अगर मनुष्य इस एक चीज का नहीं जुटा पाया साहस तो सातों जन्म हो जाएंगे बेकार



खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।



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आयोडीन की कमी भारत में चिंता का विषय क्यों है, जानें इसके कारण


आयोडीन (Iodine) की कमी का दिन, जिसे वैश्विक आयोडीन की कमी विकार (आयोडीन डिफिशिएंसी डिसऑर्डर IDD) रोकथाम दिवस के रूप में भी जाना जाता है, हर साल 21 अक्टूबर को आयोजित होता है. इस दिन को सेलिब्रेट करने का उद्देश्य लोगों के बीच आयोडीन- इस सूक्ष्म पोषक तत्व की जरूरत के बारे में जागरुकता फैलाना है. थायराइड सही तरीके से कार्य करे, मस्तिष्क का विकास हो सके और ओवरऑल ग्रोथ भी बनी रहे इन सबके लिए शरीर को आयोडीन की जरूरत होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि IDD, मस्तिष्क क्षति का सबसे प्रचलित कारण है, बावजूद इसके इसे आसानी से रोका जा सकता है.

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि IDD की समस्या बच्चे के जन्म से पहले ही शुरू हो सकती है और बच्चे के अस्तित्व को भी खतरे में डाल सकती है क्योंकि अगर गर्भवती महिला के शरीर में आयोडीन की कमी हो तो स्टिलबर्थ (गर्भ में ही बच्चे का मरना) का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा गर्भ में पल रहे बच्चे में विकास से जुड़ी समस्याएं, बौद्धिक कमी, जन्मजात असामान्यताएं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं.

आयोडीन की कमी पर अपने ग्लोबल डेटाबेस पर आधारित रिपोर्ट में WHO का कहना है कि वैसे तो कई देश ऐसे हैं जिन्होंने आयोडीन युक्त नमक का व्यापक इस्तेमाल कर अपने यहां आयोडीन की कमी की समस्या को दूर करने में सक्षम हो गए हैं, लेकिन 54 देश अब भी ऐसे हैं जहां आयोडीन की कमी देखने को मिलती है. IDD को कंट्रोल करने के लिए प्राथमिक रणनीति के तौर पर वैश्विक नमक आयोडीज़ेशन का काम साल 1993 में शुरू किया गया था और अधिकांश देशों ने इस स्वास्थ्य समस्या पर काबू पाने में सफलता हासिल की.भारत में आयोडीन की कमी का अदृश्य हाथ
इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (IJMR) में साल 2013 में प्रकाशित एक अध्ययन से संकेत मिलता है कि भारत की संपूर्ण आबादी को आईडीडी का खतरा है क्योंकि हमारे यहां की मिट्टी में खनिज के तौर पर आयोडीन की कमी है. परिणामस्वरूप, भारत में उगाए जाने वाले विविध प्रकार के अनाज, दाल, फल, सब्जियां, सूखे मेवे और बीज में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन नहीं होता है. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप भारत में किस प्रकार का आहार खाते हैं क्योंकि सभी में आयोडीन की मात्रा बेहद कम है और इसलिए आयोडीन की इस कमी को पूरा करने के लिए आयोडी से फॉर्टिफाइड (मजबूत बनाए गए) नमक को सप्लिमेंट के तौर पर लेना जरूरी है.

साल 2012 में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा किए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत में करीब 35 करोड़ लोग ऐसे हैं जो पर्याप्त मात्रा में आयोडीन युक्त नमक का सेवन नहीं करते हैं और इसलिए उन्हें आईडीडी होने का खतरा बना रहता है. अध्ययन से पता चलता है कि वर्तमान समय में, करीब 91% भारतीय घरों में आयोडीन युक्त नमक की पहुंच है, लेकिन उनमें से केवल 71% ही ऐसे हैं जो इसका पर्याप्त मात्रा में सेवन करते हैं. यही वजह है कि साल 2012 तक IDD के राष्ट्रीय प्रसार को 10% से कम करने का भारत का लक्ष्य था, पूरा नहीं हो पाया था.

न्यूट्रिशन इंटरनैशनल, एम्स और इंडियन कोलिएशन फॉर कंट्रोल ऑफ आयोडीन डिफिशिएंसी डिसऑर्डर (ICCIDD)ने मिलकर एक सर्वेक्षण किया जिसके अनुसार, 2018-2019 में आयोडीन युक्त नमक का पर्याप्त मात्रा में सेवन करने वाले भारतीय परिवारों का प्रतिशत बढ़कर 82.1% हो गया. सर्वेक्षण से यह भी पता चला कि आयोडीन युक्त नमक के बारे में जागरूकता शहरी क्षेत्रों (62.2%) में ग्रामीण क्षेत्रों (50.5%) की तुलना में अधिक है और सर्वे में शामिल अधिकांश प्रतिभागियों ने आयोडीन को लेकर जागरूकता फैलाने में इलेक्ट्रॉनिक मास मीडिया अभियानों को उपयोगी माना.

आयोडीन की कमी (आईडीडी) के गंभीर प्रभाव
वैसे तो ये आंकड़े शाबाशी देने वाले हैं, बावजूद इसके आयोडीन युक्त नमक की अधिक जागरूकता और उपयोग की आवश्यकता भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है. आयोडीन युक्त नमक की अधिक से अधिक व्यापक खपत की आवश्यकता को उजागर करने के साथ-साथ, कई ऐसे अभियान भी चलाने की जरूरत है जिसमें आईडीडी के नकारात्मक प्रभावों को उजागर करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए, खासकर गर्भवती महिलाओं और परिवारों के बीच. आयोडीन की कमी (आईडीडी) के कुछ गंभीर प्रभाव निम्नलिखित हैं जिनसे भारतीय आबादी का अवगत होना जरूरी है :

1. उच्च शिशु मृत्यु दर : WHO का कहना है कि आयोडीन मां और भ्रूण के थायराइड हार्मोन के उत्पादन के लिए आवश्यक है. ये हार्मोन भ्रूण के ग्रोथ और विकास को नियंत्रित करते हैं, इसलिए यदि आयोडीन की गंभीर कमी हो जाती है, तो गर्भ में बच्चे के जीवित रहने की संभावना बहुत कम हो जाती है (स्टिलबर्थ), साथ ही जन्मजात असामान्यताएं भी पैदा हो सकती हैं.

2. गॉयटर : विश्व स्तर पर, लगभग 90% गॉयटर के मामले आयोडीन की कमी के कारण होते हैं. चूंकि आयोडीन की कमी की वजह से आवश्यक थायराइड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है, यह थायरॉयड ग्रंथि को नुकसान पहुंचाता है और गॉयटर से वृद्धि का कारण बनता है.

