ट्रेनों के परिचालन में प्लेटफार्मों की विसंगति से यात्रियों को भारी असुविधा – RailSamachar

प्लेटफार्म नं. 1 और प्लेटफार्म नं. 6-7 को छोड़कर सीधे प्लेटफार्म नं. 8-9 पर यात्रियों को भेजा जाना, यह किसी विशेष प्रयोजन के तहत किया गया प्रतीत होता है, जबकि यहां सामान्य सुविधा नियमों का पालन करना जरूरी नहीं समझा गया

अहमदाबाद : पश्चिम रेलवे का अहमदाबाद रेलवे स्टेशन एक अत्यंत व्यस्त और भारी भीड़ वाला स्टेशन है। कम ट्रेनों के चलते भी इस रेलवे स्टेशन पर काफी भीड़ हो जाती है। स्टेशन का प्लेटफार्म-4 फिलहाल दुरुस्तीकरण के लिए बंद किया गया है। तथापि उस पर भी गाड़ियां ले ली जा रही हैं। इससे यात्रियों की आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा प्लेटफार्म-1 और 6-7 को खाली रखकर सीधे प्लेटफार्म 8-9 पर यात्रियों को भेजना उन्हें और ज्यादा परेशानी में डालने जैसा है। स्टेशन पर ट्रेन ऑपरेशन की इस विसंगति को लेकर जेडआरयूसीसी/प.रे. के सदस्य योगेश मिश्रा, किंजन पटेल और शैलेश उपाध्याय ने सोमवार, 29 जून को रेल प्रशासन का ध्यान यात्रियों की परेशानी की ओर आकर्षित करते हुए एक ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन के अनुसार अहमदाबाद मंडल से वर्तमान में 100 जोड़ी ट्रेनों में से 10 जोड़ी ट्रेनों को अहमदाबाद स्टेशन से चलाया जा रहा है। जबकि एक पासिंग ट्रेन भी है। इस प्रकार कुल 11 जोड़ी ट्रेनों का आवागमन अहमदाबाद स्टेशन पर होता है। अहमदाबाद स्टेशन पर कुल 12 प्लेटफार्म थे। परंतु बुलेट ट्रेन एवं मेट्रो का निर्माण कार्य चलने के कारण प्लेटफार्म नं. 10, 11 और 12 को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

इस प्रकार अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के पूर्वी छोर (प्लेटफार्म-12 की तरफ) से आवागमन का पूरा मार्ग अवरुद्ध हो चुका है। अब वहां से किसी भी व्यक्ति का किसी भी प्रकार से आवागमन नहीं हो सकता। अतः 22 मार्च से जनता कर्फ्यू और 24 मार्च से लॉकडाउन के बाद नियमित यात्री ट्रेनों का संचालन बंद किया गया था।

यह स्थिति है अहमदाबाद स्टेशन के प्लेटफार्म नं. 8-9 की, जिस पर अभी निर्माण कार्य प्रगति पर है। फिर भी इस पर ट्रेन का परिचालन 29 जून शुरू कर दिया गया है। नीचे का यह वीडियो इस बात का साक्ष्य है। आखिर प्लेटफार्म नं. 6-7 पर परिचालन क्यों नही किया जा सकता? इसकी जवाबदेही किसकी है? यात्रियों की समस्या के विषय में लापरवाही क्यों और कब तक?

Taking train on under construction platform at #Ahmedabad station by Ahmedabad Division Operating authorities

1 मई से श्रमिक ट्रेनें चालू हुईं तथा 1 जून 2020 से स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इसमें अहमदाबाद स्टेशन से 10 ट्रेनें चल रही हैं। वर्तमान में अहमदाबाद स्टेशन पर 1 से 8 तक कुल 8 प्लेटफार्म उपलब्ध हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर ट्रेनों का कम से कम आवागमन होने के कारण वर्तमान में 1 जून से प्लेटफार्म नं. 1, 3, 4 और 5, यानि कुल 4 प्लेटफार्मों से ट्रेनों का परिचालन ऑपरेटिंग डिपार्टमेंट द्वारा किया जा रहा है।

