अति आवश्यक होने पर ही यात्रा करें! – RailSamachar

भारतीय रेल द्वारा देश भर में प्रतिदिन कई श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, ताकि श्रमिकों की अपने घरों तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। यह देखा जा रहा है कि कुछ ऐसे लोग भी श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में यात्रा कर रहे हैं, जो पहले से ही ऐसी बीमारियों से पीड़ित हैं जिनसे कोविड-19 महामारी के दौरान उनके स्वास्थ्य को खतरा बढ़ जाता है। यात्रा के दौरान पूर्वग्रसित बीमारियों से लोगों की मृत्यु होने के कुछ दुर्भाग्यपूर्ण मामले भी सामने आए हैं।

ऐसे पूर्व बीमारीग्रस्त लोगों की सुरक्षा हेतु रेल मंत्रालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश क्र. 40-3/2020-DM -l(A) दि.17.05.2020 के तहत, अपील करता है कि पूर्व बीमारीग्रस्त (जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, कर्करोग, कम प्रतिरक्षा) वाले व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं, 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे एवं 65 वर्ष से ऊपर के बुजुर्ग अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए, जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, रेल यात्रा करने से बचें।

रेल मंत्रालय ने इस अपील में यह भी कहा है कि “हम समझ सकते हैं कि देश के कई नागरिक इस समय यात्रा करना चाहते हैं एवं उनको निर्बाध रूप से रेल सेवा मिलती रहे, इस हेतु भारतीय रेल और इसके सभी कर्मी चौबीसों घंटे, सातों दिन कार्य कर रहे हैं। परंतु यात्रियों की सुरक्षा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है।”

“इसके लिए सभी नागरिकों का यथोचित सहयोग अपेक्षित है। किसी भी कठिनाई या आकस्मिक समस्या होने पर नजदीकी रेलकर्मी से संपर्क करने में हिचकिचाएं नहीं। भारतीय रेल आपकी सेवा में हमेशा की तरह तत्पर है।”

(हेल्प लाइन नंबर – 139 & 138)








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सिर्फ कन्फर्म्ड आरक्षित टिकटधारी यात्रियों को ही स्टेशनों में प्रवेश और ट्रेनों में यात्रा की अनुमति – RailSamachar

रेल प्रशासन द्वारा रेलयात्रियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेनों और स्टेशनों पर पर्याप्त व्यवस्था की गई है। यात्रियों की भीड़ और आने-जाने वाले यात्रियों को अलग रखने के लिए सभी स्टेशनों पर अलग-अलग प्रवेश और निकास के साथ सीमांकन, साइनेज आदि का प्रावधान किया गया है।

प्लेटफॉर्म, कॉनकोर्स और अन्य यात्री क्षेत्रों को लगातार साफ और सेनेटाइज किया जा रहा है। शारीरिक दूरी के लिए फर्श पर निशान, बैरिकेडिंग आदि की व्यवस्था की गई है। स्वचालित सेनेटाइजर डिस्पेंसर आदि को स्पर्श बिंदुओं को कम करने के लिए स्टेशनों पर प्रदान किया गया है। सभी स्टेशनों पर यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है।

ट्रेनों और स्टेशनों पर सिर्फ कन्फर्म्ड आरक्षित टिकटधारी यात्रियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। प्लेटफार्म के प्रवेश द्वार पर स्वचालित थर्मल स्कैनिंग मशीन लगाई गई है, जिससे यात्रियों का तापमान लिया जाएगा। इसके पश्चात हाथों को साफ (सेनेटाइज) करने के लिए भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें बिना छुए ही हाथों को सेनेटाइज किया जा सकेगा।

सभी प्लेटफार्मों पर कैटरिंग स्टालों को खोले जाने हेतु निर्देशित कर दिया गया है जिससे यात्रियों को पैक्ड फूड आइटम एवं पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। रेल प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि कम से कम सामान लेकर यात्रा करें और साथ में खानापान की पर्याप्त सामग्री लेकर चलें।

