जब हम कोरोना से लड़ते हुए देश सेवा में लगे थे, तब सरकार हमारी पीठ पर खंजर घोंप रही थी -शिवगोपाल मिश्रा

यह समय चुनौतीपूर्ण है, इसलिए हमें कोरोना से डरकर नहीं, लड़कर यूनियन का काम करना होगा -महामंत्री

एनआरएमयू, लखनऊ मंडल की समीक्षा बैठक संपन्न

नई दिल्ली: नार्दर्न रेलवे मेंस यूनियन, लखनऊ मंडल की समीक्षा बैठक शनिवार, 30 मई को संपन्न हुई। बैठक में महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने कहा कि ये वक्त चुनौतीपूर्ण है, इसलिए हमें कोरोना से डरकर नहीं, लड़कर यूनियन का काम करना होगा। उन्होंने कहा कि ये सही है कि कोरोना के चलते चौतरफा दहशत का माहौल है। फिर ये जल्दी खत्म होने वाला भी नहीं है। ऐसे में हम सब घर तो नहीं बैठ सकते है। परंतु सावधानी के साथ अपना काम भी करना है और यूनियन की गतिविधियों को भी जारी रखना है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए लखनऊ मंडल की समीक्षा बैठक में महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने सभी मामलों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि लॉकडाउन के बावजूद रेलकर्मचारी पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन से जब पूरा देश ठप हो गया, लोग घरों में बैठ रह गए, तब देशवासियों की चिंता रेलकर्मियों ने की, क्योंकि अगर इस दहशत के माहौल में मालगाडियों और पार्सल ट्रेनों का संचालन न होता, तो कई राज्यों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो जाती।

उन्होंने कहा कि रेलकर्मचारियों ने मालगाड़ियों, पार्सल ट्रेनों का संचालन कर अनाज, फल, सब्जी, दूध की ही आपूर्ति को नहीं, बल्कि अन्य जरूरी सामानों की भी किसी राज्य में कमी नहीं होने दी। जब राज्य सरकारें मजदूरों को उनके घर पहुंचाने में नाकाम साबित हुईं, तो फिर किसी तरह की चिंता किए बगैर हजारों ट्रेनों के जरिए 50 लाख से ज्यादा मजदूरों को उनके घर रेलकर्मियों ने ही पहुंचाया।

महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जब हम कोरोना से लड़ते हुए देश की सेवा कर रहे थे, तब हमारी सरकार हमारी पीठ थपथपाने के बजाय हमारी पीठ पर हमला कर रही थी। उस दौरान सरकार श्रमिक विरोधी काम करते हुए कर्मचारियों को मिल रही सुविधाओं में कटौती करने की साजिश में जुट गई। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो रेलकर्मचारियों ने बिना मांगे पीएम केयर फंड में 151 करोड़ रुपये का योगदान दिया, तो दूसरी तरफ सरकार ने हमारी पीठ पर खंजर घोंपा। वह हमसे कहते तो हम कुछ और भी मदद करते, लेकिन ऐसा न करके सरकार ने डीए फ्रीज करने का एकतरफा फैसला सुना दिया।

उन्होंने कहा कि एआईआरएफ और एनआरएमयू का इतिहास है कि हमने कभी किसी भी सरकार की मनमानी नहीं चलने दी। हमने कर्मचारी हितों के साथ कभी समझौता नहीं किया। इसलिए इस मामले पर फेडरेशन ने अपना रुख साफ कर दिया कि सरकार की ये चालबाजी हमें मंजूर नहीं है।

महामंत्री ने कहा कि फिलहाल तो डीए को फ्रीज करने का मामला हो, या  फिर पदों को खत्म करने की बात हो, पुरानी पेंशन की बहाली समेत अन्य दूसरे मुद्दों पर एनआरएमयू और फेडरेशन लगातार सरकार के संपर्क में रहकर अपना विरोध जताती रही है। जब देखा गया कि इस सबके बाद भी सरकार का रवैया कर्मचारियों के खिलाफ ही है, तो एआईआरएफ की स्टैंडिग कमेटी की बैठक में संघर्ष का निर्णय लिया गया।

