सरकार भी चिंतित है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को स्टील उत्पादक कंपनियों के साथ-साथ सीमेंट कंपनियों को भी कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि स्टील और सीमेंट बढ़ते भाव से सरकार की परियोजनाओं को झटका लगेगा। सरकार की योजना 5 सालों में करीब 111 लाख करोड़ रुपए निवेश करने की है।

समस्या के निदान के लिए रेगुलेटर की जरूरत

गडकरी ने कहा कि स्टील और सीमेंट की कीमत पर नियंत्रण के लिए एक रेगुलेटर का सुझाव है, लेकिन यह उनके हाथ में नहीं। हालांकि इसके लिए वो वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री से बात करेंगे।

आगे भी स्टील और सीमेंट के बढ़ते भाव से नहीं मिलेगी राहत

वासिक हुसैन कहते हैं कि अगर स्टील उत्पादक कंपनियां सांठगांठ कर भाव बढ़ा रहीं हैं, तो यह कंपनी एक्ट के खिलाफ है। यानी एक तरह का अपराध है। कंपनियां मजदूरों के वेतन में तो कोई बढ़ोतरी नहीं कर रहीं हैं। दाम का बढ़ना आगे भी जारी रहने वाला है क्योंकि उन कंपनियों पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं है।



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Petrol, diesel prices at record high; check out latest details – Petrol Price Today: दिल्ली और मुंबई में पेट्रोल के दामों ने बनाया नया रिकॉर्ड, डीजल भी पीछे नहीं…


Petrol Price Today: दिल्ली और मुंबई में पेट्रोल के दामों ने बनाया नया रिकॉर्ड, डीजल भी पीछे नहीं...

Petrol Price: यह वृद्धि तीन दिन तक यथास्थिति बने रहने के बाद हुई है

नई दिल्ली:

Petrol Price Today: पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) के दाम में सोमवार को 25 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई. इसके साथ ही राजधानी में पेट्रोल की कीमत (Petrol Price) 85 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गई जबकि मुंबई में डीजल का दाम (Diesel Price) 82 रुपये लीटर के करीब पहुंच गया. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 84.95 रुपये प्रति लीटर पर अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई जबकि डीजल का दाम 75.13 रुपये प्रति लीटर हो गया. पेट्रोल, डीजल के दाम में सोमवार को यह वृद्धि तीन दिन तक यथास्थिति बने रहने के बाद हुई है. वाहन ईंधनों के दाम में इससे पहले 13 और 14 जनवरी को दो किस्तों में 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी. मुंबई में पेट्रोल की कीमत 91.56 रुपये लीटर पर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है. डीजल का दाम भी बढ़कर 81.87 रुपये लीटर हो गया है. मुंबई में इससे पहले 4 अक्टूबर 2018 को पेट्रोल का दाम सबसे अधिक 91.34 रुपये प्रति लीटर पर था जबकि डीजल का दाम भी रिकॉर्ड उच्चस्तर पर पहुंच गया था.

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों — इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) — ने 6 जनवरी से पेट्रोल, डीजल के दाम में दैनिक तौर पर संशोधन की शुरुआत की थी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बाद यह कदम उठाया गया.

विभिन्न देशों में कोरोना वायरस टीके की शुरुआत के बाद मांग बढ़ने की उम्मीद में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं. पेट्रोल, डीजल के दाम को हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के बेंचमार्क दाम के अनुरूप दैनिक आधार पर संशोधित करने की नीति है लेकिन पिछले साल कोरोना वायरस महामारी के फैलने के बाद से सरकार के नियंत्रण वाली सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां इनके दाम में नियंत्रित दायरे में रखे हुये हैं.

कोराना वायरस महामारी फैलने के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम काफी नीचे गिर गये थे. अप्रैल 2020 में इनका औसत मूल्य 19 डालर प्रति बैरल के दायरे में आ गया था. यही वजह है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल के दाम को नियंत्रित दायरे में रखने के लिये सरकार ने पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में 13 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट का समायोजन किया.

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इस समय एक लीटर पेट्रोल के दाम में 32.98 रुपये उत्पाद शुल्क लगता है जबकि दिल्ली में इस पर 19.32 रुपये प्रति लीटर का वैट लगता है. वहीं डीजल के दाम में 31.83 रुपये लीटर उत्पाद शुल्क शामिल होता है वहीं 12.84 रुपये का वैट लगता है. तेल कंपनियों की मूल्य अधिसूचना में यह दर्शाया गया है.

महानगरों में फिर महंगा हुआ पेट्रोल डीजल

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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Bse Sensex Nse Nifty Share Market Sensex Nifty Indian Indices Opened Higher All Sectors In Green Mark – Share Market Today: बढ़त पर खुले सेंसेक्स-निफ्टी, सभी सेक्टर्स हरे निशान पर


आज सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन यानी मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में रौनक लौटी और यह हरे निशान पर खुला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 359.64 अंक (0.74 फीसदी) की बढ़त के साथ 48,923.91 के स्तर पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 100.10 अंक यानी 0.70 फीसदी की बढ़त के साथ 14,381.40 के स्तर पर खुला। आज शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। 

999 शेयरों में आई तेजी 
आज 999 शेयरों में तेजी आई और 232 शेयरों में गिरावट आई। वहीं 28 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। केंद्रीय बजट से पहले निवेशक निवेश को लेकर चिंतित हैं क्योंकि ज्यादातर मार्केट विश्लेषकों के अनुसार, कोरोना के चलते इस बार का बजट उम्मीद के मुताबिक नहीं होगा, जिसकी वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 252.16 अंक या 0.51 फीसदी के लाभ में रहा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 86.45 अंक या 0.60 फीसदी चढ़ गया।

इस सप्ताह इन कारकों से तय होगी शेयर बाजार की दिशा
शेयर बाजारों की दिशा इस सप्ताह कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक घटनाक्रमों से तय होगी। विश्लेषकों का कहना है कि आगामी आम बजट से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव रह सकता है। इसके अलावा निवेशकों की निगाह कोविड-19 से जुड़े घटनाक्रमों, विशेषरूप से देश में टीकाकरण अभियान पर रहेगी। इस सप्ताह बैंक ऑफ महाराष्ट्र, बजाज फाइनेंस, फेडरल बैंक, एशियन पेंट्स, बजाज ऑटो और रिलायंस इंडस्ट्रीज के तिमाही नतीजे आने हैं। वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख के बीच इस सप्ताह घरेलू बाजारों की निगाह बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र पर रहेगी। कारोबारियों ने कहा कि देश में टीकाकरण शुरू होने के बाद शेयर मूल्यों में काफी बदलाव देखने को मिल सकता है। 