सभी स्टेशनों पर जनउदघोषणा प्रणाली एवं अन्य माध्यमों से ट्रेनों के आने-जाने की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। रेल प्रशासन ने निर्देशित किया कि यात्रियों को सभी प्रकार की समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि यात्रा हेतु वही यात्री स्टेशन आएं जिनके पास कन्फर्म्ड आरक्षित टिकट हो। प्रतीक्षा सूची वाले टिकट पर यात्रा की अनुमति नहीं है।

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने हेतु यात्रा प्रारंभ करने से पहले यात्रीगण कृपया निम्नलिखित आवश्यक अनुदेशों का पालन सुनिश्चित करें :-

1. बिना कन्फर्म्ड आरक्षित टिकट के स्टेशन पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।

2. सभी यात्रियों को फेस मास्क पहनना आवश्यक है।

3. सभी यात्री, गाड़ी के प्रस्थान समय से डेढ़ से दो घंटे पहले स्टेशन पर पहुंचना सुनिश्चित करें।

4. सभी यात्रियों के मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य होगा।

5. टिकटधारक यात्री के अतिरिक्त अन्य किसी व्यक्ति को प्लेटफार्म पर प्रवेश की अनुमति नहीं है।

6. ट्रेन में यात्रा करने वाले सभी यात्री अपने साथ भोजन सामग्री, पानी, चादर, तकिया, कम्बल स्वयं लेकर आएं। यद्यपि स्टेशनों पर कैटरिंग स्टाल खुले रहेंगे, जिससे पानी की बोतल एवं पैक्ड खाद्य पदार्थ खरीदने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।








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अटैच्ड आरपीएफ स्टाफ को लाखों रुपए के यात्रा भत्ते का भुगतान – RailSamachar

महीनों से जवानों को नहीं मिल रहीं छुट्टियां, कमांडेंट/आईपीएफ दे रहे हैं जवानों को डीएम से अनुमति लाने का मौखिक आदेश!

सुरेश त्रिपाठी

कोरोनावायरस से संक्रमित होकर रेलवे सुरक्षा बल के कई जवान असमय काल-कवलित हुए हैं और कई जवान फिलहाल आइसोलेशन में हैं। इसके लिए काफी हद तक आरपीएफ प्रशासन भी जिम्मेदार है।

इसके अलावा एक तरफ जहां डायरेक्टिव-32 जैसा एकतरफा आदेश निकालकर लगभग पूरी फोर्स को दर-बदर कर दिया गया और उसके लिए बतौर ट्रांसफर अलाउंस करोड़ों रुपए के रेल राजस्व का नुकसान हुआ, वहीं दूसरी तरफ रेलवे बोर्ड सहित अधिकांश जोनों और मंडलों में सैकड़ों “फेवरेट स्टाफ” का अटैचमेंट करके उसे लाखों रुपए के ट्रांसपोर्ट अलाउंस (टीए) का अनावश्यक भुगतान किया जा रहा है।

DG RPF Arun Kumar

डायरेक्टर जनरल/रेलवे सुरक्षा बल (DG/RPF) अरुण कुमार द्वारा हाल ही में जवानों के वेलफेयर के लिए स्थानांतरण नीति (डायरेक्टिव 32) में बदलाव किया गया था कि एक ही जिले में लगातार 10 वर्षों से अथवा उसी जिले में कुल 15 वर्षों तक तैनात रहने वाले जवानों का स्थानांतरण अन्य जिलों में किया जाएगा।

ऐसा किया भी गया, किंतु डीजी/आरपीएफ की ईमानदारी से कार्य करने की मंशा में सेंध लगाने की कारगुजारी उन बाबुओं द्वारा की जा रही है जो स्वयं भी कई वर्षों से एक ही जिलेे में जमे हुए हैं।

जिन जवानों का स्थानान्तरण किया गया था, उन्हें कुछ समय बाद किसी न किसी कार्य का विशेषज्ञ बताकर वापस उसी जगह या उसी मंडल कार्यालय में मौखिक आदेश से लंबे समय से अटैच करके रखा गया है।

यहां तक कि उन्हें लाखों रुपये के यात्रा भत्ते (टीए) का भी भुगतान किया जा रहा है। जबकि देश में इस समय कोरोना महामारी के कारण ट्रेन एस्ककॉर्टिंग और अन्य बंदोबस्त के लिए जवानों की आवश्यकता उनके सटेशनों पर है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस प्रकार के अनावश्यक अटैचमेंट कई जोनल एवं मंडल मुख्यालयों में हैं। जबकि रेलवे बोर्ड में ऐसे कुल 50-55 जवानों का अटैचमेंट किया हुआ है।