3. हाइपोथायरायडिज्म : आयोडीन की कमी हाइपोथायरायडिज्म का भी सबसे आम कारण है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जैसे ही शरीर में आयोडीन का स्तर गिरता है, थायराइड हार्मोन का उत्पादन गंभीर रूप से बिगड़ जाता है जिसकी वजह से लंबे समय तक रहने वाली यह बीमारी हाइपोथायरायडिज्म का विकास होता है.

4. क्रेटेनिज्म : इसे जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म के रूप में भी जाना जाता है, क्रेटेनिज्म जन्म के समय थायरायड ग्रंथि की गंभीर अंडरऐक्टिविटी से जुड़ा है, मुख्यतः गर्भावस्था और भ्रूण के विकास के दौरान आयोडीन की कमी के कारण. क्रेटेनिज्म की वजब से बच्चे का विकास मंद हो जाता है, फीचर्स असामान्य हो जाते हैं या बच्चे में कई तरह के दोष या डिफेक्ट्स भी हो सकते हैं.

5. मानसिक मंदता : आयोडीन की कमी की वजह से अपरिवर्तनीय मस्तिष्क क्षति होती है, जिसके कारण बच्चों में मानसिक मंदता (मेंटल रिटार्डेशन) की समस्या हो सकती है. मानसिक मंदता की वजह से जीवन में बाद के सालों में गंभीर बौद्धिक विकलांगता, सामाजिक अलगाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल आयोडीन की कमी के बारे में पढ़ें.न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी  खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.





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Durga Puja 2020: 6 Durga Puja Pandal Foods You Can Make At Home To Not Miss Out On Festive Fun!  


Highlights

  • Durga Puja is a five-day festival
  • Bengalis celebrate Durga Puja with much aplomb
  • Food plays an important role in the festivities

The season of festivals is here and yet there is something feels amiss. Owing to the pandemic scare, the scale of celebrations would not be the same. Many Durga Puja pandals that you love visiting every time may not be up this year and that breaks our heart, but we also know that it is for the best and also a very important measure to flatten the curve.  

So, what if your Pujo itinerary looks a bit different this year, instead of 20 pandals you are visiting only two. You can still try recreating some of the ‘pandal foods’ at home and make your festivities memorable.

Here Are 6 Durga Puja Pandal Foods You Can Make At Home:

1. Mutton Kathi Roll

Spicy chunks of mutton interfused with sauces, onions and chutney, nicely tucked inside a maida flat-bread. There, we saw you slurping. Here’s the recipe, click and cook for yourself.  

nqphvs18 Kathi rolls are loaded wraps you cannot ignore at a pandal

2. Egg devil

Egg devil or dimer devil is quite similar to scotch eggs. Boiled eggs coated with spicy mutton mince mixture. Counters selling this yummy snack always has one of the longest queues, you can try making something similar at home with this recipe.

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3. Fish Chop

Chops and cutlets are Durga Pujo staples that are also fairly easy to make at home. There are many kinds of chops, but one of our favourite is the fish chop. The soft fish underneath the crusty, spicy exterior is heartwarming juxtaposition of flavours.

4. Ghugni

This fiery chickpea dish is often laced with more masala, chopped onions or juicy mutton bits. This yummy dish is a show-stealer in every possible way. Do not forget to make it this Pujo season. Click here for the recipe.

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Ghugni is an interesting chickpea -based dish

5. Labra
Talk about Durga Puja and forget about the yummy bhog? Cant happen, won’t happen! Labra is an intensely satisfying mixed vegetable made with potatoes, brinjal, cabbage and Bengali spice-mix panch phoron. Pair it with hot khichdi and you are done! Click here for the recipe.

6. Payesh

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Payesh is the Bengali, slightly more milky cousin of kheer. You are sure to find it if you attend any Anondo mela, a food festival conducted either on panchami or shashti where in a bunch of home chefs bring their home-cooked delicacies to the pandal. Now, master the recipe at home with this link.

Happy Durga Puja 2020 Everyone!
 

About Sushmita SenguptaSharing a strong penchant for food, Sushmita loves all things good, cheesy and greasy. Her other favourite pastime activities other than discussing food includes, reading, watching movies and binge-watching TV shows.



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Coronavirus Precautions; Dussehra Diwali Festivals During Coronavirus Pandemic; Know How to Protect Yourself & Others | बाजार जाएं तो बच्चों को न ले जाएं, पार्टी फैमिली संग मनाएं क्योंकि अलग-अलग जगहों पर कोरोना अलग तरह से फैलता है; ध्यान रखें ये 6 बातें


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  • Coronavirus Precautions; Dussehra Diwali Festivals During Coronavirus Pandemic; Know How To Protect Yourself & Others

10 घंटे पहले

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  • घर को पूरी तरह पैक न करें, इसमें वेंटिलेशन के लिए जगह होनी चाहिए क्योंकि खुली जगह पर संक्रमण का खतरा कम होता है
  • कोरोना खाने की चीज से नहीं फैलता लेकिन उसकी पैकिंग पर वायरस हो सकता है, इसलिए अलर्ट रहें

देश में कोरोना के एक्टिव केस का ग्राफ नीचे जा रहा है और लोगों ने लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है। फेस्टिवल का सीजन है, बाजार में भी खरीदारी के लिए भीड़ भी बढ़ रही है लेकिन इस दौरान सबसे अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। वैक्सीन, इंफेक्शन और फेस्टिव सीजन में क्या सावधानी बरतें, इससे जुड़े कई सवालों के जवाब दे रही हैं दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की डॉ. अपर्णा अग्रवाल

1. त्योहारों में लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

हमेशा मास्क पहनना है। हाथ साफ रखने हैं। सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखनी है। खांसी-जुकाम, या गला खराब हो, तो तुरंत खुद को आईसोलेट कर लें। त्योहार के समय में इन बातों का खास ध्‍यान रखना है। अगर सावधानी नहीं बरतेंगे, तो घरवालों के साथ-साथ दूसरों को भी संक्रमित कर सकते हैं। त्योहार की खुशी घर वालों में खोजें, अपने घर को सजाने में, घर के पकवानों में खोजें, क्योंकि दूसरों से मिलना अभी ठीक नहीं है।

2. त्योहारों में बाहर क्या सावधानी रखनी है?

त्योहारों में आप बाहर अपने रिश्‍तेदारो, दोस्तों से मिलने जाते हैं और पार्टी करते हैं, वो सब मत करें। बेहतर होगा इस साल वर्चुअल पार्टियां, वर्चुअल मीटिंग करें करें, क्योंकि भीड़ से संक्रमण के फैलने का खतरा रहता है। रही बात शॉपिंग की तो इस वक्त ऑनलाइन शॉपिंग को तरजीह दें।

3. बच्‍चे अगर बाहर जाने की ज़‍िद करते हैं, तो क्या करें?

