आज तक नहीं किया गया कटरा में टीटीई रेस्ट हाउस का इंतजाम, इधर-उधर भटकने को मजबूर चेकिंग स्टाफ

डीआरएम ने निकाल दिया मौज-मस्ती में अपना कार्यकाल, हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं मुख्यालय के वाणिज्य अधिकारी

सुरेश त्रिपाठी

फिरोजपुर: श्री वैष्णव देवी कटरा रेलवे स्टेशन पर कोई टीटीई रेस्ट हाउस नहीं है। जबकि इस स्टेशन को बने हुए और चालू हुए कई वर्ष बीत चुके हैं।

भारतीय रेल के अधिकांश अधिकारियों का श्री वैष्णव देवी के दर्शन लाभ के लिए यहां अक्सर आना-जाना लगा रहता है। तथापि आज तक उनका ध्यान इस एक बड़ी समस्या और आवश्यक व्यवस्था की तरफ क्यों नहीं गया, यह आश्चर्य की बात है।

अधिकारियों ने अपने ठहरने के लगभग सभी आलीशान इंतजाम वहां किए हैं। मगर अर्निंग स्टाफ की कोई यथोचित व्यवस्था आज तक नहीं की गई है।

विभिन्न मंडलों से गाड़ियां लेकर कटरा आने वाले टीटीई के लिए ठहरने के जो इंतजाम किए गए हैं, वहां बेड होता है, तो बेडशीट नहीं होती, साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं होता, और इतनी गर्मी में एसी तो बहुत दूर की बात है, कूलर तक का कोई इंतजाम नहीं है।

डीआरएम/फिरोजपुर ने अपना दो साल का कार्यकाल पूरी अय्याशी, मौज-मस्ती और मनमानी करते हुए निकाल दिया। इसके अलावा दो साल में यहां उन्होंने तीन सीनियर डीसीएम बदलवा दिया, जिससे कमर्शियल स्टाफ का कोई माई-बाप ही नहीं रहा, वह अपनी समस्या कहें तो किससे जाकर कहें!

स्टाफ का कहना है कि मंडल में कई फालतू और अनुपयोगी काम कराए गए, परंतु टीटीई के लिए जो आवश्यक और मानक कार्य किया जाना चाहिए था, वह नहीं कराया गया।

इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि आज जब कुछ ही गाड़ियां चल रही हैं और बहुत थोड़ा स्टाफ वहां पहुंचता है, जब उसके लिए ही व्यवस्था कम पड़ रही है, तो जब सभी गाड़ियां चलेंगी, और ज्यादा स्टाफ वहां पहुंचेगा, तब तो उसके सामने प्लेटफार्म पर डेरा डालने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होगा।

इस सबके साथ उत्तर रेलवे मुख्यालय बड़ौदा हाउस में हाथ पर हाथ धरे बैठे संबंधित वाणिज्य अधिकारियों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे न सिर्फ अर्निंग बटोरने के लिए ही वाणिज्य स्टाफ को झोंकें, बल्कि उनकी आवश्यकताओं और आवश्यक सुविधाओं का भी बंदोबस्त करने-कराने की पहल करें।

अब जहां तक बात आती है मान्यताप्राप्त संगठनों और उनके पदाधिकारियों की, जो कि खुद को रेलवे का तथाकथित स्टेकहोल्डर और रेलकर्मियों का ठेकेदार मानते हैं, वे अपनी आत्मा गिरवी रख चुके हैं। ऐसे में उनके बारे में कुछ न ही कहा जाए, तो शायद अच्छा है, क्योंकि मृत अथवा मृतप्राय लोगों के बारे में कुछ बुरा कहने की भारतीय परम्परा नहीं है!

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वॉशिंग पिट लाइन, गोरखपुर में लगाया गया वाटर री-साइक्लिंग प्लांट

गोरखपुर ब्यूरो: पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा पानी को संचित कर फिर से उपयोग में लाने हेतु वॉशिंग पिट लाइन, गोरखपुर में वाटर री-साइक्लिंग प्लांट लगाया जा रहा है, जो शीघ्र ही कार्य करना आरम्भ कर देगा।

इस प्लांट के स्थापित हो जाने से कोचों की सफाई हेतु हजारों लीटर लगने वाले पानी का पुनः उपयोग हो सकेगा। इसके अतिरिक्त उपयोग किए हुए पानी का पुनः उपयोग बागवानी, प्लेटफार्मों की सफाई, प्रसाधन एवं रेल लाइनों की सफाई आदि में भी हो सकेगा।