आरपीएफ सूत्रों का कहना है कि जोनों/मंडलों के लिए जब भी रेलवे बोर्ड से सख्ती की जाती है, तब ऐसे लोगों को उनके नियत स्थान पर वापस कर दिया जाता है मगर फिर कुछ समय बाद पुनः अटैच कर लिया जाता है। यह सारा अनियमित कामकाज आरपीएफ अधिकारियों के मौखिक आदेशों पर चल रहा है।

आरपीएफ स्टाफ का कहना है कि डीजी/आरपीएफ यदि चाहते हैं कि उनके द्वारा बनाई गई नीति का सही और ईमानदारी से पालन हो, तो इस तरह के तमाम अनियमित कामकाज के विरुद्ध उचित कार्यवाही करने के लिए वही खुद सक्षम अधिकारी हैं।

उनका कहना है कि ऐसा इसलिए माना जा सकता है कि स्वयं डीजी/आरपीएफ स्थानांतरण नीति के अनुपालन में किसी भी प्रकार के अटैचमेंट के खिलाफ हैं। उनके द्वारा सुरक्षा सम्मेलनों में बार-बार यह कहा जाता रहा है कि किसी एक के फायदे अथवा सुविधा के लिए नियम नहीं बदला जा सकता, लेकिन उन्हें ही यह भी देखना होगा कि ये नियम धरातल पर कितने तर्कसंगत हैं?

यह भी बताया गया है कि रेलवे बोर्ड में स्टॉफ अटैचमेंट से ही लिया जाता है। परंतु यह भी सही है कि यह अटैचमेंट बिना जुगाड़ के किसी सामान्य सिपाही के लिए संभव नहीं है। बोर्ड का वर्क डिस्ट्रीब्यूशन भी अलग है, परंतु बोर्ड में भी ऐसा बहुत कुछ होता है, जो डीजी के संज्ञान में कभी नहीं आने दिया जाता है।

बोर्ड में अटैच जवानों से ऑफिस में चाय बनाने और देने, फाइलें लाने-लेजाने जैसे ऑफिस चपरासी के काम लिए जाते हैं, जबकि उसे हथियारबंद होकर यात्रियों और रेल संपत्तियों की सुरक्षा में तैनात रहना चाहिए। इसके अलावा भी उनसे अन्य तमाम कार्य करवाए जाते हैं, जो एक जवान की ड्यूटी में कदापि शामिल नहीं हो सकते।

बताते हैं कि बोर्ड में अटैचमेंट का पूरा मामला भी डीजी के संज्ञान में नहीं है। स्टाफ का कहना है कि डीजी को इसकी समीक्षा खुद करनी चाहिए और देखना चाहिए कि जो स्टाफ वहां अटैच किया गया है, वह किस जुगाड़ से वहां तक पहुंचा है, क्योंकि उनको बोर्ड में अटैचमेंट की व्याख्या दूसरे तरह से बताई गई है। हालांकि बोर्ड में पहले जो लोग 20-20 सालों से अटैच थे, उन्हें डीजी ने आते ही हटा दिया था। फिर जो नए अटैचमेंट किए गए, उन सभी को 6 महीने तक टीए का गलत भुगतान हुआ है।








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30 जून तक बढ़ाया गया नियमित यात्री ट्रेनों का निरस्तीकरण

रद्द किए गए टिकटों पर मिलेगा पूरा रिफंड

21 मार्च 2020 के बाद के निरस्त टिकटों की शेष राशि भी वापस की जाएगी

कोविड-19 के मद्देनजर टिकट निरस्तीकरण और किराया रिफंड के संशोधित निर्देश जारी

मालगाड़ियों, समयसारिणीबद्ध पार्सल सेवाएं, श्रमिक और विशेष ट्रेनें यथावत चलती रहेंगी