बच्चे बाहर जाने की ज़‍िद कर रहे हैं, तो थोड़ी देर के लिए, गार्डन या पार्क जैसी खुली जगह पर ले जा सकते हैं। बाज़ार मत ले जाएं क्योंकि बच्चे भीड़ में जाएंगे तो कुछ न कुछ छुएंगे और उनको संक्रमण का खतरा आपकी तुलना में ज्यादा रहेगा। बच्चों को मास्क लगाने की आदत भी नहीं होती है। अगर कुछ खाने की ज़‍िद करें या खरीदने की ज़‍िद करें तो ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं।

4. हवा में ड्रॉपलेट कितनी देर तक रहते हैं?

इस सवाल का जवाब देना मुश्किल है। कई बार ड्रॉपलेट एक गज के बाद नीचे गिर जाते हैं। लेकिन यह निर्भर करता है कि आप कहां हैं। अगर आप बंद जगह पर हैं, तो वहां ड्रॉपलेट ज्यादा देर तक हवा में रहेंगे, और संक्रमण की आशंका अधिक रहती है, खुली जगह पर आशंका कम रहती है। कितनी दूरी तक जाएगा, यह भी जगह पर निर्भर करता है। ऐसा पाया गया है कि ये तीन से चार गज की दूरी तक जा सकते हैं।

5. क्या खाने की चीजों से कोरोना होता है?

नहीं, कोरोना खाने की चीजों से नहीं होता है, लेकिन खाने की चीजें जिसमें परोसी गई हैं, या जिसमें पैक होकर आयी हैं, उस पर वायरस हो सकता है। इसीलिए के खाने को तरजीह देने के लिए कहा जा रहा हे।

6. रिकवरी रेट तेज़ी से बढ़ रहा है, जब सब लोग ठीक हो जाएंगे तब वैक्सीन का क्या काम?

रिकवरी रेट बढ़ा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोरोना खत्म हो गया। कई देशों में कोरोना लगभग खत्म हो गया था, अब महामारी की दूसरी लहर आ रही है। इसके बाद तीसरी लहर भी आएगी या नहीं, यह कोई नहीं कह सकता है।

कोरोना एक वायरस नहीं है, यह वायरस का समूह है, जो अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरह से फैलता है। कहीं, बहुत ज्यादा लोग संक्रमित होते हैं, कहीं कम। ये वायरस म्यूटेट भी होते हैं। कुछ महीनों के अंतराल पर ये दूसरे रूप में आते हैं। कोविड-19 कैसे बिहेव करेगा, यह अभी नहीं बता सकते हैं। यह जाएगा कि नहीं, यह भी नहीं पता है। इसलिए वैक्सीन की जरूरत पड़ेगी ही।



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Recipe: अष्टमी और नवमी में मां दुर्गा के भोग के लिए ऐसे बनाएं सूखे काले चने, ये है बनाने की सबसे आसान रेसिपी



नवरात्रि के व्रत के उद्यापन में लगने वाले भोग सूखे काले चने की आसान सी रेसिपी बताते हैं। ये रेसिपी इतनी आसान है कि इसे कोई भी आराम से बना सकता है।



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किन तरीकों से किया जा सकता है कोरोनावायरस का ट्रीटमेंट, जानें



कोरोनावायरस के उपचार के क्या हैं विकल्प

कोरोनावायरस के उपचार के क्या हैं विकल्प

स्टेरॉयड (Steroids) जैसे डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) की मदद से कोरोना (Covid 19) के गंभीर मरीजों में मौत की संभावना को कम किया जा सकता है, लेकिन वह कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मरीजों के विपरीत हो सकते हैं.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 21, 2020, 10:57 PM IST

कोरोनावायरस (Coronavirus) को लेकर दुनियाभर में अभी भी डर की स्थिति बनी हुई है. कोरोना के अधिक मामलों में अमेरिका (80 मिलियन से ज्यादा) पहले तो भारत (70 मिलियन से ज्यादा) दूसरे स्थान पर हैं. दोनों ही देशों में लोग कोरोना की वैक्सीन (Vaccine) के लिए आस लगाए बैठे हैं. वहीं, कोरोनावायरस पर हो रहे रोज नए-नए अध्ययन (Study) और शोधों (Research) से अलग-अलग तर्क निकलकर आ रहे हैं जिससे वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ रही है. ऐसे में कोरोनावायरस से बचने के उपचारिक विकल्प क्या है. आइए जानते हैं इनके बारे में…

गंभीर रोगियों में हो सकता जोखिम कम

बता दें कि यहां कोरोनावायरस के कुछ उपाचारिक विकल्पों को बताया जा रहा है जिससे वायरस से गंभीर रुप से पीड़ितों के जोखिमों को कम किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, स्टेरॉयड (Steroids) जैसे डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) की मदद से कोरोना के गंभीर मरीजों में मौत की संभावना को कम किया जा सकता है, लेकिन वह कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मरीजों के विपरीत हो सकते हैं. गौरतलब है कि अमेरिका में कोविड-19 के लिए अभी तक कोई सुगम इलाज की व्यवस्था नहीं की गई है. लेकिन इमरजेंसी में और गंभीर रूप से पीड़ितों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. नए अध्ययनों के सामने आते ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने दिशा-निर्देशों के तहत विशेषज्ञों के एक पैनल को बुलाया है.

जानिए मरीजों के लिए क्या सलाह हैबता दें कि अस्पताल में भर्ती मरीज, घर पर आइसोलेट रोगी और जिन्हें ऑक्सीजन की ज्यादा जरुरत नहीं हैं. ऐसे मरीजों को कोई विशिष्ट दवाओं की सिफारिश नहीं की गई है और न ही स्टेरॉयड के उपयोग के लिए कोई चेतावनी जारी की गई। वहीं, जो लोग अस्पताल में हैं और ज्यादा ऑक्सीजन की जरुरत वाले मरीज हैं, लेकिन सांस लेने के लिए मशीन पर निर्भर नहीं हैं, उनके लिए एंटीवायरल ड्रग रेमेडिविर IV के माध्यम से दी जाती है क्योंकि कुछ मामलों में यह एक तरह से स्टेरॉयड भी है.

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन नहीं असरदार

वहीं, अस्पताल में भर्ती और सांस लेने के लिए मशीन पर निर्भर रोगियों के लिए रेमेडिसविर और एक स्टेरॉयड दोनों जरूरी है. बता दें कि आक्षेप प्लाज्मा जिनके एंटीबॉडीज शरीर में वायरस से लड़ने में मददगार साबित होते हैं. दिशानिर्देशों में कहा गया है कि रोगी के शरीर में इनकी मौजूदगी कोरोना के लड़ने के लिए पर्याप्त होती है। वहीं, दिशानिर्देशों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) और कुछ दवाओं को कोरोना के खिलाफ कमजोर बताया है जो रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी प्रभावित कर रहे हैं. कई पूर्व अध्ययनों ने भी इन्हें कोरोनावायरस के खिलाफ अप्रभावी बताया है।
वहीं, दवाओं के अलावा, डॉक्टरों ने अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज के तरीकों के बारे में ज्यादा से ज्यादा सीख रहे हैं. जिसमें वे मरीजों को व्यायाम के जरिए सांस लेने लेने की उनकी मशीनों पर निर्भरता को कम कर रहे हैं.





