Farmers Protest: Farmers Leaders Responses To Govt Over Their Proposal – किसान आंदोलन: 25 दिसंबर को ‘कड़वाहट’ दूर कर सकता है अटल के जन्मदिन और क्रिसमस का ‘केक’

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किसान दिवस पर आंदोलनकारी किसानों ने सरकार को अपना लिखित जवाब भेज दिया है। दोनों तरफ से भले एक-दूसरे के प्रति नरमी दिखाने की कोशिश हुई, लेकिन तीखे तेवर की गर्मी से इस कंपकंपाती ठंड में भी आम किसानों के माथे पर पसीना है। संयुक्त किसान मोर्चा ने ताजा पत्र का जवाब सरकार को भेजकर अब तक के प्रस्तावों को नकारते हुए नए सिरे से ठोस प्रस्ताव की उम्मीद की है। दो दिनों की मैराथन मंथन बैठक के बाद आखिरकार संयुक्त किसान मोर्चा ने नये सिरे से ठोस व लिखित प्रस्ताव, नई तारीख पर बातचीत की ओर इशारा कर फिर से सरकार के पाले में गेंद डाल दी है।

किसानों की बात
संयुक्त मोर्चा की ओर से योगेंद्र यादव ने कहा कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। सरकार अपनी मंशा साफ करे। नया और ठोस लिखित प्रस्ताव लाए। पुराने संशोधन मान्य नहीं। नई तारीख बताएं। फिर बातचीत पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी गारंटी की ओर इशारा करते हुए कहा कि हमें दाम चाहिए, दान नहीं। मध्यप्रदेश के किसान नेता और संयुक्त मोर्चा के सक्रिय सदस्य शिवकुमार कक्का ने सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी की ओर इशारा कर कहा कि फैसला होने तक सरकार इन कानूनों को ठंडे बस्ते में डाल दे। पहले बातचीत का माहौल बनाए, फिर बात बनेगी। वामपंथी नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा कि संशोधन मंजूर नहीं। सरकार किसानों को थका देना चाहती है, हम थकने वाले नहीं।

बता दें, एक दिन पहले 22 दिसंबर को पंजाब की 30 जत्थेबंदियों ने सरकार के नए पत्र पर मंत्रणा की। फिर किसान दिवस पर दिन भर संयुक्त मोर्चे ने मंथन किया। संयुक्त मोर्चा की पांच सदस्यीय कमेटी ने चर्चा के बाद सरकार को भेजे जाने वाले जवाब के मजमून को अंतिम रूप दिया। दो दिनों तक मैराथन मंथन की खास वजह यह थी कि पहले पंजाब की जत्थेबंदियों, फिर जिन 40 संगठनों का सरकार ने इस पत्र में जिक्र किया था उनसे और आखिर में संयुक्त मोर्चे के बीच मंत्रणा चली। गहन विमर्श के बाद पांच सदस्यीय टीम ने जवाब तैयार किया। इसके कानूनी पहलुओं पर भी गौर किया गया। इस बीच किसान दिवस पर भी आंदोलनकारी किसान संगठनों ने दोपहर में उपवास रखा तो क्रमिक भूख हड़ताल भी जारी रखी।

सरकार का पक्ष
किसान दिवस पर सुबह पीएम नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्वीट कर किसानों के प्रति हमदर्दी दिखाई। सरकार की ओर से किसान हित का भरोसा दिलाया गया और बातचीत से हल निकलने की उम्मीद जगाई गई। उधर, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को ट्रैक्टर वितरित किया। योगी बोले, विपक्ष किसानों को बरगला रहा है। भाजपा प्रवक्ता संवित पात्रा ने किसान आंदोलन को वामपंथियों द्वारा हाईजैक करने का आरोप मढ़ा और केरल का खासतौर से जिक्र किया। हालांकि संवित पात्रा के वामपंथ के आरोपों को योगेंद्र यादव ने खारिज किया।

दोनों का पक्ष
संयुक्त किसान मोर्चा के जवाब पर अब सरकार की ओर से फिर एक प्रस्ताव भेजा जा सकता है। इसके लिए 25 दिसंबर अहम हो सकता है। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भर के 9 करोड़ किसानों से सीधा संवाद करेंगे। उनके खाते में 18 हजार करोड़ की सम्मान निधि भी डालेंगे। पीएम आम किसानों के प्रति सहानुभूति रखेंगे लेकिन विपक्ष पर वार जारी रहेगा। सरकार ने तीनों कानूनों की वापसी की मांग को पहले ही खारिज कर दिया है। ऐसे में अब न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बात आकर अटक रही है। सरकार लिखित गारंटी पहले ही दे चुकी है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लिखित गारंटी और कानूनी गारंटी के बीच पेच फंसता नजर आ रहा है। ऐसे में सरकार की ओर से 25 दिसंबर को आम किसानों का समर्थन जुटाने का अभियान है, तो उससे एक दिन पहले ही 24 दिसंबर को किसान एकता मोर्चा की ओर से सोशल मीडिया पर 10 लाख लोगों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान लोगों के सवालों के जवाब दिए जाएंगे। दोनों तरफ से दबाव का दौर भी जारी है।

किसानों के समर्थन में आंसू 
इस बीच सियासी फसल लहलहाने वालों ने किसान दिवस पर आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में ‘आंसू’ बहाए। बयानबाजी का दौर चला। बंगाल की तृणमूल कांग्रेस के पांच सांसद सिंघु बॉर्डर पहुंचे और ममता का संदेश दिया। बंगाल चुनाव सिर पर है। शरद पवार किसान दिवस पर किसानों की हालत से ‘भावुक’ हुए। कांग्रेस ने यूपी में किसानों के समर्थन में कही-कहीं ‘ताकत’ झोंकने की कोशिश की।

‘सुप्रीम’ रास्ता
संसद के बाद अब सड़क पर बाहर यदि बात नहीं बनी तो सुप्रीम कोर्ट से आखिरी रास्ता निकल सकता है। हालांकि, अब तक सुप्रीम कोर्ट जाने वाले किसान संगठनों से संयुक्त मोर्चा ने नाता तोड़ कर सरकार के विरोध के स्वर को ही मुखर किया है। अब दिल्ली जाम के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरी समस्या पर गौर किया। इसमें दोनों पक्षों के लिए संदेश है- बातचीत से हल। सरकार को संदेश- बातचीत और हल तक कानूनों पर अमल नहीं। किसान संगठनों को संदेश- कमेटी बनाएं, बात करें और जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ को शामिल करें। यदि आंदोलनकारियों के नुमाइंदे और सरकार के वार्ताकार इस हफ्ते मेज पर बातचीत के लिए जुट पाते हैं, तो सोने पे सुहागा वरना अवकाश के बाद नए साल के पहले हफ्ते में फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर मामला पहुंचेगा और आखिर में ‘सुप्रीम’ रास्ता से ही हल की उम्मीद बचेगी।

रणनीति

  • 24 को किसान एकता मोर्चा सोशल मीडिया पर देश के 10 लाख लोगों को जोड़ेगा, देगा सवालों के जवाब
  • 25 को पीएम नरेंद्र मोदी 9 करोड़ किसानों से करेंगे संवाद, खाते में डालेंगे 18 हजार करोड़ सम्मान निधि
  • कड़वाहट दूर कर सकता है अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिन और क्रिसमस का ‘केक’
  • सड़क पर नहीं बनी बात तो सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से निकल पाएगा आखिरी रास्ता



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