इसी क्रम में गोरखपुर कोचिंग डिपो की नई वॉशिंग पिट लाइन में री-साइक्लिंग प्लांट लगाने का काम पूरा हो चुका है, जो शीघ्र ही कार्य करने लगेगा। इसके अतिरिक्त गोरखपुर जं. के पूर्वी यार्ड स्थित वॉशिंग पिट में री-साइक्लिंग प्लांट लगाने का कार्य प्रगति पर है। इनके लग जाने से पानी की बरबादी नहीं होगी और प्लांट में पानी री-साइकिल होता रहेगा।

इस वॉटर ट्रीटमेंट एंड री-साइक्लिंग प्लांट में पानी को संचित करने के लिए बड़े-बड़े गढ़ढे बनाए गए हैं, जिनमें आधुनिक विधि से पानी को पुनः उपयोग के लायक बनाया जा सकेगा। इस पानी का उपयोग बोगियों एवं कोचों की सफाई में एक से अधिक बार किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त स्टेशन यार्ड स्थित पार्क और लॉन में भी पौधों की सिंचाई की जा सकेगी।








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30 जून तक बढ़ाया गया नियमित यात्री ट्रेनों का निरस्तीकरण

रद्द किए गए टिकटों पर मिलेगा पूरा रिफंड

21 मार्च 2020 के बाद के निरस्त टिकटों की शेष राशि भी वापस की जाएगी

कोविड-19 के मद्देनजर टिकट निरस्तीकरण और किराया रिफंड के संशोधित निर्देश जारी

मालगाड़ियों, समयसारिणीबद्ध पार्सल सेवाएं, श्रमिक और विशेष ट्रेनें यथावत चलती रहेंगी

कोविड-19 के दृष्टिगत रेलवे बोर्ड ने मेल/एक्सप्रेस, पैसेंजर और उपनगरीय गाड़ियों सहित नियमित यात्री ट्रेन सेवाओं का निरस्तीकरण 30 जून 2020 तक विस्तारित कर दिया है। हालांकि मालगाड़ियों, समय-सारणीबद्ध पार्सल सेवाओं, श्रमिक विशेष ट्रेनों और 12 मई 2020 से शुरू हुई अन्य विशेष ट्रेनों का संचालन जारी रहेगा। रेलवे बोर्ड द्वारा यह भी अधिसूचित किया गया है कि 30 जून 2020 तक की नियमित यात्री ट्रेनों के सभी टिकटों के निरस्तीरकरण पर पूरा रिफंड दिया जाएगा।

रेलवे बोर्ड ने कोविड-19 के कारण व्याप्त परिस्थिति के कारण टिकट निरस्तीकरण और किराया वापसी के संदर्भ में संशोधित दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इन नए दिशा-निर्देशों के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नवत हैं:

क. 21.03.20 से बाद से यात्री सेवाओं के प्रारंभ होने तक के पीआरएस से प्राप्त टिकट/ई-टिकट (पहले से बुक किए गए) के लिए रिफंड नियमों में विशेष प्रावधान के तहत छूट।

1. रेलवे द्वारा पूर्णत: निरस्त ट्रेनें : पीआरएस काउंटर टिकट: यात्रा की तारीख (सामान्य 03 दिनों के बजाय) से 6 महीने तक टिकट जमा करने पर काउंटर पर रिफंड लिया जा सकता है।

2. ई-टिकट: ऑटो रिफंड : ऐसी ट्रेन जिनको रेल प्रशासन द्वारा निरस्त नहीं किया गया है, पर यात्री यात्रा नहीं करना चाहते हैं

3. पहले से आरक्षित टिकटों के लिए विशेष प्रावधान के तहत पीआरएस काउंटर से प्राप्त और ई-टिकट दोनों के लिए पूर्ण रिफंड दिया जाएगा।

4. पीआरएस काउंटर टिकट: टीडीआर (टिकट जमा रसीद) यात्रा की तारीख से 6 महीने के भीतर (सामान्य 03 दिनों के स्थान पर) स्टेशन पर भरी जा सकती है।