दिग्गज शेयरों का हाल
दिग्गज शेयरों की बात करें, तो आज शुरुआती कारोबार के दौरान टाटा स्टील और यूपीएल के अतिरिक्त सभी कंपनियों के शेयर हरे निशान पर खुले। शीर्ष बढ़त वाले शेयरों में गेल, एसबीआई, टोटो मोटर्स, ओएनजीसी और इंडसइंड बैंक शामिल हैं।

सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर
सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर डालें, तो आज सभी सेक्टर्स हरे निशान पर खुले। इनमें आईटी, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, फाइनेंस सर्विसेज, बैंक, मेटल, प्राइवेट बैंक, फार्मा, मीडिया, रियल्टी और ऑटो शामिल हैं।

प्री ओपन के दौरान यह था शेयर मार्केट का हाल
प्री ओपन के दौरान सुबह 9.03 बजे सेंसेक्स 131.62 अंक (0.27 फीसदी) ऊपर 48,695.89 के स्तर पर था। वहीं निफ्टी 52.40 अंक (0.37 फीसदी) ऊपर 14,333.70 के स्तर पर था।

2020 में बाजार में जारी रही उठा-पटक
शेयर बाजारों के लिए साल 2020 काफी घटनाक्रमों वाला रहा। मार्च 2020 में भारत में कोरोना वायरस महामारी ने दस्तक दी। कोरोना वायरस से शेयर बाजार भी अछूता नहीं रहा। घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव रहा। मार्च में जहां शेयर बाजार धड़ाम हुआ था, वहीं साल के अंत में सेंसेक्स-निफ्टी ने 2020 में हुए पूरे नुकसान की भरपाई कर ली। 

पिछले कारोबारी दिन गिरावट पर खुला था सेंसेक्स 
पिछले कारोबारी दिन सेंसेक्स सेंसेक्स 56.81 अंक (0.12 फीसदी) की कमजोरी के साथ 48,977.86 के स्तर पर खुला था। वहीं निफ्टी की शुरुआत 21.70 अंक यानी 0.15 फीसदी की गिरावट के साथ 14,412 के स्तर पर हुई थी। 

सोमवार को लाल निशान पर बंद हुआ था बाजार
सोमवार को दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद शेयर बाजार लाल निशान पर बंद हुआ था। सेंसेक्स 470.40 अंक यानी 0.96 फीसदी की गिरावट के साथ 48564.27 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 152.40 अंक (1.06 फीसदी) की गिरावट के साथ 14281.30 के स्तर पर बंद हुआ था। 



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From transparent TV to wireless vacuum cleaner; These products of Sony, Lenovo, LG and Panasonic can be launched today, see list | ट्रांसपेरेंट टीवी से लेकर वायरलेस वैक्यूम क्लीनर तक; आज लॉन्च हो सकते हैं सोनी, लेनोवो, एलजी और पैनासोनिक के ये प्रोडक्ट्स


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नई दिल्ली2 दिन पहले

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  • शो में सबसे ज्यादा लैपटॉप, डेस्कटॉप और गेमिंग लैपटॉप पर फोकस रहेगा
  • एलजी ट्रांसपेरेंट टीवी और मर्सिडीज बेंज हाइपरस्क्रीन भी सुर्खियां बटोरेंगी

दुनिया के सबसे बड़े कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो (CES) 2021 शुरू होने में सिर्फ कुछ ही घंटे बाकी है। 1950 से ज्यादा एग्जीबिटर्स शो में भाग लेंगे, जिसमें दुनियाभर के कई बड़े ब्रांड्स भी शामिल हैं। शो 11 से 14 जनवरी तक चलेगा। आज एलजी, सैमसंग, पैनासोनिक, टीसीएल, इंटेल और सोनी समेत कई ब्रांड्स अपनी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और इनोवेटिव प्रोडक्ट्स लॉन्च करेंगे।

चलिए एक नजर डालते हैं कि ये कंपनियां कौन से प्रोडक्ट लॉन्च करेंगी या कर सकती है…

1. लेनोवो
लेनोवो शो में नए लैपटॉप्स, ऑन इन वन डेस्कटॉप समेत कई प्रोडक्ट पेश करेगा।

  • लैपटॉप- आइडियापैड 5G, आइडियापैड 5 प्रो, एईसी लैवी प्रो मोबाइल, एईसी लैवी मिनी
  • डेस्कटॉप- योगा एआईओ 7 (ऑल इन वन पीसी)
  • स्मार्ट प्रोडक्ट- थिंकस्मार्ट साउंडबार, थिंकस्मार्ट कैम, थिंकस्मार्ट एडिशन टाइनी, थिंक रियलिटी ए3
  • टैबलेट- लेनोवो टैप पी11
  • मॉनिटर- लेनोवो L27e-30, लेनोवो L24i-30
  • सॉफ्टवेयर- शो मोड ऑन एलेक्सी फोर पीसी

शो में मोटोरोला पेश करेगी दमदार स्पेसिफिकेशन से लैस चार नए बजट स्मार्टफोन, जानिए कीमत से लेकर फीचर्स तक सबकुछ

2. सैमसंग
इवेंट में सैमसंग ढेर सारी नई टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट पेश करेगा। इनमें से कुछ कंपनी पहले ही अनाउंस कर चुकी है।

  • लैपटॉप- गैलेक्सी क्रोमबुक 2
  • टेक- सोलर रिमोट कंट्रोल, सी-लैब इंसाइड एंड सी-लैब आउटसाइड
  • टीवी- निओ-एईडी 8K QN900A, 4K QN90A और माइक्रो-एलईडी टीवी पैनल्स
  • स्मार्ट होम- BESPOKE रेफ्रिजरेटर 2021 मॉडल

3. एलजी
इवेंट में एलजी टीवी से लेकर रेफ्रिजरेटर तक के लिए नई टेक्नोलॉजी पेश करेगी

  • टेक- ट्रांसपेरेंट ओएलईडी, बेंडेबल सीएस-ओएलईडी
  • लैपटॉप- एलजी ग्राम 2021- 2021 एलजी ग्राम 14,16,17
  • स्मार्ट प्रोडक्ट्स- कोर्डजीरो थिंनक्यू A9 कम्प्रेशर प्लस वैक्यूम क्लीनर
  • टीवी- आईसेफ सर्टिफाइड टीवी डिस्प्ले
  • एलजी इंस्टा-व्यू रेफ्रिजरेटर्स

आज से शुरू हो रहा दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स शो, LG मुड़ने वाला टीवी करेगी लॉन्च

4. सोनी
सोनी की मेन कॉन्फ्रेंस 11 जनवरी को शुरू होगी लेकिन कंपनी पहले ही ब्राविया एक्सआर 2021 लाइनअप टीवी अनाउंस कर चुकी है।