कोविड-19 के दृष्टिगत रेलवे बोर्ड ने मेल/एक्सप्रेस, पैसेंजर और उपनगरीय गाड़ियों सहित नियमित यात्री ट्रेन सेवाओं का निरस्तीकरण 30 जून 2020 तक विस्तारित कर दिया है। हालांकि मालगाड़ियों, समय-सारणीबद्ध पार्सल सेवाओं, श्रमिक विशेष ट्रेनों और 12 मई 2020 से शुरू हुई अन्य विशेष ट्रेनों का संचालन जारी रहेगा। रेलवे बोर्ड द्वारा यह भी अधिसूचित किया गया है कि 30 जून 2020 तक की नियमित यात्री ट्रेनों के सभी टिकटों के निरस्तीरकरण पर पूरा रिफंड दिया जाएगा।

रेलवे बोर्ड ने कोविड-19 के कारण व्याप्त परिस्थिति के कारण टिकट निरस्तीकरण और किराया वापसी के संदर्भ में संशोधित दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इन नए दिशा-निर्देशों के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु निम्नवत हैं:

क. 21.03.20 से बाद से यात्री सेवाओं के प्रारंभ होने तक के पीआरएस से प्राप्त टिकट/ई-टिकट (पहले से बुक किए गए) के लिए रिफंड नियमों में विशेष प्रावधान के तहत छूट।

1. रेलवे द्वारा पूर्णत: निरस्त ट्रेनें : पीआरएस काउंटर टिकट: यात्रा की तारीख (सामान्य 03 दिनों के बजाय) से 6 महीने तक टिकट जमा करने पर काउंटर पर रिफंड लिया जा सकता है।

2. ई-टिकट: ऑटो रिफंड : ऐसी ट्रेन जिनको रेल प्रशासन द्वारा निरस्त नहीं किया गया है, पर यात्री यात्रा नहीं करना चाहते हैं

3. पहले से आरक्षित टिकटों के लिए विशेष प्रावधान के तहत पीआरएस काउंटर से प्राप्त और ई-टिकट दोनों के लिए पूर्ण रिफंड दिया जाएगा।

4. पीआरएस काउंटर टिकट: टीडीआर (टिकट जमा रसीद) यात्रा की तारीख से 6 महीने के भीतर (सामान्य 03 दिनों के स्थान पर) स्टेशन पर भरी जा सकती है।

5. पूर्व निर्धारित 10 दिनों के सामान्य नियम के स्थान पर मुख्य दावा अधिकारी/मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (दावा) के कार्यालय में टिकट रिफंड हेतु टीडीआर 60 दिनों तक जमा किया जा सकता है। यह ट्रेन चार्ट से मिलान के अधीन होगा।

6. ई-टिकट: ऑनलाइन निरस्तीकरण और धनवापसी सुविधा उपलब्ध है।

7. 139 के माध्यम से निरस्तीकरण: जो यात्री 139 के माध्यम से टिकट निरस्त करना चाहते हैं, उन्हें यात्रा की तारीख से 06 महीने के भीतर काउंटर पर रिफंड मिल सकता है।

ख.  दि 21.03.20 एवं उसके बाद की यात्रा अवधि के लिए पहले से आरक्षित टिकटों को निरस्त करने पर हुई कटौती की गई राशि की पूर्ण वापसी।

पीआरएस काउंटर टिकट: दि 21.03.20 एवं उसके बाद की यात्रा अवधि के लिए ऐसे यात्री जिन्होंने पहले से ही अपना टिकट निरस्त करवा लिया है, वे कैंसलेशन चार्ज की शेष राशि की वापसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह आवेदन जोन के मुख्य दावा अधिकारी / मुख्य वाणिज्य प्रबंधक / रिफंड के कार्यालय में किए जा सकते है। निरस्तीकरण शुल्क की शेष राशि की वापसी के दावे के लिए यह आवेदन यात्रा की निर्धारित तिथि के 06 महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप में किया जा सकता है।

ई-टिकट: निरस्त किए गए टिकटों की शेष राशि का रिफंड उन यात्रियों के उसी खाते में जमा किया जाएगा जिससे टिकट बुक किया गया था।

कोविड-19 के प्रसार को रोकने के दृष्टिगत संपूर्ण देश भर में लॉकडाउन लागू है और इसको आगे विस्तारित कर दिया गया है। इस अवधि के दौरान रेल प्रशासन द्वारा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पार्सल विशेष गाड़ियों का परिचालन किया जा रहा है।