परंतु 29 जून से प्लेटफार्म नं. 4 की मरम्मत हेतु 38 दिन का ब्लाक लिया गया है, जिसके कारण प्लेटफार्म नं. 4 से चलने वाली गाड़ियों को अन्य प्लेटफार्मों पर डायवर्ट किया जाना है। 1 जून से अहमदाबाद स्टेशन से चलने वाली विशेष ट्रेन नं. 02947 अहमदाबाद-पटना, ट्रेन नं. 09019 अहमदाबाद-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन, प्लेटफार्म नंबर 1 से चलनी थी। जबकि प्लेटफार्म-3 से 02915 अहमदाबाद-दिल्ली, 09165 अहमदाबाद-दरभंगा, 09167 अहमदाबाद-वाराणसी ट्रेन चलाई जा रही थी।

इसी प्रकार ट्रेन नं. 02479 जोधपुर-बांद्रा टर्मिनस की पासिंग प्लेटफार्म-3 से कराई जा रही थी। प्लेटफार्म-4 से ट्रेन नं. 02917 अहमदाबाद-निजामुद्दीन चलाई जा रही थी। ट्रेन नं. 02480 बांद्रा टर्मिनस-जोधपुर की पासिंग हो रही थी। जबकि प्लेटफार्म-5 से ट्रेन नं. 02833 अहमदाबाद-हावड़ा, 02934 अहमदाबाद मुंबई सेंट्रल, 02957 अहमदाबाद-नई दिल्ली, 09083 अहमदाबाद-मुजफ्फरपुर स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है।

परंतु 28 दिन के परिचालन के बाद प्लेटफार्म-4 के दुरुस्तीकरण के लिए ब्लॉक लेने पर यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सिर्फ प्लेटफार्म-4 की ट्रेनों को अन्य प्लेटफार्मों पर डायवर्ट करके उन्हें वहां से ऑपरेट किया जाना चाहिए था। इसके बजाय अहमदाबाद मंडल के ऑपरेटिंग विभाग द्वारा प्लेटफार्म-1 से सिर्फ बांद्रा टर्मिनस-जोधपुर ट्रेन 02480 पास की जा रही है।

जबकि प्लेटफार्म-3 से ट्रेन नं. 02947 अहमदाबाद-पटना, और ट्रेन नं. 02917 अहमदाबाद-निजामुद्दीन ही चलाई जा रही है। प्लेटफार्म-4 को ब्लॉक कर दिया गया है। प्लेटफार्म-5 से ट्रेन नं. 02833 अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस, 02934 अहमदाबाद-मुंबई सेंट्रल, 02957 अहमदाबाद-नई दिल्ली ट्रेनें चलाई जा रही है। प्लेटफार्म नं. 5-6-7 से एक भी ट्रेन को ऑपरेट न करके किन कारणों से प्लेटफार्म-8/9 से गाड़ियों का परिचालन किए जाने का निर्णय लिया गया, यह समझ से परे है।

प्लेटफार्म-8 से 29 जून को ट्रेन नं.09083 अहमदाबाद मुजफ्फरपुर, ट्रेन नं.02915 अहमदाबाद-दिल्ली, ट्रेन नं. 02479 जोधपुर-बांद्रा टर्मिनस की पासिंग कराई गई। जबकि प्लेटफार्म-9 से ट्रेन नं.09165 अहमदाबाद दरभंगा, ट्रेन नं.09167 अहमदाबाद-वाराणसी, ट्रेन नं. 09014 अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन चलाई गई। प्लेटफार्म-12 की तरफ से आवागमन का संपूर्ण मार्ग बंद होने के कारण प्लेटफार्म उस तरफ से किसी भी प्रकार से आवागमन नहीं हो सकता है।

वर्तमान में सुरक्षा के दृष्टिकोण से एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और थर्मल स्कैनिंग करते हुए, सैनिटाइजर मार्ग से गुजरकर यात्रियों को प्लेटफार्म पर प्रवेश दिया जा रहा है। जो अहमदाबाद मंडल का सराहनीय कार्य है। अहमदाबाद स्टेशन पर  मात्र प्लेटफार्म-1 की तरफ से ही आवागमन का मार्ग प्रशस्त किया गया है। ऐसी स्थिति में प्लेटफार्म-1 से एस्केलेटर (स्वचालित सीढ़ियों) अथवा एफओबी सीढ़ियां चढ़कर यात्रियों को नजदीकी प्लेटफार्म पर पहुंचने की सुविधाजनक व्यवस्था की जानी चाहिए।

