चितरंजन लोकोमोटिव वर्कशॉप की वर्ष 2018-19 और 2019-20 की उपलब्धियां

चितरंजन लोकोमोटिव वर्कशॉप (सीएलडब्ल्यू), भारतीय रेल की इलेक्ट्रिक इंजन निर्माण की सबसे पुरानी स्थापित उत्पादन इकाई (पीयू) है। सीएलडब्ल्यू ने अब तक भारतीय रेल को विद्युत इंजनों की महत्वपूर्ण आपूर्ति की है।

18 वर्ग किमी के विस्तृत क्षेत्र में फैली भारतीय रेल की इस उत्पादन इकाई की वर्ष 2018-19 और 2019-20 की कुछ उल्लेखनीय उपलब्धियां-

पुश पुल ऑपरेशन:

* रेक के प्रत्येक छोर पर दो WAP-7 या WAP-5 लोकोमोटिव डिब्बों के माध्यम से वायर्ड संचार नेटवर्क के जरिये एक के साथ एक जुड़े हुए हैं।

*  फ्रंट ड्राइविंग लोकोमोटिव मास्टर लोको और रियर लोकोमोटिव स्लेव लोकोमोटिव है।

* स्लेव लोकोमोटिव फ्रंट ड्राइविंग लोकोमोटिव से कर्षण और ब्रेकिंग के लिए कमान लेता है।

* आवश्यकता के अनुसार सॉफ्टवेयर को CLW द्वारा अद्यतन किया गया है।

o मास्टर लोकोमोटिव से पुश पुल मोड में दो लोकोमोटिव का एकीकरण।

o मास्टर लोकोमोटिव और स्लेव लोको के लिए न्यूट्रल सेक्शन नेगोटिएशन लॉजिक ।

o परिचालन आवश्यकता के अनुसार ट्रैक्शन और ब्रेकिंग डिमांड ट्यूनिंग ।

सीएलडब्ल्यू टीम ने WAP-5 लोकोमोटिव के साथ मुंबई से दिल्ली और दिल्ली से मुंबई, वडोदरा और मथुरा के मध्य 160 किमी प्रति घंटे तक की गति के पहले COCR परीक्षण के दौरान जुड़ी हुई थी। सीएलडब्ल्यू टीम ने मुंबई से निजामुद्दीन और निजामुद्दीन से मुंबई, भोपाल तथा इटारसी के रास्ते राजधानी रेक के ट्रायल के दौरान भी जुड़ी हुई थी। फरवरी 2019 से सीएसटीएम-एनजेडएम राजधानी एक्सप्रेस पुश पुल मोड से चल रही है।

लाभ:

o कुल 12000HP (6000 + 6000) शक्ति

o केवल मास्टर लोको में क्रू की आवश्यकता

o कम कप्लोर फ़ोर्स – कम झटका

o बेहतर अक्सेलरेशन और डी- अक्सेलरेशन

o कुल यात्रा समय में कमी

o कर्व पर कम वियर एंड टेअर

एयरोडायनामिक डिज़ाइन युक्त उच्च गति संपन्न 200 किमी प्रघं.

* 200 कि. मी. प्र. घं. की रफ़्तार क्षमता का डब्ल्यूएपी-5 यात्री-वाही विद्युत् रेल इंजन (संख्या 30164) का निर्माण 200 किमी प्रघं के लिए अल्टेरनट ड्राइव गियर असेंबली।

* गियर औसत में संशोधन कर इसे अधिकतम 200 किमी प्रघं की गति क्षमता का बनाया गया है।

* रेल इंजन का उपयोग भारतीय रेल में प्रतिष्ठित रेलगाड़ियों जैसे, राजधानी एक्सप्रेस, गतिमान एक्सप्रेस एवं शताब्दी एक्सप्रेस चलाने हेतु उपयोग में लाया जायेगा।