उन्होंने कहा कि इसी क्रम में एक से छह जून तक तो हम राष्ट्रीय स्तर पर जनजागरण करेंगे और आठ जून को काला दिवस मनाने के लिए काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। इसके बाद भी अगर हमारी बात नहीं सुनी जाती है, तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने दोहराया कि अगर सरकार को बैकफुट पर लाना है, तो हमें निचले स्तर पर गर्मी पैदा करनी होगी। इसके बिना काम चलने वाला नहीं है। महामंत्री ने कहा कि इन हालात में हमें कोरोना से डरकर घर नहीं बैठ जाना है, बल्कि कोरोना से भी लड़कर सरकार का भी मुकाबला करने को तैयार रहना है।

महामंत्री ने संगठन की समीक्षा बैठक में लखनऊ मंडल की तारीफ की और कहा कि मेंबरशिप का मामला हो या फिर केंद्र से निर्धारित किए गए कार्यक्रम हों, हर मामले में लखनऊ मंडल का प्रदर्शन बेहतर रहा है। उन्होंने युवाओं को संगठित करने पर जोर दिया। संगठन में दो शाखाओं के चुनाव भी होने हैं, लिहाजा सभी शाखा सचिव अपना  इलेक्टोरल तैयार कर केंद्र को भेज दें, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

केंद्रीय अध्यक्ष एस. के. त्यागी ने लखनऊ मंडल के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अभी तो देख रहा हूं कि कोरोना का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, इसलिए सावधानी  बरतनी होगी, क्योंकि  इसकी चपेट में कुछ रेलकर्मचारी भी आ गए हैं, लिहाजा रेल भवन ही नहीं बड़ौदा हाउस को भी बंद करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि रेलकर्मियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। सरकार ने हमें कोरोना वारियर्स तो माना, लेकिन दूसरे विभागों की तरह हमें किसी तरह की सहूलियत नहीं दी। इससे रेल कर्मचारियों में रोष होना स्वाभाविक है। आने वाला समय काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए हमें काम के साथ अपनी सुरक्षा का भी पूरा ख्याल खुद ही रखना होगा।

केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीना सिंह ने कहा कि लखनऊ मंडल विपरीत हालात में भी अच्छी मेंबरशिप की है। इसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है। उन्होंने कहा कि मंडल  में महिला संयोजक के रिटायर होने के बाद ये पद रिक्त है, इस पर अगर जल्दी नियुक्ति हो जाए तो महिलाओं को संगठित करने में और सुविधा होगी।

नेशनल यूथ कन्वीनर प्रीति सिंह ने मंडल में युवाओं के बीच हुए कार्यों पर चर्चा की। इस कांफ्रेंस को केंद्रीय उपाध्यक्ष एस. यू. शाह, कोषाध्यक्ष जोनल यूथ कन्वीनर मनोज श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया।

मंडल अध्यक्ष राजेश सिंह ने कहा कि ये सही है कि कोरोना की वजह से हमारे संगठन के कार्यों पर थोड़ा असर पड़ा, लेकिन जब हम सब ने देखा कि महामंत्री खुद इतनी देर तक काम कर रहे हैं, रोज आफिस आ रहे हैं, तो अपने लोगों ने भी संगठन के काम में कोई कोताही नहीं की और अपना प्रदर्शन बेहतर किया। उन्होंने कहा कि हमारी तैयारी है और जल्दी शाखास्तर पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।

मंडल मंत्री आर. के. पांडेय ने संगठन के कार्यों की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान हमारे साथियों ने तमाम सामाजिक कार्यों में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। हम लोगों ने भूखे मजदूरों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में खाने के पैकेट का वितरण किया, लगेज पोर्टरों की मुश्किल घड़ी में मदद की गई। ऐप बेस्ट ट्रांसपोर्टर्स को भी राहत सामग्री का वितरण किया गया।

उन्होंने कहा कि इस दौरान कुछ रेलकर्मियों की भी कुछ समस्याएं रहीं, उनका भी समाधान किया गया। कई मसलों में केंद्रीय नेतृत्व से भी काफी मदद मिली, जिससे हम ये सब कर पाने में कामयाब हुए। उन्होंने आश्वस्त किया एक से छह जून के बीच जनजागरण अभियान के तहत हमारी तैयारी पूरी है और हम बेहतर प्रदर्शन करेंगे। इसके  अलावा आठ जून को हर कर्मचारी काली पट्टी जरूर बांधेगा, इसकी तैयारी की जा चुकी है।