यह एक साधारण नियम है, उस साधारण नियमों को भी ऑपरेटिंग विभाग ने ताक पर रखकर प्लेटफार्म-1 से मात्र एक ट्रेन, वह भी जो सिर्फ पासिंग है, का परिचालन जारी रखा गया है। प्लेटफार्म-3 से मात्र 2 ट्रेनों का आवागमन जारी रखने का निर्देश दिया गया है। जबकि प्लेटफार्म-5 से 3 ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। वहीं प्लेटफार्म-8 से 2 ट्रेनें एवं प्लेटफार्म-9 से 3 ट्रेनों का परिचालन हो रहा है।

अब प्रश्न यह खड़ा होता है कि प्लेटफार्म नं. 1, 3, 5 के बाद प्लेटफार्म नं. 6 और 7 से परिचालन का कार्य किन कारणों से नहीं कराया जा रहा है? आखिर यात्रियों को एक प्लेटफार्म और आगे जाने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? और किन कारणों से यात्री प्लेटफार्म नं. 6-7 पर न उतरकर, प्लेटफार्म नं. 8-9 पर कयों जाएं? यात्री को इसके लिए 50-100 कदम अतिरिक्त चलना पड़ेगा। यात्रियों को कम से कम दूरी तक चलाकर प्लेटफार्म पर उतारा जा सके, ऐसी सुविधाजनक व्यवस्था की जानी चाहिए।

फोटो परिचय: अहमदाबाद स्टेशन के प्लेटफार्म नं. 8-9 पर निर्माण कार्य चल रहा है। यह सोमवार, 29 जून की तस्वीर है। फिर भी इस प्लेटफार्म पर ट्रेन का परिचालन किया गया। जबकि प्लेटफार्म नं. 6-7 खाली पड़े हैं, उन पर परिचालन नहीं किया जा रहा, रेल प्रशासन से यह सवाल है जेडआरयूसीसी/प.रे. के सदस्यों का!

यदि सामान्य मानवीय दृष्टिकोण से भी देखा जाए तो भी 30-35 किग्रा वजन लिए हुए व्यक्ति को कम से कम दूरी तक पैदल चलकर पहुंचने की व्यवस्था करनी चाहिए। इसको ध्यान में रखकर प्लेटफार्म नं.1 और प्लेटफार्म नं. 6-7 को छोड़कर सीधे प्लेटफार्म नं. 8-9 पर यात्रियों को भेजा जाना, यह किसी विशेष प्रयोजन के तहत किया गया प्रतीत होता है, जबकि यहां सामान्य सुविधा नियमों का पालन करना जरूरी नहीं समझा गया। वह भी तब जब प्लेटफार्म-12 की तरफ से आवागमन का कोई भी मार्ग उपलब्ध नहीं है।

यात्रियों को प्लेटफार्म-1 से प्रवेश देकर, प्लेटफार्म-8 में पहुंचने की बजाय अगर प्लेटफार्म नं. 6-7 पर उतारा जाए तो यह उनके लिए न सिर्फ काफी सुविधाजनक होगा, बल्कि उनका समय और वजन लेकर चलने का उनका परिश्रम कुछ कम हो सकता है। गस तथ्य पर विचार किया जाना चाहिए।

उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में लेते हुए इस विषय पर विचार करने और यात्रियों को होने वाली मुश्किलों को कम करने का प्रयास करने हेतु उचित कार्यवाही किए जाने का यह ज्ञापन क्षेत्रीय रेल उपभोगकर्ता परामर्शदात्री समिति, पश्चिम रेलवे के सदस्य योगेश मिश्रा ने महाप्रबंधक/प.रे. आलोक कंसल, प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक/परे. शैलेंद्र कुमार और डीआरएम/अहमदाबाद दीपक कुमार को भेजा है।



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देश में भारी आर्थिक संकट के बावजूद जारी हो रहे करोड़ों-अरबों के अनावश्यक टेंडर

महामारी के संकटकाल में रेल अस्पतालों की दुर्दशा, नहीं मिल रहा रेलकर्मियों को उपचार

