सोलापुर आरपीएफ और अवैध हाकरों के बीच घमासान – RailSamachar

सोलापुर आरपीएफ बैरक परिसर में हुई आरपीएफ कर्मियों की आपसी बातचीत के वायरल वीडियो ने खोलकर रख दी आईपीएफ/सोलापुर की पोल

अवैध आदमी साथ रखकर आईपीएफ/सोलापुर की सेल्फ-वसूली के कारण अवैध हाकरों से दहशत में रहते हैं सोलापुर आरपीएफ पोस्ट के अन्य आरपीएफ कर्मी

भारतीय रेल में अवैध हाकरों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। जबकि वाणिज्य एवं आरपीएफ अधिकारियों के सुझाव पर स्टेशनों पर स्थित चल-अचल खानपान यूनिटों को आवश्यक अथवा उनकी मांग के अनुसार अतिरिक्त वेंडर मुहैया कराकर और प्लेटफॉर्म वेंडिंग की अनुमति देकर इसका हल खोजा गया था। परंतु इतने बड़े और व्यापक अभियान के बावजूद यह समस्या जस की तस बनी हुई है।

पिछले दिनों अवैध हाकरों के खिलाफ पूरी भारतीय रेल में दस दिन तक लगातार अभियान चलाकर सैकड़ों अवैध हाकरों के पकड़े जाने और इस समस्या से रेलयात्रियों को निजात दिलाने की बहुत वाहवाही रेलमंत्री से लेकर डीजी/आरपीएफ तक ने लूटी, मगर नतीजा वही ढ़ाक के तीन पात ही रहा है।

यही स्थिति अवैध-अनधिकृत टिकट दलालों की भी है, जिन पर कोई लगाम न लगा पाने पर अब इसका लिंक टेरर-फंडिंग से जोड़कर और अतिरिक्त सनसनी पैदा करके आरपीएफ/रेल प्रशासन द्वारा अपना पल्ला झाड़ लिया गया है। जबकि रेलयात्रियों के लिए स्थिति ज्यों की त्यों है, उन्हें इस तमाम कवायद का कोई लाभ नहीं हुआ।

अब मुद्दे की बात यह है कि सोलापुर स्टेशन आरपीएफ पोस्ट पर जब से वर्तमान इंस्पेक्टर राकेश कुमार सिंह की पोस्टिंग हुई है, तब से उनके साथ एक अनधिकृत आदमी हर समय उपस्थित रहता है। या यों कहा जाए कि चौबीसों घंटे उनके साथ चिपका रहता है। उन्हीं के आवास पर सोता-खाता और रहता है। फोटो के साथ यह खबर कानाफूसी.कॉम के पास 28 अगस्त 2019 को आई थी और तब से अब तक यह किसी न किसी कारण पेंडिंग पड़ी थी।

आईपीएफ/सोलापुर का ‘जीरो पुलिस” वाला रवि (नीली जींस, फुल ब्लू शर्ट में)

अब इस खबर का संदर्भ हाल में आरपीएफ सिपाहियों के साथ हुई अवैध हाकरों की मारपीट के सिलसिले में संज्ञान में आया। बताया गया कि इस आदमी का नाम ‘रवि’ है। यह आरपीएफ इंस्पेक्टर सोलापुर का “जीरो पुलिस” है। पुलिस की भाषा में “जीरो पुलिस” उसे कहा जाता है जिसका कोई ऑफीसियल रिकॉर्ड नहीं होता है और वह इंस्पेक्टर या संबंधित पुलिस अधिकारी का नितांत निजी आदमी होता है।

सोलापुर के आरपीएफ कर्मियों का कहना है कि आईपीएफ/सोलापुर का रवि नामक यह ‘अनधिकृत निजी सहायक’ सोलापुर स्टेशन और आसपास के अवैध हाकरों/धंधे वालों से हप्ता वसूली, स्टेशन पर स्थित कैंटीनों से मंथली वसूली करता है। किसका धंधा चलना है, किसका नहीं, यही व्यक्ति इंस्पेक्टर को बताता है और उसके कहे या बताए अनुसार ही निर्णय होता है।

उनका कहना है कि ये आदमी मनमाड से ही इंस्पेक्टर राकेश कुमार सिंह के साथ है। तब राकेश कुमार सिंह मधमाड में सब-इंस्पेक्टर के रूप में तैनात थे। उन्होंने बताया कि राकेश कुमार सिंह का तबादला जब भुसावल किया गया था, तब भी यह आदमी भुसावल में उनके साथ रहा। जब वह भुसावल से सोलापुर आए, तब यह आदमी भी उनके साथ ही आया। अब लगभग दो साल से यह सोलापुर में भी उनके साथ है।