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Delhis Baba Ka Dhaba Gets Surprise Visit From Actor Aparshakti Khurana


Aparshakti Khurana went to social media’s iconic ‘Baba Ka Dhaba’.

Highlights

  • Baba Ka Dhaba had recently gone viral on social media
  • The iconic Dhaba had a surprise visit from Aparshakti Khurana
  • Take a look at what all he ate when he visited

The story of ‘Baba Ka Dhaba’ had gone viral on the internet, as the elderly couple shared in an emotional video how the pandemic had adversely affected their earnings. The video of their heartfelt story got many people volunteering to help them, including celebrities such as Sonam Kapoor, Ravichandran Ashwin and Raveena Tandon. Supporting local eateries and those struggling to get by became a social media movement. Recently, actor Aparshakti Khurana too came to Delhi to visit the internet’s iconic dhaba. Take a look at the post he shared on Instagram:

(Also Read: )

Aparshakti Khurana went and sampled the delicious Paneer Matar at ‘Baba Ka Dhaba’. Referring to the food blogger, who had originally shared the video, Aparshakti Khurana wrote in the caption, “Promised Gaurav Wasan that we would have lunch at Baba Ka Dhabha when I’ll be in Delhi and we finally did! Had the bestttt matra paneer everrr!” He also shared a video about two boys who come everyday to help the elderly couple at ‘Baba Ka Dhaba’ prepare the meals for the day. Take a look:

(Also Read: )

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“Meet Mukul and Tushant! Two young boys who come at 6 AM sharp, everyday at #BabaKaDhaba to help Baba and his wife. I am moved by their selflessness and relentless support,” he wrote in the caption. Aparshakti Khurana further explained how the movement should not be limited to Delhi’s Baba Ka Dhaba alone as there are many such similar eateries everywhere around us. “We all have many similar Baba Ka Dhabhas around us. Maybe we can learn from Mukul and Tushant and add some joy in the lives of people who need it the most,” concluded Khurana.

What an incredible gesture by Aparshakti Khurana to support Baba Ka Dhaba and inspire others to do so as well! We hope to see more such positive and life-altering social media movements in future too.

About Aditi AhujaAditi loves talking to and meeting like-minded foodies (especially the kind who like veg momos). Plus points if you get her bad jokes and sitcom references, or if you recommend a new place to eat at.





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Navratri Bhog Prasad Recipes 2020 | Day 6 of Auspicious Nine Days of Navratri 2020 Today – Maa katyayani Favourite Food Special Prasad Bhog | नवरात्र में छठे दिन बनाएं पपीते का हलवा और समा के चावल की इडली, यह आपको दिनभर एनर्जेटिक रखेगी


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5 घंटे पहले

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शारदीय नवरात्र के छठे दिन ऐसी डिशेज बनाएं जो आपको दिनभर एनर्जेटिक रखें और कार्ब व विटामिन-सी की कमी भी पूरी करें। इसके लिए पपीते का हलवा और समा के चावल की इडली बना सकते हैं। जानिए इन्हें घर पर तैयार करने की आसान रेसिपी…



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Aaj Ka Panchang: नवरात्र का छठा दिन, जानें 22 अक्टूबर 2020 का पंचांग, राहुकाल और शुभ मुहूर्त



शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। इसलिए मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा की जाएगी। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए आज का पंचांग।



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पाचन संबंधी परेशानियों को दूर करने के लिए रोज पिएं कॉफी, शोध में हुआ खुलासा


कॉफी पीने के बाद शरीर में ऐसे बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं जो फायदा पहुंचाते हैं.

कॉफी पीने के बाद शरीर में ऐसे बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं जो फायदा पहुंचाते हैं.

कॉफी (Coffee) पीने से पित्त की पथरी और पैन्क्रियाटाइटिस यानी अग्नाशय की सूजन सहित कुछ पाचन संबंधी विकारों (Digestion Problems) के छुटकारा मिल सकता है.




  • Last Updated:
    October 21, 2020, 12:15 PM IST

रोजाना कॉफी (Coffee) पीना पाचन (Digestion) के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. ऐसा दावा एक शोध में किया गया है. इस शोध में यह बात सामने आई है कि कॉफी पीने से पित्त की पथरी और पैन्क्रियाटाइटिस यानी अग्नाशय की सूजन सहित कुछ पाचन संबंधी विकारों के छुटकारा मिल सकता है. यह भी खुलासा किया गया कि कॉफी आंत की गतिशीलता को बढ़ावा देते हुए पाचन की प्रक्रिया में सहायता कर सकती है. कॉफी पर की गई इस शोध की रिपोर्ट ‘कॉफी और पाचन पर इसका प्रभाव’ शीर्षक के साथ इंस्टीट्यूट फॉर साइंटिफिक इंफॉर्मेशन ऑन कॉफी में प्रकाशित हुई है.

इटली के यूनिवर्सिटी ऑफ मिलान के वैज्ञानिकों के अनुसार, ‘शोध बताता है कि कॉफी का सेवन पाचन की आम समस्या जैसे कब्ज में लाभ पहुंचाता है. साथ-साथ लिवर की बीमारियों में कमी के संकेत देता है.’

पित्ताशय की पथरी का रोग एक आम पाचन विकार है. myUpchar के अनुसार पित्ताशय शरीर की पित्त प्रणाली का एक हिस्सा होता है, जिसमें पित्त नलिकाएं, अग्नाशय और लिवर आदि शामिल होते हैं. पित्ताशय की पथरी क्रिस्टल जैसा पदार्थ होता है जो पित्ताशय में बनता है. यह वयस्क आबादी का लगभग 10-15 प्रतिशत प्रभावित करता है.शोधकर्ताओं ने कहा कि किस तरीके से कॉफी पित्ताशय की बीमारी से बचा सकती है, इसके बारे में अभी खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन यह देखा गया है कि कॉफी के रोजाना सेवन से जोखिम कम होता है. शोध में इस सवाल का जवाब भी खोजने की कोशिश की गई कि कॉफी सीने में जलन या गैस्ट्रो-ओसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीओआरडी) तो पैदा नहीं करती? अधिकांश अध्ययनों का सुझाव है कि कॉफी इन स्थितियों के लिए जिम्मेदार नहीं है.

