There is more water on the surface of the moon than we think, but still water’s source is unknown | चांद की सतह पर उम्मीद से ज्‍यादा पानी, लेकिन अब भी अनसुलझे हैं ये सवाल

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नई दिल्‍ली: यह बात तो सब जानते हैं कि चंद्रमा की सतह (Lunar Surface) पर पानी है लेकिन अब पता चला है कि चंद्रमा की सतह पर जितना पानी है, वह दरअसल हमारी सोच से ज्‍यादा है. यह पानी बर्फ के उन हिस्‍सों में है, जो हमेशा छाया में रहते हैं. 11 साल पहले हुए शोध में संकेत मिले थे कि चंद्रमा पर पानी (Water) कम मात्रा में है लेकिन वैज्ञानिकों की एक टीम ने अब चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं की स्‍पष्‍ट पहचान की है. वहीं एक और शोध के मुताबिक चंद्रमा की वो सतह जिस पर हमेशा छाया रहती है उसके लगभग 15,000 वर्ग मील के दायरे में संभवतः बर्फ के रूप में पानी मौजूद है. 

बेहद अहम है पानी की मिलना 
पानी एक अनमोल संसाधन है और भविष्‍य में चंद्रमा पर मानव की उपस्थिति के लिए यह बेहद जरूरी है. अंतरिक्ष यात्रियों और रोबोट मिशनों के लिए चंद्रमा की सतह पर पानी का होना बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जो पीने या ईंधन के एक हिस्‍से के रूप में इसका इस्‍तेमाल कर सकते हैं. 

मैरीलैंड में नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर की टीम ने चंद्रमा की सतह पर आणविक पानी का पता लगाया है. ये अणु प्राकृतिक चश्मे के भीतर या चांद की सतह के बीच कहीं फंसे हो सकते हैं.

अणुओं के रूप में है पानी 
सतह पर पानी के बचे रहने के लिए एकमात्र तरीका यही है कि यह चंद्रमा की उस सतह पर हो जहां सूरज की रोशनी पड़ती है. पहले अध्‍ययन में कहा गया है कि पानी खनिज के दानों के भीतर है. यह जानने के लिए शोधकर्ताओं ने SOFIA एयरबोर्न ऑर्ब्‍जवेटरी के एक बोइंग 747SP विमान से भेजे गए टेलीस्कोप के डेटा का उपयोग किया. 

शोधकर्ता होन्‍नीबेल ने कहा, ‘बहुत से लोग सोचते हैं कि मैंने जो पता लगाया है वह पानी की बर्फ है. दरअसल, ऐसा नहीं है, यह सिर्फ पानी के अणु हैं, जो इतना फैल चुके हैं कि वे तरल पानी बनाने के लिए एक-दूसरे के संपर्क में नहीं आ सकते हैं.’ 

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चंद्रमा की अंधेरी सतह पर भी पानी
नेचर एस्ट्रोनॉमी नाम की मैगजीन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रमा की अंधेरी सतह का तापमान करीब 260 डिग्री फ़ारेनहाइट ( माइनस 163 डिग्री सेल्सियस) से कम है. इतनी ठंड से यहां जमा पानी कई अरब वर्षों तक रह सकता है. नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter spacecraft के डेटा का उपयोग कर कोलोराडो विश्वविद्यालय के प्‍लेनेटरी साइंटिस्‍ट पॉल हेने (Paul Hayne) के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने पाया कि इस सतह पर कई अरब छोटी-छोटी छाया हो सकती हैं जो एक छोटे सिक्के से बड़ी नहीं होंगी. इनमें अधिकांश ध्रुवीय क्षेत्रों में स्थित हैं.

हेने ने कहा, ‘हमारे शोध से पता चलता है कि चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में पानी हमारी सोच से कहीं ज्‍यादा फैला हो सकता है. इससे इसका उपयोग करना, निकालना और विश्‍लेषण करना आसान होगा.’ 

लेकिन पता नहीं है पानी का स्‍त्रोत
होन्‍नीबेल कहते हैं, ‘पानी केवल ध्रुवीय क्षेत्र में नहीं है बल्कि उससे कहीं ज्‍यादा बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है.’ लेकिन एक रहस्य अभी भी अनसुलझा है कि चंद्रमा पर पानी का स्रोत क्‍या है. हेने ने कहा, ‘चांद पर पानी की उत्पत्ति का कारण ऐसा बड़ा सवाल है, जिसका जबाव हम शोध के जरिए ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. वर्तमान में इसके लिए प्रमुख दावेदार धूमकेतु, क्षुद्रग्रह या ग्रह के छोटे धूल कण, सौर वायु और चंद्रमा के ज्वालामुखी विस्फोट हैं.’ 

पृथ्वी में विशाल खारे महासागर, ताजे पानी की बड़ी झीलें और बर्फ के विशाल पहाड़ हैं. हेने कहते हैं, ‘हमारे ग्रह के सबसे करीबी साथी के रूप में चंद्रमा पर पानी की उत्पत्ति को समझना, पृथ्वी पर पानी की उत्पत्ति का रहस्य भी बता सकता है क्‍योंकि हमारे ग्रह के लिए भी यह एक अनसुलझा सवाल ही है.’ 

 





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