5. पूर्व निर्धारित 10 दिनों के सामान्य नियम के स्थान पर मुख्य दावा अधिकारी/मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (दावा) के कार्यालय में टिकट रिफंड हेतु टीडीआर 60 दिनों तक जमा किया जा सकता है। यह ट्रेन चार्ट से मिलान के अधीन होगा।

6. ई-टिकट: ऑनलाइन निरस्तीकरण और धनवापसी सुविधा उपलब्ध है।

7. 139 के माध्यम से निरस्तीकरण: जो यात्री 139 के माध्यम से टिकट निरस्त करना चाहते हैं, उन्हें यात्रा की तारीख से 06 महीने के भीतर काउंटर पर रिफंड मिल सकता है।

ख.  दि 21.03.20 एवं उसके बाद की यात्रा अवधि के लिए पहले से आरक्षित टिकटों को निरस्त करने पर हुई कटौती की गई राशि की पूर्ण वापसी।

पीआरएस काउंटर टिकट: दि 21.03.20 एवं उसके बाद की यात्रा अवधि के लिए ऐसे यात्री जिन्होंने पहले से ही अपना टिकट निरस्त करवा लिया है, वे कैंसलेशन चार्ज की शेष राशि की वापसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह आवेदन जोन के मुख्य दावा अधिकारी / मुख्य वाणिज्य प्रबंधक / रिफंड के कार्यालय में किए जा सकते है। निरस्तीकरण शुल्क की शेष राशि की वापसी के दावे के लिए यह आवेदन यात्रा की निर्धारित तिथि के 06 महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप में किया जा सकता है।

ई-टिकट: निरस्त किए गए टिकटों की शेष राशि का रिफंड उन यात्रियों के उसी खाते में जमा किया जाएगा जिससे टिकट बुक किया गया था।

कोविड-19 के प्रसार को रोकने के दृष्टिगत संपूर्ण देश भर में लॉकडाउन लागू है और इसको आगे विस्तारित कर दिया गया है। इस अवधि के दौरान रेल प्रशासन द्वारा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पार्सल विशेष गाड़ियों का परिचालन किया जा रहा है।

व्यापारीगण अपना जरूरी सामान पार्सल घरों से बुक करके भेज सकते हैं। पार्सल बुकिंग से जुड़ी जानकारी पार्सल कार्यालय, मंडल कार्यालय या कमर्शियल कंट्रोल से प्राप्त की जा सकती है।

यात्रा के दौरान यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए रेल सुरक्षा बल उनकी सुरक्षा हेतु तैनात रहेगा। इसी प्रकार निरन्तर कार्य करते हुए भारतीय रेल अपने यात्रियों को एक सुखद यात्रा का अनुभव देने के लिए सदैव प्रयासरत है।








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‘समस्त ब्राह्मण सेवा समाज, कल्याण’ द्वारा साड़ी भेंट कर किया गया समाज की महिलाओं का सम्मान

समाजसेवी डॉ ब्रजेंद्र सारस्वत, करुणाशंकर शुक्ल और विद्या प्रसारक विजय उपाध्याय की रही गरिमापूर्ण उपस्थित

कल्याण : समस्त ब्राह्मण सेवा समाज, कल्याण के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध समाजसेवी और जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ ब्रजेंद्र सारस्वत (एमडी/मेडिसिन, हार्ट, लंग्स, अस्थमा विशेषज्ञ) के सहयोग से गुरुकृपा हॉस्पिटल प्रांगण, बिड़ला कालेज रोड, कल्याण में रविवार, 12 जनवरी को मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में  एक समाजोपयोगी कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ ब्रजेंद्र सारस्वत के हाथों समाज की 30 बुजुर्ग महिलाओं का साड़ी भेंट करके उनका सम्मान किया गया।

इस समाजोपयोगी कार्य में कान्यकुब्ज मंडल मुंबई के ट्रस्टी और समाजसेवी करुणाशंकर शुक्ल, सुप्रसिद्ध आयडियल शिक्षा संस्था के प्रमुख, समाजसेवी एवं विद्या प्रसारक विजय उपाध्याय, समस्त ब्राह्मण सेवा समाज के सचिव सुरेंद्र शर्मा, पत्रकार गंगाधर तिवारी, रेल समाचार के संपादक सुरेश त्रिपाठी, विनोद कुमार शर्मा इत्यादि ने डॉ सारस्वत का सहयोग किया।

