अधिकारियों द्वारा जारी है रेल सेवाओं के विलय का पुरजोर विरोध

कैडर मर्जर का रेल संचालन और यात्री संरक्षा/सुरक्षा पर पड़ेगा बुरा प्रभाव

मर्जर का फैसला रेल अधिकारियों की सहमति से लिया गया है, यह सरासर झूठ है

भारतीय रेल की आठ संगठित सेवाओं के मर्जर के खिलाफ रेलवे की तीन सिविल सर्विसेस के अधिकारियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इन अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला एकतरफा लिया गया है और इसमें सबकी सहमति शामिल नहीं है। उनका कहना है कि इससे रेल संचालन पर बुरा असर पड़ेगा और यात्री संरक्षा/सुरक्षा भी बुरी तरह प्रभावित होगी।

उल्लेखनीय है कि रेलमंत्री ने बिना किसी सलाह-मशवरे के रेलवे में सर्विस मर्जर का बड़ा फैसला लिया है, लेकिन रेलवे के अधिकारी इस फैसले से सहमत नहीं हैं और इसीलिए वे इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। रेलवे के 13 जोन और 60 डिविजन के सिविल सर्विस अधिकारियों ने 250 पेज का ज्ञापन प्रधानमंत्री सहित रेलमंत्री और रेलवे बोर्ड को सौंपा है। इसमें कहा गया है कि सरकार का यह फैसला एकतरफा है और इस फैसले से यात्री संरक्षा और ट्रेनों के संचालन पर बुरा असर पड़ेगा।

रेल मंत्रालय ने आठ सर्विस कैडरों को एक साथ मर्ज करने का फैसला किया है। मंजूरी के लिए इसे कैबिनेट और प्रधानमंत्री के पास भी भेजा गया है। रेलवे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके घोषणा की थी जिसमें कहा गया था कि मर्जर का फैसला रेलवे के अधिकारियों की सहमति से लिया गया है, जबकि यह सरासर झूठ है। तथापि इसमें बताया गया था कि 7-8 दिसंबर 2019 को अधिकारियों के साथ ‘परिवर्तन संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया था।

अधिकारियों का दावा है कि परिवर्तन संगोष्ठी में 12 ग्रुप बनाए गए थे जिनका हेड जनरल मैनेजर को बनाया गया था और यह फैसला सिविल सर्विस अधिकारियों को नजरअंदाज करने तथा इंजिनियरिंग सर्विस के अधिकारियों को तवज्जो देने के लिए किया गया था।

उनका कहना है कि सभी जनरल मैनेजर इंजिनियरिंग सर्विस के हैं। इन अधिकारियों का कहना है कि बैठक में केवल जीएम (जनरल मैनेजर) ही अपनी बात रख सकते थे। ऐसे में जनरल मैनेजर की व्यक्तिगत राय को पूरे ग्रुप की राय बताया गया, जो कि गलत है, क्योंकि एक जीएम की व्यक्तिगत राय को सभी कैडर अधिकारियों की राय नहीं माना जा सकता है।

इसमें कहा गया है कि जब इस फैसले में आम सहमति शामिल नहीं है तो यह तरीका लोकतांत्रिक कैसे हो गया? एक रेल अधिकारी का कहना था कि ज्ञापन में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि रेलवे का यह फैसला यात्री संरक्षा और सुरक्षा के साथ समझौता साबित हो सकता है।

अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय पहले ही आश्वस्त कर चुका है कि सिविल सर्विस के जरिए आने वाले अधिकारियों के अधिकारों को सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकारयों से ईमेल के माध्यम से भी सुझाव देने की अपील की गई है और 900 से ज्यादा सुझाव अब तक मिले भी हैं।

ज्ञातव्य है कि रेल मंत्रालय ने मकैनिकल, इलेक्ट्रिकल, स्टोर्स, पर्सनल, ट्रैफिक, सिविल इंजिनियरिंग, सिग्नल एंड टेलिकॉम और एकाउंट्स सर्विस कैडर को मिलाकर एक सर्विस ‘इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस’ बनाने का निर्णय किया गया है। फिलहाल आरपीएफ और मेडिकल को इससे अलग रखा गया है। 








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