कुछ सनकी डॉक्टरों के हवाले कल्याण रेलवे हॉस्पिटल! – RailSamachar

वाशिंग मशीन के लिए स्टाफ से लिया गया पांच-पांच सौ रुपए का चंदा

क्वारंटीन लोगों की ड्यूटी कर रहे हर स्टाफ को नहीं उपलब्ध कराई गई अलग-अलग पीपीई किट्स, ग्लव्स

क्वारंटीन स्टाफ और अन्य ड्यूटी स्टाफ से लिया जा रहा रहा खाने का पैसा, सेनिटाइजर का भी उचित इंतजाम नहीं

Suresh Tripathi

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए कल्याण रेलवे हॉस्पिटल सक्षम नहीं है। यहां की स्थिति काफी गम्भीर है। बदइंतजामी का शिकार इस हॉस्पिटल का इंतजाम कुछ सनकी डॉक्टरों के हवाले छोड़ दिया गया है। लाख कोशिशों के बावजूद भी यहां के प्रशासनिक अधिकारी स्टाफ की समस्याओं की गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं।

इससे पहले भी लिखा जा चुका है कि कोविद19 से बचाव की तैयारी के लिए जो फंड यहां दिया गया था, उससे 80 हजार रुपए खर्च करके एक बाईपेप मशीन खरीद ली गई, जिसका फिलहाल कोई उपयोग नहीं होना था। तथापि इस पर रेल प्रशासन द्वारा कोई उचित संज्ञान नहीं लिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आइसोलेशन वार्ड बनाने हेतु भी कर्मचारियों से पैसा मांगा जा रहा है। पुराने कोविद केसेस के संपर्क में आए हुए डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ, जिनको क्वारंटीन किया गया है, से खाने और नास्ते का पैसा वसूल किया जा रहा है।

स्टाफ का कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय के निर्देशानुसार आइसोलेशन वार्ड बनाते समय निर्धारित मापदंड अपनाने के बजाय हॉस्पिटल प्रशासन यूनियनों और यहां कार्यरत पैरामेडिकल स्टाफ के अनुरोध को बिल्कुल ठुकराकर अपनी मनमानी कर रहा है।

यहां कार्यरत नर्सिंग एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाफ भय और चिंताग्रस्त है। वह प्रॉपर और अलग-अलग पीपीई किट, दस्ताने एवं अन्य मेडिकल सुरक्षा सामग्री के बिना कैसे मरीजों की देखभाल करे, उसे समझ में नहीं रहा है।

जब तक उन्हें स्वरक्षा के लिए उचित सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाएगी, तब तक वे कैसे अपना कर्तव्य निभा पाएंगे, यह एक बड़ा सवाल है। यह सब वह किसको बताएं, कोई सुनने वाला नहीं है। सब राम भरोसे छोड़ दिया गया है।

ऐसे में कल्याण रेलवे हॉस्पिटल के एक कर्मचारी ने हॉस्पिटल की प्रशासनिक व्यवस्था और यहां हो रही अंधेरगर्दी के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए जो पत्र नेशनल रेलवे मजदूर यूनियन (एनआरएमयू) के जनरल सेक्रेटरी वेणु पी. नायर को लिखा है, उसकी एक प्रति कानाफूसी.कॉम को भी अपने सूत्रों से प्राप्त हुई है।

देखें, कोरोनावायरस जैसी वैश्विक महामारी से निपटने के लिए बिंदुवार इस पत्र में कल्याण रेलवे हॉस्पिटल की दुर्दशा का वर्णन

On the occasion of converting Railway Hospital, Kalyan for COVID19 treatment

Please do consider the following matters-

The 2nd floor of Kalyan Railway Hospital is set-up for Covid19 treatment but there is no other alternative for the patient who are already effected in the same hospital.

They are using the same entrance, corridor and lift. The casualty and operation theatre, and also ICU is working in the ground and 1st floor respectively.

It may not be advisable to admit the patients for other diseases especially cases related to delivery. So, as soon as possible to relief the other patients from here is very important.

After converting Kalyan Railway Hospital completely for Covid19 treatment, it is not advisable for the railway staff to consult railway hospital at the time of emergency. So, it is necessary to maintain a tie-up with any of the nearest hospital.

There is no proper provision of PPE kit for the staff who are going to check the quarantine patients.

