रेलमंत्री को किस हैसियत से मिलने पहुंचा था डपोरशंख?

एएसएम से बना अधिकारी और पिछले कुछ सालों से कर रहा है सत्ता की दलाली

फेडरेशन और डपोरशंख को चला रहे हैं चंदा चाटुकार!”

पिछले हफ्ते जब कैडर मर्जर के मामले में रेलवे की सिविल सेवाओं – ट्रैफिक, कार्मिक एवं एकाउंट्स – के कुछ अधिकारी पूर्व अनुमति लेकर रेलमंत्री को मिलने गए थे, तब उनके साथ ही एक ‘डपोरशंख’ को भी रेलमंत्री से मिलने की अनुमति दी गई थी और वह भी इन अफसरों के साथ ही रेलमंत्री को मिलने पहुंचा था। बाद में इस पर तमाम अफसरों ने भारी ऐतराज जताया है।

रेलवे बोर्ड के हमारे विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जब उपरोक्त तीनों सेवाओं के अधिकारी अपनी बात रेलमंत्री के सामने रखकर उन्हें अपने भविष्य और समस्याओं से अवगत करा रहे थे, तभी बीच में कूदते हुए इस डपोरशंख उर्फ सत्ता के दलाल ने रेलमंत्री से कहा कि ‘वह बेधड़क कैडर मर्जर करें, उसके 3700 रेल अधिकारी उनके साथ हैं।’ बताते हैं कि इस संदर्भ में उसने रेलमंत्री को वह पत्र भी सौंपा है जिसमें कैडर मर्जिंग का ‘सशर्त समर्थन’ यह कहते हुए किया गया है कि ‘रेल प्रशासन ‘डपोरशंख ग्रुप’ के अफसरों के हितों का ध्यान रखे।’ उक्त पत्र की प्रति ‘कानाफूसी.कॉम’ के पास सुरक्षित है।

“It is strange that organization has not discussed such a very very important issue with its officers except some yes man”, said a branch officer of Bhusawal Division, Central Railway from ‘Daporshankh Group’

सूत्रों का कहना है कि सहायक स्टेशन मास्टर (एएसएम) से अधिकारी बनकर रेलवे से रिटायर हुए इस डपोरशंख के ऐसा कहने पर इस मुलाकात और बातचीत का पूरा परिदृश्य ही बदल गया। इसके परिणामस्वरूप रेलमंत्री का सुर भी बदल गया और उन्होंने मिलने आए अधिकारियों के साथ एक मंजे हुए पॉलिटीशियन की तरह व्यवहार किया और उन्हें यह कहकर रुखसत कर दिया कि ‘अब तो कैबिनेट का निर्णय हो चुका है, परंतु उनके सभी हितों का ध्यान रखा जाएगा।’ सूत्रों का कहना है कि रेलमंत्री के इस आश्वासन के बाद अफसरों ने बातचीत को वहीं खत्म कर दिया और समझदारी दिखाते हुए मंत्री के चेंबर से निकल गए।

यहां एक बात खासतौर पर उल्लेखनीय है कि रेलमंत्री के साथ हुई अधिकारियों की इस मुलाकात के बारे में सोशल मीडिया में यह खबर चलाई गई कि रेलमंत्री ने मिलने आए अधिकारियों को डांट-डपटकर भगा दिया और हड़काकर यह भी कहा कि यदि वह लोग ज्यादा तड़का-भड़की दिखाएंगे तो उनके विभाग ही रेलवे से हटाए जा सकते हैं। इस पर सूत्रों का कहना है कि यह भ्रामक खबर ‘डपोरशंख ग्रुप’ अथवा अधिकारियों के बड़े धड़े द्वारा चलाई गई थी। इसके पीछे रेलमंत्री और रेल प्रशासन को उनके खिलाफ भड़काने की मंशा निहित थी। इसके अलावा रेलमंत्री को मिलने गए अधिकारियों ने भी वहां ऐसी कोई बात होने से इंकार किया है।

चंदा चाटुकार, फेडरेशन और डपोरशंख को चला रहे हैं

तथापि, रेलवे बोर्ड में यह चर्चा का विषय बन गया है कि ये डपोरशंख, अधिकारियों का ठेकेदार कब से बन गया? अधिकारियों का कहना है कि सत्ता के गलियारों में संदिग्ध विचरण करने वाले इस डपोरशंख को किस हैसियत से रेलमंत्री को मिलने की अनुमति प्रदान की गई? सूत्रों का कहना है कि “पूर्व सीआरबी के समय सत्ता की धौंस में इसने जोड़-तोड़ करके अपने ग्रुप के कथित अफसरों का जो थोड़ा-बहुत लाभ करवाया था, वह सब अब कैडर मर्जिंग के चलते खत्म हो जाने वाला है। इससे आने वाले कुछेक वर्षों बाद इन कथित अफसरों का प्रमोशन और कैरियर प्रोग्रेशन में भारी नुकसान होना निश्चित है। इसी तथ्य को भांपते हुए और अपनी कथित ठेकेदारी बनाए रखने के लिए यह डपोरशंख ‘ऊपर’ के हवाले से रेलमंत्री को मुलाकात अथवा डील करने पहुंचा था।”

Where is agenda of AGM? and where you people have discussed in Zone that what stand you are suppose to take? Mind it, you are our representative not alone individuals. You suppose to take posture what majority says in Zone !

Regards

(Above msg posted by Mr XYZ from Central Railway on discussion on the issue of cadre merger at AGM of Federation. “Chanda chatukar, Officer Federation aur Daporshankh ko chala rahe hain”, he also said.)

कुछ अधिकारियों का कहना था कि रेलवे से रिटायरमेंट के बाद सत्ता की दलाली और एक खास केंद्रीय मंत्री के नाम पर रेलवे बोर्ड सहित जोनल अधिकारियों पर भी धौंस जमाने वाले इस डपोरशंख ने रेलमंत्री के नाम का भी खूब इस्तेमाल किया है। उनका कहना था कि ‘अंदर कुछ बात होती है, पर बाहर आकर यह उस बातचीत को चाशनी में लपेटकर प्रस्तुत करता है, जिससे कई बोर्ड अधिकारी इसके झांसे में आ जाते हैं। जबकि कोई भी बोर्ड अधिकारी इसे पसंद नहीं करता है और जिन अधिकारियों की ठेकेदारी इसने ले रखी है, उनमें से भी अधिकांश अधिकारी इसे सख्त नापसंद करते हैं।’

बहरहाल, अब देखना यह है कि भिन्न कैडर अधिकारियों में भारी असंतोष के चलते अब रेलमंत्री कैडर मर्जर पर क्या रुख अपनाते हैं? सूत्रों के अनुसार इस मामले में प्रधानमंत्री सहित पूरी कैबिनेट को अंधेरे में रखा गया और उन्हें इस तथाकथित मर्जर की संपूर्ण वस्तुस्थिति से अवगत नहीं कराया गया है। उनका यह भी कहना था कि इस मर्जर के पीछे अवश्य कोई न कोई बड़ी साजिश हो सकती है, जिसके कामयाब होने पर रेलवे का न सिर्फ पूरा बंटाधार होना तय है, बल्कि इसके पूरी तरह से निजीकरण के साथ ही बोर्ड में तथाकथित नामांकित निदेशकों, यानि डपोरशंख जैसे राजनीतिक दलालों और आईएएस का काबिज होना निश्चित है।

सौजन्य से : kanafossi.com








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