करीब दस साल पहले रेलवे से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर समाज की सेवा में लग गए डॉ सारस्वत ने इस मौके पर समस्त ब्राह्मण सेवा समाज के ऐसे समाजोपयोगी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज के उत्थान के लिए समाज के सक्षम लोगों को आगे आना चाहिए। उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं का सम्मान करते हुए कहा कि समाज में महिलाओं की उन्नति से ही समाज का व्यापक भला हो सकता है। डॉ सारस्वत ने कहा कि हमें महिलाओं को बढ़ावा देने और उनकी उन्नति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था के सचिव सुरेंद्र शर्मा ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए उनसे अनुरोध किया कि वे सब भरे-पूरे परिवार का हिस्सा हैं, ऐसे में वह अपने बच्चों और नाती-पोतों को वैदिक संस्कार प्रदान करें, इससे हमारे बच्चों की बौध्दिक उन्नति तो होगी ही, बल्कि इसके साथ ही इन सामाजिक एवं पारिवारिक संस्कारों के चलते एक स्वस्थ समाज की स्थापना करने में भी उनका यह प्रयास बहुत कारगर साबित होगा।

कान्यकुब्ज मंडल, मुंबई के वरिष्ठ ट्रस्टी एवं समाजसेवी करुणाशंकर शुक्ल ने इस अवसर पर महिलाओं और समाज का मार्गदर्शन किया और डॉ सारस्वत द्वारा कही गई बातों का समर्थन किया।

आयडियल शिक्षा संस्था के प्रमुख एवं समाजसेवी विजय उपाध्याय ने अपनी अति-व्यस्त दिनचर्या से थोड़ा सा वक्त निकालकर और इस महत्वपूर्ण मौके पर उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। उन्होंने संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज हित में और समाज के काम के लिए वह हमेशा खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर न सिर्फ एक-दूसरे से मिलना होता है, बल्कि यह भी पता चलता है कि हम समाज के लिए और क्या-क्या कर सकते हैं।

उन्होंने अपने स्वभाव और प्रोफेशन के अनुरूप उपस्थित सभी सम्मानित महिलाओं से यही निवेदन किया कि वे अपने बच्चों की उचित देखभाल और शिक्षा का अवश्य ध्यान रखें। उन्होंने महिलाओं से खासतौर पर बच्चियों की शिक्षा और स्वावलंबन पर विशेष ध्यान देने का अनुरोध किया और पुनः इस बात को दोहराया कि वे समाज के हित में हमेशा तत्पर हैं।

कान्यकुब्ज मंडल, कल्याण की सक्रिय कर्ताधर्ता और समाजसेवी श्रीमती प्रभा तिवारी ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें ब्राह्मण-ब्राह्मण में भेद को मिटाना चाहिए और पीछे का सब कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़कर आपस में बिना किसी भेदभाव के हमें अपने संबंधों को मजबूत करना चाहिए, तभी एक सुदृढ़ समाज का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि संस्कार और सेवा देना ही हमारी संस्कृति रही है, इसे हमें आगे बढ़ाना है। उनके इस सुझाव का सभी उपस्थित लोगों ने स्वागत किया। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार गंगाधर तिवारी ने भी महिलाओं का मार्गदर्शन किया।

इस मौके पर मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में सभी महिलाओं को हल्दी-कुमकुम लगाकर उचित सत्कार किया गया और तिल-गुड़ देकर उनका पूरा साल मीठा-मीठा (अच्छा-अच्छा) जाने और सपरिवार सुखी-संपन्न रहने की कामना की गई।

इस समाजोपयोगी कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीमती राजलक्ष्मी शर्मा, श्रीमती प्रभा तिवारी, श्रीमती मालती अवस्थी, श्रीमती कांति दुबे, श्रीमती अनिता दुबे, श्रीमती प्रभा शर्मा, श्रीमती ऊषा पांडेय एवं श्रीमती लक्ष्मी शुक्ला आदि महिलाओं सहित सुरेश त्रिपाठी, विनोद कुमार शर्मा, घनश्याम आर. पांडेय, एच. एस. शर्मा, हरिशंकर अवस्थी और सुरेंद्र शर्मा (बबलू) इत्यादि सहयोगियों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर सुरेंद्र (बबलू) शर्मा के सौजन्य से सभी उपस्थितों को अल्पाहार के बाद ससम्मान विदा किया गया। 








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