* कार बॉडी को एयरोडायनामिक डिज़ाइन बनाया गया है।

* एक ही ड्राइव गियर सिस्टम के साथ लोकोमोटिव को गातिमान एक्सप्रेस के साथ सेवा में है(160 किमी प्रति घंटा)।

* पहला लोको 30164 को नवंबर 2018 में भेजा गया।

चिरेका में उत्पादन के तहत दो और लोकोमोटिव:

लाभ:

o एयर ड्रैग को कम करने के लिए – ऊर्जा की कम खपत और बेहतर अक्सेलरेशन।

o उच्च गति पर स्थिरता बढ़ाना।

o फ्रंट फेसिंग एंगल को कम कर कैबिन डिजाइन को री-प्रोफाइल किया गया।

o कम वायु प्रतिरोध जो विशेष रूप से उच्चतर गति पर महत्वपूर्ण हो जाता है।

हाई स्पीड WAP-7HS लोकोमोटिव का विकास:

* मौजूदा WAP-7, 140 किमी प्रति घंटे तक की 24 कोच वाली हाई स्पीड ट्रेनों को चलाने में सक्षम है।

* WAP-7HS, 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम सेवा गति की क्षमता है।

* गियर अनुपात को भी 3.6 (72:20) से 3.2 (70:22) में बदल दिया गया है। वजन में लगभग 14 टन की कमी।

लाभ: राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों का उच्च गति संचालन। सीआरएस निरीक्षण के बाद ऑपरेशन के लिए मार्च 20 में आरबी द्वारा अंतिम मंजूरी दी गई।

WAG-9HC3- फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव पारंपरिक ब्रेक सिस्टम के साथ (टाइप IRAB)

सीएलडब्ल्यू द्वारा किया गया कार्य:

o पारंपरिक लोको (WAG-7) का बिना पाइप लेआउट में परिवर्तन कर न्युमेटिक सर्किट को WAG-9HC में अपनाया गया।

o मशीन रूम में उपकरणों का उपयुक्त स्थान पर प्लेसमेंट।

o ट्राई-प्लेट पैनल की फिटमेंट, सहायक कंप्रेसर, सहायक पैनल और रखरखाव और संचालन के लिए SA9; A9 वाल्व

o विजिलेंस कण्ट्रोल डिवाइस का एकीकरण

o 3-फेज लोकोमोटिव के कण्ट्रोल लॉजिक के कार्यान्वयन के लिए वाहन नियंत्रण इकाई (VCU) के साथ एकीकरण

लाभ:

o रखरखाव अभ्यास के साथ शेड दक्षता हासिल कर रहे है- रखरखाव में सुविधा

o पुर्जों के लिए अच्छी तरह से स्थापित स्रोत – पुर्जों की बेहतर उपलब्धता

o डिजाइन पर पूर्ण नियंत्रण – गलती निदान और परेशानी शूटिंग में आसानी

o मानकीकृत घटक / पुर्जे – कमतर इन्वेंटरी

o सिस्टम की कम लागत – लागत अर्थव्यवस्था

दिसम्बर 2018 मेँ 32146 रेल इंजन भेजा गया। परीक्षण ईबीडीके बाद आरडीएसओ से मंजूरी मिल गयी। रेल इंजन सेवा में है। WAG-9 और WAP- लोकोमोटिव की 6000HP से 9000HP तक क्षमता का उन्नयन।

6000HP से 9000HP तक रेलइंजन की क्षमता का उन्नयन:

* WAG-9 और WAP-7 लोकोमोटिव की 6000HP से 9000HP तक क्षमता का उन्नयन।

* उच्च शक्ति के लिए उपकरणों का उन्नयन

o ट्रैक्शन कन्वर्टर o ट्रांसफार्मर o ट्रैक्शन मोटर o बोगी और कार-बॉडी

फायदे: उच्च गति पर बेहतर त्वरण आरक्षित, o डालने के माध्यम से वृद्धि, o बढ़ी हुई लाइन क्षमता, o ट्रेनों की सही पॉवरिंग, o गति क्षमता में सुधार की संभावना।