The staff who are cleaning the quarantine room/ward are wearing a simple surgical gown.

PPE, Gloves and Face shield should be provided individually for each and every staff who are serving the Covid19 patients.

Sanitizer and gloves should be provided in a sufficient quantity.

At the time of implementation of ventilator system, an experienced staff should be accompany the system including doctors.

The staff who are the incharge should co-operate with other staff that will help to boost the substrate morale.

The staff who are more than 50 years old of age and the people with pre-existing medical conditions – such as asthma, diabetes, heart decease etc – should not be accompany for Covid19 duty.

A special roaster duty should be implemented for such staffs. Once PPE kit wore, they are unable to pursue their daily needs, even that of drinking water. So, the rotation in specified intervals is necessary, i.e. 4 hrs or 6 hrs duty is preferable.

The staff who have been quarantine due to treating undetected Covid19 patients are asked to pay for their food provided at the hospital.

Even the staff who are gonna stay in the hospital premises ordered to be available 24 hrs in case of need for the Covid19 patients are also asked to pay for their food.

(This issue must be brought to notice to the concerned higher authorities as soon as possible.)

The staff who have been appointed for the Covid19 and who are going to stay in nearby premises of hospital are asked to pay Rs. 500 by each doctors, nurses and other paramedical staff for providing two washing machines for their needs.

An look of Quarantine Ward at Railway Hospital







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हावड़ा पार्सल/गुड्स में बीसों साल से जमे हुए हैं कुछ खास रेलकर्मी

मंडल के प्रत्येक वाणिज्य अधिकारी को होती है 50 हजार से 5 लाख की अवैध कमाई

सीवीसी/विजिलेंस के सभी डायरेक्टिव ताक पर, भ्रष्ट स्टाफ को प्राप्त है अधिकारियों का संरक्षण

कोलकाता : हावड़ा पार्सल, दांकुनी गुड्स, पाकुर गुड्स, बर्दवान पार्सल, भद्रेश्वर गुड्स, श्रीरामपुर पार्सल, बाली गुड्स, त्रिवेणी गुड्स। पूर्व रेलवे, हावड़ा मंडल के इन सभी महत्वपूर्ण पार्सल/गुड्स डिपो में करीब 20-25 सालों से कुछ विशेष लोगों की पोस्टिंग है, जो कुछ संबंधित वाणिज्य अधिकारियों की जरूरतों और हितों का पूरा ख्याल रखने की महारत रखते हैं।

इनमें से कुछ नाम और उनकी खास विशेषताएं इस प्रकार हैं-

1. सुभाष चौधरी, ईआर मेंस कांग्रेस से संबंधित हैं। हावड़ा टिकट बुकिंग में बीएस1 हैं। पार्सल में 25 रहे हैं। वहां भी सिर्फ साइन किए, काम कभी नहीं किया, आज भी नहीं कर रहे हैं। सिर्फ पैसा उगाही करना ही इनका प्रमुख काम है।

2. संजीव गुप्ता, अभी सीएस1/हावड़ा पार्सल में पदस्थ हैं, पहले बीएस1 रहे हैं। यह भी ईआर मेंस यूनियन से संबंधित हैं। यह काउंटर पर कभी काम नहीं करते, यह पैसा नहीं लेते हैं, मगर इजी वर्किंग को ही प्रीफर करते हैं।

3. सुमन बोस, पार्सल शेड नं.3 में पदस्थ हैं, सीपीसी यानि चीफ पार्सल क्लर्क हैं। 18 साल से एक ही सीट पर काम कर रहे हैं। पहले माल बुकिंग में थे और अब डिस्पैचिंग में हैं। डिस्पैच में कभी विजिलेंस केस होने का डर नहीं रहता है। इसलिए यह हमेशा सेफ साइड पोस्टिंग में रहने वाले खास प्राणी हैं। हावड़ा पार्सल का यह सबसे मलाईदार शेड है। यह मोस्ट सेंसिटिव पोस्ट है। फिर भी यह यहां पिछले 18 सालों से जमे हुए हैं।

