Dhanteras: Markets Full Of Customers But Traders Disappointed – धन धना धन धनतेरस : सजा बाजार, घूमते ग्राहक और हाथ मलते व्यापारी

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ऐसी मान्यता है कि धन (वस्तु) खरीदने से उसमें तेरह गुना की वृद्धि होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार कांर्तिक माह की कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन लोग बर्तन खरीदते हैं। चांदी खरीदने से चंद्रमा प्रसन्न होते हैं और सोना मां लक्ष्मी को प्रिय है। इन्ही उम्मीदों के साथ हर घर बाजार में आता है और धनतेरस के दिन पूरा बाजार ग्राहकों के स्वागत के लिए सज जाता है। इस बार भी सजा है। ग्राहक भी आ रहा हैं, लेकिन खरीदारी ने कारोबारियों को बहुत निराश किया है।

बग्गा ज्वैलर्स, भारत ज्वैलर्स, लाजपतनगर मार्केट में धीर एंड संस और विकास मार्ग पर चाहे तनिष्क हो या चावला ज्वेलर्स, हर साल दीपावली के पहले ग्राहकों की लाइन लगी रहती थी। ग्राहक आते और सामान खरीदते थे। इस बार के त्यौहार में पहले की तुलना में अभी 10 फीसदी भी ग्राहक नहीं आए हैं। आने वाले ग्राहकों में अधिकांश कामचलाऊ सोना-चांदी खरीद रहे हैं। अश्विनी बग्गा हर साल चांदी के सैकड़ों सिक्के बेचते थे। सिक्के इस बार भी हैं लेकिन बाजार में खरीदार नहीं हैं।

मधु विहार में सिंगला स्वीट, कनॉट प्लेस में हीरा, हल्दीराम, चांदनी चौक में भी इन दिनों ग्राहकों का रेला लगा रहता था। दीपक सिंगला बताते हैं कि इस बार वह बात नहीं है। लक्ष्मीनगर मार्केट में आइए। कुमार साड़ी सेल से लेकर किसी भी दुकान आप आसानी से जाकर सामान खरीद सकते हैं। सुरजीत सिंह बताते हैं कि पिछले साल की दीपावली में ऐसा नहीं था। ग्राहकों की भीड़ से बाजार में सांस लेना मुश्किल हो जाता था। खरीदारी भी जमकर होती थी। लाजपत नगर मार्केट में सिंधी ड्राईफ्रूट की मशहूर दुकान है। इसी तरह से लक्ष्मीनगर की मार्केट में राजकुमार हर साल कई क्विंटल बादाम गिरी, अखरोज, काजू, पिस्ता, किसमिस बेचते थे। लेकिन इस बार राजकुमार को उस तरह ऑर्डर नहीं मिले हैं।

आइए खुदरा बाजार की तरफ चलते हैं

सर्दी का मौसम आते ही गन्ने के जूस के ग्राहक नहीं रह जाते। उमेश कुमार तब दुकान के सामने मौसम के हिसाब से धंधा करने की नीति अपनाते हैं। दीपावली आने के पहले वह मोमबत्ती, सजावट का सामान बेचते हैं। उमेश कहते हैं कि इस बार भी उन्होंने उधार पूंजी लेकर सामान सजा लिया है, लेकिन धनतेरस के दिन रात 9.30 बजे तक बाजार और ग्राहक की स्थिति से निराश हैं। अधिकतर ग्राहक आ रहे हैं, दाम पूछ रहे हैं और चले जा रहे हैं। शनि अग्रवाल मेगामार्ट चलाते हैं। वह दीपावली से पहले पूरी दुकान सामान से भरकर सजा लेते हैं और दीपावली बीतते-बीतते 30 प्रतिशत सामान ही बचा रह जाता है। अभी तक के बाजार की हालत देखकर उनके मेगामार्ट में इस बार 70 प्रतिशत सामान बच जाने की उम्मीद है। सुरेन्द्र चावला धनतेरस के दो दिन अपने बर्तन बेचने के लिए पहले पड़ोसी की दुकान भी 48 घंटे के किराए पर ले लेते हैं। इस बार भी उन्होंने दो दिन के लिए 20 हजार रुपये देकर दुकान किराए पर ली है। बर्तन भी खूब मंगाए हैं, लेकिन इस बार गिलास, चम्मच, कटोरी से काम चलाने वाले ग्राहक ज्यादा हैं। कमला देवी की विनोद नगर सब्जी मंडी में फुटपाथ पर सब्जी बेचने की दुकान लगती है। लेकिन हर बार वह 15 दिन पहले से मूर्तियों की दुकान सजाती हैं। बेगुसराय की कमला देवी बताती हैं कि 15 दिन में उनकी तीन-चार महीने के बराबर की कमाई हो जाती थी। इस बार उन्हें फायदा होने की गुंजाइश कम नजर आ रही है।