सुरेश त्रिपाठी

कोरोना महामारी के संकटकाल में रेलवे अस्पतालों और हेल्थ यूनिटों का बुरा हाल है। कोरोना फंड के नाम पर न जाने कितनी धनराशि रेल अस्पतालों को दी गई लेकिन परिणाम क्या निकला! आज स्थिति यह है कि रेल कर्मचारी और उनके परिवार रेल अस्पतालों में जाने से कतरे रहे है।

सामान्य रोगी को भी पहले जिला अस्पताल से कोविड टेस्ट कराने की सलाह रेलवे डॉक्टर दे रहे हैं। कमाल है, जो सामान्य मरीज है, वह क्यों कोरोना का टेस्ट कराए? अस्पताल के डॉक्टर तो ऐसे पीपीई किट पहन रहे हैं, मानो सिर्फ उन्हीं पर कोरोना अटैक करेगा, बाकी जो रेलकर्मी फील्ड और कार्यालयों में काम कर रहे हैं, मानो वे सब अमृत पीकर और कर्ण के कवच-कुंडल पहनकर आए हैं।

अगर ऐसे ही रेलवे अस्पतालों के हालात हैं तो फिर रेल अस्पताल बंद कर देने चाहिए और इस मद के फंड को सही जगह इस्तेमाल किया जाना चाहिए। डॉक्टर यदि अपने चैम्बर में ओपीडी का केस देख भी रहे हैं तो मरीज उनके चैम्बर के बाहर ही खड़ा होकर अपना दुखड़ा रोएगा और वहीं से दवा लिख दी जाएगी.. ऐसी दयनीय हालत हो गई है रेल कर्मचारियों और उनके परिवारों की! लेकिन रीढ़हीन यूनियन पदाधिकारी, अधिकारी और मंत्री सब मौन हैं।

उधर उत्तर रेलवे केंद्रीय अस्पताल (एनआरसीएच) का जो हाल है, वह अब सबको पता है कि वहां लंबे समय से मरीजों की बाहर से जांच कराने में किस कदर कमीशन का खेल चल रहा था और किस तरह अस्पताल प्रमुख को एमडी के पद से निवृत्त करके जनरल प्रैक्टिस में भेजने के पांच दिन बाद पुनः उसी पद पर उनकी नियुक्ति कर दी गई। जाहिर है कि सेटिंग और पहुंच बहुत ऊपर तक रही होगी। एनआरसीएच में कमीशनखोरी का यह खेल कानाफूसी.कॉम रेलसमाचार.कॉम की “उत्तर रेलवे केंद्रीय अस्पताल में जारी कमीशनखोरी का खेल” शीर्षक खबर प्रकाशित होने के बाद रेल प्रशासन यह कमीशनखोरी का खेल रोककर कोविद सहित सभी प्रकार की जांचें अब अस्पताल में ही करना अनिवार्य कर दिया है। 

Also Read: उत्तर रेलवे केंद्रीय अस्पताल में जारी कमीशनखोरी का खेल?

एक तरफ केंद्र सरकार कर्मचारियों की मूल सुविधाओं पर आर्थिक संकट दिखाकर कैंची चला रही है, तो दूसरी तरफ रेलवे और अन्य सरकारी विभागों में बिना वर्तमान परिस्थिति का आकलन किए अरबों-खरबों के टेंडर निकाले जा रहे हैं। सरकार का यह कृत्य विरोधाभासी है!

जब मुद्रा संकट है और देश चौतरफा आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, तो अनावश्यक कार्यों को कुछ समय के लिए रोक दिया जाना चाहिए। टेंडर अवार्ड करने की इतनी जल्दी क्यों है? क्या स्टेशनों पर मेकेनाइज्ड क्लीनिंग का काम विभागीय सफाई कर्मचारियों से नहीं कराया जा सकता? वह भी तब जब अगले साल तक भी सामान्य रेल यातायात और ट्रैफिक बहाल होना मुश्किल लग रहा है, तब ऐसे में अनाप-शनाप और अनावश्यक खर्च क्यों किया जाना चाहिए??