  • टेक- बी-सीरीज और सी-सीरीज माइक्रो एलईडी डिस्प्ले
  • टीवी- ब्राविया एक्सआर सीरीज- 5 मॉडल- X90J, X95J, X93J, A80J, A90J 4K
  • सोनी 360 रियलिटी ऑडियो कम्पैटिबल स्पीकर्स- RA5000 SRS-RA3000

6. डेल
कंपनी शो में अपने लैपटॉप, पीसी और गेमिंग मॉनिटर पेश करेगी

  • लैपटॉप- डेल लेटीट्यूड 9420, 9520; लेटीट्यूड 7520,7420; लेटीट्यूड 7320 2-इन-1; लेटीट्यूड 5420
  • मॉनिटर- डेल अल्ट्रा-शार्प 40 कर्व्ड WUHD मॉनिटर, 24, 27, 34 इंच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मॉनिटर

7. अन्य

  • पैनासोनिक JZ2000 4K ओएलईडी टीवी
  • हाईसेंस VIDAA U5 OS, हाईसेंस 8K ULED TVs
  • मोटोरोला स्मार्टफोन (वन 5जी ऐस, मोटो जी स्टाइलस 2021, मोटो जी पावर 2021, मोटो जी प्ले 2021)
  • मर्सिडीज बेंज हाइपरस्क्रीन
  • कोलहर वॉयस एक्टिवेटेड बाथटब

बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप एथर एनर्जी से लेकर एक्सेसरीज बनाने वाली जीरो-वन तक, ये 9 भारतीय कंपनियां इवेंट में पेश करेंगी अपने इनोवेशन



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Dr Prannoy Roy and Global investor Ruchir Sharma discuss top 10 trends of the year 2021: highlights – वर्ष 2021 में ग्लोबल इकोनॉमी के टॉप 10 ट्रेंड पर डॉ. प्रणय रॉय और निवेशक रुचिर शर्मा की चर्चा : हाईलाइट्स


नई दिल्ली:

एनडीटीवी के प्रणय रॉय ने 2021 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के टॉप 10 ट्रेंड्स पर वैश्विक निवेशक और लेखक रुचिर शर्मा से चर्चा की. शर्मा के अनुसार, इस साल महंगाई के साथ इस साल ब्याज दर बढ़ने के आसार हैं. यह संभवतः प्रापर्टी में निवेश करने का सबसे बेहतर समय है और विकासशील देश जबरदस्त वापसी करेंगे. डॉ. रॉय के शो की ये खास बातें रहीं. 

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2021 के टॉप ट्रेंड में अर्थव्यवस्था में उभार और शेयर बाजार में सुस्ती दिख सकती है. महंगाई फिर बढ़ सकती है. ब्याज दरों मे उछाल देखने को मिल सकता है. यह प्रापर्टी खरीदने का सबसे बेहतर वक्त होगा. अमेरिकी डॉलर में गिरावट दिखेगी. कमोडिटी की मांग फिर तेज पकड़ सकती है. विकासशील देश फिर वापसी करेंगे.डिजिटल क्रांति और तेजी से पैठ बनाएगी. साथ ही नई चुनौतियां उभरेंगी. भारत छोड़कर अन्य जगहों पर टीवी का चलन बेहद कम हो सकता है.

ट्रेंड 1 :अर्थव्यवस्था में उभार, शेयर बाजार में सुस्ती 

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ट्रेंड 2  :महंगाई बढ़ेगी

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ट्रेंड 3 : ब्याज दरें भी बढ़ सकती हैं.

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ट्रेंड 4 :यह प्रापर्टी खरीदने का सबसे बेहतर समय

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ट्रेंड 5 : अमेरिकी डॉलर में गिरावट आएगी

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ट्रेंड 6 : कमोडिटी मांग में फिर मजबूती आएगी

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ट्रेंड 7  : विकासशील देश फिर वापसी करेंगे

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ट्रेंड 8  : डिजिटल क्रांति का दायरा बढ़ेगा

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ट्रेंड 9  :चुनौती देने वाले नए लोगों का उदय

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Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana Scheme News: Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana Completes 5 Years Of Operation Farmers Can Take Benefit Of Scheme – प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: किसानों की सुरक्षा के लिए शुरू हुई इस सरकारी योजना के पांच वर्ष पूरे, करोड़ों अन्नदाताओं को हुआ लाभ


बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 13 Jan 2021 11:44 AM IST

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पांच वर्ष पूरे
– फोटो : twitter: @BJP4Delhi

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किसानों को ज्यादा लाभ पहुंचाने कि लिए सरकार समय-समय पर एलान करती रहती है। किसानों को सबसे कम प्रीमियम पर एक व्यापक फसल जोखिम बीमा समाधान प्रदान करने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को आज पांच साल हो गए हैं। सरकार की एक उल्लेखनीय पहल के रूप में इस योजना को 13 जनवरी 2016 को लागू किया गया था। इस मौके पर सरकार ने इसका भरपूर लाभ उठाने को कहा है ताकि किसान आत्मनिर्भर हो सकें। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाभार्थी किसानों को बधाई दी और कहा कि इससे करोड़ों किसानों को लाभ हुआ है। मोदी ने ट्वीट कर कहा कि, ‘इस स्कीम के तहत नुकसान का कवरेज बढ़ने और जोखिम कम होने से करोड़ों किसानों को लाभ हुआ है। इसके सभी लाभार्थियों को मेरी बहुत-बहुत बधाई।’

योजना की खास बातें

  • योजना के अंतर्गत 33 फीसदी और उससे अधिक फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसानों को राहत प्रदान की जाती है जो पहले 50 फीसदी नुकसान की स्थिति में दी जाती थी। 
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना न सिर्फ किसानों की आजीविका की रक्षा करती है बल्कि टिकाऊ खेती सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाती है।
  • प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से किसान अब आसानी से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अपना नामांकन करवा सकते हैं।
  • ड्रोन जैसी टेक्नोलॉजी के उपयोग से अब फसल के नुकसान का आकलन करने में तेजी आई है और दावों के त्वरित निपटारे को बढ़ावा भी मिला है।


 

40,700 रुपये हुई औसत बीमित राशि 
इसमें किसान के हिस्से के अतिरिक्त प्रीमियम का खर्च राज्यों और भारत सरकार द्वारा समान रूप से सहायता के रूप में दिया जाता है। पूर्वोत्तर राज्यों में 90 फीसदी प्रीमियम सहायता भारत सरकार देती है। सरकार ने किसानों से आग्रह किया कि वे संकट के समय में आत्मनिर्भर बनने के लिए योजना का लाभ उठाएं और एक आत्मनिर्भर किसान तैयार करने का समर्थन करें। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार योजना के तहत औसत बीमित राशि बढ़ाकर 40,700 रुपये कर दी गई है, जो पूर्व की योजनाओं के दौरान प्रति हेक्टेयर 15,100 रुपये थी। 