व्यापारीगण अपना जरूरी सामान पार्सल घरों से बुक करके भेज सकते हैं। पार्सल बुकिंग से जुड़ी जानकारी पार्सल कार्यालय, मंडल कार्यालय या कमर्शियल कंट्रोल से प्राप्त की जा सकती है।

यात्रा के दौरान यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए रेल सुरक्षा बल उनकी सुरक्षा हेतु तैनात रहेगा। इसी प्रकार निरन्तर कार्य करते हुए भारतीय रेल अपने यात्रियों को एक सुखद यात्रा का अनुभव देने के लिए सदैव प्रयासरत है।








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यात्री ट्रेनें नहीं चल रही हैं, ऐसे मार्जिन में केबल मेगरिंग कराने पर अधिकारियों का जोर

केबल मेगरिंग करने का नया फरमान, रिले रूम के वायरस ग्रस्त होने पर कैसे बचेगी रेलकर्मियों की जान !

अब तक एसएंडटी कर्मचारियों को इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों के साथ रेल बदलने, ट्रैक मशीन से पैकिंग करने के कार्य में लगाया गया था परंतु अब एक और नया फरमान जारी कर दिया गया है। इस नए आदेश में केबल मेगरिंग कराने के निर्देश दिये गये हैं।

जब कर्मचारियों का कहना है कि समस्या काम करने की नहीं, बल्कि काम करने की जगह को लेकर है, क्योंकि केबल मेगरिंग कराने के लिए रिले रूम जिस पर दो लाॅक होते हैं, जिनकी एक चाभी एसएंडटी विभाग के पास तथा दूसरी चाभी स्टेशन मास्टर के पास होती है।

स्टेशन मास्टर चाभी तभी देते हैं, जब एसएंडटी विभाग का जेई या एसएसई स्तर का निरीक्षक चाभी मांगने के लिए कंट्रोल से पीएन लेता है और स्टेशन मास्टर को कंट्रोल चाभी देने के लिए अनुमति देता है।

यानि रिले रूम पूरी तरह से बंद और सुरक्षित होता है। अतः रिले रूम को खोले बगैर केबल मेगरिंग करना संभव नहीं है।

जबकि रिले रूम के अंदर सिग्नल की सारी सर्किट तथा हजारों-लाखों की संख्या में सिग्नलिंग तारों का गुच्छा सिग्नलिंग उपकरणों को चलाने के लिए लगा होता है।

अब प्रश्न यह है कि क्या एक बंद और सुरक्षित कमरे को इस कोविद-19 महामारी के समय खोलकर उसे भी असुरक्षित नहीं किया जा रहा है और क्या इस प्रकार के रिले रूम को सैनेटाइज किया जाना संभव है जहाँ हजारों-लाखों की संख्या में सिगनलिंग तारों का गुच्छा तथा सिगनलिंग सिस्टम मौजूद हो?

एसएंडटी कर्मियों का आग्रह है कि आखिर अधिकारियों को कर्मचारियों की सुध क्यों नहीं हो रही है? उनका कहना है कि जब प्रधानमंत्री खुद देश के हर नागरिक को ‘घर पर रहिये और केवल घर पर रहिये’ के लिए निवेदन कर रहे हैं, तो क्या हमारे अधिकारी अपने मातहत कर्मचारियों को ‘घर पर रहिये और केवल घर पर रहिये’ के लिए प्रेरित नहीं कर सकते हैं?

उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में चेयरमैन, रेलवे बोर्ड ने भी सभी अधिकारियों को केवल मालगाड़ियों के लिए आवश्यक स्टाफ को ही ड्यूटी पर लगाने का निर्देश दिया है, वह भी रोटेशन में। परंतु ब्रांच अधिकारियों, खासतौर पर एसएंडटी तथा इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों को ट्रेनें कम चल रही हैं, तो काम करने के लिए अच्छा मार्जिन दिख रहा है, इसीलिए वह सामान्य दिनों से भी ज्यादा काम करवा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कहने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जा रहा है, परंतु इंजीनियरिंग तथा एसएंडटी विभाग का प्रत्येक काम रिस्क एवं हार्डशिप के बिना संभव ही नहीं है, ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग तो मात्र एक छलावा है। ऐसी परिस्थितियों में कई रेलकर्मी कोरोना महामारी के चपेट में आ रहे हैं, जिसका एक बेहतरीन उदाहरण पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल मंडल के नंदुरबार सेक्शन में आ चुका है, जहां संदिग्ध मामले पाए जाने पर तीन ट्रैकमैनों को होम क्वारंटाइन किया गया है।

