World Heart Day 2020: पुरुषों में ज्यादा होता है हार्ट अटैक का खतरा, जानिए इसका कारण | health – News in Hindi

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World Heart Day 2020: दुनियाभर में फैले कोविड-19 (Covid-19) के कहर ने कई देशों के स्वास्थ्य (Health) से जुड़े बुनियादी ढांचे को हिला कर रख दिया है. दिसंबर 2019 से ज्यादातर डॉक्टर इसी महामारी के शिकार लोगों के इलाज में लगे हुए हैं. इन सबके बीच स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी जैसे तमाम कारणों के चलते नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडीएस) की ओर पूरा ध्यान नहीं जा पा रहा है. हृदय रोग (Heart Disease) सहित एनसीडीएस की तमाम बीमारियों के प्रति विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. एनसीडीएस ऐसी दीर्घकालिक बीमारियां हैं, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती हैं जैसे- कैंसर, मधुमेह (Diabetes) और हृदय रोग आदि.

दुनिया भर में हृदय रोगों (Heart Disease) से संबंधित मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. अध्ययनों (Studies) में यह भी बताया गया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों को हार्ट अटैक (Heart Attack) होने का खतरा अधिक रहता है. महामारी के चलते हृदय रोगी अपने नियमित चेकअप के लिए भी अस्पताल नहीं जा पा रहे हैं, ऐसे में उनके लिए खतरा और भी अधिक बढ़ गया है.

महामारी के बीच आखिर क्यों बढ़ गई है हृदय रोगियों के लिए समस्याएं?तमाम कारणों के चलते कोविड-19 महामारी के दौरान हृदय से संबंधित रोगों का बोझ बढ़ गया है. चारों ओर फैली बीमारी के कारण कुछ हृदय रोगी न तो नियमित चेकअप के लिए अस्पतालों में जा पा रहे हैं, न ही दवाइयां ले पा रहे हैं. कुछ मरीजों की दवाइयों के खुराक में लंबे वक्त से कोई बदलाव भी नहीं हुआ है. ऐसे में ऐसे मरीजों को स्वास्थ्य संबंधी कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. यही कारण है कि हृदय से संबंधित बीमारियां लगातार बढ़ती ही जा रही हैं.

जब हम हृदय रोगों के बारे में बात कर रहे हैं तो एक अध्ययन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. डाटा से पता चलता है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हृदय रोग के कारण होने वाली मौतों का खतरा तीन से चार गुना अधिक होता है. 21 देशों के 1.60 लाख लोगों पर किए गए एक हालिया अध्ययन को लेकर द लांसेट में छपी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को हृदय रोग (सीवीडी) का खतरा भी कम होता है. विशेषज्ञों के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं का शरीर जिस ढंग से हृदय से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित करता है, उसमें भी काफी फर्क है. इसके कुछ कारण निम्नलिखित हो सकते हैं.

तनाव
पहले के समय में पुरुषों को घर की कमाई का एकमात्र काम करने वाला माना जाता था. ऐसा माना जाता था कि वे अपनी चिंताओं और तनाव को दबा लेते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनके हृदय रोग की समस्याएं पैदा हो जाती हैं. इसके अलावा माना जाता था पुरुषों की तुलना में महिलाएं शांत स्वभाव की होती थीं. उनमें ऑक्सीटोसिन हार्मोन का स्तर भी अधिक होता है जो उन्हें तनाव को अधित प्रभावी तौर से नियंत्रित करने की शक्ति देता है. यही कारण है कि महिलाओं को हृदय रोग का खतरा भी पुरुषों की तुलना में कम होता है.

आहार और जीवनशैली
विशेषज्ञों के मुताबिक खराब जीवनशैली और तमाम प्रकार की आदतों जैसे शराब पीने और धूम्रपान करने आदि के कारण पुरुषों को तनाव की दिक्कत होती है. भारत सहित दुनिया के बड़े हिस्सों में देखने को मिला है कि महिलाओं की तुलना में पुरुष इन आदतों के ज्यादा शिकार होते हैं. इसके कारण पुरुषों में हृदय से संबंधित रोग भी अधिक देखने को मिलते हैं. महिलाओं की तुलना में पुरुष भोजन भी अधिक करते हैं, जिससे उनमें मोटापे का भी खतरा अधिक होता है. इस स्थिति में रक्त में प्लाक का निर्माण होने लगता है, जिससे धमनियों का कार्य अवरुद्ध होता है. इन कारणों के चलते हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है.

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हार्मोनल प्रभाव
महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन होता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करके अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसी कारण से महिलाओं को हृदय रोगों का खतरा भी कम होता है. इतना ही नही ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखने में एस्ट्रोजन हार्मोन काफी सहायक होता है. यही कारण है कि रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा अधिक हो जाता है क्योंकि इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा में गिरावट आ जाती है.

निदान की कमी
महिलाओं में अक्सर हृदय से संबंधित बीमारियों का निदान देर में होता है, क्योंकि उनमें बीमारी के असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं. आमतौर पर कंधे, पीठ और गर्दन में असुविधा के रूप में लक्षण स्पष्ट होते हैं.

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अंततः इन बिंदुओं के आधार पर कहा जा सकता है कि पुरुषों और महिलाओं के बीच लक्षणों को पहचाने के लिए अधिक जागरूकता की आवश्यकता है. इसके अलावा हृदय रोग के खतरे को कम करने के लिए कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसे मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और हाई कोलेस्ट्रॉल आदि के स्तर नियंत्रित करने की आवश्यकता है. इसके अलावा हृदय रोग के खतरों से बचने के लिए शराब और तम्बाकू आदि के सेवन से भी परहेज किया जाना चाहिए.

इस आर्टिकल को माइ उपचार के लिए डॉ निशिथ चंद्रा ने लिखा है जो दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर हैं.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, हार्ट अटैक के प्रकार, लक्षण, कारण, इलाज, परहेज और दवा पढ़ें।

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