World Mental Health Day 2020: साइकोथेरेपी के बारे में अक्सर लोगों के मन में होती हैं ये गलतफहमियां | health – News in Hindi

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World Mental Health Day 2020: साइकोथेरेपी के बारे में अक्सर लोगों के मन में होती हैं ये गलतफहमियां

मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का बने रहना.

World Mental Health Day 2020: मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) से जुड़ी समस्याओं से निपटने का एक तरीका है- साइकोथेरेपी (Psychotherapy) यानी मनोचिकित्सा. अधिकांश लोग साइकोथेरेपी लेने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे स्वयं ही बिना किसी थेरेपी के इन समस्याओं (Problems) से निपट सकते हैं.




  • Last Updated:
    October 10, 2020, 1:29 PM IST

वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे (World Mental Health Day 2020) हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार इस दिन को सेलिब्रेट करने का उद्देश्य दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे और समस्याओं के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है और मेंटल हेल्थ (Mental Health) से जूझ रहे लोगों का समर्थन करने के लिए प्रयास करना है. मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होने का मतलब केवल मानसिक बीमारी से मुक्त होना नहीं है. इसमें जीवन को बेहतर ढंग से संभालने और अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करना भी शामिल है. बहुत सारे लोगों को लगता है कि मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ है भावनात्मक स्वास्थ्य का बेहतर होना. यहां हम आपको बता दें कि आपका मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य का बने रहना.

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से निपटने का एक तरीका है- साइकोथेरेपी यानी मनोचिकित्सा. हालांकि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी विषय की ही तरह थेरेपी के साथ भी बहुत सारी गलतफहमियां और रुढ़िवादी विचार जुड़े हुए हैं. अधिकांश लोग साइकोथेरेपी लेने से हिचकिचाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह उनके समय और प्रयास की बर्बादी है और वे स्वयं ही बिना किसी थेरेपी के इन समस्याओं से निपट सकते हैं. हालांकि एक अनुभवी चिकित्सक न केवल आपको अपनी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा, बल्कि आपकी स्थिति और लक्षणों को जल्द हल करने में भी आपकी मदद करेगा. ऐसे में मेंटल हेल्थ डे के मौके पर आइए हम साइकोथेरेपी से जुड़ी सबसे आम गलत धारणाओं में से तीन की सच्चाई आपको बताते हैं:

1. मेरी समस्या इतनी गंभीर नहीं है कि मुझे थेरेपी की जरूरत पड़े और केवल कमजोर लोग ही थेरेपी करवाते हैंबहुत से लोग ऐसा मानते हैं कि थेरेपी सिर्फ पागल लोगों के लिए होती है और उनकी समस्याएं और लक्षण इतने गंभीर नहीं हैं कि उन्हें थेरेपी की जरूरत हो. कुछ मामलों में यह सोच लक्षणों को इस कदर बढ़ा देती है कि तब तक व्यक्ति संघर्ष करने लगता है और फिर उसे थेरेपी लेनी ही पड़ती है. सच तो यही है कि हमेशा ही कोई ऐसा व्यक्ति जरूर होगा जिसकी स्थिति आपसे भी ज्यादा बदतर हुई होगी. आप चाहें तो अपनी रोजमर्रा की समस्याओं के लिए भी थेरेपी ले सकते हैं. उदाहरण के लिए जब खुद पर संदेह होने लगे, तनाव, चिंता, डिप्रेशन जैसी दिक्कतें महसूस हों या फिर यह समझने के लिए कि कैसे बेहतर तरीके से आप अपने जीवन को जी सकते हैं. इससे पहले कि आपकी समस्याएं आपके रोजमर्रा के जीवन में हस्तक्षेप करना शुरू कर दें, आपको उनसे निपटना सीखना होगा.

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2. एक बार अगर मैंने थेरेपी शुरू कर दी तो मैं हमेशा के लिए इसका हिस्सा बन जाऊंगा
अधिकांश थेरेपी शॉर्ट टर्म यानी कम समय के लिए होती है और 8 से 20 सेशन के बीच की होती है जिसमें हर सप्ताह एक सेशन होता है. आपका थेरेपी लेने का कारण क्या है और आप किन लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहते हैं इसके आधार पर आप और आपके थेरेपिस्ट तय कर सकते हैं कि थेरेपी की अवधि कितनी होगी. आप चाहें तो लॉन्ग टर्म यानी दीर्घकालिक थेरेपी का विकल्प भी चुन सकते हैं, जो कुछ महीनों से लेकर 1 साल या उससे भी अधिक समय तक जारी रह सकता है. इस तरह की थेरेपीज आपको यह समझने में मदद करती हैं कि किस तरह से आपका पारिवारिक इतिहास और आपका व्यक्तित्व उस व्यवहार को प्रभावित कर रहा है जिसे आप सुधारना चाहते हैं या बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

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3. मुझे दवा लेने के लिए मजबूर किया जाएगा और इनमें से कुछ दवाओं का मैं आदी हो जाऊंगा
ऐसा जरूरी नहीं कि सभी तरह की थेरेपी में दवाइयां दी जाएं. कुछ मामलों में सिर्फ टॉक थेरेपी ही पर्याप्त होती है. हालांकि अगर आप किसी मनोचिकित्सक के पास जा रहे हैं और आपको चिंता, सिज़ोफ्रेनिया या बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी बीमारियां हैं तो आपको दवाओं की आवश्यकता हो सकती है. एक अनुभवी चिकित्सक किसी भी दवा को प्रिस्क्राइब करने से पहले उस व्यक्ति के मादक द्रव्यों के सेवन के इतिहास और उनके पारिवारिक इतिहास को भी ध्यान में रखता है. इतना करने के बाद भी लगातार मरीज की निगरानी की जाती है. आपको किसी भी दवा की लत या आदत तभी हो सकती है जब आप दवाओं को निर्धारित खुराक में लेने के बजाय उसका दुरुपयोग करें या फिर अगर आप डॉक्टर से पूछे बिना किसी और के लिए प्रिस्क्राइब की गई दवाइयों का सेवन कर लगें.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल मनोचिकित्सा क्या है, कैसे होती है, इससे होने वाले लाभ के बारे में पढ़ें।

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