योजना में प्रतिकूल परिस्थितियों से होने वाला नुकसान भी शामिल
योजना में बुवाई से पूर्व चक्र से लेकर कटाई के बाद तक फसल के पूरे चक्र को शामिल किया गया है, जिसमें रोकी गई बुवाई और फसल के बीच में प्रतिकूल परिस्थितियों से होने वाला नुकसान भी शामिल है। बाढ़, बादल फटने और प्राकृतिक आग जैसे खतरों के कारण होने वाली स्थानीय आपदाओं और कटाई के बाद होने वाले व्यक्तिगत खेती के स्तर पर नुकसान को शामिल किया गया है। लगातार सुधार लाने के प्रयास के रूप में, इस योजना को सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक बनाया गया था, फरवरी 2020 में इसमें सुधार किया गया। 

अब तक 90,000 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान
कृषि मंत्रालय के अनुसार इस योजना में साल भर में 5.5 करोड़ किसानों के आवेदन आते हैं। अब तक, योजना के तहत 90,000 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया जा चुका है। आधार सीडिंग ने किसान के खातों में सीधे दावा निपटान में तेजी लाने में मदद की है। सरकार के अनुसार कोविड लॉकडाउन अवधि के दौरान भी लगभग 70 लाख किसानों को लाभ हुआ और इस दौरान 8741.30 करोड़ रुपये के दावे लाभार्थियों को हस्तांतरित किए गए।

किसानों को ज्यादा लाभ पहुंचाने कि लिए सरकार समय-समय पर एलान करती रहती है। किसानों को सबसे कम प्रीमियम पर एक व्यापक फसल जोखिम बीमा समाधान प्रदान करने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को आज पांच साल हो गए हैं। सरकार की एक उल्लेखनीय पहल के रूप में इस योजना को 13 जनवरी 2016 को लागू किया गया था। इस मौके पर सरकार ने इसका भरपूर लाभ उठाने को कहा है ताकि किसान आत्मनिर्भर हो सकें। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाभार्थी किसानों को बधाई दी और कहा कि इससे करोड़ों किसानों को लाभ हुआ है। मोदी ने ट्वीट कर कहा कि, ‘इस स्कीम के तहत नुकसान का कवरेज बढ़ने और जोखिम कम होने से करोड़ों किसानों को लाभ हुआ है। इसके सभी लाभार्थियों को मेरी बहुत-बहुत बधाई।’

योजना की खास बातें

  • योजना के अंतर्गत 33 फीसदी और उससे अधिक फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसानों को राहत प्रदान की जाती है जो पहले 50 फीसदी नुकसान की स्थिति में दी जाती थी। 
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना न सिर्फ किसानों की आजीविका की रक्षा करती है बल्कि टिकाऊ खेती सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाती है।
  • प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से किसान अब आसानी से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अपना नामांकन करवा सकते हैं।
  • ड्रोन जैसी टेक्नोलॉजी के उपयोग से अब फसल के नुकसान का आकलन करने में तेजी आई है और दावों के त्वरित निपटारे को बढ़ावा भी मिला है।

 

40,700 रुपये हुई औसत बीमित राशि 

इसमें किसान के हिस्से के अतिरिक्त प्रीमियम का खर्च राज्यों और भारत सरकार द्वारा समान रूप से सहायता के रूप में दिया जाता है। पूर्वोत्तर राज्यों में 90 फीसदी प्रीमियम सहायता भारत सरकार देती है। सरकार ने किसानों से आग्रह किया कि वे संकट के समय में आत्मनिर्भर बनने के लिए योजना का लाभ उठाएं और एक आत्मनिर्भर किसान तैयार करने का समर्थन करें। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार योजना के तहत औसत बीमित राशि बढ़ाकर 40,700 रुपये कर दी गई है, जो पूर्व की योजनाओं के दौरान प्रति हेक्टेयर 15,100 रुपये थी। 

योजना में प्रतिकूल परिस्थितियों से होने वाला नुकसान भी शामिल

योजना में बुवाई से पूर्व चक्र से लेकर कटाई के बाद तक फसल के पूरे चक्र को शामिल किया गया है, जिसमें रोकी गई बुवाई और फसल के बीच में प्रतिकूल परिस्थितियों से होने वाला नुकसान भी शामिल है। बाढ़, बादल फटने और प्राकृतिक आग जैसे खतरों के कारण होने वाली स्थानीय आपदाओं और कटाई के बाद होने वाले व्यक्तिगत खेती के स्तर पर नुकसान को शामिल किया गया है। लगातार सुधार लाने के प्रयास के रूप में, इस योजना को सभी किसानों के लिए स्वैच्छिक बनाया गया था, फरवरी 2020 में इसमें सुधार किया गया। 

अब तक 90,000 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान

कृषि मंत्रालय के अनुसार इस योजना में साल भर में 5.5 करोड़ किसानों के आवेदन आते हैं। अब तक, योजना के तहत 90,000 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया जा चुका है। आधार सीडिंग ने किसान के खातों में सीधे दावा निपटान में तेजी लाने में मदद की है। सरकार के अनुसार कोविड लॉकडाउन अवधि के दौरान भी लगभग 70 लाख किसानों को लाभ हुआ और इस दौरान 8741.30 करोड़ रुपये के दावे लाभार्थियों को हस्तांतरित किए गए।





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Delhi HC Issues Notice Seeking Biyanis’ & Reliance’s Response In Amazon’s Appeal



The Delhi court on Wednesday issued notice to Kishore Biyani-led Future Retail Ltd (FRL) and Reliance Retail seeking response in Amazon’s plea challenging the prima facie observations by a single judge that the American e-commerce giant’s attempt to control the Indian entity was violative of FEMA and FDI rules. ALSO READ | Future Retail-Amazon Case: Amazon’s Objections No Longer Relevant As SEBI To Give Final Approval To FRL Scheme

A Division Bench of Chief Justice DN Patel and Justice Jyoti Singh heard the plea and the following arguments in the matter today. The bench then listed the case for further hearing on February 12.

Jeff Bezos led Amazon.com, Inc. on Monday urged the Delhi High Court divisional bench to set aside “certain prima facie observations” in the December 21 order of the single bench that allowed Future Group to continue its deal with Reliance Retail under Indian laws, a move that may further delay the Rs 24,713 crore deal.

The firm has contended that the observations are inconsistent with the findings in the SIAC emergency arbitral (EA) order of October 25, 2020 against FRL’s asset sale under a Rs 24,713 crore deal with Reliance Retail.

