The People Of Tibet Are Making Their Social Media Platforms Midst The Restrictions Of China – चीन की हिटलरशाही से बेखौफ अपना सोशल मीडिया एप बना रहे हैं तिब्बत के लोग

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  


टेक डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 04 Dec 2020 04:59 PM IST

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें

तिब्बत में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की दादागारी जगजाहिर है। आए दिन तिब्बत के लोगों को हर एक मामले में दबाने की कोशिश करता है। कभी सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने को लेकर चीन को आपत्ति होती है तो कभी उसे लोगों के राय पसंद नहीं आते, लेकिन कहते हैं ना कि दुनिया की किसी भी चीज का अंत तय है, बस इंतजार रहता है तो समय का। तिब्बत के लोगों पर चीन के अत्याचार का अंत शुरू हो गया है। खबर है कि तिब्बत के लोग खुद का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बना रहे हैं। इसका दावा ताइवान टाइम्स की एक रिपोर्ट में किया गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी तिब्बत में इंटरनेट पर सेंसरशिप लगाती है। तिब्बत समेत कई इलाकों में चीनी सरकार लोगों को पहचानने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन और ट्रैकिंग के लिए जीपीएस का इस्तेमाल करती है। चीन का यह रवैया पूर्वी तुर्कीस्तान, दक्षिणी मंगोलिया जैसे इलाकों में भी है। इन इलाके के लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट पर बारिकी से नजर रखा जाता है और सरकार विरोधी कंटेंट को फिल्टर किया जाता है।

लंबे समय से चीन का जुल्म सहने के बाद तिब्बत के लोगों ने अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने का फैसला लिया है ताकि वे अपनी बात, अपनी राय को दुनिया के सामने रख सकें। इसका फायदा यह होगा कि इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चीन फिल्टर नहीं लगा सकेगा। बता दें कि पिछले कुछ दिनों तिब्बत के अंदर 150 से अधिक सोशल मीडिया एक्टिविट्स की बातें खूब शेयर हुईं हैं।

तिब्बतियों की आवाज दबाने के लिए चीनी सरकार हर हथकंडे अपना रही है। इस साल चीनी सरकार ने अफवाह फैलाने के आरोप में लहासा में 10 स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया। इसी साल जुलाई में तिब्बती गीतकार खादो सेतन और गायक सेगाओ को क्रमशः सात और तीन साल की सजा सुनाई गई। सीपीसी ने एक लड़की को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर गाना शेयर किया था।

तिब्बत में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की दादागारी जगजाहिर है। आए दिन तिब्बत के लोगों को हर एक मामले में दबाने की कोशिश करता है। कभी सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने को लेकर चीन को आपत्ति होती है तो कभी उसे लोगों के राय पसंद नहीं आते, लेकिन कहते हैं ना कि दुनिया की किसी भी चीज का अंत तय है, बस इंतजार रहता है तो समय का। तिब्बत के लोगों पर चीन के अत्याचार का अंत शुरू हो गया है। खबर है कि तिब्बत के लोग खुद का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बना रहे हैं। इसका दावा ताइवान टाइम्स की एक रिपोर्ट में किया गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी तिब्बत में इंटरनेट पर सेंसरशिप लगाती है। तिब्बत समेत कई इलाकों में चीनी सरकार लोगों को पहचानने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन और ट्रैकिंग के लिए जीपीएस का इस्तेमाल करती है। चीन का यह रवैया पूर्वी तुर्कीस्तान, दक्षिणी मंगोलिया जैसे इलाकों में भी है। इन इलाके के लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट पर बारिकी से नजर रखा जाता है और सरकार विरोधी कंटेंट को फिल्टर किया जाता है।

लंबे समय से चीन का जुल्म सहने के बाद तिब्बत के लोगों ने अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाने का फैसला लिया है ताकि वे अपनी बात, अपनी राय को दुनिया के सामने रख सकें। इसका फायदा यह होगा कि इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चीन फिल्टर नहीं लगा सकेगा। बता दें कि पिछले कुछ दिनों तिब्बत के अंदर 150 से अधिक सोशल मीडिया एक्टिविट्स की बातें खूब शेयर हुईं हैं।

तिब्बतियों की आवाज दबाने के लिए चीनी सरकार हर हथकंडे अपना रही है। इस साल चीनी सरकार ने अफवाह फैलाने के आरोप में लहासा में 10 स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया। इसी साल जुलाई में तिब्बती गीतकार खादो सेतन और गायक सेगाओ को क्रमशः सात और तीन साल की सजा सुनाई गई। सीपीसी ने एक लड़की को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार कर लिया, क्योंकि उसने सोशल मीडिया पर गाना शेयर किया था।



Source link

Leave a Comment

Translate »