4. अजय कुमार, सीएस1 हैं, नौकरी में आने से लेकर अब तक पार्सल में ही पदस्थ हैं। कर्मचारियों द्वारा इन्हें हावड़ा मंडल सहित संपूर्ण पूर्व रेलवे पार्सल का माफिया बताया गया है। यह विभागीय प्रमुख को साधकर पूरे जोनल पार्सल कंट्रोल करते हैं। कर्मचारियों ने बताया कि यह इतने पावरफुल हैं कि इन्होंने पदोन्नति से पहले वर्तमान सीसीएम/पीएम की पोस्टिंग सीनियर डीसीएम, हावड़ा के पद पर करवाई थी, जिनकी कमजोरी पैसा और शबाब दोनों रही हैं। इसी संदर्भ में उनकी पत्नी की शिकायत पर उन्हें हावड़ा से हटाया गया था।

बताते हैं कि इनके पहले वाले सीनियर डीसीएम की पोस्टिंग भी अजय कुमार ने ही करवाई थी। अजय कुमार को हावड़ा पार्सल से कुछ समय के लिए तब हटाया गया, जब उनके खिलाफ एक बड़ा विजिलेंस केस हुआ था। इनकी कैश हैंडलिंग करीब 10 साल से बंद है। आज भी इनकी पोस्टिंग पार्सल एकाउंट में है, मगर हावड़ा पार्सल शेड नं.3 में इंचार्ज के तौर पर काम कर रहे हैं। वहां इनसे सभी स्टाफ इससे इसलिए डरता है, क्योंकि यही सब कुछ तय करते हैं कि किसको कितना पैसा पहुंचाना है। यह पीएस/पीसीसीएम अजय राय, जो पहले बुकिंग/आरक्षण क्लर्क थे और बाद में एसीएम में पदोन्नत होकर अधिकारी बन गए, अजय कुमार के लंगोटिया यार हैं।

5. जॉय बल्लभ भी यहां काफी समय से पदस्थ हैं, सीपीसी हैं। एक विजिलेंस केस होने के बाद इनका ट्रांसफर हावड़ा बुकिंग से तारकेश्वर बुकिंग में हुआ था। फिर वापस वहां से जुगाड़ लगाकर जल्दी ही हावड़ा पार्सल में आ गए। दुबारा जब विजिलेंस केस हुआ, तब इनको हावड़ा बुकिंग में भेजा गया था, मगर आज तक यह न वहां गए और न ही संबंधित अधिकारियों ने इनके ट्रांसफर आर्डर पर अमल करवाने की जरूरत समझी। जबकि अन्य लोगों का आर्डर उसी दिन या 2-3 दिन में लागू करवाया जाता है। तथापि जॉय बल्लभ महोदय का आर्डर आज तक नहीं लागू हुआ।

बताते हैं कि इस शेड से एसीएम/कोचिंग, एसीएम/गुड्स, डीसीएम और सीनियर डीसीएम आदि सबका न सिर्फ खास ख्याल रखा जाता है, बल्कि सबका हिस्सा भी उनके ओहदे के अनुसार समय पर पहुंचाया जाता है।

कर्मचारियों का कहना है कि सिर्फ हावड़ा पार्सल से डीसीएम को कुछ नहीं मिलता। बाकी सब जगह से मिलता है। कर्मचारियों के अनुसार एसीएम/कोचिंग और एसीएम/गुड्स में से प्रत्येक को हावड़ा पार्सल से प्रतिमाह 40-50 रुपये मिल जाते हैं, जबकि हावड़ा पार्सल को छोड़कर बाकी सभी जगह से डीसीएम को कुल मिलाकर एक लाख की आमदनी प्रतिमाह हो जाती है। वहीं सीनियर डीसीएम को सब जगह से कुल मिलाकर प्रतिमाह लगभग पांच लाख रुपये मिलते हैं।

हावड़ा मंडल के उपरोक्त पांचों महान पार्सल कर्मियों के खौफ से आतंकित और उत्पीड़ित कुछ रेलकर्मियों का यह भी कहना था कि यदि कोई उच्च वाणिज्य अधिकारी किसी आपातकालीन स्थिति में इनसे कभी यह फरमाइश कर दे कि एक घंटे में 50 लाख रुपये की जरूरत है, तो यह लोग उससे पहले ही यह रकम उस तक पहुंचा देने की पूरी क्षमता रखते हैं। यही नहीं, इन्होंने इसी की बदौलत करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। यदि इनकी अर्जित संपत्तियों की सीबीआई जांच करवाई जाए, तो सबकी कलई खुलकर सामने आ जाएगी।








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