कांफ्रेंस में सेवानिवृत्त हो रहे सहायक मंडलमंत्री घनश्याम पांडेय के कार्यों की भी सराहना की गई। इस दौरान मीटिंग को मुख्य रूप से राकेश कनौजिया, सुधीर तिवारी, एस. के. सिंह, रंजन सिह, संजय श्रीवास्तव, सुनिल सिंह, धीरेन्द्र सिंह, बिंदा प्रसाद, राकेश कुमार पांडेय, मदन गोपाल मिश्रा, राजकुमार, हीरा लाल और अजय श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया।

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बिना दिखावे के मानव सेवा में लगा एक रेलकर्मी – RailSamachar

मनुष्यता की मिसाल कायम कर रहे हैं सुरेंद्र शर्मा और उनके सहयोगी

समस्त ब्राह्मण सेवा समाज कल्याण (सामाजिक संस्था) के सचिव श्री सुरेंद्र शर्मा, इस लॉकडाउन पीरियड में, जब मनुष्य तो क्या, पशु-पक्षी भी भूख-प्यास से इधर-उधर भटक रहे हैं, तब बिना किसी दिखावे के लगातार मानव सेवा में लगे हुए हैं।

श्री शर्मा मध्य रेलवे, मुंबई मंडल में मुख्य लोको निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। स्वयं की दो बार एंजियोप्लास्टी हो जाने के बावजूद भी वह कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन की इस भीषण आपदा में असहाय और जरूरतमंद लोगों की दुर्दशा के बारे में सोचकर स्वयं को घर में रोक न सके।

श्री शर्मा के अनुसार उनके पास दो विकल्प थे, पहला यह कि इस क्षेत्र में कार्यरत किसी संस्था को अपनी ओर से ₹1100 या ₹2100 देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाए, या फिर मेरे जैसे अनेकों लोग आत्मिक रूप से गरीबों का दुख महसूस कर रहे होंगे, परंतु अकेला चना कैसे भाड़ फोड़ सकता है, यह सोचकर और अपने दिल को तसल्ली देकर चुपचाप बैठे रहा जाए।

तथापि दोनों विकल्पों को छोड़कर श्री शर्मा ने व्हाट्सएप पर एक छोटी सी अपील बनाकर डाली। उसका यह असर हुआ कि ब्राह्मण वर्ग के साथ-साथ उनके सहकर्मियों ने भी इंसानियत में सहयोग का हाथ बढ़ाया और उन्हें इसका पर्याप्त रेस्पॉन्स मिला। इस तरह 44 लोगों ने अलग-अलग तरह से सहयोग दिया। किसी ने खाद्य सामग्री दी, तो किसी ने पैसा दिया।

अब प्रश्न यह था कि इसका वितरण कैसे किया जाए। यदि पकाकर बांटते हैं, तो बनाने वाला, उससे संबंधित सामग्री, अन्य साधन, जगह कहां निश्चित हो, आदि की कई समस्याएं थीं। लॉकडाउन पीरियड में सोशल डिस्टेंस का पालन करना भी जरूरी है। मैनपावर कैसे जुटाएं! ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था कैसे होगी, आदि आदि अनेकों विचार कौंध रहे थे।

चूंकि सुरेंद्र शर्मा अधिक से अधिक पैसों का सामान जुटाकर जरूरतमंदों तक पहुंचाने का विचार लेकर चल रहे थे। अतः मजदूरी, ट्रांसपोर्टेशन आदि में अपने थोड़े से फंड का बड़ा हिस्सा गंवाना नहीं चाहते थे। ऐसी स्थिति में सूझबूझ के साथ सही व्यक्ति तक सहायता पहुंचे, इस विचार से उन्हें सबसे पारदर्शी और सही जगह कल्याण गुरुद्वारा ही लगी।