लोको नंबर 90002 में स्किल्लासिन और परफॉरमेंस परीक्षण कार्य फरवरी 2019 को पूरा हुआ।आरडीएसओ द्वारा ईएमआई और ईएमसी परीक्षण आयोजित किए जाने वाला है।

कम्पोज़िट कन्वर्टर का उपयोग कर WAP-5 लोकोमोटिव को HOG सक्षम किया गया:

* WAP-5 में जगह की कमी के कारण होटल लोड संभव नहीं था।

* चिरेका ने कम्पोजिट कन्वर्टर का विकास कार्य शुरू किया है।

* उपकरण होटल लोड कनवर्टर और ट्रैक्शन को समायोजित करने के लिए एकल क्यूबिकल में पुन: डिज़ाइन किया गया।

० ट्रैक्शन कनवर्टर + होटल लोड कनवर्टर- समग्र कनवर्टर

o ट्रांसफार्मर से अलग इनपुट वाइंडिंग से आपूर्ति।

स्थिति:

* जून 2018 में प्रथम लोकोमोटिव(30140) ईएलएस / जीजेडबी को भेजा गया।

* अक्टूबर 2018 में द्वितीय WAP-7 लोको (30715) ईएलएस / जीजेडबी को भेजा गया।

* समग्र संयोजक के साथ 2019-20 में 7 ज्यादा WAP-5 लोको के उत्पादन किया गया।

* इसने HOG की भोपाल शताब्दी, कानपुर शताब्दी और चंडीगढ़ शताब्दी जैसी ट्रेनों के संचालन को सक्षम किया है।

लाभ: ० WAP – 5 लोकोमोटिव के साथ उच्च उत्पत्ति(पीढ़ी) पर संभव है। ० शोर और प्रदूषण मुक्त। ० जीवाश्म ईंधन (डीजल) पर निर्भरता कम करना।

पायथन कॉन्फ़िगरेशन में तीन WAG-9H लोकोमोटिव का संचालन:

० तीन WAG-9H लोकोमोटिव डिस्ट्रिब्यूटेड पावर वायरलेस कंट्रोल सिस्टम (DPWCS) के साथ जुड़ा हुआ है और रेक के बीच वितरित किया गया।

० लोको पायलट / सहायक लोको पायलट केवल लोकोमोटिव के सामने उपलब्ध है।

० फरवरी 2020 में SECR ने 177 वैगन को रेक में जोड़ा और पायथन कॉन्फ़िगरेशन में संचालित किया। संयोजन (लोको + 59 वैगनों + लोको + 59 वैगनों + लोको + 59 वैगनों के साथ)

० चिरेका द्वारा DPWCS के साथ संचालन के लिए लोको में सॉफ्टवेयर संशोधन देश में ही किए गए।

लाभ: ० युग्मक और ड्रा बार बलों में कमी o ब्रेक के अनुप्रयोग और रिलीज के समय में कमी o रेल का कम पहनना और फाड़ना o समग्र ऊर्जा में कमी लाने के लिए अनुकूलित बल संतुलन सेवन  o घाट अनुभाग में बैंकर की कोई आवश्यकता नहीं।

3WAG-9H (सुसंगत ऑपरेशन) लोकोमोटिव का MU संचालन:

० मल्टी ऑपरेशन के लिए बैक टू बैक तीन WAG-9H लोकोमोटिव जोड़े गए।

० लोको पायलट / सहायक लोको पायलट केवल लोकोमोटिव के सामने उपलब्ध है।

० चिरेका द्वारा मिलकर संचालन के लिए लोको में सॉफ्टवेयर संशोधन किए गए।

० 15 जोड़े डिवीजन केकेआर लाइन में काम कर रहे है।

लाभ: 18000 एचपी की कुल शक्ति उच्च ढुलाई के लिए अग्रणी चालक

क्रू वौइस् और वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम (CVVRS):

उद्देश्य:

