भोपाल मंडल को जुलाई 2020 माह में 69.59% अधिक माल राजस्व की प्राप्ति – RailSamachar

रेलवे की माल परिवहन आय और रेलवे के माध्यम से माल लदान बढ़ाने के लिए भोपाल मंडल, पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है।

रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार भोपाल मंडल द्वारा व्यापारियों, व्यावसायियों, व्यापार/वाणिज्य संगठनों, फैक्ट्री मालिकों, माल उत्पादकों और मार्केटिंग कंपनियों से संपर्क कर रेलवे के जरिए माल परिवहन की संभावनाओं को तलाशकर अधिक से अधिक माल लदान के साथ पीस-मील माल लदान को भी रेलवे की तरफ आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी क्रम में बल्क माल लदान के साथ-साथ पीस-मील माल लदान के तहत जुलाई 2020 में भोपाल मंडल के विभिन्न माल गोदामों और साइडिंग्स से फर्टिलाइजर, पीओएल, रेलवे गुड्स, कंटेनर एवं खाद्यान्न आदि के कुल 255 रेक 0.65 मिलियन टन माल कुल 11966 वैगनों में लोड करके विभिन्न गंतव्य स्थानों को भेजा गया।

इससे भोपाल मंडल को जुलाई 2020 माह में 69.43 करोड़ रुपए की आय प्राप्त हुई है, जो कि गत वर्ष की समान अवधि में 148 रेक और 7633 वैगनों में लोड किए गए 0.40 मिलियन टन माल से प्राप्त कुल 40.94 करोड़ के राजस्व की अपेक्षा 69.59% अधिक है।

उल्लेखनीय है कि व्यापारियों, व्यावसायियों, व्यापार/वाणिज्य संगठनों, फैक्ट्री मालिकों, माल उत्पादकों और मार्केटिंग कंपनियों को रेलवे के जरिए माल लदान करने के अलावा पीस-मील माल लदान करने की भी सुविधा प्रदान की गई है। इससे फुटकर व्यापारियों को भी पर्याप्त लाभ मिलेगा।

“फुटकर व्यापारी यदि अपना माल सिर्फ दो-चार कंटेनरों में भेजना चाहते हैं, तो वे वैगन लोड रेट पर मालभाड़ा जमा करके अपने माल का लदान कर सकते हैं। इसके अलावा यदि वे ट्रेन लोड पर माल का परिवहन करना चाहते हैं, तो भी उन्हें मालभाड़ा प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ मिलेगा।”

यह जानकारी जनसंपर्क विभाग, भोपाल मंडल द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में दी गई है।





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पुल कारखाना, गोरखपुर को मिले तीन आईएसओ प्रमाणन प्रमाण-पत्र

1947 में स्थापित और 1954 से स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्यरत है यह पुल कारखाना

गोरखपुर ब्यूरो : पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर छावनी स्थित पुल कारखाना को उत्कृष्ट कार्य निष्पादन के लिए गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली हेतु आईएसओ 9001: 2015, पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली हेतु आईएसओ 14001: 2015 तथा व्यवसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के लिए आईएसओ  45001: 2018 प्रमाणन प्रदान किया गया है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में इस पुल कारखाने में 45.7 मीटर ओपन वेब गर्डर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसे सीतापुर-बुढ़वल दोहरीकरण कार्य में उपयोग हेतु निर्मित किया जा रहा है।

इसके पहले इस पुल कारखाने में निर्मित 61.0 मीटर का एक स्पैन तुर्तीपार पुल, एक स्पैन खड्डा पुल, 10 स्पैन रामगंगा पुल, इज्जतनगर तथा 10 स्पैन माँझी पुल वाराणसी जैसी महत्वपूर्ण पुल परियोजनाओं में प्रयोग में किया जा चुका है।

कारखाने में निर्मित गर्डरों की गुणवत्ता की जाँच कारखाने के गुणवत्ता अनुभाग द्वारा किए जाने के बाद आरडीएसओ (मानक एवं अनुसंधान अभिकल्प संगठन), लखनऊ के एम एंड सी (धातु एवं रसायन) तथा बी एंड एस (पुल एवं संरचना) निदेशालय द्वारा की जाती है।

कारखाने की प्रयोगशाला में कंक्रीट स्लीपर टेस्टिंग मशीन भी स्थापित है, जिसका प्रयोग विभिन्न स्लीपर प्लांट्स द्वारा बनाए गए स्लीपर्स की गुणवत्ता जांच के लिए किया जाता है। प्लांट अनुभाग में ओपन लाइन में कार्यरत मोटर ट्राली, मोपेड ट्राली, जैक, कम्प्रेशर मशीन आदि की मरम्मत भी की जाती है।