यह सब जानते-बूझते होने के बाद भी यदि यही हाल है, तो कहना ही पड़ेगा कि कोरोना कहीं न कहीं अवसर भी लेकर आया है! लेकिन कमजोर विपक्ष के कारण इस चालाकी को कोई उजागर नहीं कर पा रहा है।

प्रयागराज स्टेशन की मेकेनाइज्ड तरीके से साफ-सफाई करने के लिए टेंडर 4 साल की अवधि के लिए अभी हाल ही में निकाला गया है जिसकी कीमत 29 करोड़ रुपया है। इसी हफ्ते कानपुर सेंट्रल के लिए भी लगभग 30 करोड़ रुपये का टेंडर निकलेगा। अब इसे अवसर नहीं तो क्या कहा जाए! इस वक्त इसकी क्या जरूरत थी?

उल्लेखनीय है कि अभी दो साल पहले ही प्रयागराज और कानपुर सेंट्रल दोनों रेलवे स्टेशनों की मेकेनाइज्ड साफ-सफाई के ठेके करीब 15-15 करोड़ में दिए गए थे, अब यह राशि पुनः बढ़कर दोगुनी हो गई है, जबकि दो साल पहले तक साफ-सफाई के यही ठेके ढ़ाई-तीन करोड़ के हुआ करते थे। स्टेशनों की सफाई को लेकर यह स्थिति सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि यही हाल सभी जोनल रेलों में भी हुआ है जिसमें कमीशनखोरी की प्रमुख भूमिका है।

इसके साथ ही उत्तर रेलवे वाराणसी मंडल द्वारा हाल ही में एक ऐसा ही सफाई का टेंडर (एम-सीएनडब्ल्यू-42/2019-20, इशू दि. 30.03.2020, क्लोज्ड दि. 20.05.2020) जारी किया गया है, जिसकी सेवा-शर्तें (टर्म्स एंड कंडीशंस) देखकर ही लगता है कि उक्त टेंडर किसी खास पार्टी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इस टेंडर की कुल एडवरटाइज्ड वैल्यू ₹64448684.81 है।

क्या रेल प्रशासन को नहीं पता कि सामान्य रेल संचालन और यात्रियों की आवाजाही कम से कम इस साल तो सामान्य होने से रही, फिर किसके लिए रेल राजस्व को लुटाने की तैयारी क्यों की जा रही है?

विभागीय सफाई कर्मचारी अधिकांश अधिकारियों, निरीक्षकों, और सुपरवाइजरों के घरों में काम कर रहे हैं और उनके एवज में रेल प्रशासन साफ-सफाई का ठेका प्राइवेट पार्टी को देने के लिए टेंडर निकाल रहा है। इसी तरह सिग्नल एंड टेलीकम्यूनिकेशन, इंजीनियरिंग आदि विभागों में भी अनावश्यक कार्यों के लिए करोड़ों-अरबों के टेंडर निकाले जा रहे हैं जिनकी कम से कम इस साल तक सामान्यतः कोई विशेष जरूरत नहीं पड़ने वाली है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान तथाकथित यात्री सुख-सुविधाओं और साफ-सफाई सहित सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल एवं एसएंडटी के टेंडर्स की लागत जिस तरह अनाप-शनाप बढ़ी है, या जानबूझकर बढ़ाई गई है, उसको देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि भ्रष्टाचार किस सीमा तक पहुंच चुका है और इस लूट का हिस्सा कहां तक पहुंच रहा होगा? जबकि आर्थिक संकट के नाम पर देशवासियों की भावनाओं को उभारकर तथा उनकी मनोदशा को दिग्भ्रमित करके राजनीतिक रोटियां सेंकने का खेल बदस्तूर जारी है।





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महीनों से लंबित भुगतान न मिलने और भारी प्रताड़ना से तंग आकर रेलवे ठेकेदार ने की आत्महत्या

आईआरआईपीए ने ठेकेदार की आत्महत्या के लिए डिप्टी सीई/सी/द.म.रे. एस. के. शर्मा को जिम्मेदार ठहराया

6 मार्च को पूरी भारतीय रेल के कांट्रेक्टर नहीं करेंगे रेलवे का कोई काम, ‘भुगतान दो – काम लो’ का लगाया नारा