गुरुद्वारे के माध्यम से ही कल्याण डोंबिवली महानगर पालिका द्वारा भी हर दिन दोपहर और शाम को करीब 1200 खाने के पैकेट जरूरतमंदों तक पहुंचाए जा रहे हैं। गुरुद्वारे से ही सीधे तौर पर जाने कितने लोग खाना ले जा रहे हैं। अनेकों सेवादार रात-दिन सेवा में लगे हैं। पेट भर स्वादिष्ट खाना हर जरूरतमंद तक खुशी-खुशी और उत्साहपूर्वक पहुंचाने की तमन्ना लेकर वहां एक पूरी टीम लगातार काम कर रही है।

ऐसे में सुरेंद्र शर्मा ने भी कल्याण गुरुद्वारा का चयन कर वहीं अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया। साथीगण राशन और पैसे से मदद कर रहे थे। इस तरह से शर्मा द्वारा 27 मार्च, 1 अप्रैल, 9 अप्रैल, 12 अप्रैल, 18 अप्रैल, और 20 अप्रैल 2020 को, इस तरह धीरे-धीरे 1835 किलो आटा, दाल, चावल, चीनी, गेहूं, तेल, मसाले आदि का सहर्ष सहयोग दिया गया।

इसके साथ ही ठेठ आदिवासी गांव, फलेगांव आदिवासी पाड़ा तथा रूंदा गांव तथा अनाथ आश्रम में जरूरतमंदों का सहयोग कर आत्मिक संतुष्टि हासिल की। इसके अलावा उन्होंने लीला पुरुषोत्तम गौशाला कल्याण की गायों के लिए चारे की व्यवस्था भी करवाई।

कल्याण गुरुद्वारे के सेवादार सरदार श्री मनिंदर सिंह जी, सरदार श्री राजू सिंह जी और श्री गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा सुरेंद्र शर्मा को हरसंभव सहयोग प्राप्त हुआ तथा श्री गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा उनका पर्याप्त उत्साहवर्धन भी किया गया।

श्री शर्मा की इस सद्भावना यात्रा में उनके सभी सम्मानित सहयोगी, उनके परिवारिक सदस्य, कान्यकुब्ज मंडल मुंबई के ट्रस्टी एवं समाजसेवी श्री करुणा शंकर शुक्ला, समाजसेवी श्री राधेश्याम अवस्थी आदि सहायक सिद्ध हुए।

सुरेंद्र शर्मा ने बार-बार मानव सेवा की इच्छा रखते हुए अपने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है.








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‘समस्त ब्राह्मण सेवा समाज, कल्याण’ द्वारा साड़ी भेंट कर किया गया समाज की महिलाओं का सम्मान

समाजसेवी डॉ ब्रजेंद्र सारस्वत, करुणाशंकर शुक्ल और विद्या प्रसारक विजय उपाध्याय की रही गरिमापूर्ण उपस्थित

कल्याण : समस्त ब्राह्मण सेवा समाज, कल्याण के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध समाजसेवी और जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ ब्रजेंद्र सारस्वत (एमडी/मेडिसिन, हार्ट, लंग्स, अस्थमा विशेषज्ञ) के सहयोग से गुरुकृपा हॉस्पिटल प्रांगण, बिड़ला कालेज रोड, कल्याण में रविवार, 12 जनवरी को मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में  एक समाजोपयोगी कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ ब्रजेंद्र सारस्वत के हाथों समाज की 30 बुजुर्ग महिलाओं का साड़ी भेंट करके उनका सम्मान किया गया।

इस समाजोपयोगी कार्य में कान्यकुब्ज मंडल मुंबई के ट्रस्टी और समाजसेवी करुणाशंकर शुक्ल, सुप्रसिद्ध आयडियल शिक्षा संस्था के प्रमुख, समाजसेवी एवं विद्या प्रसारक विजय उपाध्याय, समस्त ब्राह्मण सेवा समाज के सचिव सुरेंद्र शर्मा, पत्रकार गंगाधर तिवारी, रेल समाचार के संपादक सुरेश त्रिपाठी, विनोद कुमार शर्मा इत्यादि ने डॉ सारस्वत का सहयोग किया।