गिफ्ट के डब्बों की चमक भी हुई फीकी

विनीत कपूर का ट्रेडिंग का कारोबार है। वह दीपावली से पहले कंपनियों, ऑफिसों, कारोबारियों के लिए गिफ्ट पैक की आपूर्ति करते हैं। विनीत कपूर कहते हैं कि 56 साल के जीवन में उन्हें कारोबार में 34 साल हो गए। वह कहते हैं कि इतना खराब समय उन्होंने कभी नहीं देखा था। पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया में बीबी शर्मा भी इसी तरह का काम करते हैं। बीबी शर्मा का कहना है कि उनके पुराने कस्टमर में 60 प्रतिशत तो जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। 20 प्रतिशत ने दीपावली गिफ्ट देने में कुछ निवेश किया है। 15 प्रतिशत ऐसे हैं जिनका पिछले बार से गिफ्ट पैक तैयार कराने का स्तर थोड़ा नीचे आया है। केवल पांच प्रतिशत लोग (कस्टमर) ऐसे हैं जिन्होंने पिछले साल के स्तर के आस-पास खुद को मेंटेन करके रखा है।  

आखिर क्यों ग्राहक नहीं खरीद रहा है सामान

हर व्यापारी, कारोबारी की राय बस एक है। ग्राहक बाजार में आ रहा है, लेकिन उसके हाथ खरीदारी के लिए नहीं खुल पा रहे हैं। उसकी जेब बड़ी कमजोर हो गई है। नूतन अग्रवाल कहती हैं कि कोविड-19 संक्रमण और लगे लॉकडाऊन के कारण लोगों की हालत खराब है। राजेश निश्चल का कहना है कि उनके भाई की नौकरी छूटी हुई है। वह एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करते हैं। पिछले छह महीने से बाजार नहीं चल रहा है तो प्रिंटिंग प्रेस के पास भी काम नहीं है। ऐसे में उन्हें भी बहुत कम तनख्वाह में गुजारा करना पड़ रहा है। ऐसे में वह कैसे खरीदारी करें और दीपावली मनाएं। राजेन्द्र रावत को एक पत्रकार का सवाल अखर गया। वह टूरिज्म के बिजनेस से जुड़े हैं। रावत का कहना है कि किसी तरह अभी दाल-रोटी चल जाए यही बहुत है।

क्या आपने प्रधानमंत्री का कल का भाषण सुना?

अनीता सचदेवा लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति और ग्रीन पटाखा बेच रही थीं। उनसे बुधवार 11 नवंबर को प्रधानमंत्री के भाषण के बारे में पूछने पर अनीता ने कहा कि घर का खर्चा चलाने के लिए यह दुकान लगाई है। अनीता का बेटा नोएडा की एक गारमेंट फैक्टी में था और नौकरी छूट गई है। वह कहती हैं कि प्रधानमंत्री तो केवल बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। उन्हें क्या पता हमारी परेशानी क्या है? मुजफ्फरपुर से आकर खुमचे पर गोलगप्पा बेचने वाले प्रकाश का कहना है कि देश जो तरक्की कर रहा है, उसे पूछिए मत। खुद देख लीजिए। प्रकाश के मुताबिक लोगों का काम धंधा छिन रहा है। अभी न जाने क्या दिन देखने पड़ेंगे। 



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