इंडियन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन ने 2 मार्च को चेयरमैन, रेलवे बोर्ड को एक पत्र लिखकर रेलवे कांट्रेक्टर डी वेंकट रेड्डी की आत्महत्या के लिए दक्षिण मध्य रेलवे, सिकंदराबाद के डिप्टी सीई/सी एस के शर्मा को जिम्मेदार ठहराते हुए रेड्डी को प्रताड़ित करने और महीनों से उसका भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है। इस मौके पर हुई रेलवे ठेकेदारों की एक बैठक में 6 मार्च को देश भर में ठेकेदारों द्वारा रेलवे का काम बंद करने का निर्णय भी लिया गया।

“अत्यंत खेद और भारी दुःख का विषय है कि विषम आर्थिक परिस्थितियों के चलते रेलवे विभाग में काम करने वाले हमारे एक ठेकेदार साथी डी वेंकट रेड्डी को आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।” यह लिखा है रेलवे कांट्रेक्टर वेंकट रेड्डी की आत्महत्या के बाद इंडियन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (आईआरआईपीए) के अध्यक्ष बाल किशन शर्मा और महासचिव राकेश कुमार मेघनानी द्वारा चेयरमैन, रेलवे बोर्ड को भेजे गए पत्र में। 

उन्होंने पत्र में लिखा है कि अपने खून पसीने की कमाई लगाकर और दिन-रात एक करके कड़ी मेहनत कर रेलवे ठेकेदारों द्वारा सरकारी/रेलवे ठेकों को निर्धारित गुणवत्ता और समयानुसार पूरा किया जाता है और तब कहीं जाकर किए गए कार्यों के सापेक्ष उन्हें अपना और अपने सहयोगी मजदूरों का पेट पालने तथा सप्लायर्स की रोजी-रोटी चलाने के लिए शासकीय विभागों से भुगतान प्राप्त हो पाता है। मगर शोषण की पराकाष्ठा तब हो जाती है, जब काम पूरा करने के कई-कई महीने बीतने के बाद भी रेलवे विभाग ठेकेदारों को भुगतान नहीं देता है।

उन्होंने लिखा है कि इसके बावजूद निरंतर काम जारी रखने के लिए विभाग द्वारा ठेकेदारों पर अनुचित दबाव बनाया जाता है, जिसके चलते ठेकेदारों पर लेबर और सप्लायर्स के भुगतान का दबाव लगातार बढ़ता चला जाता है। उस पर भी अनेक अधिकारियों द्वारा ठेकेदार को भुगतान मांगने पर विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया जाता है।

https://youtu.be/sYI_RCYSy9A

!पत्र में उन्होंने कहा है कि इन विषम परिस्थितियों में कोई भी सामान्य व्यक्ति टूट सकता है और उसकी सहनशक्ति जवाब दे जाती है। इसी का नतीजा विगत दिनों उत्तर प्रदेश में दो ठेकेदारों द्वारा की गई आत्महत्या की घटनाएं रही हैं और वर्तमान में शोषण की इन्हीं परिस्थितियों के चलते हमारे अभिन्न साथी और कर्मठ ठेकेदार डी वेंकट रेड्डी को यह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है।

उन्होंने लिखा है कि रेलवे जैसे देश के सबसे व्यापक शासकीय विभाग में ठेकेदारों को कई-कई महीनों तक भुगतान नहीं मिलना सरकार की घोर असफलता का परिचायक है।

https://youtu.be/rYJZHoBigtM

बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) की ओर से भी अपने सदस्य स्व. डी वेंकट रेड्डी के असामयिक निधन पर दुःख और संवेदना व्यक्त की गई है। “इस शोक और संकट की घड़ी में बीएआई का समस्त संगठन अपनी पूरी शक्ति के साथ इरिपा के साथ खड़ा है। हम बीएआई की ओर से विश्वास दिलाते हैं कि आपके द्वारा किए जाने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन में हमारा पूर्ण सहयोग और समर्थन रहेगा।” इस श्रृद्धांजलि सभा में बीएआई की राष्ट्रीय संविधान संशोधन समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ सदस्य मैनेजमेंट कमेटी संजय त्यागी ने यह बात कही।

#IRIPA #RailwayBoard #IndianRailways 








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