In January, 2021, Amazon wrote to Sebi yet again, asking it to suspend the “review of the Impugned Transaction as well as the scheme involving the Impugned Transaction” and not grant any no-objection to the Reliance-Future deal. The e-commerce giant also requested the market regulator to direct the Indian Stock Exchanges not to issue any letter of no objection/approval to Future Group.

ALSO READ | Amazon Moves Delhi HC’s Division Bench Seeking Relief In RIL-Future Deal 



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German passport is the most powerful in 2021 | जर्मन नागरिकों को ज्यादा देशों में वीजा फ्री एक्सेस, भारत के पासपोर्ट पर 18 देशों में जा सकते हैं बिना वीजा


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2 दिन पहले

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  • जर्मन पासपोर्ट होल्डर 99 देशों में बिना वीजा जा सकते है, 35 देशों में वीजा ऑन अराइवल सुविधा
  • ग्लोबल पासपोर्ट पावर रैंकिंग 2021 में पांचवें नंबर पर रहे जापान और साउथ कोरिया, भारत 61वें नंबर पर

कोविड-19 की वजह से दुनिया भर में लगे ट्रैवल बैन के चलते कम से कम तीन महीने लोगों का दूसरे देशों में जाना बंद रहा। इसको नजरअंदाज कर दें तो 2020 में जर्मनी सबसे ज्यादा देशों में वीजा फ्री एक्सेस के मामले में फिर अव्वल रहा। 1 से 77 तक की रैंकिंग वाले पासपोर्ट इंडेक्स के मुताबिक, वीजा फ्री एक्सेस के मामले में उसका पासपोर्ट सबसे मजबूत रहा है। जहां तक भारत की बात है तो ग्लोबल पासपोर्ट पावर रैंक 2021 में वह 61 पायदान पर जस का तस है। पिछले साल के मुकाबले उसके पासपोर्ट की ताकत घटी नहीं है।

जर्मन नागरिकों को 64 देशों में ही पहले वीजा लेना होता है

आर्टन कैपिटल पासपोर्ट इंडेक्स 2021 के मुताबिक, वीजा फ्री एक्सेस के मामले में जर्मनी के बाद दूसरे नंबर पर स्वीडन, फिनलैंड और स्पेन रहे हैं। टॉप 10 रैंकिंग में एशिया के जापान और साउथ कोरिया पांचवें नंबर पर रहे हैं। जहां तक जर्मनी की बात है तो इसके पासपोर्ट होल्डर 99 देशों में बिना वीजा जा सकते है और 35 देशों में पहुंचने पर वीजा दे दिया जाता है। सिर्फ 64 देशों में जाने के लिए इनको पहले से वीजा लेना होता है।

इंडियन पासपोर्ट पर बिना वीजा जा सकते हैं 18 देश

भारत अपने पासपोर्ट की ताकत के मामले में 61वें पायदान पर भूटान, बेनिन, गैबन, अल्जीरिया और फिलीपींस जैसे देशों के साथ है। इंडियन पासपोर्ट पर 18 देशों में बिना वीजा जाया जा सकता है जबकि 34 देशों में पहुंचने पर वीजा मिल जाता है। भारतीय पासपोर्ट धारकों को 146 देशों में जाने के पहले से वीजा लेना होता है। इस रैंकिंग के हिसाब से जिस देश के नागरिकों को बिना वीजा सबसे कम देशों में जाने की इजाजत है वह है इराक।

अमेरिका 19वें पायदान जबकि चीन 52वें नंबर पर है

अगर सुपर पावर्स की बात करें तो पासपोर्ट पावर रैंकिंग में सुपर पावर अमेरिका 19वें पायदान पर है। यहां के पासपोर्टहोल्डर्स को 62 देशों में बिना वीजा और 41 देशों में वीजा ऑन आइरवल की सुविधा मिली हुई है। लेकिन उनको 95 देशों में जाने के लिए पहले वीजा लेना होता है। रैंकिंग में चीन 52वें नंबर पर है जहां के पासपोर्ट धारकों को 137 देशों में जाने के लिए पहले से वीजा लेना होता है। चाइनीज पासपोर्टहोल्डर्स 25 देशों में वीजा फ्री एक्सेस है जबकि 36 देशों में वीजा ऑन अराइवल फैसिलिटी है।

पड़ोसी मुल्कों में सबसे कमजोर पाकिस्तान का पासपोर्ट

पासपोर्ट की ताकत के मामले में लगे हाथ पड़ोसी मुल्कों, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और लंका की रैंकिंग को भी जान लेते हैं। पड़ोसियों में सबसे कमजोर पासपोर्ट पाकिस्तान का है जो रैंकिंग में 74वें, नेपाल 72वें, बांग्लादेश 71वें और श्रीलंका 70वें नंबर पर है।



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Pandemic risk of real value of banks assets, capital shortage: RBI Governor


महामारी से बैंकों की संपत्ति का वास्तविक मूल्य घटने, पूंजी की कमी होने का जोखिम : RBI गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास – फाइल फोटो

मुंबई:

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि महामारी के कारण बैंकों में बही-खातों में संपत्ति का मूल्य घट सकता है और पूंजी की कमी हो सकती है. केन्द्रीय बैंक ने कहा कि खासतौर से नियामकीय राहतों को वापस लेने के साथ यह जोखिम हो सकता है.

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दास ने छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) की भूमिका में लिखा है कि नकदी स्थिति आसान होने और वित्तीय स्थिति बेहतर होने से बैंकों का वित्तीय मानदंड सुधरा है. हालांकि, उन्होंने कहा कि लेखांकन के स्तर पर उपलब्ध आंकड़े बैंकों में दबाव की स्पष्ट तस्वीर को नहीं दिखाते हैं. उन्होंने बैंकों से पूंजी बढ़ाने बढ़ाने के लिये मौजूदा स्थिति का उपयोग करने को कहा. साथ ही कारोबारी मॉडल में बदलाव लाने को कहा जो भविष्य में लाभकारी होगा.

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आरबीआई ने कोविड-19 संकट के बीच लोगों को राहत देने के लिये कर्ज लौटाने को लेकर छह महीने की मोहलत दी जो अगस्त में समाप्त हो गई. बाद में कर्जदारों को राहत देने के लिये एक बारगी कर्ज पुनर्गठन की घोषणा की. कई बैंकों खासकर निजी क्षेत्र के बैंकों ने महामारी के शुरूआती दिनों में पूंजी जुटायी. दास ने कहा कि राजकोषीय प्राधिकरणों को राजस्व की कमी का सामना करना पड़ रहा है और फलत: बाजार उधारी कार्यक्रम का विस्तार हुआ है. ‘‘इससे बैंकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है.”