करीब दस साल पहले रेलवे से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर समाज की सेवा में लग गए डॉ सारस्वत ने इस मौके पर समस्त ब्राह्मण सेवा समाज के ऐसे समाजोपयोगी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज के उत्थान के लिए समाज के सक्षम लोगों को आगे आना चाहिए। उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं का सम्मान करते हुए कहा कि समाज में महिलाओं की उन्नति से ही समाज का व्यापक भला हो सकता है। डॉ सारस्वत ने कहा कि हमें महिलाओं को बढ़ावा देने और उनकी उन्नति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था के सचिव सुरेंद्र शर्मा ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए उनसे अनुरोध किया कि वे सब भरे-पूरे परिवार का हिस्सा हैं, ऐसे में वह अपने बच्चों और नाती-पोतों को वैदिक संस्कार प्रदान करें, इससे हमारे बच्चों की बौध्दिक उन्नति तो होगी ही, बल्कि इसके साथ ही इन सामाजिक एवं पारिवारिक संस्कारों के चलते एक स्वस्थ समाज की स्थापना करने में भी उनका यह प्रयास बहुत कारगर साबित होगा।

कान्यकुब्ज मंडल, मुंबई के वरिष्ठ ट्रस्टी एवं समाजसेवी करुणाशंकर शुक्ल ने इस अवसर पर महिलाओं और समाज का मार्गदर्शन किया और डॉ सारस्वत द्वारा कही गई बातों का समर्थन किया।

आयडियल शिक्षा संस्था के प्रमुख एवं समाजसेवी विजय उपाध्याय ने अपनी अति-व्यस्त दिनचर्या से थोड़ा सा वक्त निकालकर और इस महत्वपूर्ण मौके पर उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। उन्होंने संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि समाज हित में और समाज के काम के लिए वह हमेशा खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मौकों पर न सिर्फ एक-दूसरे से मिलना होता है, बल्कि यह भी पता चलता है कि हम समाज के लिए और क्या-क्या कर सकते हैं।

उन्होंने अपने स्वभाव और प्रोफेशन के अनुरूप उपस्थित सभी सम्मानित महिलाओं से यही निवेदन किया कि वे अपने बच्चों की उचित देखभाल और शिक्षा का अवश्य ध्यान रखें। उन्होंने महिलाओं से खासतौर पर बच्चियों की शिक्षा और स्वावलंबन पर विशेष ध्यान देने का अनुरोध किया और पुनः इस बात को दोहराया कि वे समाज के हित में हमेशा तत्पर हैं।

कान्यकुब्ज मंडल, कल्याण की सक्रिय कर्ताधर्ता और समाजसेवी श्रीमती प्रभा तिवारी ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें ब्राह्मण-ब्राह्मण में भेद को मिटाना चाहिए और पीछे का सब कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़कर आपस में बिना किसी भेदभाव के हमें अपने संबंधों को मजबूत करना चाहिए, तभी एक सुदृढ़ समाज का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि संस्कार और सेवा देना ही हमारी संस्कृति रही है, इसे हमें आगे बढ़ाना है। उनके इस सुझाव का सभी उपस्थित लोगों ने स्वागत किया। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार गंगाधर तिवारी ने भी महिलाओं का मार्गदर्शन किया।

इस मौके पर मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में सभी महिलाओं को हल्दी-कुमकुम लगाकर उचित सत्कार किया गया और तिल-गुड़ देकर उनका पूरा साल मीठा-मीठा (अच्छा-अच्छा) जाने और सपरिवार सुखी-संपन्न रहने की कामना की गई।

इस समाजोपयोगी कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीमती राजलक्ष्मी शर्मा, श्रीमती प्रभा तिवारी, श्रीमती मालती अवस्थी, श्रीमती कांति दुबे, श्रीमती अनिता दुबे, श्रीमती प्रभा शर्मा, श्रीमती ऊषा पांडेय एवं श्रीमती लक्ष्मी शुक्ला आदि महिलाओं सहित सुरेश त्रिपाठी, विनोद कुमार शर्मा, घनश्याम आर. पांडेय, एच. एस. शर्मा, हरिशंकर अवस्थी और सुरेंद्र शर्मा (बबलू) इत्यादि सहयोगियों का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर सुरेंद्र (बबलू) शर्मा के सौजन्य से सभी उपस्थितों को अल्पाहार के बाद ससम्मान विदा किया गया। 








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