वर्ष 1947 में स्थापित तथा वर्ष 1954 से स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य कर रहे गोरखपुर छावनी स्थित इस पुल कारखाना द्वारा पूर्वोत्तर रेलवे के ओपन लाइन एवं निर्माण संगठन के साथ ही दूसरी रेलों के लिए भी पुल एवं लोहे के ढ़ांचों का निर्माण किया जाता है।

वर्तमान में पुल कारखाने में टैम्पलेट अनुभाग, कटिंग अनुभाग, भारी एवं हल्की संरचना उत्पादन अनुभाग, मशीन अनुभाग, प्लांट अनुभाग तथा गुणवत्ता नियंत्रण अनुभाग उत्कृष्टता के साथ अपना कार्य निष्पादन कर रहे हैं।

इस पुल कारखाने में 61.0 मीटर तक के ओपन वेब गर्डर, 30.5 मीटर स्पैन तक के प्लेट गर्डर, कम्पोजिट गर्डर तथा अंडर स्लांग गर्डर का निर्माण किया जाता है। कारखाने में फुट ओवर ब्रिज, यात्री प्लेटफार्म छाजनों एवं सीसी क्रिब का निर्माण भी होता है। पुल कारखाने की भू-तकनीकी प्रयोगशाला में मिट्टी, बालू, मोरंग, ईंट एवं क्यूब आदि का परीक्षण (टेस्टिंग) भी किया जाता है।



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कोविद-19 महामारी के दौरान भारतीय रेल द्वारा माल परिवहन हेतु घोषित की कई प्रोत्साहन योजनाएं

कोविद-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए, भारतीय रेल ने माल ग्राहकों को प्रोत्साहन देने की घोषणा की है। इन प्रोत्साहनों से देश के निर्यात को बढ़ावा मिलने से  अर्थव्यवस्था को सहायता  मिलेगी। इन प्रयासों से माल ग्राहकों को भौतिक रूप से शेड में जाने के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से सामानों के लिए अपनी मांगों को पंजीकृत करने की सुविधा मिल सकेगी और इस प्रकार यह अधिक सुविधाजनक, तेज और पारदर्शी प्रक्रिया बनेगी।

डेमरेजव्हार्फेज और अन्य  शुल्कों  से छूट

कोविड महामारी के मद्देनजर, रेलवे बोर्ड ने निर्णय लिया है कि माल / पार्सल यातायात में फोर्स मेज्यूर  के तहत डेमरेज, व्हार्फेज, स्टैकिंग, स्टैबलिंग चार्ज नहीं लगेंगे। इसी तरह कंटेनर ट्रैफिक के लिए भी डिटेंशन चार्ज  और ग्राउंड  यूसेज चार्ज भी नहीं लागू होगा। ये दिशानिर्देश 22.03.2020 से 03.05.2020 तक लागू हैं।

फ्रेट फारवर्डर्सआयरन एंड स्टीलआयरन ओर और नमक के ट्रैफिक के मामले में इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन ऑफ डिमांड (e-RD) और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन रेलवे रिसिप्ट  (eT-RR) सुविधा का विस्तार

मांग का इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण (ई-आरडी) ग्राहकों को भौतिक रूप से माल शेड जाने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक रूप से माल की अपनी मांगों को पंजीकृत करने की सुविधा प्रदान करता है। यह सरल, सुविधाजनक, त्वरित और पारदर्शी है।

रेलवे रसीद (ईटी-आरआर) का इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन, पेपरलेस ट्रांजेक्शन सिस्टम से एक कदम आगे है, जिसमें रेलवे रसीद भी उत्पन्न की जाती है और एफओआईएस के माध्यम से ग्राहक को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित की जाती है, और यहां तक कि माल की डिलीवरी भी ईटी-आरआर के ई-सरेंडर के माध्यम से दी जाती है। इससे ग्राहक को मांग पंजीकरण, माल की डिलीवरी लेने के लिएऔर आरआर/चालान प्राप्त करने के लिए माल शेड जाने आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

रेलवे रसीद (आरआर) के बिना माल प्राप्त करना

जहां तक संभव हो, ग्राहकों  को ईटी-आरआर का विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि माल की डिलीवरी  लेने के लिए ओरिजिनल पेपर आरआर को गंतव्य बिंदुओं तक नहीं ले जाना पड़े। हालांकि कागज आरआर के मामले में भी, कंसाइनर (पार्टी भेजने वाली पार्टी) मूल स्टेशन पर नाम, पदनाम, आधार, पैन, जीएसटीआईएन जैसे कंसाइनर/रिसीवर का विवरण प्रदान करेगा जिसे वाणिज्यि कंट्रोल के माध्यम से गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। टीएमएस में इन विवरणों के सत्यापन के बाद डिलीवरी दी जाएगी और इसके लिए इंडेमिनिटी नोट जमा करना, जिसमें यह कहा गया होगा कि कोई भी दावा उनकी जिम्मेदारी होगी और आरआर की स्कैन/फोटोकॉपी होगी। ये दिशानिर्देश 03.05.2020 तक मान्य हैं।