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वित्तीय बाजारों के कुछ क्षेत्रों और वास्तविक अर्थव्यवस्था के बीच का अंतर हाल के दिनों में बढ़ा है. उन्होंने आगाह करते हुए यह भी कहा कि वित्तीय परिसंपत्तियों का बढ़ा हुआ मूल्य वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा करता है. उन्होंने कहा कि बैंकों और वित्तीय मध्यस्थों को इसका संज्ञान लेने की आवश्यकता है. दास ने कहा कि महामारी से हमें नुकसान हुआ है, आगे आर्थिक वृद्धि और आजीविका बहाल करने का काम करना है और इसके लिये वित्तीय स्थिरता पूर्व शर्त है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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Indian Economy May Rise 11 Percent In Next Financial Year – अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर, अगले वित्त वर्ष में 11 फीसदी हो सकती है आर्थिक वृद्धि: रिपोर्ट


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घरेलू रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार और निम्न तुलनात्मक आधार के प्रभाव के साथ अगले वित्त वर्ष में देश के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 11 फीसदी तक जा सकती है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिबंधों में छूट के बाद आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे कोविड-19 से पहले की स्थिति में पहुंच रहीं हैं। 

केवल वही क्षेत्र अभी पीछे हैं जहां सुरक्षित शारीरिक दूरी के नियमों के चलते कामकाज पूरी गति नहीं पकड़ पाया है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, ‘कोविड-19 से बचाव के लिए प्रभावी टीका विकसित करने में हुई प्रगति और घरेलू अर्थव्यवस्था में उम्मीद से बेहतर सुधार के संकेत मिलने के साथ ही निम्न तुलनात्मक आधार को देखते हुए हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी (स्थिर मूल्य के आधार पर) 11 फीसदी बढ़ सकती है। यह वृद्धि चालू वित्त वर्ष के दौरान 7 से 7.5 फीसदी की अनुमानित गिरावट की तुलना में होगी।’ 

कुछ क्षेत्रों में धीमी गति से होगा सुधार
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा चालू वित्त वर्ष (2020- 21) के लिए जारी जीडीपी वृद्धि के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक देश के सकल घरेलू उत्पाद में 7.7 फीसदी की रिकॉर्ड गिरावट आएगी। रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी दमाही में अर्थव्यवस्था में सकारात्मक स्थिति के साथ वृद्धि दर्ज की जाएगी। हालांकि कुछ क्षेत्र जहां शारीरिक दूरी के नियमों के कारण गतिविधियां धीमी हैं वहां सुधार की गति धीमी बनी हुई है। 

कृषि क्षेत्र में बरकरार रहेगी वृद्धि 
रिपोर्ट के मुताबिक, इन तमाम बातों के बावजूद टीका विकसित होने के बाद अगले वित्त वर्ष के लिए परिदृश्य में सुधार आया है। इसमें कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में अगले वित्त वर्ष में भी 3.5 फीसदी की वृद्धि बरकरार रहेगी। हालांकि उसने कहा है कि यह अनुमान सामान्य मानसून और कृषि सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन पर आधारित हैं। एजेंसी के मुताबिक 2021- 22 में औद्योगिक क्षेत्र में 11.5 फीसदी और सेवा खेत्र में 11 से 12 फीसदी तक वृद्धि हासिल हो सकती है।

घरेलू रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक गतिविधियों में सुधार और निम्न तुलनात्मक आधार के प्रभाव के साथ अगले वित्त वर्ष में देश के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 11 फीसदी तक जा सकती है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिबंधों में छूट के बाद आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे कोविड-19 से पहले की स्थिति में पहुंच रहीं हैं। 

केवल वही क्षेत्र अभी पीछे हैं जहां सुरक्षित शारीरिक दूरी के नियमों के चलते कामकाज पूरी गति नहीं पकड़ पाया है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, ‘कोविड-19 से बचाव के लिए प्रभावी टीका विकसित करने में हुई प्रगति और घरेलू अर्थव्यवस्था में उम्मीद से बेहतर सुधार के संकेत मिलने के साथ ही निम्न तुलनात्मक आधार को देखते हुए हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी (स्थिर मूल्य के आधार पर) 11 फीसदी बढ़ सकती है। यह वृद्धि चालू वित्त वर्ष के दौरान 7 से 7.5 फीसदी की अनुमानित गिरावट की तुलना में होगी।’ 

कुछ क्षेत्रों में धीमी गति से होगा सुधार

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा चालू वित्त वर्ष (2020- 21) के लिए जारी जीडीपी वृद्धि के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक देश के सकल घरेलू उत्पाद में 7.7 फीसदी की रिकॉर्ड गिरावट आएगी। रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी दमाही में अर्थव्यवस्था में सकारात्मक स्थिति के साथ वृद्धि दर्ज की जाएगी। हालांकि कुछ क्षेत्र जहां शारीरिक दूरी के नियमों के कारण गतिविधियां धीमी हैं वहां सुधार की गति धीमी बनी हुई है। 

कृषि क्षेत्र में बरकरार रहेगी वृद्धि 

रिपोर्ट के मुताबिक, इन तमाम बातों के बावजूद टीका विकसित होने के बाद अगले वित्त वर्ष के लिए परिदृश्य में सुधार आया है। इसमें कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में अगले वित्त वर्ष में भी 3.5 फीसदी की वृद्धि बरकरार रहेगी। हालांकि उसने कहा है कि यह अनुमान सामान्य मानसून और कृषि सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन पर आधारित हैं। एजेंसी के मुताबिक 2021- 22 में औद्योगिक क्षेत्र में 11.5 फीसदी और सेवा खेत्र में 11 से 12 फीसदी तक वृद्धि हासिल हो सकती है।



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Reliance Approaches Punjab, Haryana High Courts Over Vandalism Incident; Says ‘No Plan To Enter Corporate Farming’



New Delhi: In the wake of the recent vandalism incidents, Reliance Industries Limited (RIL) knocked the doors of the Punjab and Haryana High Court today seeking that the government safeguard its assets and services in both the states against the “miscreants” who damaged number of its telecom towers few days ago.

As per the company, the mobile service installations were damaged allegedly by farmers angry over the company’s perceived role in framing three agricultural laws recently passed by Parliament.

In a petition filed in the Punjab and Haryana High Court on Monday, the company has sought the urgent intervention of Government authorities to bring a complete stop to the “illegal acts” of vandalism by miscreants.

In a statement, the RIL said that these acts of violence have endangered the lives of thousands of its employees and caused damage and disruption to the vital communications infrastructure, sales and service outlets run by its subsidiaries in the two states.

In a statement released, the company has stated: “The miscreants indulging in vandalism have been instigated and aided by vested interests and our business rivals. Taking advantage of the ongoing farmers’ agitation near the national capital, these vested interests have launched an incessant, malicious and motivated vilification campaign against Reliance, which has absolutely no basis in truth.”