अध्ययनों से पता चलता है कि कॉफी पीने के बाद शरीर में ऐसे बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं जो फायदा पहुंचाते हैं. कॉफी में फाइबर और पॉलीफेनोल्स पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं. कॉफी का सेवन गैस्ट्रिक एसिड, पित्त और अग्नाशय का स्राव करके पाचन सुधारता है.

myUpchar से जुड़े डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला का कहना है कि कॉफी में कैफीन की वजह से इसे सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है और इससे शरीर पर ऊर्जादायक प्रभाव पड़ते हैं. कॉफी पीने के अन्य कई फायदे हैं, जिसमें वजन कम करना, थकावट दूर करना, दिल की बीमारी में लाभ, डायबिटीज में फायदा, पार्किंसन की समस्या, अवसाद के लिए, त्वचा के लिए आदि शामिल हैं. कॉफी गर्म होती है, इसलिए कुछ लोगों को पेट में जलन महसूस हो सकती है. ऐसे लोग कॉफी या चाय के अधिक सेवन से बचें. वहीं डायबिटीज के मरीजों के लिए कॉफी में शामिल शुगर मुश्किल पैदा कर सकती है. इसलिए सावधानी बरतें.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ग्रीन कॉफी के फायदे और बनाने की विधि पढ़ें.न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।





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Navratri 2020: Vrat-Special Kuttu Ka Halwa Recipe For Your Sweet Cravings during Fasting


Navratri 2002: Kuttu ka halwa recipe is a must-try.

Highlights

  • Navratri is an important Hindu festival in India.
  • Make kuttu atta ka halwa for your Navratri vrat sweet menu.
  • Here’s an easy recipe to make it at home.

Navratri 2020 menu sees all vrat-special foods that we get an opportunity to eat during the festival only. Regular cereal grains are not allowed to eat if one is fasting during Navratri. So kuttu ka atta and singhara atta are brought in to replace wheat flour to make roti, paratha, tikki, poori, cheela and more such everyday meals. Navratri give us the chance to load up on the various health offerings of kuttu ka atta (buckwheat flour). Kuttu ka atta has all the nine essential amino acids, which gives us the much-needed proteins when we start to buckle due to lack of energy. Other than that, kuttu ka atta is also rich in fibre and immunity-boosting antioxidants.

Dishes made of kuttu ka atta have an overwhelming nutty flavour and are filling enough to help us wade through the day of fasting. If you thought there is only roti and staples like these that can be made with kuttu, here is a recipe that will let you enjoy this vrat-special food in its sweetest form. Kuttu ka halwa is just the dessert you should be making to obtain its many benefits while pleasing your sweet tooth.

(Also Read: 5 Vrat-Special Halwa Recipes To Try This Navratri)

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Kuttu ka atta is commonly used in Navratri vrat menu. 

Navratri-Special Kuttu Ka Halwa Recipe:

Ingredients:

(Serving – 4-5)

1 cup kuttu ka atta (buckwheat flour)

1 cup sugar

1 tsp cardamom powder

Half cup ghee (clarified butter)

2 glass water

5-6 cashew nuts

5-6 raisins

5-6 pistachios, grated

Method:

Step 1 – Heat some ghee in a kadhai and roast cashews and raisins. Keep aside.

Step 2 – Sift the kuttu flour through a sieve. Heat around half cup ghee in the kadhai and roast the sifted kuttu flour on low flame while stirring continuously.

Step 3 – When the flour changes colour and is well roasted, add cardamom powder and mix well.

Step 4 – Add sugar and water and let it cook till the flour absorb all the water and sugar is dissolved. Stir often.

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Step 5 – Add the roasted cashews and raisins, and mix well. Turn off the gas and garnish with pistachio shaving before serving hot.

Kuttu ka halwa can be made in less than half an hour – another reason for you to make this sweet vrat-friendly halwa for yourself and your family during Navratri 2020!
 

About Neha GroverLove for reading roused her writing instincts. Neha is guilty of having a deep-set fixation with anything caffeinated. When she is not pouring out her nest of thoughts onto the screen, you can see her reading while sipping on coffee.



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China Coronnavirus, Heilongjiang Latest News Update; 9 People From Same Family Died Due To Eating Noodle Soup | सालभर से फ्रीज में रखा नूडल सूप पीने से चीन में एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत, जहर बन गया था कॉर्न फ्लोर


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10 मिनट पहले

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प्रोफेसर फेन कहते हैं, बॉन्गक्रेकिक एसिड वाला खाना खाने से इंसान और जानवर दोनों में फूड पॉइजनिंग हो सकती। इससे किसी की जान भी जा सकती है।

  • चीन के नॉर्थ-ईस्ट रीजन के हिलोजियांग प्रांत का मामला
  • परिवार के 9 लोगों ने 5 अक्टूबर को पीया था नूडल सूप

चीन में घर में बने नूडल सूप को पीने से एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई है। यह मामला चीन के नॉर्थ-ईस्ट रीजन के हिलोजियांग प्रांत का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार के सदस्यों ने जो नूडल सूप पीया था, वह एक साल से फ्रीजर में रखा था। नूडल सूप को कॉर्न फ्लोर से तैयार किया गया था, जिसे 5 अक्टूबर को सुबह नाश्ते में पीया गया था।

इसे पीते ही कुछ ही घंटों के अंदर 9 लोगों की हालत बिगड़ गई। आनन-फानन में उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया। चीनी मीडिया के मुताबिक, 10 अक्टूबर तक 7 लोगों की मौत हो चुकी थी। आठवीं मौत दो दिन बाद हुई। घर के 9वें सदस्य ने 19 अक्टूबर को दम तोड़ा। आखिरी मौत एक महिला की हुई थी, जिसका नाम ली था।

12 लोगों के परिवार में से 3 लोगों की जान ऐसे बची
फ्रीजर में सालभर तक रखे रहने के कारण नूडल सूप खराब हो चुका था। जिस दिन ये हादसा हुआ, उस दिन के नाश्ते के लिए परिवार के 12 सदस्य मौजूद थे। उनमें से 3 सदस्यों ने सूप का टेस्ट पसंद न आने पर पीने से इनकार कर दिया था, इसलिए उनकी जान बच गई।

चीन में जारी हुई एडवाइजरी
चीनी हेल्थ कमीशन ने सोमवार को वार्निंग जारी करते हुए खाने में फर्मेंटेड फ्लोर (कॉर्न फ्लोर) न लेने की सलाह दी। चीनी अधिकारियों का कहना है इस पूरे मामले की जांच की गई है। जांच में सामने आया है कि घर के सदस्यों जो नूडल सूप पीया था, उसमें बॉन्गक्रेकिक एसिड की मात्रा अधिक थी, जो फूड पॉइजनिंग की वजह बना।

क्या है बॉन्गक्रेकिक एसिड जिसने ली नौ जिंदगियां
बॉन्गक्रेकिक एसिड ने खाने को जहरीला बनाने का काम किया है। यह फर्मेंटेड मैदा और चावल से जुड़े फूड में पाई जाती है। चाइना एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फेन झिहॉन्ग का कहना है, यह बेहद जहरीली होती है। बॉन्गक्रेकिक एसिड जिस भी खाने में मौजूद है, उसे गर्म करने पर भी इसका असर खत्म नहीं होता।

40 से 100% तक है मौत की दर प्रोफेसर फेन कहते हैं, बॉन्गक्रेकिक एसिड वाला खाना खाने से इंसान और जानवर दोनों में फूड पॉइजनिंग भी हो सकती है और मौत भी। फूड पॉइजनिंग होने पर मौत की दर 40 से 100% तक होती है।



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राशिफल 22 अक्टूबर: धनु और कर्क राशि के जातकों की किस्मत खोल देगा सुकर्मा योग, जानें अन्य राशियों का हाल



आश्विन शुक्ल पक्ष की उदया तिथि षष्ठी गुरूवार का दिन है। षष्ठी तिथि सुबह 7 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। जानिए आचार्य इंदु प्रकाश से राशिनुसार कैसा रहेगा आपका दिन।



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जानें, कैसे कोविड-19 के रोकथाम की दवा बनाने का काम किसानों के लिए खुशखबरी लाया


कोर्डिसेप्‍स कैप्‍सूल केे एम्‍स द्वारा परीक्षण भी शुरू कर दिए गए हैं.

