लापरवाह एएनओ के कुप्रबंधन से एनआरसीएच की कई नर्सें हुईं कोरोना संक्रमित

स्टाफ करता है सप्ताह में 72 घंटे की ड्यूटी, एएनओ और उसके चहेते करते हैं सिर्फ 24 घंटे की साप्ताहिक ड्यूटी, एनआरसीएच में एचओईआर के समस्त नियम-निर्देश हैं ताक पर

उत्तर रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल (एनआरसीएच) की कई नर्सें कोरोना संक्रमित हो हैं। उन्हें फिलहाल होम कोरंटाइन किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन नर्सों की यह हालत लापरवाह और एरोगेंट असिसटेंट नर्सिंग ऑफिसर/मैन पॉवर प्लानिंग (एएनओ/एमपीपी) की मनमानी तथा कुप्रबंधन के कारण हुई है।

पता चला है कि एनआरसीएच में एएनओ की मनमानी के चलते नर्सों एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ से अनावश्यक रूप से 12-12 घंटे की ड्यूटी करवाई जा रही है। इस दौरान सभी नर्सों को लगातार पीपीई पहने रहना पड़ता है।

इसके अलावा एएनओ द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों की पूरी तरह से अनदेखी तथा अवहेलना करके एनआरसीएच के समस्त स्टाफ को एकसाथ ड्यूटी पर बुलाया जाता है। इसीलिए स्टाफ का एक-दूसरे के साथ अधिकतम संपर्क हो रहा है।

एनआरसीएच के सूत्रों का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में कार्यरत समस्त नर्सिंग स्टाफ को भी एकसाथ ड्यूटी पर बुलाया जा रहा था। इसी वजह से उनमें से कोई एक-दो स्टाफ बाहर से संक्रमित होकर आया होगा, जिसके निकट संपर्क में आने के कारण बाकी स्टाफ भी संक्रमित हुआ।

स्टाफ का कहना है कि चूंकि बाहर से संक्रमित होकर आया स्टाफ दो-तीन दिनों तक आराम से ड्यूटी कर रहा था, इसलिए उसके संपर्क में आईं ओटी की 6 नर्सें भी संक्रमित पाई गई हैं, जिनको फिलहाल होम कोरंटाइन किया गया है।

समस्त नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि एनआरसीएच में उनसे 12-12 घंटों की ड्यूटी करवाकर उनका भयानक शोषण किया जा रहा है और रेलवे की कोई सक्षम अथॉरिटी उनकी कोई समस्या सुनने-समझने को तैयार नहीं है।

उनका कहना है कि एरोगेंट एएनओ और उसका खास चापलूस स्टाफ सुबह 8 बजे से शाम को 4 बजे तक की ही ड्यूटी करता है, वह भी सप्ताह में सिर्फ 3 दिन। इस तरह एएनओ और उसके खास चहेते साप्ताहिक सिर्फ 24 घंटे की ही नौकरी कर रहे हैं।

जबकि वहीं अन्य स्टाफ से – नॉन-कोविद में ३६ घंटे और कोविद वार्ड एवं ओपीडी में 72 घंटे – की ड्यूटी ली जा रही है। यानि अन्य स्टाफ से 14 दिन की ड्यूटी, वह भी लगातार 12-12 घंटे की!

स्टाफ का कहना है कि एनआरसीएच में एचओईआर के नियमों-निर्देशों का किसी भी स्तर पर किसी भी तरह से अनुपालन नहीं किया जा रहा है। यहां सीनियर डॉक्टर सिर्फ अपने केबिन में बैठकर हवा-हवाई निर्णय लेते हैं, जबकि जमीन पर स्टाफ की जो परेशानियां हैं, भौतिक समस्याएं हैं और अन्य जो वास्तविकताएं हैं, उनका सामना कोई नहीं करना चाहता।

प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार अब जब कई नर्सें कोरोना संक्रमित हो चुकी हैं, और इससे हॉस्पिटल की भी काफी बदनामी हो रही है, तथा यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सहित कोविद ग्रुप के भी संज्ञान में आ चुकी है, तब रेल प्रशासन को कुछ होश आ रहा है, क्योंकि उसको स्थिति सुधारने तथा उस पर पूरा नियंत्रण करने के लिए सख्ती से कहा गया है।








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