It has sought punitive and deterrent action against miscreants and vested interests

Elaborating further, it said “the falsehood of the campaign becomes crystal clear from the following irrefutable facts, which we have placed before the Honourable High Court. These facts establish that Reliance has nothing whatsoever to do with the three farm laws currently debated in the country, and in no way benefits from them. As such, the sole nefarious purpose of linking the name of Reliance to these laws is to harm our businesses and damage our reputation.”

It listed down several points emphasizing that it has no plans to enter agriculture business. It stated that Reliance Retail Limited (RRL), Reliance Jio Infocomm Limited (RJIL), or any other affiliate of our parent company, i.e., Reliance Industries Limited have not done any “corporate” or “contract” farming in the past, and have absolutely no plans to enter this business.

“Neither Reliance nor any of our subsidiaries has purchased any agricultural land, directly or indirectly, in Punjab/Haryana or anywhere else in India, for the purpose of corporate or contract farming. We have absolutely no plans to do so,” it stated.

Reliance Retail does not purchase any food grains directly from farmers and has never entered into long-term procurement contracts to gain unfair advantage over farmers or sought that its suppliers buy from farmers at less than remunerative prices, nor will it ever do so, the statement read.

“We at Reliance have immense gratitude and the greatest respect for India’s kisans, who are the ‘ANNA DATA’ of 1.3 billion Indians. Reliance and its affiliates are committed to doing everything to enrich and empower them. As customers of their services, we believe in building a strong and equal partnership with Indian farmers on the basis of shared prosperity, inclusive development and an equitable New India,” it said.

Reliance said it seeks significant augmentation of  farmers’ incomes and said that it shall insist on our suppliers to strictly abide by the Minimum Support Price (MSP) mechanism, and/or any other mechanism for remunerative price for farm produce, as may be determined and implemented by the government.

The company enumerated how the businesses of Reliance have actually benefited the farmers and the Indian public at large:

  1. Reliance Retail has built India’s largest organized retail business by investing in economies of scale and creating world-class technology-enabled supply chains, which has brought significant gains to both Indian farmers and consumers.
  2. Jio’s fully 4G network has provided world-class data connectivity to every single village in India at the most affordable rates anywhere in the world, thus bringing the benefits of the Digital Revolution to crores of Indian farmers. In just four short years, Jio has become India’s largest digital service provider, with 40 crore loyal customers. As of 31st October 2020, Jio has more than 140 lakh subscribers in Punjab (approximately 36% subscribers in the state) and 94 lakh in Haryana (approximately 34 % subscribers in the state). Unlike the vested interests, Jio has not resorted to any coercive or unlawful measures to win over customers.
  3. During the ongoing COVID-19 pandemic, Jio’s network has become a lifeline for millions of farmers and others in rural and urban India. It has helped kisans, traders and consumers to participate in digital commerce. It has enabled professionals to work from home, and students to learn from home. It has aided teachers, doctors, patients, courts, various government and private offices, industries and charitable establishments. It has served people working to provide emergency, critical and life-saving services.

The company thanked the police of Punjab and Haryana, for their action against miscreants so far. It has urged the public and the media not be misguided by false information.



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Consumer News In Hindi : Uber launches new service, will now be able to book cars by the hour | उबर ने शुरू की नई ‘आवरली रेंटल्‍स’ सर्विस, अब घंटों के हिसाब से बुक कर सकेंगे कार


  • कंपनी ने ‘Hourly Rentals’ नाम की सर्विस को शुरू किया है
  • यह ऑन-डिमांड सर्विस 24 घंटे सातों दिन उपलब्‍ध रहेगी

दैनिक भास्कर

Jun 09, 2020, 10:41 AM IST

बेंगलुरु. उबर अपने ग्राहकों के लिए खास सुविधा लेकर आया है। इसके तहत वे अब कार घंटों के हिसाब से बुक कर सकेंगे। सोमवार को कंपनी ने ‘आवरली रेंटल्‍स’ (Hourly Rentals) नाम की इस सर्विस को शुरू किया है। यह ऑन-डिमांड सर्विस 24 घंटे सातों दिन उपलब्‍ध रहेगी। इस सर्विस के तहत लोग एक शहर से दूसरे में भी आ-जा सकते हैं।

कितना देना होगा किराया?
इस सेवा की शुरुआत 189 रुपयए घंटे/ प्रति 10 किमी पैकेज से होगी। इसमें राइडर्स को कई अन्य पैकेज भी ऑफर किए जाएंगे। लोग अपनी जरूरत के हिसाब से पैकेज चुन सकते हैं। इस सर्विस के तहत लोग अधिकतम 12 घंटे तक कार को बुक करा सकेंगे।

मिलेगी खुद की कार जैसी सुविधा
कंपनी ने बताया कि सफर करते हुए लोग जहां चाहेंगे, कार को रुकवा सकेंगे। इस दौरान ड्राइवर कार में ही रहेगा। बुकिंग के घंटों के दौरान वे कार को कहीं भी रोक और ले जा सकते हैं। कंपनी के अनुसार इसका मकसद ग्राहकों को अपनी कार जैसी सुविधा उपलब्‍ध कराना है।

इन शहरों में शुरू हुई सुविधा
यह सर्विस फिलहाल 17 शहरों में उपलब्‍ध है। इनमें दिल्‍ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्‍नई, जयपुर, पुणे, अहमदाबाद, भवनेश्‍वर, कोयंबटूर, लुधियाना, चंडीगढ़, कोच्‍च‍ि, लखनऊ, गुवाहाटी, कानपुर और भोपाल शामिल हैं।



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Maintenance Of Hygiene Standards Is Taken Care Of In The Manufacture Of Harvest Gold Bread – हार्वेस्ट गोल्ड ब्रेड के निर्माण में रखा जाता है स्वच्छता के मानकों का पूरा ध्यान


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27 साल पहले लोगों को स्वादिष्ट ब्रेड खिलाने के लिए भिवाड़ी के एक कमरे में शुरू किया गया हार्वेस्ट गोल्ड आज एक विश्वस्तरीय ब्रांड बन चुका है। दिल्ली एनसीआर में पांच फैक्ट्रियों के साथ, डिस्कवरी चैनल के “द ग्रेट इंडियन फैक्ट्री सीरीज” में भी हार्वेस्ट गोल्ड का कार्यालय दर्शन कराया जा चुका है। हार्वेस्ट गोल्ड अपने उत्पादों, जैसेकि, बन, पाव, कुल्चा, बर्गर बन, रोटी, रस्क आदि के द्वारा लाखों घरों तक पहुंच चुका है। आज के मुश्किल समय में भी लोगों को अच्छा उत्पाद उपलब्ध करानाअपनी जिम्मेदारी समझते हुए, हार्वेस्ट गोल्ड नित्य नए परिवर्तन कर रहा है।