कोर्डिसेप्‍स कैप्‍सूल केे एम्‍स द्वारा परीक्षण भी शुरू कर दिए गए हैं.

Covid 19 : नैनीताल के भोवाली में एमब्रोसिया फूड फार्म कंपनी कोरोना की रोकथाम की दवा बनाने के काम लगी है. इसके लिए परीक्षण किए जा रहे हैं. इसे नाम दिया गया है कोर्डिसेप्‍स कैप्‍सूल. एम्‍स द्वारा इसके परीक्षण भी शुरू कर दिए गए हैं.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 21, 2020, 5:15 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना (Covid 19) महामारी की रोकथाम और इसके उपचार के लिए जहां पूरी दुनिया में वैक्‍सीन बनाने का प्रयास युद्धस्‍तर पर चल रहा है, वहीं भारत (India) में भी इस दिशा में तेजी से काम जारी है. साथ ही कोरोना की दवाई बनाने के प्रयास किसानों के लिए भी खुशखबरी लाए हैं, क्‍योंकि यह उन्‍हें रोजगार के अवसर जो मुहैया करा रहा है. यह सब हो रहा है उत्‍तराखंड के नैनीताल में.

दरअसल, नैनीताल के भवाली में एमब्रोसिया फूड फार्म कंपनी कंपनी कोरोना की दवाई बनाने के काम लगी है. इसके लिए परीक्षण किए जा रहे हैं. इसे नाम दिया गया है कोर्डिसेप्‍स कैप्‍सूल. एम्‍स द्वारा इसके परीक्षण भी शुरू कर दिए गए हैं. पहले परीक्षण के परिणाम इस महीने के अंत तक मिल जाएंगे. परीक्षणों के लिए नियामक संस्थाओं से स्वीकृति भी ले ली गई है.

कंपनी के प्रबंधक निदेशक गौरवेंद्र गंगवार बताते हैं कि परीक्षणों के अंतिम परिणाम इसी साल के अंत तक मिल जाएंगे. उनके अनुसार, कोर्डिसेप्स एक औषधीय जड़ीबूटी है, जिसके जरिये कोर्डिसेप्स कैप्सूल बनाया जा रहा है. यह एक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला और वायरल-रोधी कैप्सूल है. गंगवार कहते हैं कि इसके उत्पादन के लिए किसानों की सेवाएं ली जा रही हैं, जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा.

एमब्रोसिया फूड फार्म कंपनी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट कॉऑर्डिनेशन ऑफ‍िसर विकास विनोद तिवारी ने बताया कि शुरुआती जांच का काम डॉ. ओम सिलाकरी के नेतृत्व में पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के औषधि निर्माण विज्ञान और औषधि अनुसंधान विभाग द्वारा किया गया था. इस रिसर्च के अच्छे परिणाम निकले, जिसे देखते हुए इस परीक्षण की आवश्यकता महसूस की गई. मेड इनडाइट कम्यूनिकेशन प्रा. लि. ने एक अनुसंधान टीम के साथ मिलकर देश भर में इस परीक्षण की तैयारी शुरू की.





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Dussehra 2020: Date, Puja Time, Significance And How To Celebrate The Festival


Dussehra 2020 will be celebrated on October 25.

Highlights

  • Dussehra 2020 will be celebrated on October 25.
  • Dussehra marks the culmination of Navratri festival.
  • Here is everything you need to know about the festival of Dussehra.

We are well into the festive season of the year and the joy of festivities has masked our fears of the ongoing pandemic. With the festival of Navratri coming to an end, the nation is already gearing up for other big festivals of Dussehra and Durga Puja. Dussehra (or Vijaydashmi) culminates the nine-day Navratri festival and coincides with the Bengali festival of Durga Puja, leading to Diwali that is celebrated after 21 days of Dussehra every year. All these festivals are celebrated with much enthusiasm all over the country with everything lit up and buzzing around us.

Dussehra 2020: Date And Puja Timing

Dusshera is celebrated on the tenth day of Ashvin or Kartik months of the Hindu calendar. This year, Dussehra will be celebrated on Sunday, October 25, 2020.

Vijay Muhurat – 01:57 PM to 02:42 PM

Duration – 00 Hours 45 Mins

Bengal Vijayadashami: Monday, October 26, 2020

AparahnaPuja Time – 01:12 PM to 03:27 PM

Duration – 02 Hours 15 Mins

Dashami Tithi Begins – 07:41 AM on Oct 25, 2020

Dashami Tithi Ends – 09:00 AM on Oct 26, 2020

Shravana Nakshatra Begins – 01:28 AM on Oct 24, 2020

Shravana Nakshatra Ends – 02:38 AM on Oct 25, 2020

(Source: drikpanchang.com)
 

Newsbeep

(Also Read: 10 Bad Food Habits to Banish This Dussehra)

dussehra generic 650The effigy of Ravana is burnt on Dussehra festival.

Dussehra 2020: History And Significance

Dussehra commemorates the victory of Lord Rama over king of Lanka, Ravana, in the historic battle of Ramayana. Lord Rama defeated Ravana and rescued his wife Sita from his captivity. The word Dussehra comes from two Sanskrit words – ‘dasha’ that symbolises the ten heads of Ravana, and ‘hara’, which mean ‘ to defeat’. Dussehra signifies the ‘triumph of good over evil’.

How Is Dussehra Celebrated?

To mark the victorious occasion, large effigies of Ravana, Kumbhakarna (Ravana’s brother) and Meghanad (Ravana’s son) are burnt in the evening. It is said that while you set afire the effigies of the mythological demons, you also abolish the demons living inside you.

As per the Hindu customs, Ram Leela, a theatrical play enacting the story from the epic of Ramayana, is played during the nine days of Navratri leading to the battle of Ramayana on the day of Dussehra.

(Also Read: 10 Amazing Dussehra Recipes To Savour This Festive Season)

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Sandesh is a popular Bengali sweet. 

Dussehra 2020: Foods To Celebrate The Festival

Many devotees offer bhog to Lord Rama for puja at home. North Indians make chawal ki kheer, gur ke chawal, boondi ladoo among other desserts for the prasad.