उन्होंने कहा कि जो लोको पायलट ट्रेन चलाते हैं, उनको भी ब्रेथ एनालाईजर टेस्ट तथा बायोमैट्रिक उपकरणों से छुट दी गई है, परंतु कुछ लाॅबियों में यह अभी मान्य नहीं किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि उनके पास मंडल कार्यालय से अभी तक कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। अब जबकि अभी हाल ही में पालनपुर में एक लोको पायलट को कोरोना से संक्रमित पाया गया था, तब भी रेल प्रशासन के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 

सवाल यह है कि आखिर इस वैश्विक कोरोना महामारी से इन रेल कर्मचारियों को कौन बचाएगा और इसके लिए जिम्मेदार किसे ठहराया जाएगा?

“हम बचेंगे, तो देश बचेगा”

एसएंडटी कर्मचारियों के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में डाला गया मैसेज भी कानाफूसी.कॉम को प्राप्त हुआ है। इसमें कहा गया था कि – “जबकि भारत सरकार एवं देश के प्रधानमंत्री खुद बार-बार सभी नागरिकों से ‘घर में ही रहें और केवल घर में ही रहें’ की अपील कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में घर से बाहर निकलना मौत के मुँह में जाने के बराबर ही नहीं, बल्कि पूरे भारत को मौत के मुँह डालने के बराबर माना जा रहा है। ऐसी विकट परिस्थिति में हम रेल कर्मचारियों के ऊपर विशेष जिम्मेदारियां आ जाती हैं। परंतु हमारी जिम्मेदारियों की आड़ में हमारा शोषण किया जाना उचित नहीं है। हम कर्मचारी भी आप अधिकारियों के परिवार के एक सदस्य की तरह ही हैं और हमसे काम लेना आपकी जवाबदारी है, परंतु इसे किसी भी अधिकारी को अपने इगो पर नहीं लेना चाहिए। और जहां तक संभव हो, हम सभी को एक-दूसरे की भावनाओं को तथा समस्याओं को इससे भी ज्यादा हमारे घर से बाहर निकलने के डर को महसूस करना चाहिए। अगर बात केवल हम कर्मचारियों की होती, तो कोई बात नहीं थी, परंतु यह महामारी हमारे परिवार को ही नहीं, पूरे देश को महामारी के दलदल में डाल रही है। हमारी एक गलती न जाने किस-किस को लील जाए। आज किसी भी प्रकार किसी से हुई एक छोटी सी गलती भी बहुत बड़ी गलती बन सकती है। अतः आप सभी से हाथ जोड़ कर नम्र निवेदन है कि आप सभी के हाथों में हमारी ही नहीं, बल्कि हमारे पूरे परिवार के साथ-साथ हमारे समाज की जिंदगियां भी हैं। मेरे इस अनुरोध पर आप सभी एक बार पुनर्विचार करें तथा शिफ्ट ड्यूटी में कार्यरत कर्मचारियों के दर्द को समझने की कोशिश करें, जब गाड़ियां चल नहीं रही हैं, तो शिफ्ट ड्यूटी में कर्मचारियों की संख्या कम की जानी चाहिए, उन्हें अल्टर्नेट दिन में बुलाया जाना चाहिए तथा जनरल ड्यूटी में भी किसी भी प्रकार का नया काम नहीं किया जाना चाहिए। जहां तक संभव हो, हमें इस वक्त केवल और केवल इमरजेंसी कार्यों का संपादन ही करना चाहिए। इस महामारी से बचेंगे, तो बहुत सारे काम कर लेंगे। हम बचेंगे तो देश बचेगा।”

