Rahul Gandhi Narendra Modi: India Bangladesh GDP Growth Rate Vs Per Capita Income Report 2020 | How Big Is India Economy Vs Bangladesh | राहुल ने भारत-बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति GDP की तुलना कर मोदी पर साधा निशाना; जानिए हकीकत

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  • Rahul Gandhi Narendra Modi: India Bangladesh GDP Growth Rate Vs Per Capita Income Report 2020 | How Big Is India Economy Vs Bangladesh

4 मिनट पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

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  • आर्थिक विश्लेषकों का दावा- प्रति व्यक्ति GDP तो बांग्लादेश की पहले भी भारत से ज्यादा रही है
  • IMF की रिपोर्ट ही कहती है कि कुछ वर्षों में भारत फिर सबसे तेज GDP ग्रोथ रेट वाला देश बनेगा

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने दुनियाभर के देशों के लिए वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बांग्लादेश ने प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में भारत को पीछे छोड़ दिया है। पिछले दिनों जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे लेकर सवाल उठाए तो एकेडमिक लेवल पर चर्चा शुरू हो गई कि क्या वाकई में भारत विकास की रफ्तार में बांग्लादेश से पीछे छूट गया है? क्या है यह पूरा मसला? आइए समझते हैं…

सबसे पहले, IMF रिपोर्ट क्या कहती है?

  • IMF ने पिछले हफ्ते वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट जारी की। इसमें दावा किया है कि 2020 में भारत का GDP ग्रोथ रेट -10% के आसपास रहेगा। कुछ महीने पहले IMF ने कहा था कि भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट -4.5% रहेगा और नया अनुमान इसके दोगुने से ज्यादा है।
  • इस आकलन में चौंकाने वाली बात यह थी कि बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति औसत आय इस साल भारत में प्रति व्यक्ति औसत आय से ज्यादा रहने वाली है। इसे लेकर राहुल गांधी ने भाजपा की मोदी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया- भाजपा के नफरत भड़काने वाले सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की 6 साल में उपलब्धि, बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ देगा।
  • इसके साथ ही राहुल ने प्रति व्यक्ति GDP का एक चार्ट भी शेयर किया। उसमें दिख रहा है कि 1981 में भारत में प्रति व्यक्ति GDP 274.7 डॉलर थी, जो 2020 में बढ़कर 1,876.5 डॉलर हो गई। बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति GDP 263.7 डॉलर से बढ़कर 1,888.0 डॉलर हो गई है। यानी भारत पीछे रह गया है।

यह कैसे हो गया? क्या भारत अब दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी में से एक नहीं रही?

  • राहुल के दावे की हकीकत जानने के लिए यह समझना होगा कि किसी भी देश की इकोनॉमी की तुलना कैसे की जाती है? आम तौर पर इसके लिए GDP ग्रोथ रेट या एब्सोल्यूट GDP को बेस बनाया जाता है। दोनों ही मामलों में भारत की इकोनॉमी बांग्लादेश के मुकाबले काफी बड़ी है।
  • भारत सरकार के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर रहे अरविंद सुब्रमणियन ने राहुल के दावे का जवाब ट्विटर पर दिया। उन्होंने कहा कि जिस डेटा की तुलना से बेचैनी बढ़ाई जा रही है, वह सही डेटा है ही नहीं। जो महत्वपूर्ण डेटा है, उसमें भारत-बांग्लादेश की तुलना ही नहीं की जा सकती।
  • और तो और, IMF के मुताबिक भी निकट भविष्य में वह नहीं होने वाला, जिसका दावा हो रहा है। यह देखने लायक है कि भारत का GDP ग्रोथ रेट और एब्सोल्यूट GDP बांग्लादेश से तकरीबन 10 गुना ज्यादा है और वह हर साल तेजी से बढ़ रही है।

बांग्लादेश से किस मायने में पिछड़े और क्यों?
प्रति व्यक्ति GDP या आय निकालने के लिए देश की कुल GDP को कुल आबादी से भाग दिया जाता है। इस लिहाज से भारत के बांग्लादेश से पिछड़ने की यह तीन अहम अहम वजहें हैं:

  1. 2004 के बाद से बांग्लादेश की इकोनॉमी ने रफ्तार पकड़ी है। इसके बावजूद दोनों की इकोनॉमी की रिलेटिव पोजिशन 2004 और 2016 के बीच नहीं बदली है। बांग्लादेश के मुकाबले भारत की ग्रोथ तेज रही है। 2017 के बाद जरूर भारत की इकोनॉमी गिर रही है, जबकि बांग्लादेश की रफ्तार तेज है।
  2. पिछले 15 साल में भारत की आबादी 21% तक बढ़ी है। वहीं, बांग्लादेश की आबादी 18% से कम रफ्तार से। इसका असर भी प्रति व्यक्ति GDP पर स्पष्ट है। 2007 में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति GDP भारत के मुकाबले आधी थी। 2014 में वह 70% रह गई और पिछले कुछ वर्षों में उसने बराबरी की है।
  3. कोविड-19 की वजह से भारत की GDP में 10% तक की गिरावट का अनुमान लगाया गया है। वहीं, बांग्लादेश में GDP ग्रोथ रेट 4% के आसपास रहने की संभावना है। इसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बांग्लादेश दुनिया के ब्राइट स्पॉट्स में से एक है।

क्या इससे पहले भी ऐसा हुआ है?

  • कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1991 में जब भारत में गंभीर संकट था और उसने 1% से थोड़ा ही ऊपर ग्रोथ रेट दर्ज की थी, तब बांग्लादेश के प्रति व्यक्ति GDP नंबर भारत से आगे थे। तब से भारत ने मजबूत ग्रोथ दर्ज की और तेजी से बढ़त बनाई।
  • 1991, 1992 और 1993 में भी बांग्लादेश भारत से आगे रहा था। 1990 में एक डॉलर की कीमत 17.5 रुपए थी, जो 1991 में बढ़कर 22.7 रुपए और 1993 में बढ़कर 33.4 रुपए हो गई। नतीजा यह रहा कि 1990 से 1993 के बीच रुपए में आय बढ़ने के बाद भी प्रति व्यक्ति GDP 1990 में 374 डॉलर से घटकर 1993 में 306 डॉलर रह गई थी। बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति GDP इस दौरान 1990 में 324 डॉलर और 1993 में 322 डॉलर रही थी।
  • यह भी ध्यान रखना चाहिए कि श्रीलंका और भूटान में प्रति व्यक्ति GDP भारत की तुलना में ज्यादा है, वहीं नेपाल और म्यांमार में कम। म्यांमार में भी प्रति व्यक्ति GDP तेजी से बढ़ी है। 1998 में यह भारत के मुकाबले 28% थी जो 2020 में बढ़कर 71% के लेवल पर आ चुकी है।
  • आईएमएफ के प्रोजेक्शन बताते हैं कि भारत में अगले साल ग्रोथ रेट तेज रहेगा। उम्मीद की जा सकती है कि अगले साल भारत फिर आगे निकल जाएगा। बांग्लादेश की कम आबादी और तेज इकोनॉमिक ग्रोथ को देखते हुए अगले कुछ वर्षों में दोनों के बराबर रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस बहस में सुब्रमणियन का दावा क्या है?

  • सुब्रमणियन का कहना है कि प्रति व्यक्ति GDP को किसी देश में औसत स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग या वेलफेयर का इंडिकेटर माना जा सकता है। इसके अलावा ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स जैसे कई और भी इंडेक्स है, जिसकी मदद से किसी देश के नागरिकों की स्थिति का पता चलता है।
  • उन्होंने कहा कि हमें इन्फ्लेशन के इफेक्ट्स को बाहर निकालने के बाद रियल GDP को लोकल करेंसी में नापना होता है। रियल GDP के लोकल करेंसी अनुमानों को डॉलर से कन्वर्ट करना होता है। IMF के पास इसका आकलन करने के तीन तरीके हैं, जबकि वर्ल्ड बैंक के पास चार।
  • आईएमएफ ने मौजूदा मार्केट एक्सचेंज रेट्स के आधार पर जुटाए गए GDP के आंकड़ों के आधार पर तुलना की है। यह वेलफेयर को लेकर तुलना करने का सही तरीका नहीं है, क्योंकि इसमें घरेलू इन्फ्लेशन या प्रोडक्टिविटी ग्रोथ को आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाता।
  • सुब्रमणियन का कहना है कि तुलना करने के लिए GDP के आंकड़ों को कॉन्स्टंट रखकर पर्चेजिंग पॉवर पैरिटी (PPP) एक्सचेंज रेट्स को देखा जाता है। इस आधार पर यदि तुलना की जाए तो भारत की तुलना में बांग्लादेश काफी पीछे है। कोरोनावायरस की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के बावजूद।

बांग्लादेश की ग्रोथ स्टोरी क्या है?

  • IMF के आंकड़ों ने उन लोगों को चौंकाया, जो मानकर चलते थे कि बांग्लादेश सिर्फ सस्ते लेबर का सप्लायर है और अवैध तरीके से भारत में रह रहे नागरिकों का देश है। कई सोशल इंडिकेटर बताते हैं कि भले ही बांग्लादेश भारत से गरीब हो, कई मामलों में उसने भारत को भी पछाड़ दिया है।
  • पाकिस्तान से अलग होने के बाद बांग्लादेश को शुरुआत में दिक्कत आई। लेकिन, इसके बाद उसे इकोनॉमिक और पॉलिटिकल आइडेंटिटी बनाने का मौका मिला और उसने इसे भुनाया भी। उसके लेबर लॉ इतने सख्त नहीं है और इकोनॉमी में महिलाओं की लेबर फोर्स में भागीदारी बढ़ी है।
  • गारमेंट इंडस्ट्री बांग्लादेश के ग्रोथ में की-ड्राइवर रही है। ग्लोबल एक्सपोर्ट भी चीन के मुकाबले तेजी से बढ़ा है। इसने बांग्लादेश की इकोनॉमी को इस तरह स्ट्रक्चर करने में मदद की कि वहां GDP में इंडस्ट्रियल सेक्टर सबसे बड़ा हिस्सेदार बन गया। इसके बाद सर्विस सेक्टर आता है।
  • इन दोनों ही सेक्टरों ने भरपूर नौकरियां पैदा कीं और एग्रीकल्चर की तुलना में इसमें पैसा भी ज्यादा है। दूसरी ओर, भारत में अब भी इंडस्ट्रियल सेक्टर उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाया है और अब भारत में ज्यादातर लोग रोजगार के लिए एग्रीकल्चर पर निर्भर है।





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