कंटेनर यातायात को प्रोत्साहित करने के लिए नीतिगत उपाय

क.  खाली कंटेनरों और खाली फ्लैट की आवाजाही के लिए हॉलेज चार्जों को लागू ना करना:- कोविड-19  के कारण लॉकडाउन के मद्देनजर, रेलवे बोर्ड ने निर्णय लिया है कि 24.03.2020 से 30.04.2020 तक खाली कंटेनरों और खाली फ्लैट वैगनों की आवाजाही के लिए कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे न केवल भार्तीय रेल बल्कि निर्यात में वृद्धि से  अर्थव्यवस्था को बढ़ावा भी देने की उम्मीद है।

ख. कंटेनर ट्रैफिक की सहायता के लिए चार्ज में हब और स्पोक प्रणाली के तहत छूट:- कंटेनरों को रेलवे टेलीस्कोपिक दर का लाभ देता है, जिसमें बीच में एक ब्रेक / ट्रांजिट प्वाइंट के साथ ट्रैफिक प्रारंभिक स्थान से गंतव्य तक पहुंचाया जाता है। इसे हब एंड स्पोक सिस्टम कहा जाता है। मौजूदा दिशा-निर्देशों के तहत, पारगमन बिंदु के बीच का ब्रेक पांच दिनों तक सीमित है। कोरोना वायरस के प्रभाव के फलस्वरूप आईसीडी पर कार्गो की निकासी में देरी को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड ने दिनांक 16.04.2020 से 30.05.2020 तक टेलीस्कोपिक लाभ प्राप्त करने के लिए सीमा को पांच दिनों से बढ़ा कर पंद्रह दिनों तक करने का निर्णय लिया है।

माल परिवहन के लिए छूट

रेलवे के पास ऐसे ग्राहकों के लिए ऐसे परिवहन उत्पाद / योजनाएँ हैं जो मानक लंबाई की रेक, दो आरंभिक प्वाइंट से प्रारंभ होने वाली रेक, दो गंतव्यों वाली रेक आदि की बुकिंग करना चाहते हैं।

ऑपरेटिंग ऑप्टिमाइजेशन की दृष्टि से दूरी प्रतिबंध आदि के साथ ये सभी छूट मालग्राहकों के लिए उपलब्ध है। कोविड लॉकडाउन के दौरान निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान की गई हैं :-

क. मिनी रेक के लिए दूरी प्रतिबंध 600 किमी था, जिसे इंट्रा ज़ोनल ट्रैफ़िक के लिए 1000 किलोमीटर तक बढ़ाया गया था। अब इंटर जोनल और इंट्रा जोनल ट्रैफिक दोनों के लिए एक समान 1500 किलोमीटर की अनुमति दे दी गई है।

ख. इसी तरह, दो प्वाइंटों से प्रारंभ होने वाले रेकों के लिए एक दूरी का प्रतिबंध है जिसके तहत लीन सीज़न में दो लोडिंग पॉइंट पर 200 किमी से अधिक और पीक सीज़न 400 किमी से अधिक दूरी नही होनी चाहिए। यह व्यवस्था रेक के इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए है। पर अभी बिना किसी सीज़न के बंधन के, 500 किमी तक के लोडिंग पॉइंट के  दूरी प्रतिबंध की छूट दी गई है।

ग. इसके अलावा, ट्रेन लोड के लाभ के लिए निर्धारित संख्या में वैगनों को लोड किया जाना आवश्यक है अन्यथा यदि लोडेड वैगनों की संख्या इस संख्या से कम है तो बुकिंग वैगन-लोड दरों में की जाती हैं, जो थोड़ी अधिक होती हैं।

इस प्रावधान में भी बीसीएनएचएल वैगनों के संबंध में छूट दी गई है, ये एक प्रकार के कवर्ड वैगन हैं जिनको मुख्य रूप से बैग्ड कन्साइनमेंट जैसे खाद्यान्न, कृषि उपज अर्थात प्याज आदि के लिए उपयोग किया  जाता  हैं। आवश्यक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के दृष्टिगत उनके लदान को प्रोत्साहित करने के लिए इन में अब ट्रेन लोड के लाभ के लिए पहले की न्यूनतम संख्या 57 के स्थान पर अब 42 वैगनों को लोड किए जाने की छूट दी गई है।

पैरा 5 में ये सभी छूट 30.09.2020 तक मान्य हैं।








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