० वास्तविक समय में एलपी / एएलपी के सभी प्रकार के संचार की रिकॉर्डिंग

० परिचालन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए खतरा पहचान और जोखिम विश्लेषण

o गैर-मानक / असामान्य / असुरक्षित परिस्थितियों की घटनाओं को उजागर करना

० परिचालन जोखिम की पहचान

o प्रमुख क्षेत्रों की ओर इशारा करते हुए पिन

o जोखिम शमन के लिए जांच उपकरण

० कुल 15 लोको CVVRS के साथ उपलब्ध कराया गया।चिरेका निर्मित सभी लोको के लिए 100% प्रावधान की सुविधा है।

वाटर क्लोसेट: प्रणाली सुविधाएँ और एकीकरण:

o आवश्यक इंटरलॉक सुरक्षा प्रदान करने के लिए माइक्रोप्रोसेसर आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स लोकोमोटिव के साथ एकीकृत नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम लैस है।

o डब्ल्यूसी (WC) की वास्तविक समय की व्यस्तता का पता लगाने हेतु अधिभोग सेंसर सेवा प्रदान किया गया है ।

o सिस्टम में उपयोग किए जाने वाले बैक्टीरिया को 39; एनारोबिक माइक्रोबियल इकोकोम के रूप में जाना जाता हैं।

o यह इंगित करने के लिए कि क्या यह निषिद्ध है या सभी सुरक्षा इंटरलॉक पर विचार करने के बाद शौचालय का उपयोग करने की अनुमति के लिए एलईडी(लाल और हरे)संकेतक प्रणाली सुविधा प्रदान की गई है।

कुल 15 लोको CVVRS के साथ उपलब्ध कराया गया। सभी फ्रेट लोको के लिए 100% प्रावधान की सुविधा है।





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कैंटीन में 36 लाख के घोटाले की भरपाई रेट बढ़ाकर कर्मचारियों से करने पर आमादा वर्कशॉप प्रशासन – RailSamachar

वर्कशॉप प्रशासन के इस निंदनीय निर्णय का यूनियन और कर्मचारियों का भारी विरोध

माटुंगा वर्कशॉप, मध्य रेलवे की कर्मचारी कैंटीन में वर्ष 2012 से चले आ रहे 36 लाख रुपए के घोटाले की राशि यह घोटाला करने वाले संबंधित अधिकारियों से करने के बजाय वर्कशॉप प्रशासन कैंटीन के खाद्य पदार्थों के रेट बढ़ाकर कर्मचारियों से इसकी भरपाई करने का अत्यंत अन्यायपूर्ण प्रयास कर रहा है। प्रशासन के इस निंदनीय प्रयास का विरोध यूनियन के साथ ही वर्कशॉप के लगभग सभी कर्मचारियों द्वारा भी किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार माटुंगा वर्कशॉप प्रशासन द्वारा 26 जनवरी 2020 को कैंटीन में मिलने वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों में मनमानी और कुतर्कपूर्ण वृद्धि कर दी गई थी। तभी से यूनियन और कर्मचारियों द्वारा इसका जबरदस्त विरोध किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि 36 लाख की गड़बड़ी करने वालोें को वर्कशॉप प्रशासन द्वारा अन्यायपूर्ण तरीके से बचाने और इस गड़बड़ी का पैसा कर्मचारियों से वसूलने का शर्मनाक प्रयास किया जा रहा है।

पता चला है कि वर्कशॉप प्रशासन के साथ हुई पिछली बैठक में नेशनल रेलवे मजदूर यूनियन (एनआरएमयू) ने चर्चा के दौरान रेट बढ़ाने का सख्त विरोध किया था और इस घोटाले की राशि कर्मचारियों से नहीं, बल्कि घोटाला करने वाले मैनेजमेंट कमेटी के संबंधित अधिकारियों से किए जाने की मांग की थी। परंतु ऐसा लगता है माटुंगा वर्कशॉप प्रशासन ने कर्मचारियों के हित में सोचने के बजाय घोटालेबाजों को बचाना ज्यादा जरूरी समझा है।