‘Kadakani’, a sweet and savoury dish, is paired with green chilli chutney and served to family and guests in Maharashtra.

Bengalis make their signature sweet treats of sandesh, rajbhog, payesh and more.

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In South India, payasam is commonly made to celebrate Dussehra.

Happy Dussehra 2020!

About Neha GroverLove for reading roused her writing instincts. Neha is guilty of having a deep-set fixation with anything caffeinated. When she is not pouring out her nest of thoughts onto the screen, you can see her reading while sipping on coffee.



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Coronavirus Breath Testing | Here’s Singapore Researchers Latest News And Developments | अब फूंक मारकर एक मिनट में कोरोना का पता लगाया जा सकता है, दावा; 90% तक सटीक रिजल्ट देता है


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42 मिनट पहले

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  • नए कोविड-19 टेस्ट पर रिसर्च कर रही सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी का दावा
  • कहा, 180 मरीजों की हुई जांच, सांस में मौजूद ऑर्गेनिक कम्पाउंड से होती है वायरस की जांच

कोरोना की जांच फूंक मारकर भी हो सकेगी। सिंगापुर में ऐसा कोविड-19 टेस्ट विकसित किया गया है। सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के मुताबिक, नया टेस्ट एक मिनट में सांस के जरिए कोविड-19 का पता लगाता है। जांच के दौरान, इंसान की सांस में मौजूद वाष्पशील ऑर्गेनिक कम्पाउंड का पता लगाया जाता है। जो बताते हैं मरीज में वायरस है या नहीं।

ऐसे होगी जांच

इस पर रिसर्च करने वाली नेशनल यूनिवर्सिटी का दावा है, 180 मरीजों की जांच नए टेस्ट से से की गई है। यह 90 फीसदी से अधिक सटीक परिणाम बताता है। कोविड-19 की जांच के लिए बस मरीज को ब्रीथ सैम्पलर में फूंक मारनी होती है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब मरीज मुंह से हवा ब्रीथ सैम्पलर में डालता है तो यह हवा मास स्पेक्ट्रोमीटर में इकट्‌ठा हो जाती है। इसमें हवा में मौजूद कणों की एनालिसिस की जाती है, वो भी एक मिनट में।

सांस में बदलाव बीमारियों का इशारा करता है

जांच की तकनीक को विकसित करने वाले स्टार्टअप ब्रीथॉनिकस की सीईओ डॉ. जिया झूनान का कहना है, अलग-अलग बीमारियां होने पर सांस में अलग-अलग बदलाव देखा जाता है। इसलिए इसमें पाए जाने वाले वाष्पशील आर्गेनिक कम्पाउंड्स में होने वाले बदलाव से कोरोना का पता लगाया जा रहा है।

स्टार्टअप के सीईओ डू फैंग कहते हैं, ब्रीथ सैम्पलर में लगा माउथपीस डिस्पोजेबल है। यह एकतरफा काम करता है। एक बार इसमें फूंक मारने पर मुंह से निकली हवा वापस मुंह में नहीं जाती। और न ही इसमें से लार मुंह में वापस आती है क्योंकि मशीन में वन-वे वाल्व और सेलाइवा ट्रैप लगा हुआ है।



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Recipe: नवरात्रि में बनाएं बिना प्याज मटर पनीर की टेस्टी सब्जी, जानिए बनाने का सिंपल तरीका



नवरात्रि के दिनों में लहसुन-प्याज सेवन करना शुभ नहीं मानते हैं। जानिए बिना प्याज के कैसे बनाएं टेस्टी मटर पनीर की सब्जी।



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प्रेग्नेंसी में आ रही है दिक्कत, आईवीएफ है वरदान, जानें टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक है कैसे फायदेमंद


गर्भधारण में कैसे आईवीएफ तकनीक है फायदेमंद जानें (फोटो साभारः Instagram @anushkasharma) (तस्वीर: सांकेतिक चित्र )

गर्भधारण में कैसे आईवीएफ तकनीक है फायदेमंद जानें (फोटो साभारः Instagram @anushkasharma) (तस्वीर: सांकेतिक चित्र )

प्रेग्नेंट (Pregnency)नहीं होने की समस्या से आईवीएफ (IVF) तकनीक के सहारे छुटकारा पाया जा सकता है. आइए जानते हैं क्या है आईवीएफ तकनीक और बच्चा पाने वाली महिलाओं के लिए क्यों ये उम्मीद की किरण बनकर उभरी है –




  • Last Updated:
    October 21, 2020, 12:39 PM IST

बदलती दिनचर्या और काम के बोझ के चलते इन दिनों कई महिलाएं तनाव से गुजर रही हैं और ऐसे में कुछ महिलाओं में शादी के बाद गर्भाधारण से संबंधित समस्याएं भी दिखने को मिलती हैं. ऐसी महिलाओं को शादी के बाद जब बच्चा नहीं होता है तो और अधिक मानसिक तनाव सहन करना पड़ता है, लेकिन प्रेग्नेंट नहीं होने की समस्या से आईवीएफ तकनीक के सहारे छुटकारा पाया जा सकता है. आइए जानते हैं क्या है आईवीएफ तकनीक और बच्चा पाने वाली महिलाओं के लिए क्यों ये उम्मीद की किरण बनकर उभरी है –

क्या है आईवीएफ तकनीक

आईवीएफ तकनीक का पूरा नाम है इन विट्रो फर्टीलाइजेशन. दरअसल जिन महिलाओं में गर्भाधारण की समस्या रहती है, उनमें आईवीएफ तकनीक काफी लाभदायक मानी जाती है. आम बोलचाल की भाषा में इसे टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक भी कहा जाता है और इसकी सफलता के कारण ही आजकल बड़े शहरों में कई आईवीएफ सेंटर तेजी से खुलते जा रहे हैं.ऐसे काम करती है आईवीएफ तकनीक

myUpchar से जुड़े डॉ. विशाल मकवाना के अनुसार, आईवीएफ तकनीक में महिला के अंडाशय से अंडाणुओं को निकाला जाता है और उन्हें प्रयोगशाला में पुरुष के शुक्राणुओं के साथ निषेचित किया जाता है. बता दें कि किसी भी भ्रूण के निर्माण के लिए अंडाणु और शुक्राणु में निषेचन ही सर्वप्रथम प्रक्रिया होती है और यह कुछ महिलाओं में प्राकृतिक तौर पर नहीं हो पाती है और आईवीएफ तकनीक के द्वारा इसे प्रयोगशाला में संपन्न किया जाता है. ऐसी महिलाओं में अंडाणु और शुक्राणुओं के निषेचन के बाद की प्रक्रिया प्राकृतिक तौर पर ही जारी रहती है. प्रयोगशाला में जब अंडाणु को शुक्राणु से निषेचित कर दिया जाता है और भ्रूण विकसित होता है तो इस भ्रूण को महिला के गर्भ में डाल दिया जाता है. इस प्रक्रिया में पत्नी के अंडाणु और पति के शुक्राणु का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अगर किसी एक पार्टनर के अंडाणु और शुक्राणु में कोई समस्या रहती है तो डोनर के अंडाणु और शुक्राणु का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

