Gujarat High Court Said: Posco Law Supremacy Over Atrocities Act – अत्याचार अधिनियम पर पॉस्को कानून की है सर्वोच्चता : गुजरात हाईकोर्ट

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

Updated Thu, 08 Oct 2020 05:23 AM IST

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गुजरात हाईकोर्ट का कहना है कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉस्को) कानून की अत्याचार अधिनियम पर सर्वोच्चता है क्योंकि किसी बच्चे की जाति उसकी सुरक्षा और कल्याण से ऊपर नहीं हो सकती है। हाईकोर्ट ने यह फैसला सोमवार को अनुसूचित जाति की एक नाबालिग लड़की के दुष्कर्म मामले में दिया। गुजरात सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोपी की जमानत याचिका पर आपत्ति जताई।

जस्टिस एएस सुपेहिया ने कहा कि एक बच्चे की जाति उसकी सुरक्षा और कल्याण से ऊपर या पक्षपातपूर्ण नहीं हो सकती है। ऐसे में पॉस्को कानून के सराहनीय उद्देश्यों के साथ यह अत्याचार अधिनियम पर अपनी सर्वोच्चता स्थापित करता है। हालांकि दोनों कानून विशेष अधिनियम कहे जाते हैं। दोनों ही कानूनों के प्रावधानों के तुलनात्मक विश्लेषण से एकमात्र यह निष्कर्ष निकलता है कि विधायिका ने अत्याचार अधिनियम पर पॉस्को कानून को वरीयता दी।

नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी विक्रम मालीवाड़ के खिलाफ दोनों ही कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसलिए आरोपी की जमानत याचिका में इस मुद्दे पर विचार हुआ कि क्या बच्चे की सामाजिक स्थिति उसकी सुरक्षा के आड़े आती है। आरोपी के वकील ने सीआरपीसी की धारा 439 के तहत जमानत याचिका दायर की है। इसके तहत हाईकोर्ट या सेशन कोर्ट को जमानत पर विशेष शक्ति दी गई हुई है।

गुजरात हाईकोर्ट का कहना है कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉस्को) कानून की अत्याचार अधिनियम पर सर्वोच्चता है क्योंकि किसी बच्चे की जाति उसकी सुरक्षा और कल्याण से ऊपर नहीं हो सकती है। हाईकोर्ट ने यह फैसला सोमवार को अनुसूचित जाति की एक नाबालिग लड़की के दुष्कर्म मामले में दिया। गुजरात सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोपी की जमानत याचिका पर आपत्ति जताई।

जस्टिस एएस सुपेहिया ने कहा कि एक बच्चे की जाति उसकी सुरक्षा और कल्याण से ऊपर या पक्षपातपूर्ण नहीं हो सकती है। ऐसे में पॉस्को कानून के सराहनीय उद्देश्यों के साथ यह अत्याचार अधिनियम पर अपनी सर्वोच्चता स्थापित करता है। हालांकि दोनों कानून विशेष अधिनियम कहे जाते हैं। दोनों ही कानूनों के प्रावधानों के तुलनात्मक विश्लेषण से एकमात्र यह निष्कर्ष निकलता है कि विधायिका ने अत्याचार अधिनियम पर पॉस्को कानून को वरीयता दी।

नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी विक्रम मालीवाड़ के खिलाफ दोनों ही कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसलिए आरोपी की जमानत याचिका में इस मुद्दे पर विचार हुआ कि क्या बच्चे की सामाजिक स्थिति उसकी सुरक्षा के आड़े आती है। आरोपी के वकील ने सीआरपीसी की धारा 439 के तहत जमानत याचिका दायर की है। इसके तहत हाईकोर्ट या सेशन कोर्ट को जमानत पर विशेष शक्ति दी गई हुई है।



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