The Tension On The Lac With China In East Ladakh Is The Result Of The Removal Of Article 370, Says Farooq Abdullah – एलएसी पर तनाव अनुच्छेद 370 हटाने का नतीजा, चीन की मदद से इसे वापस लाएंगे

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

Updated Mon, 12 Oct 2020 12:06 AM IST

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव अनुच्छेद 370 हटाने का नतीजा है।

चीन शुरू से इसका विरोध करता रहा है और सीमा पर उसका आक्रामक रुख मोदी सरकार के इस गलत कदम के कारण है। अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि चीन की मदद से अनुच्छेद 370 और 35ए को वापस लेकर आएंगे। 

अब्दुल्ला ने एक कार्यक्रम में कहा, मैंने कभी चीनी राष्ट्रपति को निमंत्रण नहीं दिया, ऐसा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। उन्होंने सिर्फ न्योता ही नहीं भेजा, बल्कि यहां झूले पर भी बैठाया। उन्हें चेन्नई ले गए और उनके साथ खाना खाया। लेकिन जो 5 अगस्त 2019 को सरकार ने किया, वह किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हम नहीं करते, चीन भी नहीं कर रहा।

अब्दुल्ला ने कहा, घाटी के लोगों की हालत के बारे में हमें संसद में बोलने तक नहीं दिया जाता। यहां के लोगों को क्या सुख है? देश जहां 4जी इस्तेमाल कर रहा, 5जी आने वाला है फिर भी वहां के लोग 2जी के इस्तेमाल को मजबूर हैं। यह कैसा बराबरी का दर्जा है? ऐसे कैसे युवा आगे बढ़ेंगे? इन सब के बीच मैं उम्मीद करता हूं कि चीन के सहयोग से घाटी में वापस अनुच्छेद 370 बहाल होगा, तभी यहां के लोगों की भलाई है।

इसके अलावा अब्दुल्ला ने लोकसभा में कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए। जिस प्रकार चीन से बातचीत की कोशिश की जा रहा है उसी तरह उलझे हुए मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ चर्चा होनी चाहिए।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम और नेशनल कांफ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव अनुच्छेद 370 हटाने का नतीजा है।

चीन शुरू से इसका विरोध करता रहा है और सीमा पर उसका आक्रामक रुख मोदी सरकार के इस गलत कदम के कारण है। अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि चीन की मदद से अनुच्छेद 370 और 35ए को वापस लेकर आएंगे। 

अब्दुल्ला ने एक कार्यक्रम में कहा, मैंने कभी चीनी राष्ट्रपति को निमंत्रण नहीं दिया, ऐसा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। उन्होंने सिर्फ न्योता ही नहीं भेजा, बल्कि यहां झूले पर भी बैठाया। उन्हें चेन्नई ले गए और उनके साथ खाना खाया। लेकिन जो 5 अगस्त 2019 को सरकार ने किया, वह किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हम नहीं करते, चीन भी नहीं कर रहा।

अब्दुल्ला ने कहा, घाटी के लोगों की हालत के बारे में हमें संसद में बोलने तक नहीं दिया जाता। यहां के लोगों को क्या सुख है? देश जहां 4जी इस्तेमाल कर रहा, 5जी आने वाला है फिर भी वहां के लोग 2जी के इस्तेमाल को मजबूर हैं। यह कैसा बराबरी का दर्जा है? ऐसे कैसे युवा आगे बढ़ेंगे? इन सब के बीच मैं उम्मीद करता हूं कि चीन के सहयोग से घाटी में वापस अनुच्छेद 370 बहाल होगा, तभी यहां के लोगों की भलाई है।

इसके अलावा अब्दुल्ला ने लोकसभा में कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए। जिस प्रकार चीन से बातचीत की कोशिश की जा रहा है उसी तरह उलझे हुए मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ चर्चा होनी चाहिए।



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