वर्तमान समय में स्वच्छता व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आवश्यक हो गया है। विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव के लिए ये उपाय अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो रहे हैं। इसके द्वारा हम न सिर्फ अपनी सुरक्षा करते हैं बल्कि अन्य लोगों को भी इन बीमारियों से बचाते हैं। स्वच्छता व सोशल डिस्टेंसिंग ही इन बीमारियों के संक्रमण से बचने का सबसे कारगर हथियार है। कुछ ऐसा ही मानना है हार्वेस्ट गोल्ड का और इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने उत्पादन में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं।

इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हार्वेस्ट गोल्ड ने कोविड-19 संक्रमण से बचाव हेतु सारे नए मानकों को अपना कर अपनी स्वच्छता की परम्परा को आगे बढ़ाया है। हार्वेस्ट गोल्ड को हमेशा से उच्च गुणवत्ता के उत्पादों के लिए जाना गया है। इनकी क्वालिटी पॉलिसी में उत्पादन युनिट को स्वच्छ रखना अनिवार्य है। इस स्वच्छता को बरकरार रखने के लिए फैक्ट्री को सैनिटाइज़ कराना, सभी कर्मचारियों द्वारा हेड मास्क पहनना, अपने हाथों को हर थोड़ी देर में धोना व आईपीए हैंड सैनिटाइजर द्वारा उन्हें स्वच्छ रखना आवश्यक है। 

वर्तमान समय में जिन कर्मचारियों का उत्पादन युनिट में आना जरूरी है, उनके लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। सारे कर्मचारियों के लिए उत्पादन युनिट में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही उन्हें कोविड-19 से जुड़े भ्रम व तथ्यों के बारे में विशेषज्ञों के द्वारा सूचित भी किया गया है।

हार्वेस्ट गोल्ड के उत्पादन युनिट के हर प्रवेश द्वार पर सभी कर्मचारियों की थर्मल स्क्रीनिंग के द्वारा तापमान की जांच की जाती है। इसके अलावा डिलीवरी करने वाले ट्रकों को सैनिटाइज़ करना शुरू कर दिया है। साथ ही ट्रक चालकों की थर्मल स्क्रीनिंग जैसे कई महत्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं।

इनके द्वारा की गई नई पहल इस प्रकार है:

  • कोविड-19 के बारे में अपने सभी कर्मचारियों को सही जानकारी उपलब्ध कराना।
  • उत्पादन युनिट व बाहर, हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना।
  • उत्पादन युनिट व डिलीवरी वाले ट्रक में स्वच्छता बरकरार रखना।
  • महत्वपूर्ण वस्तुएं जैसे कच्चे माल लाने वाले ट्रक, ब्रेड रखने वाले क्रेट व कार्टन, आदि को सैनेटाइज़ करना।
  • कर्मचारियों की बसों को सैनेटाइज़ करना।
  • नियमित रूप से डॉक्टर द्वारा प्रत्येक कर्मचारियों की जांच कराना।

उत्पादन युनिट के साथ-साथ हार्वेस्ट गोल्ड की सेल्स टीम ने भी मुश्किल दौर में अपना योगदान दिया है। खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिलीवरी करना। लॉकडाउन का समय वरिष्ठ नागरिकों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा है। इस संकट की घड़ी में हार्वेस्ट गोल्ड ने अपने उत्पादों को वरिष्ठ नागरिकों के घर तक पहुंचा रहा है। जिसका लाभ ढेरों बुजुर्गों को हुआ है।

हार्वेस्ट गोल्ड समाज के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभाता है। अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिल्टी (सीएसआर) के तहत कंपनी ने ‘प्रोजेक्ट एंपावर’ नाम की एक नई पहल की शुरूआत की है। इसके अंतर्गत हार्वेस्ट गोल्ड रोजगार की तलाश कर रहे लोगों को मुफ्त में हाथ गाड़ी देती है, जिसके द्वारा वो सम्मानपूर्वक अपना जीवन यापन कर सकते हैं। हाथ गाड़ी के साथ साथ उन्हें इसे चलाने की ट्रेनिंग, आरडब्ल्यूए की अनुमति व अन्य सहायता भी प्रदान की गई है। इन हाथ गाड़ियों के द्वारा आम लोगों को ब्रेड, मक्खन, अण्डे आदि रोजमर्रा की चीजें आसानी से उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तक हार्वेस्ट गोल्ड ने 260 से ज्यादा हाथ गाड़ियां उपलब्ध कराई हैं। एक हाथ गाड़ी की सहायता से महीने में 10 से 15 हजार रुपए कमाए जा सकते हैं। 

कोविड-19 के समय में अपने इन महत्वपूर्ण परिवर्तनों द्वारा हार्वेस्ट गोल्ड ब्रेड ने अपनी परम्परा को बनाए रखा है और स्वच्छता मानको पर खरा उतरा है। हार्वेस्ट गोल्ड का प्रमुख उद्देश्य अपने कर्मचारियों व अपने  उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना है और वह अपने प्रयासों द्वारा सफल भी हो रहे हैं।

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सार

  • सालों से सुरक्षित व स्वच्छ ब्रेड का उत्पादन करता है हार्वेस्ट गोल्ड

विस्तार

27 साल पहले लोगों को स्वादिष्ट ब्रेड खिलाने के लिए भिवाड़ी के एक कमरे में शुरू किया गया हार्वेस्ट गोल्ड आज एक विश्वस्तरीय ब्रांड बन चुका है। दिल्ली एनसीआर में पांच फैक्ट्रियों के साथ, डिस्कवरी चैनल के “द ग्रेट इंडियन फैक्ट्री सीरीज” में भी हार्वेस्ट गोल्ड का कार्यालय दर्शन कराया जा चुका है। हार्वेस्ट गोल्ड अपने उत्पादों, जैसेकि, बन, पाव, कुल्चा, बर्गर बन, रोटी, रस्क आदि के द्वारा लाखों घरों तक पहुंच चुका है। आज के मुश्किल समय में भी लोगों को अच्छा उत्पाद उपलब्ध करानाअपनी जिम्मेदारी समझते हुए, हार्वेस्ट गोल्ड नित्य नए परिवर्तन कर रहा है।

वर्तमान समय में स्वच्छता व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना आवश्यक हो गया है। विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव के लिए ये उपाय अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो रहे हैं। इसके द्वारा हम न सिर्फ अपनी सुरक्षा करते हैं बल्कि अन्य लोगों को भी इन बीमारियों से बचाते हैं। स्वच्छता व सोशल डिस्टेंसिंग ही इन बीमारियों के संक्रमण से बचने का सबसे कारगर हथियार है। कुछ ऐसा ही मानना है हार्वेस्ट गोल्ड का और इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने उत्पादन में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं।



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