Lifted Lc 67  both the booms air

Replaced point no 13A and 11B today at KKLR yard

A boom 90, 90 89

B boom  90,94 96

Planned special work on Barabhum Station – spot vedio

https://youtu.be/dp2Kk_gsNYg

New and special works are going on in Godiwada section, Vijayawada division, South Central Railway

https://twitter.com/irstmu/status/1244405020109361152?s=08








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निर्दोष यात्री को पकड़कर लूटा – RailSamachar

सभी संबंधित अधिकारियों ने लिखित शिकायत के बावजूद अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया

सवाल: आईपीएफ एवं संबंधित आरपीएफ कर्मियों के विरुद्ध तत्काल निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

सुरेश त्रिपाठी

सोलापुर आरपीएफ के उल्लेखनीय कारनामे लगातार सामने आ रहे हैं। अब यह जो मामला सामने आया है, वह और ज्यादा गंभीर है, क्योंकि इसमें एक निर्दोष यात्री, जो कि पूर्व रेल कर्मचारी भी है, को अकारण पकड़कर न सिर्फ ३६-४० घंटे तक सोलापुर से कलबुर्गी तक प्रताड़ित किया गया, बल्कि उसे रात भर लॉक अप में बंद रखकर गंदी-गंदी गालियां दी गईं और उसके पास से पांच हजार तीन सौ सात रुपए भी लूट लिए गए। ऐसी अन्यायपूर्ण और गैरकाननी गतिविधियाँ अक्सर यहां आईपीएफ/सोलापुर के कार्यक्षेत्र में घटित हो रही हैं, तथापि रेल प्रशासन को इसकी कोई परवाह है, ऐसा कम से कम उसके आचरण से तो नहीं लगता है।

यह घटना काजल नगर, होटगी रोड, सोलापुर निवासी महबूब सलीम पठान, जो कि पहले सोलापुर मंडल, मध्य रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग का कर्मचारी भी रह चुका है, के साथ २३/२४ फरवरी की दरम्यानी रात को १ बजे तब घटित हुई, जब वह बकायदा रेल टिकट लेकर सोलापुर से कलबुर्गी जा रहा था। ‘रेलसमाचार’ को ईमेल पर सभी संबंधित अधिकारियों को भेजी गई अपनी लिखित शिकायतें, एफआईआर इत्यादि सहित समस्त जानकारी भेजकर बाद में मोबाइल पर बात करके पठान ने बताया कि वह २३ फरवरी की रात को ट्रेन सं १६३८१, कन्याकुमारी एक्सप्रेस से कलबुर्गी जाने के लिए निकला था, तभी उसे आरपीएफ वालों ने अकारण पकड़कर लॉक अप में बंद कर दिया।

पठान के बताए अनुसार जब वह प्लेटफार्म सं १ से टिकट लेकर प्लेटफार्म सं ३ की तरफ ट्रेन पकड़ने जा रहा था, तभी आरपीएफ के चार लोगों ने उसे रोककर पूछा कि कहां जा रहे हो। इस पर उसने उन्हें अपने गंतव्य के बारे में बताया और अपना टिकट भी उन्हें दिखाया। फिर भी वह लोग उसे आरपीएफ ऑफिस में ले गए और लॉक अप में बंद कर दिया, जबकि उसने कोई गलती भी नहीं की थी। उसके पूछने पर भी उन लोगों ने उसका अपराध नहीं बताया तथा कोई उसकी बात सुनने को भी तैयार नहीं था।

उसने बताया कि २४ फरवरी को सुबह करीब ६.२० बजे लॉक अप से निकालकर उसके पास से उसका मोबाइल, एटीएम कार्ड, उसके स्कूटर की चाबी, रेलवे टिकट और ५३०७ रुपए नकद उससे छीन लिया गया। इसके बाद अपराधियों वाली स्लेट पकड़ाकर उसकी फोटो भी निकाली गई। तत्पश्चात दोपहर को करीब १२ बजे गाड़ी सं ११०१३ से उसे लेकर कलबुर्गी गए और वहां जीआरपी को सौंप दिया। उसने बताया कि जीआरपी लॉक अप में वह बेहोश हो गया था, क्योंकि उसको लगभग १२-१४ घंटे से खाने के लिए कुछ भी नहीं दिया गया था।