किन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद

myUpchar से जुड़े डॉ. विशाल मकवाना के अनुसार, आईवीएफ तकनीक ऐसी महिलाओं के लिए ज्यादा फायदेमंद है, जो प्राकृतिक तौर पर गर्भाधारण नहीं कर पाती हैं. आजकल हम देखते हैं कि कई महिलाएं कामकाज व नौकरीपेशा होने के कारण काफी देर से शादी करती है. ज्यादा उम्र होने पर भी कई महिलाओं में गर्भाधारण से संबंधित समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में आईवीएफ तकनीक काफी फायदेमंद साबित होती है. इसके अलावा जिन महिलाओं में फैलोपियन ट्यूब में रूकावट हो या आईयूआई (इन्ट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन) जैसी तकनीक सफल नहीं हुई हो तो वे महिलाएं भी आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं. आईयूआई तकनीक में सीधा शुक्राणु को गर्भाशय में डाल दिया जाता है.

आईवीएफ से पहले पुरुष पार्टनर का भी जरूर कराएं टेस्ट

यदि आईवीएफ तकनीक का सहारा ले रहे हैं तो महिलाओं को पुरुष पार्टनर का भी टेस्ट जरूर करा लेना चाहिए, क्योंकि यह सुनिश्चित करा लेना चाहिए कि महिला के साथ-साथ पुरुष के वीर्य में मौजूद शुक्राणुओं की संख्या, शुक्राणुओं की गतिशीलता और शुक्राणुओं के आकार में सही जानकारी प्राप्त हो सके. कई बार पुरुषों के शुक्राणुओं की संख्या में कमी या कमजोर शुक्राणुओं के कारण भी आईवीएफ तकनीक सफल नहीं हो पाती है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, टेस्ट ट्यूब बेबी क्या है, खर्च और फायदे पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं। )

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।





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Navratri 2020: How To Make Instant Vrat Idli And Chutney At Home


Highlights

  • Idli is a popular South Indian treat
  • Idli is traditionally made with rice batter
  • Idli is a soft and spongy dish which is paired with sambhar

Idli has to be one of our most beloved breakfasts of all times. These puffy rice cakes doused in sambhar or chutney make for a sumptuous fare each time. However, since we all know rice is not allowed during Navratri fasting, so all of us who are observing a vrat would have to refrain from this spongy South Indian breakfast… or not! Yes, it is very much possible to have idlis during your vrat, provided it is made with vrat-friendly ingredients. In this recipe, food vlogger Parul schools us how to make idli, Navratri style!  

To make theses plate idlis, all you need to do is make a smooth batter made of one cup samak or sama rice, one-fourth cup sabudana. Blend the two in a blender with sendha namak until you get a fine powder. Take out this powder in a bowl, add a cup of curd to this mix and combine well until you get a smooth water. Add water is required. You can pour this batter in a steamer and steam for 10  minutes or make it without a  steamer in a pan using a stand as shown in the video posted on ‘Cook With Parul’.

(Also Read:

The video also comes with an instant vrat chutney. To make the vrat chutney you would need to blend roasted peanuts, green chillies dessicated coconut, sendha namak, black pepper powder, curd. Blend them all and your chutney is ready!

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(Also Read: )

Watch How To Make Instant Vrat Idli And Chutney Here:

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Have this instant, weight-loss-friendly idli at home this Navratri and let us know your thoughts in the comments section.  
 

About Sushmita SenguptaSharing a strong penchant for food, Sushmita loves all things good, cheesy and greasy. Her other favourite pastime activities other than discussing food includes, reading, watching movies and binge-watching TV shows.



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10-year-old Max has been sleeping in a tent for 200 days in memory of an old friend, friend | बुजुर्ग दोस्त की याद में 10 साल का मैक्स 200 दिनों से टेंट में सो रहा, कहा; दोस्त ने कहा था असली एडवेंचर सिर्फ प्रकृति के बीच रहकर महसूस किया जा सकता है


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6 दिन पहले

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  • इंग्लैंड के मैक्स वूसे की अपने पड़ोस में रहने वाले 74 साल के रिक से गहरी दोस्ती थी
  • फरवरी में रिक की कैंसर से मौत हुई तो उनकी प्रकृति प्रेम से जुड़ी बातों को याद कर टेंट में सोने लगे मैक्स

यह कहानी दो दोस्तों की है। इनमें एक अब इस दुनिया में नहीं है। और उसी की याद में दूसरा दोस्त पिछले 200 दिनों से टेंट में सो रहा है। इंग्लैंड के शहर ब्रॉनटॉन में रहने वाले 10 साल के मैक्स वूसे की अपने पड़ोस में रहने वाले 74 साल के रिक से गहरी दोस्ती थी। रिक की पत्नी की 2017 में मौत हो गई थी और इस साल फरवरी में रिक की भी कैंसर से मौत हो गई थी। रिक के बीमारी से जूझते आखिरी दिनों में मैक्स उसके साथ रहा। अब रिक की याद में मैक्स टेंट में सोता है।

रिक की इच्छा को पूरा कर रहा मैक्स
मैक्स बताता है कि रिक की इच्छा थी कि वह प्रकृति के बीच रहे। पेड़-पौधों से लगाव रखे। रिक ने कहा था कि नेचर के बीच रहकर तुम खुद को जान सकोगे। जिंदगी में असली एडवेंचर सिर्फ प्रकृति के बीच रहकर महूसस किया जा सकता है। फरवरी में लॉकडाउन के बाद से मैक्स रात में अपने घर के बगीचे में लगे टेंट में ही सो रहा है।

सर्दियों के कारण पिता टेंट की जगह कैंपिंग गियर लगाएंगे
मैक्स के दिन की शुरुआत सुबह-सुबह पंछियों की चहचहाहट से शुरू होती है। वह प्राकृतिक हवा का आनंद ले रहा है। हालांकि उसके टेंट में चींटियों ने एक बिल बना लिया है, जिससे वह थोड़ा परेशान है और अब सर्दियों के कारण उसके पिता टेंट के स्थान पर कैंपिंग गियर लगाने वाले हैं।

यहां देर रात कॉमिक्स पढ़ने पर कोई टोकता नहीं
मैक्स मज़ाक में कहता है कि यहां सोने का एक फायदा यह भी है कि उसे देर रात तक कॉमिक्स पढ़ने पर उसके माता-पिता नहीं टोक पाते। टेंट में सोने के कारण वह अब देर रात तक टीवी भी नहीं देख पाता और गैजेट्स से भी दूर रहता है। मैक्स ने रिक की देखभाल करने वाले नॉर्थ डेवोन हॉस्पिटल के लिए ऑनलाइन 15 लाख रुपए भी जुटाए हैं।



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