उन्होंने बताया कि आरपीएफ थाना सोलापुर में रवि नामक इस आदमी की हैसियत इंस्पेक्टर के बराबर है। समस्त आरपीएफ स्टाफ इस आदमी से डरकर नौकरी करता है, क्योंकि जिस स्टाफ की ये चुगली इंस्पेक्टर से कर देता है, उसकी खैर नहीं होती। ये इंस्पेक्टर के साथ उनके घर पर ही सोता है। दिन-रात आईपीएफ के चेंबर/ऑफिस में बिना रोक-टोक आता-जाता रहता है। जबकि स्टाफ को पूर्व अनुमति लेकर भी आईपीएफ के चेंबर में बड़ी मुश्किल से प्रवेश मिल पाता है।

हाल ही में सोलापुर आरपीएफ के दायरे में सिविल पुलिस द्वारा पकड़ी गई डीजल-पेट्रोल की बड़ी चोरी के बाद ऊपर के कड़े आदेशों के चलते अवैध हाकरों पर भी सख्ती की गई, जिससे सोलापुर आरपीएफ पोस्ट के दायरे में आने वाले काफी अवैध धंधे बंद हो गए हैं। परंतु कुख्यात बदमाश शिवा और उसके भाई शिवम के सभी अवैध धंधे बदस्तूर जारी हैं, क्योंकि वह आईपीएफ को सीधे हफ्ता देता है। इसीलिए वह बाकी किसी आरपीएफ वाले को कुछ नहीं समझता।

बताते हैं कि शिवा और शिवम पर चोरी-डकैती, हत्या, बलात्कार, हत्या के प्रयास इत्यादि गंभीर अपराधों में लिप्त होने के तमाम मामले जीआरपी सहित सोलापुर के अन्य पुलिस थानों में दर्ज हैं। एक-दो दिन पहले स्टेशन परिसर में लगा हुआ शिवा का अवैध धंधा हटवाने के लिए आरपीएफ का एक सिपाही गया था तो शिवा के वाचरों ने उस सिपाही का कॉलर पकड़कर उसके साथ मारपीट की थी।

इसके बाद बताते हैं कि अन्य आरपीएफ सिपाहियों ने मिलकर जब शिवा के उन सभी वाचरों और धंधा लगाने वालों को पकड़कर आरपीएफ थाने में ले आए, तो करीब 100-150 अवैध हाकरों ने एकजुट होकर आरपीएफ थाने को ही घेर लिया और आरपीएफ वालों के साथ यह कहते हुए मारपीट की कि जब वह हर दिन एक निश्चित राशि का हफ्ता आईपीएफ को देता है तो उसे और उसके आदमियों को पकड़कर क्यों परेशान किया जाता है।

बहरहाल, उपरोक्त घटना के बाद आरपीएफ बैरक सोलापुर में आरपीएफ कर्मियों के बीच हो रही बातचीत को वहां उपस्थित रहे किसी आरपीएफ कर्मी ने ही रिकॉर्ड कर लिया। उनकी इस बातचीत को सुनकर इस बात की पूरी पुष्टि हो जाती है कि आईपीएफ/सोलापुर के मातहत क्या-क्या गुल खिल रहे हैं।

आरपीएफ कर्मियों ने यह भी बताया कि आईपीएफ/सोलापुर ने अब अपनी “मंथली वसूली” की नीति में बदलाव करके “डेली वसूली” की रणनीति अपनाई है। उधका कहना है कि जितने दिन धंधा, उतने दिन की लगान, बाकी बंद का कोई हिसाब-किताब नहीं।

https://youtu.be/ZgdQw30BpBU

यहां दिए गए उक्त वीडियो लिंक को तसल्ली से सुनकर इसके आधार पर आरपीएफ प्रशासन में ऊपर बैठे तमाम उच्च अधिकारी उचित कदम उठाते हुए आईपीएफ/सोलापुर की जिम्मेदारी तय करें। इसके साथ ही इसके माध्यम से आवश्यक आंतरिक विभागीय प्रशासनिक अनुशासन भी कायम किया जा सकता है।

सोलापुर रेलवे स्टेशन पर अवैध हाकरों के साथ बातचीत करते हुए “जीरो पुलिस” वाला रवि (पिंक शर्ट में)।

आईपीएफ/सोलापुर का ‘जीरो पुलिस” रवि (खाकी पैंट, पिंक टी-शर्ट और मिलेट्री कैप में) आरपीएफ कांस्टेबल एस. के. गुरव (फुल सफेद शर्ट में) के साथ सोलापुर स्टेशन प्लेटफार्म पर कदमताल करते हुए।

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