संभवतः आज शनिवार 7 मार्च को भी वर्कशॉप प्रशासन के साथ यूनियन प्रतिनिधियों और कैंटीन मैनेजमेंट कमेटी की बैठक होने वाली है।

यूनियन ने वर्कशॉप के अंदर चीफ वर्कशॉप मैनेजर (सीडब्ल्यूएम) कार्यालय के सामने अपना बोर्ड लगाकर वर्कशॉप प्रशासन को चेतावनी देते हुए लिखा था कि यूनियन, वर्कशॉप प्रशासन के अन्यायपूर्ण निर्णय की निंदा करती है और इस बारे में उसे सचेत करती है कि 28 मार्च 2018 को यूनियन द्वारा दिए गए मांग पत्र के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।

यूनियन ने अपने बोर्ड में यह भी लिखा था कि 36 लाख की गड़बड़ी करने वालोें के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए इस घोटाले की उपरोक्त राशि उनसे वसूल की जाए और वर्कशॉप कर्मचारियों से इसकी भरपाई करने के प्रयास का निंदनीय कदम तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा कर्मचारियों के हित में यूनियन को आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ सकता है, क्योंकि प्रशासन की वसूली नीति अन्यायपूर्ण है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एनआरएमयू ने इससे पहले 11 नवंबर 2017 को भी वर्कशॉप प्रशासन को एक मांग पत्र देकर कैंटीन के रेट्स का पुनरीक्षण किए जाने की मांग की थी। उस पर भी वर्कशॉप प्रशासन ने आजतक कोई उचित निर्णय नहीं लिया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 के बाद से आजतक कैंटीन के लेखा-जोखा का समुचित ऑडिट नहीं किया गया है। जो ऑडिट किया भी गया, उसकी रिपोर्ट को प्रशासन ने सार्वजनिक करना जरूरी नहीं समझा।

तथापि वर्ष 2010-11 से 2015-16 तक की जो कथित ऑडिट रिपोर्ट्स (संदर्भ- सीआर/कैंटीन/एमटीएन/आरआर, दि.08.03.2018) कर्मचारियों के हाथ लगी हैं, उनके गहन अध्ययन से माटुंगा वर्कशॉप की कर्मचारी कैंटीन में भारी गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। इनके अवलोकन से जाहिर है कि माटुंगा वर्कशॉप की कर्मचारी कैंटीन की मैनेजिंग कमेटी भारी कुप्रबंधन और ऑडिट रिपोर्ट्स के मुताबिक अपरिमित वित्तीय गड़बड़ियों से कैंटीन की स्थिति काफी गंभीर है।

वर्कशॉप प्रशासन की “लापरवाही किसी की और भरपाई किसी से” की अन्यायपूर्ण नीति का विरोध करते हुए यूनियन ने 11 नवंबर 2017 को लिखे पत्र में कैंटीन की विस्तृत समीक्षा सहित “भाव बढ़ाने के कुत्सित प्रयास” की पूरी सच्चाई भी उजागर की थी। इसके साथ ही यूनियन ने कर्मचारियों के हित में चार मांगें भी वर्कशॉप प्रशासन से की थीं।

बताते हैं कि 7 मार्च 2018 की बैठक में सीडब्ल्यूएम ने यूनियन की चार मांगें मान ली थीं। इनमें उच्चाधिकार कमेटी का गठन करने, ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की करने, सभी सामग्री ई-टेंडर प्रणाली से खरीदे जाने और टेंपरिंग मुक्त कंप्यूटराइज्ड रिकॉर्ड कीपिंग प्रणाली लागू किए जाने की मांग शामिल थी। बताते हैं कि यह सारी व्यवस्था आजतक लागू नहीं हो पाई है। जबकि वर्कशॉप प्रशासन 36 लाख के घोटाले को या तो रफा-दफा करने अथवा खाद्य पदार्थों का रेट बढ़ाकर घोटाले की भरपाई कर्मचारियों से करने पर आमादा है।

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