पठान ने बताया कि उसे बेहोशी की हालत में जीआरपी वालों ने कलबुर्गी के सिविल हॉस्पिटल में ले जाकर भर्ती किया। इसका पता उसे होश आने पर हॉस्पिटल में चला। पठान का कहना था कि सूचना मिलने पर जब उसके परिजन आए, तब अगले दिन जीआरपी कलबुर्गी ने उसे जमानत पर छोड़ा, मगर अन्य सामान के साथ उसके नकद ५३०७ रुपए और उसका रेल टिकट नहीं लौटाया। इसके पहले उन्होंने उसकी माँ और भाई से कुछ सादे पेपर्स पर उनके हस्ताक्षर करा लिए थे।

भुक्तभोगी महबूब पठान ने बताया कि जमानत पर छूटने के बाद उसने डीएससी/सोलापुर और मंडल रेल प्रबंधक/सोलापुर को इस घटना की विस्तृत जानकारी दी और कार्रवाई करने की मांग भी की। इसके पहले उसने कलबुर्गी से लौटने के तत्काल बाद २५ फरवरी को सदर बाजार पुलिस स्टेशन, सोलापुर में उक्त चारों आरपीएफ वालों के विरुद्ध एफआईआर (सं १९४१००१६०७२०००००४) दर्ज करवा दी थी और ट्विटर के माध्यम से संबंधित सभी अधिकारियों को अवगत करा दिया था।

देखें और सुनें महबूब पठान की जुबानी उसकी आपबीती कहानी-

https://youtu.be/-ko6kUFgcE0

बहरहाल, उपरोक्त घटना को घटित हुए लगभग एक महीना होने जा रहा है, परंतु अब तक किसी भी अधिकारी ने इसका न तो संज्ञान लिया है और न ही कोई उचित कार्रवाई की गई है। जबकि लिखित शिकायत में आरोपी आरपीएफ वालों के नाम भी बताए गए हैं। उल्लेखनीय है कि उक्त चारों आरोपी आरपीएफ कर्मियों में कांस्टेबल कुंदन सिंह, कांस्टेबल सचिन शिंदे, कांस्टेबल दत्ता कचरे और कांस्टेबल राजकुमार उरांव शामिल हैं। यह चारों भ्रष्ट आरपीएफ कर्मी, महाभ्रष्ट आईपीएफ/सोलापुर राकेश कुमार सिंह के ‘स्पेशल’ वाले बताए गए हैं।

डीजी/आरपीएफ अरुण कुमार और पीसीएससी/मध्य रेलवे अतुल पाठक चाहे जितनी कोशिश कर रहे हों इन भ्रष्टों और महाभ्रष्टों को सुधारने की, मगर वह अपनी इन कोशिशों में कम से कम अब तक कामयाब नहीं हो पाए हैं। सवाल यह है कि यदि आरपीएफ पोस्टें ‘अलॉट’ नहीं हो रही हैं, तो आरपीएफ निरीक्षकों में इस कदर भ्रष्टाचरण पैदा कैसे हुआ?

दूसरा सवाल यह उठाया जा रहा है कि इतनी बड़ी घटना को खुलेआम अंजाम दिया गया, तथापि सारे प्रत्यक्ष सबूत उपलब्ध होने के बावजूद अब तक उक्त चारों दोषी आरपीएफ कर्मियों के खिलाफ तत्काल निलंबन और बर्खास्तगी की आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उच्च आरपीएफ प्रशासन की इस शिथिलता को क्यों न संबंधित आरपीएफ कर्मियों और आईपीएफ/सोलापुर का फेवर माना जाए?

फोटो परिचय: आईपीएफ/सोलापुर एवं उसके ‘पालतू जीरो पुलिस’ तथा ‘स्पेशल’ वालों के संरक्षण में सोलापुर रेलवे स्टेशन पर अवैध हाकर। रेलमंत्री और डीजी/आरपीएफ के ‘हाकर मुक्त रेलवे’ के दावे को मुंह चिढ़ाते हुए अवैध खाद्य पदार्थ विक्रेता सिर्फ सोलापुर में ही नहीं, बल्कि भारतीय रेल के किसी भी स्टेशन पर खुलेआम अपना धंधा करते हुए देखे जा सकते हैं।








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